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बच्चा चोरी के अफवाह से पुलिस आई हरकत में,पुलिस की जांच में संदिग्ध निकला मानसिक रूप से अस्वस्थ।

 

 

जशपुर जिले के बगीचा क्षेत्र से एक अहम मामला सामने आया है, जहां दो छोटे बच्चों को साथ लेकर जा रहे एक व्यक्ति को ग्रामीणों ने सतर्कता दिखाते हुए पकड़ा और पुलिस के हवाले कर दिया। घटना के बाद क्षेत्र में कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया, लेकिन पुलिस जांच में मामला स्पष्ट हो गया कि मामला बच्चा चोरी का नहीं है।

जानकारी के अनुसार बगीचा रोहित सोनी के दो बच्चे—एक 3 वर्षीय बच्ची और 7 वर्षीय बालक—घर के पास खेल रहे थे। इसी दौरान एक व्यक्ति बस्ती में पहुंचा और बच्चों को अपने साथ लेकर मुख्य मार्ग की ओर जाने लगा। परिजनों को जब बच्चे आसपास नहीं दिखे तो उन्होंने खोजबीन शुरू की।

करीब एक किलोमीटर दूर तहसील चौक के पास दोनों बच्चे उसी व्यक्ति के साथ दिखाई दिए। परिजनों और ग्रामीणों ने तत्परता दिखाते हुए बच्चों को सुरक्षित अपने कब्जे में लिया और संदिग्ध व्यक्ति को रोक लिया। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और व्यक्ति को थाने ले जाकर जांच शुरू की।

पुलिस की जांच में सामने आया कि संबंधित व्यक्ति मानसिक रूप से अस्वस्थ (विक्षिप्त) है और पिछले लगभग दो वर्षों से बगीचा क्षेत्र के बाजार डांड में रह रहा है। वह इधर-उधर घूमकर भीख मांगकर अपना जीवन यापन करता है। स्थानीय लोगों के अनुसार उसे बच्चों से विशेष लगाव है और वह अक्सर बच्चों को देखकर उनसे हंसी-मजाक करने की कोशिश करता है। वह बोलने में असमर्थ है और इशारों के माध्यम से ही संवाद करता है।पिछले दो वर्षों में कभी भी संदिग्ध परिस्थितियों में उसे नहीं देखा गया है।

पुलिस ने स्पष्ट किया है कि प्रथम दृष्टया यह मामला चोरी का नहीं बल्कि मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्ति की हरकत का प्रतीत होता है। बच्चों को पूरी तरह सुरक्षित उनके परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया है।

फिलहाल पुलिस पूरे मामले की गंभीरता से जांच कर रही है और क्षेत्र में लोगों से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध स्थिति में तुरंत सूचना दें, लेकिन अफवाहों से बचें,अफवाहों में आकर कोई भी कानून हाथ में न लें।

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श्रीराम कथा में शामिल हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, चिन्मयानंद बापूजी के श्रीमुख से गूंज रही रामकथा, भक्ति में डूबा कुनकुरी

 

 

 

कुनकुरी में आयोजित भव्य संगीतमय श्रीराम कथा महोत्सव में आज पंचम दिवस पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय श्रद्धाभाव से शामिल हुए। सालियाटोली मिनी स्टेडियम ग्राउंड में आयोजित इस दिव्य आयोजन में उनके साथ उनकी धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या साय भी उपस्थित रहीं। दोनों ने परम पूजनीय संत चिन्मयानंद बापू से आशीर्वाद ग्रहण किया।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में भगवान श्रीराम के आदर्श जीवन और चरित्र को आत्मसात करने का संदेश देते हुए कहा कि रामकथा केवल कथा नहीं, बल्कि जीवन को दिशा देने वाली प्रेरणा है।

 छत्तीसगढ़ की धरती के कण-कण में बसे हैं प्रभु श्रीराम

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि कुनकुरी की यह पावन भूमि आज धन्य हो गई है। पूरा वातावरण ‘जय श्रीराम’ के उद्घोष से गुंजायमान है और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ माता कौशल्या की धरती है और भगवान श्रीराम का ननिहाल होने के कारण यहां के कण-कण में राम बसते हैं।

उन्होंने वनवास काल का उल्लेख करते हुए कहा कि भगवान श्रीराम ने अपना अधिकांश समय दंडकारण्य और छत्तीसगढ़ के अंचलों में बिताया। यहां आज भी सीता रसोई जैसे पौराणिक स्थल इस इतिहास के साक्षी हैं।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि अयोध्या में श्रीरामलला की प्राण प्रतिष्ठा देश के लिए गौरव का क्षण है, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दृढ़ संकल्प से संभव हो सका। राज्य सरकार द्वारा शुरू की गई रामलला दर्शन योजना के तहत अब तक हजारों श्रद्धालु अयोध्या जाकर दर्शन कर चुके हैं।

 रामभक्ति का अद्भुत संगम उमड़ रही श्रद्धालुओं की भीड़

कथा स्थल पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। रामकथा की अमृतमयी धारा में जनमानस सराबोर होकर भक्ति रस का आनंद ले रहा है। विशेष रूप से रामनामी समाज की भक्ति परंपरा का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उनका समर्पण अद्वितीय है।

इस अवसर पर रोहित व्यास, लाल उमेद सिंह, जिला पंचायत सीईओ अभिषेक कुमार सहित जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

 08 अप्रैल तक चलेगी रामकथा की पावन धारा

02 अप्रैल से प्रारंभ हुई श्रीराम कथा 08 अप्रैल तक निरंतर प्रवाहित होगी। इस आयोजन को लेकर कुनकुरी सहित पूरे क्षेत्र में धार्मिक और आध्यात्मिक माहौल बना हुआ है। दूर-दराज से पहुंचे श्रद्धालु कथा श्रवण कर प्रभु श्रीराम के आदर्शों को अपने जीवन में उतारने का संकल्प ले रहे हैं।

 भक्ति, आस्था और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर यह आयोजन क्षेत्र में अद्भुत धार्मिक चेतना का संचार कर रहा है।

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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कार्यकर्ताओं को दिया संगठन मजबूत करने का संदेश,भाजपा स्थापना दिवस पर बगिया में फहरा पार्टी का ध्वज

 

 

भारतीय जनता पार्टी के स्थापना दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अपने निज निवास बगिया में पार्टी का ध्वज फहराया। इस दौरान उन्होंने उपस्थित कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए भाजपा की विचारधारा, राष्ट्र सेवा और संगठन की मजबूती पर विशेष जोर दिया।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि भाजपा एक विचारधारा आधारित पार्टी है, जो देशहित और जनकल्याण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे संगठन को और सशक्त बनाएं तथा आम जनता की सेवा में पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ जुटे रहें।

कार्यक्रम में सुनील गुप्ता, ठाकुर पुरुषोत्तम सिंह सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि, पार्टी पदाधिकारी और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

पूरे आयोजन के दौरान उत्साह, अनुशासन और संगठन के प्रति समर्पण का माहौल देखने को मिला।

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खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स के बाद सामुदायिक पावर हाउस के रूप में जाने जाएंगे सिद्दी पहलवान।

 

 

 'प्रतिभा को किसी परिचय की जरूरत नहीं होती'- यह कहावत 'खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स- 2026' में सच साबित हुई, जहां कर्नाटक के 'सिद्दी समुदाय' के पहलवानों ने मैट पर अपनी जबरदस्त छाप छोड़ी है। उनकी यह सफलता अब सिर्फ़ पदकों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे समुदाय के कुश्ती के क्षेत्र में एक ताकत के तौर पर उभरने का प्रतीक है। अफ़्रीकी मूल के भारत में लगभग 50,000 सिद्दी लोग रहते हैं, जिनमें से एक-तिहाई कर्नाटक में निवास करते हैं।

 खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स-2026 में कर्नाटक के 9 पहलवानों ने हिस्सा लिया, जिनमें से 4 सिद्दी समुदाय से थे। इन चार पहलवानों में से तीन ने स्वर्ण पदक अपने नाम किया जबकि एक को रजत पदक मिला। स्वर्ण पदक जीतने वाले पहलवानों में मनीषा जुआवा सिद्दी (76 किग्रा), रोहन एम डोड़ामणि (ग्रीको रोमन 60 किग्रा) और प्रिंसिता पेदरू फर्नांडिस सिद्दी (68 किग्रा) शामिल हैं जबकि शालिना सेयर सिद्दी (57 किग्रा) को रजत पदक से संतोष करना पड़ा।

 इन पहलवानों की सफलता न सिर्फ उनके संघर्ष और मेहनत की कहानी कहती है, बल्कि कुश्ती जैसे खेलो में सिद्दी समुदाय के बढ़ते वर्चस्व को भी दिखाता है। कर्नाटक के इन चारों पहलवानों का दिल्ली के इंदिरा गांधी स्टेडियम में ट्रायल हुआ था और वहां भी ये पहले नंबर पर रहे थे। 

सिद्दी समुदाय के प्रदर्शन से कर्नाटक कुश्ती टीम की कोच ममता बेहद गौरवान्वित महसूस कर रही हैं।

ममता ने कहा, ''जैसे हमारे देश में कुश्ती में हरियाणा का दबदबा है तो ठीक वैसे ही हमारे राज्य में अहलियाल क्षेत्र का कुश्ती में वर्चस्व रहता है। राज्य में डिपार्टमेंट ऑफ यूथ एंड डेवलपमेंट एंड सेंटर मुख्य रूप से इन्हीं सिद्दी समुदाय के लिए है। इनके बच्चे यहीं पर ट्रेनिंग करते हैं। पिछले कुछ समय से इस समुदाय के लोगों के अंदर कुश्ती का क्रेज बढ़ा है और वे अब अपने बच्चों को कुश्ती में भेजने लगे हैं।

उत्तरी कर्नाटक के धारवाड़ जिले से आने वाले पुरुष पहलवान रोहन एम. डोड़ामणि भी इसी समुदाय से आते हैं। डोड़ामणि की मां सरकारी स्कूल में खाना पकाती हैं जबकि पिता का छह साल पहले ही देहांत हो चुका है।

 रोहन ने कहा, “सिद्दी समुदाय के अंदर समय-समय पर छोटे दंगल होते रहते हैं और जो इनमें जीतता है, उन्हें ज्यादा से ज्यादा पुरस्कार राशि देकर सम्मानित किया जाता है। खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स-2026 में स्वर्ण जीतने से पहले मैं सीनियर नेशनल चैंपियनशिप, नेशनल गेम्स और ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स में भी भाग ले चुका हूं।''

देश में खिलाड़ियों के अंदर छिपी प्रतिभा की पहचान करने और उन्हें एक बेहतर मंच देने के लिए भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) और खेल मंत्रालय ने मिलकर 2018 में खेलो इंडिया यूथ गेम्स की शुरुआत की थी। उसके बाद खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स और अब खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स की शुरुआत हुई है। 

साई के टैलेंट डेवलपमेंट कमेटी के सदस्य महा सिंह राव कहते हैं, '' साई और खेल मंत्रालय की तरफ से हम कम उम्र के प्रतिभाशाली बच्चों की पहचान करते हैं ताकि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी का जो सपना है कि 2036 ओलंपिक खेल भारत में हो, उस सपने को साकार करने के लिए ये सरकार की रणनीति का एक हिस्सा है। प्रधानमंत्री के अलावा खेल मंत्री, साई और हम इस सपने को साकार करने में लगे हुए हैं कि आगे आने वाले ओलंपिक खेलों में हम ज्यादा से ज्यादा मेडल जीते।''

उत्तर कन्नड़ कारवार जिले से आने वाली शालिना सेयर सिद्दी ने इस प्रतियोगिता में रजत पदक जीतने के बाद कहा, ''हमारे समुदाय में कुश्ती को लेकर अब लोग दिलचस्पी लेने लगे हैं। मैंने अपने अंकल के कहने पर कुश्ती शुरू की थी और शुरू से ही वह मुझे ट्रेनिंग देते आ रहे हैं। मैंने इस प्रतियोगिता के लिए मेहनत तो पूरी की थी, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था और मैं स्वर्ण जीतने से चूक गई।'' 

कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ कारवार जिले से ही आने वाली प्रिंसिता सिद्दी ने कहा, ''शुरुआत में मुझे कुश्ती में दिलचस्पी नहीं थी और मैं बहुत रोई थी। लेकिन फिर धीरे-धीरे जब हमारे समुदाय के बच्चे इसमें भाग लेने लगे तो उन्हें देखकर मैं भी प्रैक्टिस करने लगी। यहां तक पहुंचने के लिए मैं शाम-सुबह दो-दो घंटे प्रैक्टिस करती हूं। मुझे इंटरनेशनल लेवल पर मेडल लाना है और इसके लिए मैं कड़ी मेहनत कर रही हूं।''

इन पहलवानों की सफलता इस बात को सिद्ध करती है कि जब सही मंच, ट्रेनिंग और सपोर्ट मिलता है, तो दूरदराज के समुदायों से भी प्रतिभाएं शिखर तक पहुंच सकती हैं और भारत के खेल भविष्य को आकार दे सकती हैं।

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रात में मछुआरे का काम करने वाले अब्दुल फताह की छलांग ने लक्षद्वीप एथलेटिक्स के लिए एक नया अध्याय लिखा।

 

 

 अब्दुल फताह ज़्यादातर रातों को समुद्र में होते हैं, जहां वे मछुआरे बनकर अपने परिवार की रोज़ी-रोटी कमाने में मदद करते हैं। जैसे ही सुबह होती है, वे सीधे ट्रेनिंग ग्राउंड की ओर निकल पड़ते हैं और एक एक अलग सपने का पीछा करते हुए लक्षद्वीप को 'खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स' 2026 में पहला मेडल दिलाया।

                   कवरत्ती और कदमत द्वीपों के बीच स्थित, दूरदराज के अमीनी द्वीप जो लगभग 2.7 किमी लंबा और 1.2 किमी चौड़ा है, और जिसका कुल भू-क्षेत्रफल 2.60 वर्ग किमी है के 18 वर्षीय लॉन्ग जम्पर ने जगदलपुर के क्रीड़ा परिसर मैदान में 7.03 मीटर की अपनी करियर की सर्वश्रेष्ठ छलांग लगाकर स्वर्ण पदक जीता। यह इस छोटे से केंद्र शासित प्रदेश के लिए एक ऐतिहासिक क्षण था। केंद्र शासित प्रदेश के खेल अधिकारी अहमद जावेद हसन ने मुस्कुराते हुए कहा, वह लक्षद्वीप के पहले ऐसे एथलीट हैं जिन्होंने 7 मीटर की दूरी पार की है और यह वाकई एक खास बात है।'' 

               मछुआरे परिवार में जन्मे फताह भाई-बहनों में सबसे बड़े हैं और घर की बड़ी ज़िम्मेदारी संभालते हैं। 12वीं कक्षा पूरी करने के बाद, आर्थिक तंगी के कारण उन्हें अपनी पढ़ाई बीच में ही रोकनी पड़ी। इसके बजाय, उन्होंने अपने पिता के पारिवारिक व्यवसाय में हाथ बँटाने और खेल को अपने जुनून के तौर पर अपनाने का फ़ैसला किया।फताह ने कहा, '' कोई और चारा नहीं है, आपको चीज़ों में संतुलन बनाना ही पड़ता है। जब मैं स्कूल में था, तभी से मैं अपने पिता की मछली पकड़ने के काम में मदद करता आ रहा हूँ। यही हमारी आमदनी का एकमात्र ज़रिया है। हमारे परिवार में छह लोग हैं। सुबह मैं अपनी ट्रेनिंग के लिए जाता हूँ; मेरे परिवार को इस बारे में पता है, भले ही वे इस खेल के बारे में बहुत कम समझते हों।'' 

             दिलचस्प बात यह है कि एथलेटिक्स उनका पहला प्यार नहीं था। फताह शुरू में फुटबॉल खेलते थे, जैसा कि द्वीप के कई दूसरे युवा करते थे। हालांकि, कुछ साल पहले एक स्थानीय इंटर-आइलैंड प्रतियोगिता के दौरान उनकी यात्रा में एक अहम मोड़ आया। कोच मोहम्मद कासिम ने इस युवा की दौड़ने की ज़बरदस्त काबिलियत को पहचाना और उन्हें एथलेटिक्स में आने का सुझाव दिया। तब से, फताह ने लॉन्ग जंप और 100-मीटर स्प्रिंट में ट्रेनिंग शुरू कर दी। लगभग उसी समय, अमिनी एथलेटिक्स एसोसिएशन का गठन होने लगा, जिससे इस क्षेत्र में खेलों के विकास को एक सही ढाँचा मिला।

           फताह और कई अन्य युवा एथलीटों को धीरे-धीरे कोचिंग की मदद दी गई, जिससे उन्हें ज़्यादा व्यवस्थित तरीके से ट्रेनिंग करने में मदद मिली। सिर्फ़ दो सालों में, एसोसिएशन ने लगभग 384 एथलीटों को तैयार किया। इस समूह में से, 17 एथलीटों को गेम्स में लक्षद्वीप का प्रतिनिधित्व करने के लिए चुना गया। जगदलपुर में फत्ताह की 7.03 मीटर की गोल्ड-विनिंग जंप, वहां के हालात को देखते हुए, खास तौर पर संतोषजनक थी। ट्रेनिंग के दौरान, उन्होंने बताया था कि उनकी जंप आमतौर पर 6.5 से 6.7 मीटर के आस-पास रहती है। उन्होंने कहा. '' खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में आने से पहले, मैंने अपने लिए 7.15 मीटर तक पहुंचने का लक्ष्य तय किया था। मुझे खुशी है कि मैं सात मीटर का आँकड़ा पार कर पाया, और यह गोल्ड मेडल मुझे और बेहतर करने के लिए प्रेरित करेगा,” 

         लक्षद्वीप धीरे-धीरे भारत के एथलेटिक्स के नक्शे पर अपनी जगह बना रहा है। इस केंद्र शासित प्रदेश की सबसे जानी-मानी एथलीटों में से एक हैं मुबस्सिना मोहम्मद, जो 19 साल की लॉन्ग जंपर और हेप्टाथलीट हैं। कुवैत में हुए 2022 एशियन U18 एथलेटिक्स चैंपियनशिप में लॉन्ग जंप में सिल्वर मेडल जीतकर वह लक्षद्वीप की पहली इंटरनेशनल मेडलिस्ट बनीं। उन्होंने महिलाओं की लॉन्ग जंप में 6.30 मीटर के अपने पर्सनल बेस्ट के साथ जूनियर नेशनल टाइटल भी जीता।

         मुबस्सिना की तरह, फताह भी बिना किसी आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर की सुविधा के ट्रेनिंग करते हैं। लक्षद्वीप, जो सिर्फ़ 32 वर्ग किलोमीटर में फैला है और जिसकी आबादी 70,000 से भी कम है, वहां अभी तक कोई ठीक-ठाक सिंथेटिक ट्रैक या एथलेटिक्स स्टेडियम नहीं है। नतीजतन, कई एथलीट मिट्टी के ट्रैक पर प्रैक्टिस करते हैं, जबकि फत्ताह अक्सर अपने स्प्रिंट इवेंट्स की ट्रेनिंग के लिए पास के एक फुटबॉल मैदान का इस्तेमाल करते हैं। उन्होंने आगे कहा, '' खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स और दूसरे नेशनल लेवल के मुकाबलों में हमारी सफलता को देखते हुए, हमें उम्मीद है कि हमारे लिए हालात बदलेंगे। हो सकता है कि हमें कुछ नौकरियाँ और ट्रेनिंग की सुविधाएँ मिल जाएं.''

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गढ़पहाड़ की गुफा में मिली हजारों साल पुरानी सभ्यता की झलक, जयमरगा बना प्रागैतिहासिक धरोहर का केंद्र

 

 

प्राकृतिक सुंदरता के लिए पहचाने जाने वाले जशपुर जिले में अब प्रागैतिहासिक सभ्यता के महत्वपूर्ण प्रमाण भी सामने आए हैं। जिले के मनोरा विकासखंड अंतर्गत ग्राम जयमरगा स्थित गढ़पहाड़ की गुफा में आदिमकालीन शैलचित्र मिलने से यह क्षेत्र पुरातात्विक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण बन गया है। यह खोज इस बात के स्पष्ट संकेत देती है कि हजारों वर्ष पूर्व यहां आदिमानवों का निवास रहा होगा और उन्होंने अपने जीवन, शिकार और परिवेश को इन चित्रों के माध्यम से अभिव्यक्त किया।

जंगल और पहाड़ों के बीच छिपा है इतिहास

जिला मुख्यालय से लगभग 30 किलोमीटर दूर स्थित जयमरगा ग्राम, ग्राम पंचायत डड़गांव का आश्रित गांव है, जिसकी आबादी लगभग 1400 है। गांव तक पहुंचने के लिए सड़क सुविधा उपलब्ध है, लेकिन गुफा तक पहुंचने के लिए गढ़पहाड़ पर करीब 300 मीटर की कठिन चढ़ाई करनी पड़ती है। घने जंगलों और प्राकृतिक वातावरण से घिरा यह क्षेत्र अपने भीतर हजारों साल पुराना इतिहास समेटे हुए है।

स्थानीय ग्रामीणों के लिए यह गुफा आस्था का केंद्र भी है, जहां वे पूजा-अर्चना करते हैं। अब यह स्थल धार्मिक के साथ-साथ ऐतिहासिक महत्व भी प्राप्त कर चुका है।

शैलचित्रों में दर्ज है आदिमानव का जीवन

पुरातत्त्ववेत्ता डॉ. अंशुमाला तिर्की और बालेश्वर कुमार बेसरा के अनुसार, जयमरगा क्षेत्र प्रागैतिहासिक स्थलों से समृद्ध है। यहां के पहाड़, जंगल और समीप बहने वाले जल स्रोत आदिमानवों के लिए आदर्श निवास स्थल रहे होंगे।

गुफा में बने शैलचित्रों में—

मानव आकृतियों के समूह

शिकार करते हुए दृश्य

पशु आकृतियां जैसे बैल, तेंदुआ और हिरण

विभिन्न ज्यामितीय आकृतियां और रहस्यमयी चिन्ह

इन चित्रों में लाल और सफेद रंग का उपयोग किया गया है, जो संभवतः हेमाटाइट पत्थर से तैयार किए गए थे। इन चित्रों की शैली से यह भी संकेत मिलता है कि ये अलग-अलग कालखंडों में बनाए गए हैं।

मध्य पाषाण काल के उपकरणों की भी पुष्टि

इस स्थल से मध्य पाषाण काल (Mesolithic Period) के माइक्रोलिथिक उपकरण भी प्राप्त हुए हैं, जिनमें लुनैट, स्क्रैपर, पॉइंट, ट्रैपेज, साइड स्क्रैपर और ब्लेड शामिल हैं। ये उपकरण शिकार, काटने और अन्य दैनिक कार्यों में उपयोग किए जाते थे।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह गुफा केवल निवास स्थल नहीं बल्कि एक रणनीतिक स्थान भी रही होगी, जहां से आदिमानव ऊंचाई पर बैठकर शिकार के लिए जानवरों की गतिविधियों पर नजर रखते थे।

संरक्षण और शोध की जरूरत

इतिहास और पुरातत्व के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण इस स्थल पर अभी तक व्यापक स्तर पर संरक्षण और वैज्ञानिक अध्ययन की आवश्यकता है। यदि समय रहते इस गुफा और शैलचित्रों को संरक्षित नहीं किया गया, तो यह अमूल्य धरोहर क्षति का शिकार हो सकती है।

पर्यटन के रूप में उभर सकता है नया केंद्र

गढ़पहाड़ की यह गुफा जशपुर जिले के पर्यटन मानचित्र पर एक नया आकर्षण बन सकती है। प्राकृतिक सुंदरता, ऐतिहासिक महत्व और रोमांचक ट्रैकिंग का संगम इस स्थान को विशेष बनाता है। यदि यहां बुनियादी सुविधाएं विकसित की जाएं और प्रचार-प्रसार किया जाए, तो यह क्षेत्र पर्यटन के क्षेत्र में नई पहचान बना सकता है।

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रामनाम की पावन रसधारा में डूबा कुनकुरी,श्रद्धेय चिन्मयानंद बापू के मुखारविंद से श्रीराम कथा महोत्सव का भव्य शुभारंभ।

 

 

 

 

कुनकुरी नगर गुरुवार को पूरी तरह भक्ति और आस्था के रंग में रंगा नजर आया, जब सात दिवसीय श्रीराम कथा महोत्सव का भव्य शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम के आरंभ होते ही पूरा नगर ‘जय श्रीराम’ के जयघोष से गूंज उठा और वातावरण राममय हो गया।

इस पावन अवसर पर परम पूज्य श्रद्धेय संत चिन्मयानंद बापू जी के श्रीमुख से श्रीराम कथा का वाचन प्रारंभ हुआ, जिसे सुनने के लिए हजारों की संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। कथा स्थल सलियाटोली मिनी स्टेडियम में विशाल पंडाल सजाया गया है, जहां श्रद्धालु भक्ति रस में डूबकर कथा का श्रवण कर रहे हैं।

संत चिन्मयानंद बापू जी के आगमन पर उनका भव्य स्वागत किया गया। मुख्यमंत्री की धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या साय, आयोजन समिति के सदस्य एवं नगर के गणमान्य नागरिकों ने पुष्पगुच्छ एवं मालाओं से उनका अभिनंदन किया। जय स्तंभ चौक पर गाजे-बाजे और पारंपरिक वाद्य-यंत्रों के साथ भव्य स्वागत हुआ, वहीं महिलाओं ने आरती उतारकर वातावरण को और अधिक भक्तिमय बना दिया।

प्रतिदिन तीन घंटे होगा कथा का आयोजन

आयोजन समिति के अनुसार, यह श्रीराम कथा महोत्सव 2 अप्रैल से 8 अप्रैल 2026 तक आयोजित किया जाएगा। प्रतिदिन दोपहर 3 बजे से शाम 6 बजे तक कथा का आयोजन होगा, जिसमें भगवान श्रीराम के आदर्श जीवन, धर्म, मर्यादा, त्याग और कर्तव्य के प्रसंगों का विस्तार से वर्णन किया जाएगा।

भक्ति, ज्ञान और संस्कारों का संगम

यह कथा महोत्सव केवल धार्मिक आयोजन ही नहीं, बल्कि आत्मिक शुद्धि और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम भी बन रहा है। कथा के माध्यम से श्रद्धालुओं को भक्ति, ज्ञान और संस्कारों की अनमोल सीख प्राप्त हो रही है।

श्रद्धालुओं से अपील

आयोजन समिति ने सभी धर्मप्रेमी नागरिकों से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर श्रीराम कथा का श्रवण करें और इस पावन अवसर का लाभ उठाएं।

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अखिल विश्व गायत्री परिवार की उपजोन स्तरीय गोष्ठी सम्पन्न, संकल्पों के क्रियान्वयन पर जोर।

 

 

 

गायत्री शक्तिपीठ बतौली में रविवार को अखिल विश्व गायत्री परिवार के तत्वावधान में अम्बिकापुर उपजोन की उपजोन स्तरीय गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में शांतिकुंज हरिद्वार से पधारे छत्तीसगढ़ जोन समन्वयक सुकदेव निर्मलकर की गरिमामयी उपस्थिति रही। गोष्ठी में अम्बिकापुर, बलरामपुर एवं जशपुर जिले के परिजन शामिल हुए।

कार्यक्रम का शुभारंभ मां गायत्री की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। प्रारंभ में प्रांतीय युवा प्रकोष्ठ के सह संयोजक दौलतराम चौहान ने गोष्ठी की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए संगठन की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने शताब्दी कार्यक्रम बैरागी द्वीप में लिए गए संकल्पों की समीक्षा एवं उनके क्रियान्वयन हेतु कार्ययोजना बनाने पर विशेष जोर दिया।

इस दौरान बालिका सोनिया द्वारा युग निर्माण सत्संकल्प का मौखिक पाठ कराया गया। उपजोन संयोजक एस.जे. द्विवेदी ने सभी परिजनों को संबोधित करते हुए मिलजुलकर संकल्पों को पूर्ण करने का आह्वान किया।

छत्तीसगढ़ जोन समन्वयक सुकदेव निर्मलकर ने आदरणीय शैल जीजी एवं श्रद्धेय डॉ. साहब का संदेश सुनाते हुए सभी जिलों में ब्लॉक स्तर पर समन्वय समितियों के पुनर्गठन तथा साधना किट एवं सत्संकल्प पाठ को ग्राम, विद्यालय एवं महाविद्यालयों तक पहुंचाने पर बल दिया।

गोष्ठी में नारी जागरण की प्रगति अम्बिकापुर जिले से श्रीमती शांति दीदी एवं जशपुर जिले से श्रीमती पार्वती चौहान द्वारा प्रस्तुत की गई। वहीं जिला प्रगति प्रतिवेदन बलरामपुर से अम्बुज यादव, जशपुर से कांशीराम श्रीवास एवं अम्बिकापुर से नंदकिशोर गोस्वामी ने प्रस्तुत किया।

कार्यक्रम का सफल संचालन नंदकिशोर गोस्वामी ने किया। अंत में शांति पाठ के साथ गोष्ठी का समापन हुआ।

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सूरजपुर में माता कर्मा जयंती में शामिल हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, नक्सलवाद और ईंधन आपूर्ति पर दिया बड़ा बयान।

 

 

 

प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय रविवार को सूरजपुर दौरे पर पहुंचे, जहां उन्होंने साहू समाज द्वारा आयोजित माता कर्मा जयंती समारोह में शिरकत की। इस अवसर पर उन्होंने समाज का आभार जताते हुए कहा कि माता कर्मा का आशीर्वाद सदैव छत्तीसगढ़ पर बना रहे और प्रदेश में खुशहाली आए। उन्होंने साहू समाज की एकता, संगठन और सामाजिक योगदान की सराहना की।

मीडिया से चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री ने नक्सलवाद के मुद्दे पर कहा कि नरेंद्र मोदी और अमित शाह के दृढ़ निश्चय का परिणाम है कि छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद अब समाप्ति की कगार पर है। उन्होंने कहा कि बस्तर जैसे क्षेत्र, जो पिछले चार दशकों से विकास से वंचित थे, वहां अब विकास की किरणें पहुंच रही हैं और हालात तेजी से बदल रहे हैं।

अंतरराष्ट्रीय हालातों पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री ने ईरान-इजराइल तनाव और अमेरिका से जुड़े घटनाक्रम के बीच प्रदेशवासियों को आश्वस्त किया कि देश और प्रदेश में पेट्रोलियम पदार्थों और घरेलू गैस की कोई कमी नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री स्वयं स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और आम नागरिकों को घबराने की आवश्यकता नहीं है।

मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार द्वारा पेट्रोल और डीजल पर सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी में ₹10 की कटौती के फैसले को ऐतिहासिक बताते हुए प्रधानमंत्री का आभार जताया। उन्होंने कहा कि इस निर्णय से आम उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिलेगी। साथ ही उन्होंने प्रदेश में ईंधन की कालाबाजारी रोकने के लिए प्रशासन को सख्त निर्देश देने की बात भी दोहराई।

कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू, प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े सहित अन्य जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में समाज के लोग उपस्थित रहे।

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इचकेला की बेटियों ने क्रिकेट में रचा इतिहास मुख्यमंत्री श्री साय ने किया सम्मानित, किट देकर बढ़ाया हौसला।

 

 

 सीमित संसाधनों के बीच बड़े सपने देखने वाली जशपुर जिले के इचकेला की बेटियों ने क्रिकेट के मैदान में ऐसा प्रदर्शन किया कि आज वे जिले ही नहीं, पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणा बन गई हैं। उनकी इसी उपलब्धि पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने शनिवार को जशपुर नगर के मल्टीपरपज इंडोर बास्केटबॉल स्टेडियम में उनसे मुलाकात कर उन्हें क्रिकेट किट प्रदान की और उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।

 

 ग्राम इचकेला के शासकीय प्री-मैट्रिक कन्या छात्रावास की 16 बालिका खिलाड़ियों ने क्रिकेट में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए जिले को राष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित किया है। मुख्यमंत्री ने छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि उनकी मेहनत, अनुशासन और लगन ने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया है और वे आगे भी इसी तरह राज्य और देश का नाम रोशन करती रहें।

इचकेला एमसीसी एक क्रिकेट अकादमी के रूप में उभरकर सामने आई है, जहां से वर्तमान में 40 बालिकाएं नियमित रूप से क्रिकेट का प्रशिक्षण ले रही हैं। इनमें से 17 खिलाड़ी अंडर-17 और अंडर-19 वर्ग में राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में छत्तीसगढ़ टीम का प्रतिनिधित्व कर रही हैं और बोर्ड मैचों में लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रही हैं।

वर्ष 2025 में सरगुजा संभाग ने 25 वर्षों बाद राज्य स्तरीय अंडर-17 क्रिकेट प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक हासिल किया। इस ऐतिहासिक जीत में इचकेला एमसीसी की भूमिका निर्णायक रही। विजेता टीम के 11 खिलाड़ियों में से 9 खिलाड़ी इसी अकादमी की थीं। वहीं अंडर-19 वर्ग में भी सरगुजा संभाग ने रजत पदक जीता, जिसमें 11 में से 8 खिलाड़ी इचकेला एमसीसी से थीं। रायगढ़ में आयोजित वर्ष 2025 के इंटर-स्टेट क्रिकेट टूर्नामेंट में देशभर की टीमों के बीच इचकेला की बेटियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए प्रथम स्थान हासिल किया। अब तक इस समूह की 11 खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में भाग लेकर जिले और राज्य का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। इन उपलब्धियों के पीछे कोच श्री संतोष शंकर सोनी और श्रीमती पंडरी बाई का समर्पण और मार्गदर्शन प्रमुख रहा है।इचकेला की बेटियों की सफलता इस बात का सबूत है कि अगर मन में जुनून हो और सही मार्गदर्शन मिले तो संसाधनों की कमी भी सफलता के रास्ते में बाधा नहीं बनती।

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मुख्यमंत्री ने ‘डिजिटल डोर सुविधा’ का किया शुभारंभ, जशपुर में घर बैठे टैक्स भुगतान की सुविधा शुरू।

 

 

 

छत्तीसगढ़ में डिजिटल सेवाओं को बढ़ावा देते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने ‘डिजिटल डोर सुविधा’ का शुभारंभ किया। इस पहल के तहत अब जशपुर नगर पालिका क्षेत्र के नागरिक घर बैठे क्यूआर कोड स्कैन कर जल कर, संपत्ति कर और दुकान कर का भुगतान आसानी से कर सकेंगे।

यह सुविधा HDFC Bank के सहयोग से शुरू की गई है। इसके अंतर्गत नगर पालिका जशपुर के प्रत्येक घर के लिए अलग-अलग क्यूआर कोड तैयार किए गए हैं, जिन्हें घर-घर चस्पा किया जा रहा है। इस क्यूआर कोड में मकान मालिक का नाम, मकान नंबर, मोबाइल नंबर और बकाया कर की पूरी जानकारी उपलब्ध रहेगी।

नागरिक क्यूआर कोड स्कैन कर डी.डी.एन नंबर, मोबाइल नंबर या प्रॉपर्टी आईडी के माध्यम से अपनी देय राशि देख सकेंगे और यूटीआई, डेबिट कार्ड या नेट बैंकिंग के जरिए सुरक्षित भुगतान कर पाएंगे। भुगतान के तुरंत बाद डिजिटल रसीद भी प्राप्त होगी।

नगर पालिका जशपुर में लागू प्रॉपर्टी टैक्स इंफॉर्मेशन सिस्टम एक आधुनिक आईसीटी आधारित व्यवस्था है, जिसके माध्यम से लगभग 4600 हाउसहोल्ड—आवासीय, व्यावसायिक और औद्योगिक संपत्तियों को जोड़ा गया है। यह प्रणाली राजस्व संग्रहण को पारदर्शी, सरल और प्रभावी बनाएगी।

इस पहल से नागरिकों को समय और श्रम की बचत होगी, वहीं नगर पालिका के कार्यों में पारदर्शिता और दक्षता भी बढ़ेगी। डिजिटल भुगतान से राजस्व संग्रहण में तेजी आएगी और नगरीय प्रशासन और अधिक सशक्त होगा।

कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष सालिक साय, नगर पालिका अध्यक्ष अरविंद कुमार भगत, नगर पालिका उपाध्यक्ष यश प्रताप सिंह जूदेव, कृष्णा राय, कलेक्टर रोहित व्यास, नगर पालिका अधिकारी योगेश्वर उपाध्याय, एचडीएफसी बैंक के रीजनल मैनेजर सराफत अली और शाखा प्रबंधक दीपक दास सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी मौजूद रहे।

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मुख्यमंत्री ने ‘डिजिटल डोर सुविधा’ का किया शुभारंभ, जशपुर में घर बैठे टैक्स भुगतान की सुविधा शुरू।

 

 

 

छत्तीसगढ़ में डिजिटल सेवाओं को बढ़ावा देते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने ‘डिजिटल डोर सुविधा’ का शुभारंभ किया। इस पहल के तहत अब जशपुर नगर पालिका क्षेत्र के नागरिक घर बैठे क्यूआर कोड स्कैन कर जल कर, संपत्ति कर और दुकान कर का भुगतान आसानी से कर सकेंगे।

यह सुविधा HDFC Bank के सहयोग से शुरू की गई है। इसके अंतर्गत नगर पालिका जशपुर के प्रत्येक घर के लिए अलग-अलग क्यूआर कोड तैयार किए गए हैं, जिन्हें घर-घर चस्पा किया जा रहा है। इस क्यूआर कोड में मकान मालिक का नाम, मकान नंबर, मोबाइल नंबर और बकाया कर की पूरी जानकारी उपलब्ध रहेगी।

नागरिक क्यूआर कोड स्कैन कर डी.डी.एन नंबर, मोबाइल नंबर या प्रॉपर्टी आईडी के माध्यम से अपनी देय राशि देख सकेंगे और यूटीआई, डेबिट कार्ड या नेट बैंकिंग के जरिए सुरक्षित भुगतान कर पाएंगे। भुगतान के तुरंत बाद डिजिटल रसीद भी प्राप्त होगी।

नगर पालिका जशपुर में लागू प्रॉपर्टी टैक्स इंफॉर्मेशन सिस्टम एक आधुनिक आईसीटी आधारित व्यवस्था है, जिसके माध्यम से लगभग 4600 हाउसहोल्ड—आवासीय, व्यावसायिक और औद्योगिक संपत्तियों को जोड़ा गया है। यह प्रणाली राजस्व संग्रहण को पारदर्शी, सरल और प्रभावी बनाएगी।

इस पहल से नागरिकों को समय और श्रम की बचत होगी, वहीं नगर पालिका के कार्यों में पारदर्शिता और दक्षता भी बढ़ेगी। डिजिटल भुगतान से राजस्व संग्रहण में तेजी आएगी और नगरीय प्रशासन और अधिक सशक्त होगा।

कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष सालिक साय, नगर पालिका अध्यक्ष अरविंद कुमार भगत, नगर पालिका उपाध्यक्ष यश प्रताप सिंह जूदेव, कृष्णा राय, कलेक्टर रोहित व्यास, नगर पालिका अधिकारी योगेश्वर उपाध्याय, एचडीएफसी बैंक के रीजनल मैनेजर सराफत अली और शाखा प्रबंधक दीपक दास सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी मौजूद रहे।

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जल संरक्षण का कोरिया मॉडल,प्रधानमंत्री मोदी ने की सराहना,जल संरक्षण को जनभागीदारी से सशक्त करना हमारा संकल्प- विष्णु देव साय

 

 

कोरिया जिले में जल संरक्षण को जन आंदोलन का स्वरूप देते हुए “कैच द रेन” तथा राज्य शासन के *मोर गाव मोर पानी महा अभियान अभियान* के अंतर्गत में “आवा पानी झोंकी” अभियान संचालित किया गया। इस पहल ने जल संरक्षण को केवल एक सरकारी योजना से आगे बढ़ाकर व्यापक जनभागीदारी पर आधारित आंदोलन बना दिया है।

इस अभिनव प्रयास को राष्ट्रीय स्तर पर विशेष पहचान तब मिली, जब माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने अपने लोकप्रिय कार्यक्रम “मन की बात” में कोरिया मॉडल की सराहना की और इसे जनभागीदारी आधारित जल संरक्षण का प्रेरक उदाहरण बताया।

इसके अतिरिक्त, केंद्रीय स्तर पर भी इस मॉडल को सराहना प्राप्त हुई है। केंद्रीय जलशक्ति मंत्री सी आर पाटिल द्वारा भी कोरिया मॉडल को अन्य राज्यों में लागू किए जाने योग्य पहल के रूप में उल्लेखित किया गया, जिससे इसकी उपयोगिता और विस्तार की संभावनाएँ स्पष्ट होती हैं।

पृष्ठभूमि

कोरिया जिले में लगभग 1370 मिमी वार्षिक वर्षा होने के बावजूद भू-आकृतिक परिस्थितियों के कारण जल का तीव्र बहाव होता था, जिससे भूजल पुनर्भरण सीमित था। 

कोरिया मॉडल: जन आंदोलन की अवधारणा

“जल संचय जन भागीदारी अभियान” के अंतर्गत लागू 5% मॉडल के तहत किसानों ने अपनी भूमि का 5% भाग छोटी सीढ़ीदार जल संरचनाओं के लिए समर्पित किया साथ ही सोखता गड्ढे और मनरेगा के अंतर्गत संरचनाएं बनाईं गईं।

सामुदायिक एवं वैज्ञानिक समन्वय

महिलाओं ने नीर नायिका, युवाओं ने जल दूत के रूप में भूमिका निभाई और ग्राम सभाओं के माध्यम से विकेंद्रीकृत योजना को सशक्त बनाया। इससे समुदाय स्वयं कार्यान्वयनकर्ता बना। 

2025 की उपलब्धियाँ (जल पुनर्भरण)

जिले में कुल लगभग 2.8 MCM (28 लाख घन मीटर) जल का भूजल में पुनर्भरण हुआ।यह जल मात्रा लगभग 230–235 (12000 m³/ तालाब ) बड़े तालाबों के बराबर और 1800 से अधिक ( 1500 m³/ डबरी ) डबरियों के बराबर है। ( गणनाएं मानक वैज्ञानिक मानकों एवं सावधानीपूर्वक किए गए आकलन पर आधारित हैं।)

भूजल स्तर में सुधार

CGWB की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2025 में कोरिया जिले के भूजल स्तर में 5.41 मीटर की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई, जो इस मॉडल की प्रभावशीलता को दर्शाती है। 

2026 में प्रगति

20,612 से अधिक जल संरक्षण कार्य पूर्ण/प्रगति पर हैं जिनके अंतर्गत 17,229 सामुदायिक कार्य तथा 3,383 मनरेगा आधारित संरचनाएँ शामिल हैं।

कलेक्टर का वक्तव्य

जिला कलेक्टर श्रीमती चंदन संजय त्रिपाठी ने कहा—

“कोरिया मॉडल की सफलता का मूल आधार जनभागीदारी है। जब समाज स्वयं जल संरक्षण का संकल्प लेता है, तो परिणाम स्थायी और व्यापक होते हैं। हमारा प्रयास है कि हर बूंद को संजोकर आने वाली पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।”

कोरिया मॉडल यह प्रमाणित करता है कि जब जनभागीदारी, वैज्ञानिक योजना, शासन और प्रशासनिक नेतृत्व एक साथ कार्य करते हैं, तो जल संरक्षण को एक स्थायी जन आंदोलन में परिवर्तित किया जा सकता है— और यही मॉडल अब राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनाए जाने की दिशा में अग्रसर है।

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अफवाहों से बचें, पेट्रोल-डीजल व गैस की कोई कमी नहीं : कलेक्टर रोहित व्यास,दिक्कत हो तो इन नंबरों पर करें कॉल।

 

कलेक्टर रोहित व्यास ने जिलेवासियों से अपील करते हुए कहा है कि जशपुर जिले में पेट्रोल, डीजल, घरेलू गैस सिलेंडर एवं उर्वरक की किसी भी प्रकार की कोई कमी नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आम नागरिक किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें और न ही उन्हें फैलाएं।

कलेक्टर ने शनिवार को कलेक्ट्रेट में समीक्षा बैठक लेकर जिला स्तरीय कंट्रोल रूम स्थापित करने के निर्देश दिए थे। खाद्य विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार जिले में सभी पेट्रोल पंपों पर नियमित रूप से सप्लाई हो रही है और घरेलू गैस की बुकिंग भी शासन द्वारा निर्धारित समयावधि में जारी है। साथ ही गैस का भंडारण भी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है।

उन्होंने कहा कि आपूर्ति को लेकर किसी भी प्रकार की भ्रामक सूचना पर ध्यान न दें, जिले में आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता पूरी तरह सामान्य है।

आम उपभोक्ताओं को यदि पेट्रोल, डीजल या घरेलू गैस की प्राप्ति में किसी प्रकार की समस्या आती है, तो वे राज्य स्तर पर खाद्य विभाग के कॉल सेंटर नंबर 1800-233-3663 अथवा 1967 पर संपर्क कर सकते हैं। इसके अलावा राज्य स्तरीय कंट्रोल रूम नंबर 0771-2511975 भी जारी किया गया है।

जिला स्तर पर भी कलेक्टर कार्यालय की खाद्य शाखा में कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है, जिसका संपर्क नंबर 9244011192 है।

प्रशासन ने आम जनता से अपील की है कि वे किसी भी अफवाह से बचें और आवश्यक होने पर ही संबंधित सेवाओं का उपयोग करें।

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मुख्यमंत्री कन्या विवाह में 240 नव दम्पतियों को मुख्यमंत्री देंगे अपना आशीर्वाद,जशपुर के रणजीता स्टेडियम में भव्य आयोजन।

 

 

 

 

 महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना अन्तर्गत 28 मार्च को जिले के 240 जोड़ो का विवाह रणजीता स्टेडियम जशपुर में आयोजित किया जा रहा है। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय नव दम्पतियों को अपना आशीर्वाद देंगे।

विवाह से पूर्व कन्याओं को मेंहदी एवं हल्दी और संगीत कार्यक्रम आयोजित किया गया इसके साथ ही बेटियों का मयाली नेचर कैंप में प्री वेडिंग सूटिंग का आयोजन किया गया है।

मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत प्रति जोड़ा को 50 हजार की राशि का प्रावधान इसमें 35 हजार का चेक दिया जाता है और 7 हजार की वैवाहिक सामग्री इसके साथ ही 8 हजार का वैवाहिक आयोजन में खर्च किया जाता है।

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मुख्यमंत्री निवास बगिया में श्री रामनवमी महायज्ञ का भव्य शुभारंभ, कलश यात्रा में उमड़ा जनसैलाब.......।

 

 

 चैत्र रामनवमी के पावन अवसर पर मुख्यमंत्री निवास बगिया में आयोजित चार दिवसीय श्री रामनवमी महायज्ञ का आज बुधवार को भव्य कलश यात्रा के साथ शुभारंभ हुआ। पूरे क्षेत्र में श्रद्धा, भक्ति और उल्लास का अद्भुत संगम देखने को मिला, जहां हजारों की संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।

कलश यात्रा मुख्यमंत्री निवास बगिया से प्रारंभ होकर नदी तट तक निकली तथा पुनः यज्ञ स्थल तक पहुंची, जिसमें महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में सिर पर कलश धारण कर शामिल हुईं। भजन-कीर्तन और जय श्रीराम के उद्घोष से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।इस अवसर पर मुख्यमंत्री की धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या साय विशेष रूप से उपस्थित रहीं। वहीं, कार्यक्रम में प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के भी शामिल होने की जानकारी दी गई है।आयोजन को लेकर बगिया सहित आसपास के क्षेत्रों में भारी उत्साह देखा जा रहा है।इस धार्मिक कार्यक्रम का मुख्यमंत्री के भाई जयप्रकाश साय सह पत्नी द्वारा विधि विधान से पूजा अर्चना की जा रही है।कार्यक्रम के तहत आज मूर्ति स्थापना के साथ पूजा, हवन, आरती, लीला एवं भजन-कीर्तन का आयोजन किया गया। आगामी दिनों में धार्मिक अनुष्ठानों की श्रृंखला जारी रहेगी—26 मार्च: पूजन, हवन, आरती, प्रवचन एवं भजन-कीर्तन,27 मार्च: विशेष पूजन, नवकन्या पूजन, पूर्णाहुति एवं रात्रि में भव्य लीला,28 मार्च: सहस्त्रधारा स्नान, आशीर्वाद, मूर्ति विसर्जन एवं प्रसाद वितरण के साथ समापन होगा।

यह भव्य आयोजन ग्राम बगिया के यज्ञ स्थल पर किया जा रहा है, जिसमें छत्तीसगढ़ के साथ-साथ ओडिशा, झारखंड और मध्यप्रदेश से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।पूरे कार्यक्रम का संचालन धर्म संस्थापक परम पूज्य स्वामी धनपति पण्डा जी महाराज (गुरुधाम मुंडियापानी, लैलूंगा, रायगढ़) के आशीर्वाद में किया जा रहा है।श्रीमती कौशल्या साय ने जानकारी देते हुए बताया कि चैत्र नवरात्रि में यह महायज्ञ वर्ष 1993 से निरंतर आयोजित किया जा रहा है, जो क्षेत्र की आस्था और परंपरा का प्रतीक बन चुका है।चार दिनों तक चलने वाले इस धार्मिक आयोजन में भक्ति संगीत, कथा-प्रवचन और विविध धार्मिक अनुष्ठानों से बगिया पूरी तरह भक्तिमय वातावरण में सराबोर रहेगा।

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