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राज्यपाल श्री रमेन डेका ने रेत के वैज्ञानिक एवं व्यवस्थित खनन पर दिया जोर।
राज्यपाल श्री रमेन डेका ने छत्तीसगढ़ की नदियों और बड़े नालों में रेत खनन की गतिविधियों को वैज्ञानिक, संतुलित और व्यवस्थित ढंग से संचालित किए जाने की आवश्यकता पर बल दिया है। उन्होंने कहा कि रेत राज्य के विकास और आधारभूत संरचना निर्माण के लिए महत्वपूर्ण संसाधन है, इसलिए इसके उपयोग और संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है, क्योंकि इनके अनियंत्रित दोहन से पर्यावरण और जल संसाधनों पर गंभीर दुष्प्रभाव पड़ने की संभावना बनी रहती है।
लोक भवन में आज राज्यपाल ने खनिज विभाग के सचिव पी. दयानंद से इस विषय पर चर्चा की और आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि रेत खनन निर्धारित नियमों एवं वैज्ञानिक मानकों के अनुरूप किया जाना चाहिए, ताकि पर्यावरण संरक्षण और विकास दोनों उद्देश्यों को समान रूप से साधा जा सके। राज्यपाल ने राज्य में चल रहे ड्रोन आधारित निगरानी और खनिज 2.0 पोर्टल के माध्यम से मॉनिटरिंग की जानकारी लेते हुए इसकी सराहना की।
राज्यपाल ने कहा कि नदियों और बड़े नालों की प्राकृतिक संरचना तथा जलधारण क्षमता को सुरक्षित रखना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि अनियोजित खनन गतिविधियों से नदी तटों, भू-जल स्तर और स्थानीय पारिस्थितिकी पर प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए खनन कार्यों की नियमित निगरानी और अवैध खनन पर प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि नदियों एवं जलस्रोतों की क्षमता बढ़ाने तथा भू-जल संरक्षण के लिए दीर्घकालिक और समन्वित प्रयास किए जाने की आवश्यकता है।
राज्यपाल ने निर्देश दिए कि रेत खनन से संबंधित क्षेत्रों का वैज्ञानिक अध्ययन कराया जाए। उन्होंने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) जैसे विशेषज्ञ संस्थानों से सर्वे और तकनीकी अध्ययन कराया जा सकता है, ताकि खनन गतिविधियों के प्रभावों का आकलन कर बेहतर प्रबंधन की दिशा में कदम उठाए जा सकें।
राज्यपाल डेका ने कहा कि रेत जैसे खनिज संसाधनों का उपयोग राज्य के विकास के लिए आवश्यक है, लेकिन इसके साथ प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को भी प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
आजादी के 78 साल बाद रोशन होंगे दूरस्थ मजराटोले, सुशासन तिहार में जिले को मिली बड़ी सौगात।
'सुशासन तिहार-2026' के अवसर पर खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि सामने आई है। जिला प्रशासन और विद्युत विभाग के समन्वित प्रयासों से जिले के 10 दूरस्थ एवं अब तक विद्युत सुविधा से वंचित मजराटोलों के विद्युतीकरण के लिए प्रशासनिक स्वीकृति प्राप्त हो गई है। निविदा प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद इन क्षेत्रों में इसी सत्र के दौरान तेजी से विद्युतीकरण कार्य प्रारंभ कर पूर्ण किया जाएगा।
आजादी के 78 वर्षों बाद जिले के ऐसे दूरस्थ वनांचल एवं ग्रामीण क्षेत्रों में पहली बार बिजली पहुंचने का मार्ग प्रशस्त हुआ है, जहां अब तक अंधेरा ही ग्रामीणों की नियति बना हुआ था। मुख्यमंत्री मजराटोला विद्युतीकरण योजना के तहत निजामडीह, तुम्दादाह, बलरामपुर, कोहकझोरी, संजारी-टाटीघाट, झिलमिली एवं गाताभर्री, घाघरा, लमरा, रिहाडबरा तथा टिनगीपुर जैसे गांवों के मजराटोलों में विद्युत नेटवर्क का विस्तार किया जाएगा।
*ग्रामीण विकास की नई रोशनी, शिक्षा-स्वास्थ्य और आजीविका को मिलेगा बल*
विद्युतीकरण से न केवल घरों में रोशनी पहुंचेगी, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, कृषि और आजीविका के क्षेत्र में भी सकारात्मक बदलाव आएगा। बिजली उपलब्ध होने से बच्चों की पढ़ाई, किसानों की सुविधाएं, छोटे व्यवसाय और शासकीय सेवाओं की पहुंच में उल्लेखनीय सुधार होगा। लंबे समय से बिजली की मांग कर रहे ग्रामीणों के लिए यह निर्णय किसी सपने के साकार होने से कम नहीं है।
*कलेक्टर और विद्युत विभाग के प्रयासों से मिली सफलता*
इस महत्वपूर्ण उपलब्धि के पीछे कलेक्टर श्री इंद्रजीत चन्द्रवाल तथा विद्युत वितरण कंपनी के प्रबंध निदेशक श्री भीम सिंह का विशेष मार्गदर्शन और सतत प्रयास रहा है। उनके नेतृत्व में विभागीय प्रक्रियाओं को गति मिली और वर्षों से लंबित विद्युतीकरण प्रस्तावों को स्वीकृति दिलाने में सफलता प्राप्त हुई।
सुशासन तिहार के दौरान मिली यह सौगात जिले के दूरस्थ ग्रामीण अंचलों के विकास में मील का पत्थर साबित होगी। आने वाले समय में इन मजराटोलों में जगमगाती रोशनी के साथ विकास की नई किरण भी पहुंचेगी, जिससे ग्रामीणों के जीवन में व्यापक बदलाव देखने को मिलेगा।
जशपुर इचकेला में आयोजित वुमेन टी-20 क्रिकेट चैंपियनशिप 2026 का सफल समापन रांची की जीडी गोयंका अकादमी बनी विजेता, महारानी क्रिकेट क्लब जशपुर उपविजेता
जिले के ग्राम इचकेला में 28 मई से 1 जून 2026 तक आयोजित वुमेन टी-20 क्रिकेट चैंपियनशिप 2026 का रोमांचक समापन हुआ। महिला क्रिकेट को प्रोत्साहित करने और उभरती प्रतिभाओं को मंच प्रदान करने के उद्देश्य से आयोजित इस प्रतियोगिता में कुल पांच टीमों ने भाग लिया।
फाइनल मुकाबले में जीडी गोयंका अकादमी रांची ने शानदार प्रदर्शन करते हुए महारानी क्रिकेट क्लब जशपुर को पराजित कर चैंपियनशिप का खिताब अपने नाम किया। विजेता टीम को प्रथम पुरस्कार के रूप में 31 हजार रुपये की नगद राशि प्रदान की गई। वहीं उपविजेता महारानी क्रिकेट क्लब जशपुर को 15 हजार रुपये तथा तीसरे स्थान पर रही रायगढ़ जिंदल क्रिकेट अकादमी (जेसीए) को 11 हजार रुपये की पुरस्कार राशि दी गई। फाइनल मुकाबले में प्रिया को उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ चुना गया।
पूरे टूर्नामेंट में कई खिलाड़ियों ने अपनी प्रतिभा से दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। पहले राउंड में जीडी गोयंका अकादमी रांची के खिलाफ मुकाबले में महारानी क्रिकेट क्लब जशपुर की खिलाड़ी आकांक्षा रानी ने शानदार बल्लेबाजी का प्रदर्शन करते हुए 41 गेंदों में 88 रन की विस्फोटक पारी खेली। इसके अलावा स्टार-11 जशपुर के विरुद्ध भी उन्होंने मात्र 32 गेंदों में 88 रन बनाकर अपनी बल्लेबाजी क्षमता का परिचय दिया। पूरे टूर्नामेंट में आकांक्षा रानी ने 10 छक्के और 27 चौके लगाए। वहीं मात्र 11 वर्षीय आस्था रानी ने अपनी गेंदबाजी से सभी को प्रभावित किया।
उन्होंने एक मुकाबले में लगातार चार गेंदों पर चार विकेट लेकर शानदार उपलब्धि हासिल की। उस मैच में उन्होंने कुल सात विकेट अपने नाम किए और अपनी प्रतिभा का बेहतरीन प्रदर्शन किया। प्रतियोगिता में जीडी गोयंका अकादमी रांची, अंबिकापुर क्रिकेट टीम, रायगढ़ जिंदल क्रिकेट अकादमी, महारानी क्रिकेट क्लब जशपुर तथा स्टार-11 जशपुर की टीमों ने हिस्सा लिया। प्रतियोगिता के दौरान बड़ी संख्या में उपस्थित दर्शकों ने रोमांचक मुकाबलों का आनंद लिया तथा आयोजन को महिला क्रिकेट और ग्रामीण क्षेत्र की प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने की सराहनीय पहल बताया।
विकास, विश्वास और सुशासन का सेतु बना कोण्डापल्ली का बेली ब्रिज मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने किया निरीक्षण, कहा - दूरस्थ क्षेत्रों तक विकास पहुंचाना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता।
जहां कभी दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियां विकास की राह में चुनौती बनती थीं, वहां आज आधुनिक अधोसंरचना नए अवसरों के द्वार खोल रही है।
प्रदेशव्यापी सुशासन तिहार के अंतर्गत मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज बीजापुर जिले के सुदूर वनांचल क्षेत्र स्थित ग्राम कोण्डापल्ली पहुंचकर बीजापुर-पूवर्ती मार्ग पर निर्मित बेली ब्रिज का निरीक्षण किया। उन्होंने पुल की निर्माण तकनीक, उपयोगिता और क्षेत्र के विकास में उसकी भूमिका की जानकारी लेते हुए इसे बदलते बस्तर की नई तस्वीर का प्रतीक बताया।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सड़क, पुल और अन्य आधारभूत सुविधाएं केवल निर्माण कार्य नहीं हैं, बल्कि वे दूरस्थ क्षेत्रों को शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और विकास की मुख्यधारा से जोड़ने वाले मजबूत माध्यम हैं। राज्य सरकार का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि विकास की पहुंच समाज के अंतिम व्यक्ति तक हो।
*कम समय, कम लागत और अधिक मजबूती की तकनीक*
भारतीय सीमा सड़क संगठन (BRO) द्वारा निर्मित यह बेली ब्रिज बीजापुर-पूवर्ती सड़क परियोजना का महत्वपूर्ण हिस्सा है। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि बेली ब्रिज पारंपरिक पुलों की तुलना में अधिक किफायती, मजबूत और टिकाऊ होते हैं। इनका निर्माण सामान्य पुलों की अपेक्षा लगभग पांच गुना कम लागत में किया जा सकता है तथा इन्हें मात्र एक माह के भीतर तैयार किया जा सकता है। दुर्गम और संवेदनशील क्षेत्रों में त्वरित कनेक्टिविटी स्थापित करने के लिए यह तकनीक अत्यंत प्रभावी सिद्ध हो रही है।
*बीजापुर में 21 बेली ब्रिज बने विकास के वाहक*
उल्लेखनीय है कि बीजापुर जिले में अब तक 21 बेली ब्रिजों का निर्माण किया जा चुका है। इन पुलों के निर्माण से दूरस्थ गांवों तक आवागमन सुगम हुआ है तथा लोगों को आवागमन, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा और आवश्यक सुविधाओं तक पहुंच में बड़ी राहत मिली है। इन संरचनाओं ने क्षेत्र में विकास और जनसेवाओं के विस्तार को नई गति प्रदान की है।
मुख्यमंत्री ने श्रमिकों की मेहनत और समर्पण की सराहना करते हुए कहा कि राज्य के श्रमिक और युवा ही विकास यात्रा के वास्तविक निर्माणकर्ता हैं। उन्होंने श्रमिकों का उत्साहवर्धन करते हुए उनके अनुभव भी साझा किए।
*बदलते बस्तर की नई पहचान*
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि बस्तर में अधोसंरचना विकास के माध्यम से नई संभावनाओं का निर्माण हो रहा है। कोण्डापल्ली का यह बेली ब्रिज केवल एक पुल नहीं, बल्कि विकास, विश्वास और सुशासन का सशक्त प्रतीक है। यह उस नए बस्तर की पहचान है, जहां विकास अब दूरस्थ गांवों और दुर्गम अंचलों तक मजबूती से पहुंच रहा है तथा लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रहा है।
वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने जन्मदिवस पर किया सुंदरकांड पाठ, प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि की कामना।
वित्त मंत्री श्री ओपी चौधरी अपने जन्मदिवस के अवसर पर रायगढ़ के महापल्ली में आयोजित रामचरितमानस सुंदरकांड पाठ में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने विधि-विधान से हनुमान जी की पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की खुशहाली, सुख-शांति और समृद्धि की कामना की। वित्त मंत्री श्री चौधरी ने कहा कि जन्मदिवस के इस विशेष अवसर पर प्रभु श्रीराम एवं संकटमोचन हनुमान जी का आशीर्वाद प्राप्त करना उनके लिए सौभाग्य की बात है। उन्होंने प्रदेश के विकास, जनकल्याण और सभी नागरिकों के सुखमय जीवन की प्रार्थना की।
श्री चौधरी ने जन्मदिवस पर उन्हें शुभकामनाएं देने वाले सभी नागरिकों, समर्थकों, शुभचिंतकों एवं क्षेत्रवासियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आप सभी का स्नेह, प्रेम और आशीर्वाद उन्हें जनसेवा के लिए निरंतर प्रेरित करता है। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु, जनप्रतिनिधि एवं स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।
जन्मदिवस पर मौसमी फलों और लड्डू से तौले गए वित्त मंत्री श्री ओपी चौधरी।
वित्त मंत्री श्री ओपी चौधरी के जन्मदिवस के अवसर पर रायगढ़ में क्षेत्रवासियों ने अनूठे अंदाज में उनका सम्मान किया। इस दौरान उन्हें मौसमी फलों एवं लड्डुओं से तौलकर शुभकामनाएं दी गईं। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में नागरिक, समर्थक और शुभचिंतक उपस्थित रहे।
इस अवसर पर वित्त मंत्री श्री ओपी चौधरी ने भावुक होते हुए कहा कि रायगढ़ क्षेत्रवासियों द्वारा उन्हें जन्मदिवस पर विभिन्न फलों एवं मिठाइयों से तौलना उनके जीवन के सबसे अनमोल क्षणों में से एक है। उन्होंने कहा कि यह सम्मान क्षेत्रवासियों के स्नेह, प्रेम और उन पर किए गए अटूट विश्वास का प्रतीक है।
श्री चौधरी ने सभी नागरिकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि जनता का यह अपनापन और आशीर्वाद उन्हें जनसेवा के प्रति और अधिक समर्पण के साथ कार्य करने की प्रेरणा देता है। उन्होंने सभी शुभचिंतकों, कार्यकर्ताओं और क्षेत्रवासियों को जन्मदिवस पर मिली शुभकामनाओं और स्नेह के लिए धन्यवाद दिया।कार्यक्रम का माहौल उत्साह और उल्लास से भरा रहा तथा उपस्थित लोगों ने वित्त मंत्री के स्वस्थ, दीर्घायु और सफल जीवन की कामना की।
रोशनी लौटाने की मुहिम में छत्तीसगढ़ आगे: 1.63 लाख से अधिक मोतियाबिंद ऑपरेशन से हजारों चेहरों पर लौटी मुस्कान।
छत्तीसगढ़ में आंखों की रोशनी बचाने और मोतियाबिंद से दृष्टिहिनता मुक्त समाज की दिशा में स्वास्थ्य विभाग की पहल लगातार प्रभावी साबित हो रही है। राष्ट्रीय दृष्टिहीनता एवं अल्प दृष्टि नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत राज्य ने वर्ष 2025-26 में निर्धारित लक्ष्य की तुलना में उल्लेखनीय उपलब्धि दर्ज करते हुए 1 लाख 63 हजार 641 से अधिक मोतियाबिंद ऑपरेशन पूरे किए गए हैं। यह कुल निर्धारित लक्ष्य का लगभग 91 प्रतिशत है, जिसने प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण और सुलभ नेत्र चिकित्सा सेवाओं की मजबूत तस्वीर प्रस्तुत की है।
स्वास्थ्य विभाग द्वारा Vision 20-20 की अवधारणा के अनुरूप शासकीय संस्थानों, गैर-शासकीय संगठनों (NGO) और निजी अस्पतालों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया गया है। इसका परिणाम यह है कि दूरस्थ क्षेत्रों तक भी नेत्र उपचार सेवाएं पहुँच रही हैं और आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को निःशुल्क उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है। शासन द्वारा अनुबंधित संस्थाओं को नियमानुसार भुगतान सुनिश्चित किए जाने से सेवाओं की निरंतरता और प्रभावशीलता भी बनी हुई है। राज्य में कुल उपलब्धि में शासकीय एवं NGO अस्पतालों की भागीदारी 51 प्रतिशत रही, जबकि निजी क्षेत्र ने 49 प्रतिशत योगदान देकर इस स्वास्थ्य अभियान को गति दी। विभागीय अधिकारियों के अनुसार यह साझेदारी मॉडल न केवल उपचार की पहुँच बढ़ा रहा है, बल्कि समयबद्ध और व्यवस्थित नेत्र चिकित्सा प्रबंधन का भी उदाहरण बन रहा है।
कोविड काल में नेत्र ऑपरेशन प्रभावित होने के कारण मोतियाबिंद के लंबित मामलों में वृद्धि हुई थी, लेकिन अब स्वास्थ्य विभाग ने विशेष अभियान चलाकर स्थिति को तेजी से सुधारा है। भारत सरकार की राष्ट्रीय नेत्र ज्योति योजना के तहत घर-घर सर्वे कर चिन्हित मरीजों का उपचार सुनिश्चित किया जा रहा है, जिससे जिलों को कैटरेक्ट ब्लाइंडनेस बैकलॉग फ्री स्टेटस (CBBFS) दिलाने की दिशा में ठोस प्रगति हो रही है।
प्रदेश के 15 जिले अब तक यह स्टेटस प्राप्त कर चुके हैं, जबकि अन्य जिलों में भी अभियान तेज गति से जारी है। रायपुर स्थित माना का 150 बिस्तरीय नेत्र चिकित्सालय राज्य स्तरीय रेफरल सेंटर के रूप में कार्य करते हुए दूर-दराज के मरीजों को विशेषज्ञ उपचार उपलब्ध करा रहा है। वहीं, बड़े शहरों में स्थित NGO बेस अस्पतालों के माध्यम से विभिन्न जिलों के मरीजों का प्रोटोकॉल आधारित सुरक्षित ऑपरेशन सुनिश्चित किया जा रहा है। समय पर जांच, पहचान और निःशुल्क उपचार की यह व्यवस्था हजारों लोगों के जीवन में नई रोशनी लेकर आई है और छत्तीसगढ़ को नेत्र स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक मजबूत मॉडल के रूप में स्थापित कर रही है।
जन्मदिवस के अवसर पर वित्त मंत्री श्री ओपी चौधरी ने की गौ-सेवा, संरक्षण के प्रयासों को सराहा।
जन्मदिवस के विशेष अवसर पर छत्तीसगढ़ के वित्त मंत्री श्री ओपी चौधरी ने रायगढ़ स्थित ऐतिहासिक सेठ किरोड़ीमल गौशाला पहुंचकर गौ-माता की सेवा की और उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। इस दौरान उन्होंने गौशाला परिसर का भ्रमण कर वहां संचालित विभिन्न गतिविधियों का बारीकी से अवलोकन किया और गौ-संरक्षण एवं संवर्धन के लिए किए जा रहे कार्यों की भूरि-भूरि सराहना की।
*गौ-सेवा सनातन परंपरा का अमूल्य प्रतीक*
वित्त मंत्री श्री चौधरी ने उपस्थित जनों को संबोधित करते हुए कहा कि गौ-माता की सेवा भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा का अमूल्य प्रतीक है। अपने जन्मदिवस के अवसर पर गौ-माता की सेवा करने का सौभाग्य प्राप्त होना मेरे लिए अत्यंत सुखद, संतोषजनक और प्रेरणादायी अनुभव है। उन्होंने आगे जोड़ते हुए कहा कि गौ-संरक्षण और संवर्धन के लिए इस गौशाला द्वारा किया जा रहा कार्य पूरे समाज के लिए अनुकरणीय है। गौवंश की सुरक्षा और उनकी उचित देखभाल करना हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के साथ-साथ हमारी सामाजिक जिम्मेदारी का भी एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
*सेवाभावी कार्यकर्ताओं का जताया आभार*
श्री चौधरी ने निस्वार्थ भाव से जुटे गौशाला के संचालकों और सेवाभावी कार्यकर्ताओं की मुक्तकंठ से प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि इन कार्यकर्ताओं के समर्पण, कड़ी मेहनत और अटूट प्रयासों के कारण ही क्षेत्र में गौ-संरक्षण की दिशा में उल्लेखनीय और सकारात्मक कार्य हो रहे हैं। कार्यक्रम के समापन पर वित्त मंत्री ने प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और कल्याण की कामना करते हुए सभी के प्रति अपना आभार व्यक्त किया। इस गरिमामय अवसर पर गौशाला प्रबंधन समिति के सदस्य, स्थानीय जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु व गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
सुशासन तिहार में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय पहुंचे बीजापुर के सुदूर गांव कोण्डापल्ली : चौपाल में सुनीं ग्रामीणों की समस्याएं।
प्रदेशव्यापी सुशासन तिहार के अंतर्गत मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय आज बीजापुर जिले के सुदूर वनांचल क्षेत्र स्थित ग्राम कोण्डापल्ली पहुंचे। मुख्यमंत्री ने यहां आयोजित जनचौपाल में ग्रामीणों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं, योजनाओं के क्रियान्वयन की जमीनी स्थिति जानी तथा शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों से मुलाकात कर उनके जीवन में आए सकारात्मक बदलावों की जानकारी ली।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सुशासन तिहार केवल एक प्रशासनिक अभियान नहीं, बल्कि सरकार और जनता के बीच विश्वास को और मजबूत करने का माध्यम है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि शासन की योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और किसी भी जरूरतमंद को अपने अधिकारों एवं सुविधाओं के लिए भटकना न पड़े। इसी भावना के साथ सरकार स्वयं गांव-गांव पहुंचकर लोगों की समस्याएं सुन रही है और उनके समाधान का प्रयास कर रही है।
जनचौपाल के दौरान मुख्यमंत्री ने विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टॉलों का अवलोकन किया तथा हितग्राहियों को वनाधिकार मान्यता पत्र, जाति एवं निवास प्रमाण पत्र, प्रधानमंत्री आवास योजना, श्रम कार्ड, किसान हितग्राही योजनाओं सहित विभिन्न योजनाओं के तहत लाभ वितरित किए। उन्होंने लाभार्थियों से चर्चा कर योजनाओं के प्रभाव और उनके अनुभवों की जानकारी भी प्राप्त की।
मुख्यमंत्री श्री साय ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि ग्रामीण क्षेत्रों से प्राप्त आवेदनों एवं शिकायतों का प्राथमिकता के आधार पर समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि किसी भी योजना की वास्तविक सफलता तब मानी जाएगी जब उसका लाभ पात्र व्यक्ति तक सही समय पर पहुंचे और आमजन को शासन की संवेदनशीलता का अनुभव हो।
मुख्यमंत्री ने ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि उनकी समस्याओं के समाधान के लिए सरकार पूरी प्रतिबद्धता और संवेदनशीलता के साथ कार्य कर रही है तथा क्षेत्र के विकास में कोई कमी नहीं आने दी जाएगी।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि बस्तर सहित प्रदेश के दूरस्थ और वनांचल क्षेत्रों में विकास की नई धारा पहुंचाना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। सुशासन तिहार के माध्यम से शासन लोगों के द्वार तक पहुंच रहा है, जिससे न केवल समस्याओं का त्वरित निराकरण हो रहा है, बल्कि शासन के प्रति आमजन का विश्वास भी लगातार मजबूत हो रहा है।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के विशेष सचिव श्री रजत बंसल सहित अन्य गणमान्यजन उपस्थित थे।
पत्रकारिता ने राष्ट्र निर्माण और सामाजिक परिवर्तन में निभाई ऐतिहासिक भूमिका : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय
पत्रकार लोकतंत्र के सच्चे सेनानी हैं, जो कठिन परिस्थितियों में भी निरंतर परिश्रम करते हुए सूचनाओं को जन-जन तक पहुंचाते हैं और समाज को सही दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। मीडिया की सकारात्मक आलोचना केवल व्यक्ति को ही नहीं, बल्कि प्रशासन और सरकार को भी आत्ममंथन और बेहतर कार्य की दिशा प्रदान करती है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज राजधानी रायपुर के वीआईपी रोड स्थित राम मंदिर परिसर के सुंदर सदन में आयोजित पत्रकारिता गौरव मार्तंड उत्सव को संबोधित करते हुए यह बात कही। यह आयोजन हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित किया गया।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि माता कौशल्या की धरती और भगवान श्रीराम के ननिहाल छत्तीसगढ़ में पत्रकारिता की गौरवशाली परंपरा पर आधारित ऐसा अद्भुत आयोजन निश्चित रूप से अभिनंदनीय है। उन्होंने आयोजन के लिए रायपुर प्रेस क्लब को बधाई देते हुए कहा कि रायपुर प्रेस क्लब देश के पुराने और प्रतिष्ठित प्रेस क्लबों में से एक है, जिसका इतिहास समृद्ध और प्रेरणादायी रहा है। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता और पत्रकारों के सम्मान में आयोजित ऐसे कार्यक्रम प्रेस क्लब की प्रतिबद्धता और संवेदनशीलता का सशक्त प्रमाण हैं।
मुख्यमंत्री श्री साय ने रायपुर की पत्रकारिता परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि इस शहर ने पत्रकारिता जगत को अनेक शिखर पुरुष दिए हैं। उन्होंने मधुकर खेर, मायाराम सुरजन, ललित सुरजन, रमेश नैय्यर और बबन प्रसाद मिश्र सहित अनेक प्रतिष्ठित संपादकों और पत्रकारों का स्मरण करते हुए कहा कि इन विभूतियों ने पत्रकारिता की सशक्त और वैचारिक परंपरा को समृद्ध किया है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि मीडिया लोकतंत्र की आधारशिला है और देश के स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर सामाजिक कुरीतियों के उन्मूलन तक पत्रकारिता ने हमेशा परिवर्तनकारी भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि 30 मई 1826 को कोलकाता से श्री जुगल किशोर शुक्ल द्वारा प्रकाशित देश के प्रथम हिंदी समाचार पत्र उदंत मार्तंड ने भारतीय पत्रकारिता की मजबूत नींव रखी। हिंदी पत्रकारिता के दो सौ वर्षों की यह गौरवशाली यात्रा देशवासियों के लिए गर्व का विषय है।
मुख्यमंत्री ने भारतीय सनातन परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि देवर्षि नारद को आदि पत्रकार माना जाता है और इसी कारण पत्रकार बंधु नारद जयंती को सम्मानपूर्वक मनाते हैं। उन्होंने कहा कि यह अत्यंत रोचक और प्रेरक तथ्य है कि उदंत मार्तंड का प्रकाशन भी नारद जयंती के दिन आरंभ हुआ, जो इस बात का प्रतीक है कि भारतीय पत्रकारिता की जड़ें हमारी सांस्कृतिक चेतना और सनातन मूल्यों से गहराई से जुड़ी रही हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय पत्रकारिता ने राष्ट्रवादी चेतना को स्वर देने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि महात्मा गांधी, लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक, माधवराव सप्रे और सुभाषचंद्र बोस सहित अनेक स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने पत्रकारिता को सामाजिक जागरण और राष्ट्रीय चेतना के माध्यम के रूप में उपयोग किया। उन्होंने कहा कि जब भी भारतीय पत्रकारिता का गौरवशाली इतिहास लिखा जाएगा, तब छत्तीसगढ़ का नाम स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज होगा।
उन्होंने मां भारती के सपूत माधवराव सप्रे का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने छत्तीसगढ़ से छत्तीसगढ़ मित्र का संपादन कर स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान लोगों को जागृत और संगठित करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि पत्रकारिता की चर्चा जब भी होगी, तब भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी का स्मरण स्वाभाविक रूप से होगा। उन्होंने कहा कि अटल जी ने अपनी पत्रकारिता के माध्यम से राष्ट्रवाद और राष्ट्रीय चेतना की जो अलख जगाई, उसने स्वतंत्र भारत में लाखों लोगों को प्रेरित किया। स्वदेश और राष्ट्रधर्म जैसे प्रकाशनों ने राष्ट्र चेतना और राष्ट्रीय अस्मिता को जन-जन तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राज्य सरकार ने मोदी की गारंटियों को धरातल पर उतारने का कार्य किया है और प्रदेश की अनेक जनकल्याणकारी योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने में मीडिया की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। उन्होंने विशेष रूप से नक्सलवाद उन्मूलन का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के नेतृत्व, सुरक्षा बलों के अदम्य साहस तथा जनसहभागिता के साथ-साथ पत्रकारों की महत्वपूर्ण भूमिका के कारण प्रदेश में शांति और विकास का वातावरण मजबूत हुआ है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हिंसा और भटकाव के रास्ते पर जाने वाले लोगों को शांति, विकास और मुख्यधारा की ओर प्रेरित करने में पत्रकारों ने बड़ी भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि आज जब मीडिया बस्तर में हो रहे सकारात्मक बदलाव, विकास, पर्यटन, प्राकृतिक सौंदर्य और बढ़ती संभावनाओं की खबरें सामने लाता है, तब देश और दुनिया में छत्तीसगढ़ की नई पहचान बनती है। जो बस्तर कभी बंदूक और हिंसा की खबरों से पहचाना जाता था, आज वही बस्तर पर्यटन, प्रकृति और विकास की नई संभावनाओं का केंद्र बनकर उभर रहा है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री श्री ओपी चौधरी ने कहा कि हिंदी पत्रकारिता की 200 वर्षों की यात्रा अत्यंत गौरवशाली रही है। उन्होंने कहा कि 1826 में जब उदंत मार्तंड की शुरुआत हुई, तब देश अंग्रेजी शासन के कठिन दौर से गुजर रहा था। ऐसे समय में पत्रकारिता ने अंधकार को सामने लाने के साथ समाज को उजाले की दिशा दिखाने का कार्य किया। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता का मूल धर्म समाज और राष्ट्र को सही दिशा प्रदान करना है।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता वरिष्ठ पत्रकार एवं इंडिया हैबिटेट सेंटर के डायरेक्टर डॉ. के.जी. सुरेश ने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर स्वतंत्र भारत तक पत्रकारिता ने राष्ट्रधर्म और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखा है। उन्होंने कहा कि हिंदी पत्रकारिता ने समय के साथ बदलती तकनीकों के अनुरूप स्वयं को विकसित किया है, किंतु सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव और नागरिक पत्रकारिता की अवधारणा ने कई नई चुनौतियां भी उत्पन्न की हैं। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता को शोधपरक, तथ्यात्मक और साक्ष्य आधारित बनाए रखना समय की आवश्यकता है, ताकि पत्रकारिता की विश्वसनीयता और सामाजिक भूमिका और मजबूत हो सके।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने पत्रकारिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले विशिष्टजनों को लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड प्रदान कर सम्मानित किया। उन्होंने हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में प्रकाशित नवप्रदेश के विशेष अंक, रायपुर प्रेस क्लब की पत्रकार डायरेक्टरी तथा श्री दिनेश यदु की पुस्तक 'मैं अगहन हूं' का विमोचन भी किया।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार श्री पंकज झा, मुख्यमंत्री के सलाहकार श्री कृष्णा दास, विधायक श्री पुरंदर मिश्रा, छत्तीसगढ़ राज्य नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष श्री संजय श्रीवास्तव, सीएसआईडीसी के अध्यक्ष श्री राजीव अग्रवाल, राज्य बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष श्रीमती वर्णिका शर्मा, राम मंदिर ट्रस्ट के उपाध्यक्ष श्री सुनील रामदास, रायपुर प्रेस क्लब के अध्यक्ष श्री मोहन तिवारी, प्रेस क्लब के पदाधिकारीगण, गणमान्य नागरिक एवं बड़ी संख्या में आमजन उपस्थित थे।
विकास कार्यों में लापरवाही बर्दाश्त नहीं,प्रभारी मंत्री ओपी चौधरी,शिलापट्ट नहीं लगाने पर अधिकारियों पर होगी कार्रवाई।
वित्त एवं जशपुर जिले के प्रभारी मंत्री ओपी चौधरी ने रविवार को जिला पंचायत सभाकक्ष में जिला स्तरीय अधिकारियों की समीक्षा बैठक लेकर विभिन्न विभागों की योजनाओं और विकास कार्यों की विस्तार से समीक्षा की। उन्होंने स्पष्ट कहा कि मुख्यमंत्री का गृह जिला होने के कारण जशपुर के अधिकारियों की जिम्मेदारी और अधिक बढ़ जाती है, इसलिए सभी अधिकारी अपने दायित्वों का गंभीरता से निर्वहन करें तथा विकास कार्यों को समयसीमा में पूर्ण करें।
बैठक में जशपुर विधायक श्रीमती रायमुनि भगत, पत्थलगांव विधायक श्रीमती गोमती साय, जिला पंचायत अध्यक्ष सालिक साय, नगर पालिका अध्यक्ष अरविंद भगत, जिला पंचायत उपाध्यक्ष शौर्य प्रताप सिंह जूदेव, कलेक्टर रोहित व्यास, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. लाल उमेद सिंह, जिला पंचायत सीईओ अभिषेक कुमार, डीएफओ शशि कुमार सहित जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित रहे।
प्रभारी मंत्री श्री चौधरी ने कहा कि पिछले दस वर्षों की तुलना में वर्तमान सरकार ने जशपुर जिले के लिए रिकॉर्ड संख्या में विकास कार्य स्वीकृत किए हैं। उन्होंने अधिकारियों को जनप्रतिनिधियों के साथ समन्वय बनाकर कार्य करने के निर्देश दिए।
उन्होंने विशेष रूप से कहा कि जिन कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन हो चुका है, उनके शिलापट्ट संबंधित गांवों में स्थानीय जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में अनिवार्य रूप से लगाए जाएं। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि किसी विभाग का शिलापट्ट इधर-उधर पड़ा मिला या शिकायत प्राप्त हुई तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
बैठक में प्रभारी मंत्री ने महिलाओं और किसानों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि महतारी वंदन योजना के तहत महिलाओं को हर महीने एक हजार रुपए की सहायता राशि दी जा रही है, जिसका उपयोग वे अपने बच्चों के भविष्य के लिए बचत योजनाओं में कर सकती हैं। साथ ही महतारी शक्ति ऋण योजना के तहत महिलाओं को कम ब्याज दर पर 25 हजार रुपए तक का ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है।
उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना के निर्माण कार्यों को गंभीरता से पूर्ण करने के निर्देश दिए तथा कृषि विभाग को किसानों के लिए पर्याप्त मात्रा में खाद और बीज की उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा। साथ ही किसानों को मछली पालन, केला एवं लिची की खेती के लिए प्रोत्साहित करने के निर्देश भी दिए।
बैठक में कलेक्टर श्री रोहित व्यास ने बताया कि जिले में मुख्यमंत्री घोषणाओं के अनुरूप मेडिकल कॉलेज, शासकीय नर्सिंग कॉलेज, प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र, क्रिटिकल केयर सेंटर सहित कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर तेजी से कार्य किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि सन्ना विकासखंड के पंडरापाठ में विशेष पिछड़ी जनजाति पहाड़ी कोरवा बच्चों के लिए तीरंदाजी केंद्र का निर्माण शुरू हो गया है, वहीं कुनकुरी सलियाटोली में एडवेंचर स्पोर्ट्स परियोजना भी प्रारंभ की जा चुकी है।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. लाल उमेद सिंह ने बैठक में कहा कि चौक-चौराहों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने की आवश्यकता है, जिससे पुलिस व्यवस्था को मजबूती मिलेगी। उन्होंने हेलमेट और सीट बेल्ट जागरूकता अभियान की जानकारी देते हुए बताया कि अब तक 2000 से अधिक लोगों के अपील वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित किए जा चुके हैं।
बैठक में सुशासन तिहार, मनरेगा, प्रधानमंत्री आवास योजना, वन विभाग, स्वास्थ्य, महिला एवं बाल विकास, कृषि, पशुपालन, मत्स्य पालन, खेल एवं युवा कल्याण सहित विभिन्न विभागों की योजनाओं की विस्तृत समीक्षा की गई।
कलेक्टर रोहित व्यास ने एम-कैड योजना के निर्माण कार्य का किया निरीक्षण जशपुर बनेगा आधुनिक दाबित सिंचाई प्रणाली का राष्ट्रीय मॉडल जिला
कलेक्टर श्री रोहित व्यास ने आज कांसाबेल विकासखंड के ग्राम बगिया में संचालित समृद्धि कमांड क्षेत्र विकास एवं जल प्रबंधन आधुनिकीकरण (एम-कैड) योजना के निर्माण कार्य का निरीक्षण किया। वर्तमान में परियोजना के प्रारंभिक चरण में ले-आउट एवं खुदाई कार्य प्रगति पर है। यह महत्वाकांक्षी परियोजना मैनी नदी पर निर्मित बगिया बैराज सह दाबित उद्वहन सिंचाई योजना के माध्यम से संचालित की जा रही है।
निरीक्षण के दौरान कलेक्टर श्री व्यास ने कहा कि आधुनिक एवं नवीनतम तकनीकों का उपयोग कर इस सिंचाई परियोजना का निर्माण किया जा रहा है, जो भविष्य में एक आदर्श सिंचाई मॉडल के रूप में स्थापित होगी। उन्होंने निर्माण कार्य को निर्धारित समय-सीमा में सभी गुणवत्ता मानकों के अनुरूप पूर्ण करने के निर्देश अधिकारियों को दिए।
*आधुनिक तकनीक, सौर ऊर्जा और स्मार्ट जल प्रबंधन से किसानों को मिलेगा लाभ*
परियोजना के तहत पारंपरिक नहर प्रणाली के स्थान पर आधुनिक प्रेसराइज्ड पाइप इरिगेशन नेटवर्क विकसित किया जाएगा, जिससे जल उपयोग दक्षता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। इसके तहत जमीन के अंदर पाइप बिछेगी, जिससे जमीन अधिग्रहण की भी समस्या नहीं होगी। पहले सिंचाई के लिए बारिश के पानी पर ही निर्भर रहना पड़ता था। अब इस योजना से पानी की कमी दूर होगी। साथ ही किसानों को पर्याप्त पानी भी मिलेगा। देश में 23 राज्यों में 34 योजना स्वीकृत किए गए है। इसमें प्रदेश का एकमात्र बगिया क्लस्टर शामिल है। जिसके लिए भारत सरकार द्वारा 95.89 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान की गई है। योजना की कुल लागत लगभग 119 करोड़ रुपए है। इसके अंतर्गत बगिया, उसकुटी, रजोती, सुजीबहार, चोंगरीबहार, बांसबहार, डोकड़ा, सिकरिया, पतराटोली, गहिराडोहर, बीहाबल, नरियरडांड एवं ढुढुडांड सहित 13 ग्रामों के लगभग 4933 हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। परियोजना का मुख्य उद्देश्य जल उपयोग दक्षता को बढ़ाना, पानी की हर बूंद का समुचित उपयोग करते हुए कृषि उत्पादन में वृद्धि करना तथा किसानों की आय में स्थायी सुधार लाना है।
परियोजना में विद्युत आपूर्ति सौर ऊर्जा के माध्यम से की जाएगी। साथ ही जल के नियंत्रित एवं वैज्ञानिक उपयोग के लिए सुपरवाइजरी कंट्रोल एंड डेटा एक्विज़िशन तथा इंटरनेट ऑफ थिंग्स जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाएगा। इस परियोजना के माध्यम से सिंचाई परिसंपत्तियों पाइप नेटवर्क संरचना एवं जल प्रबंधन के संचालन में किसानों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। डेटा एवं विश्लेषण के आधार पर यह निर्धारित किया जाएगा कि कहां, कब और कितना पानी देना है। बेहतर सिंचाई व्यवस्था के साथ उन्नत कृषि पद्धतियों को अपनाकर किसानों को जलवायु परिवर्तन से जुड़े जोखिमों से निपटने में सक्षम बनाया जा रहा है, जिससे दीर्घकालीन उत्पादकता, लाभप्रदता और किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार सुनिश्चित होगा।
जनभागीदारी सबसे दूर सबसे पहले अभियान के तहत गांवों में लगाया गया शिविर ।
भारत सरकार जनजातीय कार्य मंत्रालय के निर्देशानुसार "जन भागीदारी सबसे दूर सबसे पहले" अभियान के तहत फरसाबहार विकास खंड के ग्राम पुराईनबंध कांसाबेल विकास खंड के ग्राम कुसुमताल बगीचा विकास खंड के देवडाड़, पतराटोली, ग्राम पंचायत पीठा आमा, जशपुर विकास खंड के ग्राम घोलेंगे , कुनकुरी विकास खंड के ग्राम कलिबा, ग्राम गोरिया, ग्राम चटकपुर, आदि अन्य ग्राम पंचायतों में शिविर लगाया गया।
जिसमें विशेष पिछड़ी जनजाति पहाड़ी कोरवा परिवारों का राशनकार्ड बनाकर दिया गया लोगों का पेंशन स्वीकृत आदेश दिया गया।
ग्रामवासियों का स्वास्थ्य परीक्षण और आधार अपडेट,आय जाति, निवास प्रमाण के आनलाइन आवेदन और आयुष्मान कार्ड बनाया गया।
जनभागीदारी सबसे दूर सबसे पहले अभियान के तहत गांवों में लगाया गया शिविर ।
भारत सरकार जनजातीय कार्य मंत्रालय के निर्देशानुसार "जन भागीदारी सबसे दूर सबसे पहले" अभियान के तहत फरसाबहार विकास खंड के ग्राम पुराईनबंध कांसाबेल विकास खंड के ग्राम कुसुमताल बगीचा विकास खंड के देवडाड़, पतराटोली, ग्राम पंचायत पीठा आमा, जशपुर विकास खंड के ग्राम घोलेंगे , कुनकुरी विकास खंड के ग्राम कलिबा, ग्राम गोरिया, ग्राम चटकपुर, आदि अन्य ग्राम पंचायतों में शिविर लगाया गया।
जिसमें विशेष पिछड़ी जनजाति पहाड़ी कोरवा परिवारों का राशनकार्ड बनाकर दिया गया लोगों का पेंशन स्वीकृत आदेश दिया गया।
ग्रामवासियों का स्वास्थ्य परीक्षण और आधार अपडेट,आय जाति, निवास प्रमाण के आनलाइन आवेदन और आयुष्मान कार्ड बनाया गया।
जनभागीदारी सबसे दूर सबसे पहले अभियान के तहत गांवों में लगाया गया शिविर ।
भारत सरकार जनजातीय कार्य मंत्रालय के निर्देशानुसार "जन भागीदारी सबसे दूर सबसे पहले" अभियान के तहत फरसाबहार विकास खंड के ग्राम पुराईनबंध कांसाबेल विकास खंड के ग्राम कुसुमताल बगीचा विकास खंड के देवडाड़, पतराटोली, ग्राम पंचायत पीठा आमा, जशपुर विकास खंड के ग्राम घोलेंगे , कुनकुरी विकास खंड के ग्राम कलिबा, ग्राम गोरिया, ग्राम चटकपुर, आदि अन्य ग्राम पंचायतों में शिविर लगाया गया।
जिसमें विशेष पिछड़ी जनजाति पहाड़ी कोरवा परिवारों का राशनकार्ड बनाकर दिया गया लोगों का पेंशन स्वीकृत आदेश दिया गया।
ग्रामवासियों का स्वास्थ्य परीक्षण और आधार अपडेट,आय जाति, निवास प्रमाण के आनलाइन आवेदन और आयुष्मान कार्ड बनाया गया।
सुशासन तिहार में लगातार मिल रहा योजनाओं का लाभ, कुसुमताल में मिली खुशियों की सौगात
सुशासन तिहार 2026 के अंतर्गत जिलेवासियों को लगातार शासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ मिल रहा है। इसी कड़ी में जनपद पंचायत कांसाबेल के ग्राम पंचायत कुसुमताल में आयोजित जनसमस्या निवारण शिविर में ग्रामीणों को खुशियों की सौगात मिली। शिविर में जहां समस्याओं का त्वरित निराकरण किया गया, वहीं पात्र हितग्राहियों को मौके पर ही विभिन्न योजनाओं से लाभान्वित किया गया। शिविर में प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत हितग्राहियों को उनके पक्के घर के सपने को साकार करने हेतु “खुशियों की चाबी” प्रदान की गई, जिससे ग्रामीणों में विशेष उत्साह देखा गया।
इसके साथ ही समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित योजनाओं के अंतर्गत हितग्राहियों को पेंशन प्रमाण पत्र वितरित किए गए। दिव्यांग हितग्राहियों को भी शिविर में विशेष रूप से लाभान्वित किया गया। हितग्राही को सहायक उपकरण के रूप में व्हीलचेयर प्रदान की गई, जिससे उसकी दैनिक जीवन की गतिविधियां सरल हो सकेंगी और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा। कार्यक्रम में जनपद पंचायत अध्यक्ष श्रीमती सरिता भगत, जिला पंचायत सदस्य श्रीमती हीरामती पैंकरा, वरिष्ठ नागरिक श्री सुदाम पांडा तथा अन्य जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति रही। सभी ने हितग्राहियों को योजनाओं का लाभ प्रदान करते हुए शासन की जनकल्याणकारी पहल की सराहना की।
शिविर के दौरान “नशा मुक्त भारत अभियान” के तहत उपस्थित ग्रामीणों को शपथ भी दिलाई गई, जिसमें सभी ने नशे से दूर रहने और समाज को नशामुक्त बनाने का संकल्प लिया। ग्रामीणों ने कहा कि सुशासन तिहार के माध्यम से उन्हें योजनाओं का लाभ घर के पास ही मिल रहा है, जिससे समय, धन और श्रम की बचत हो रही है। यह पहल न केवल लोगों की समस्याओं का समाधान कर रही है, बल्कि उनके जीवन स्तर को भी बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
