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बेटे ने सील-लोढ़ा से पिता के सिर पर किया वार, मौत; आरोपी गिरफ्तार

 

 

जशपुर। तपकरा थाना क्षेत्र के ऊपर कछार चौकी अंतर्गत ग्राम सिंगीबहार में घरेलू विवाद के दौरान बेटे द्वारा अपने पिता की हत्या करने का मामला सामने आया है। पुलिस ने आरोपी बेटे सूरज सिंह (32) को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया है। हत्या में प्रयुक्त सील-लोढ़ा भी पुलिस ने बरामद कर लिया है।

पुलिस के अनुसार घटना 6 अगस्त 2026 की है। मृतक कृष्णा सिंह के भतीजे योगादर सिंह को गांव के एक व्यक्ति ने सूचना दी कि सूरज सिंह ने अपने पिता के साथ मारपीट की है और कृष्णा सिंह बेहोश पड़े हैं। सूचना मिलने पर योगादर सिंह मौके पर पहुंचा तो कृष्णा सिंह खाट पर बेहोश मिले। उनके नाक, मुंह और कान से खून निकल रहा था, जबकि आरोपी सूरज सिंह भी मौके पर मौजूद था।

परिजनों ने तत्काल एंबुलेंस की मदद से कृष्णा सिंह को शासकीय अस्पताल केरसेई पहुंचाया। हालत गंभीर होने पर उन्हें कुनकुरी रेफर किया गया, लेकिन अस्पताल पहुंचने पर चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

मामला तपकरा थाना क्षेत्र का होने के कारण कुनकुरी में दर्ज मर्ग की डायरी तपकरा थाना भेजी गई। पोस्टमार्टम एवं प्रारंभिक जांच के आधार पर पुलिस ने बीएनएस की धारा 103(1) के तहत हत्या का अपराध दर्ज कर विवेचना शुरू की।

पुलिस पूछताछ में आरोपी सूरज सिंह ने बताया कि उसके पिता की कथित रूप से झगड़ालू प्रवृत्ति थी और आए दिन घर तथा बाहर विवाद करते थे। घटना के दिन भी दोनों के बीच इसी बात को लेकर विवाद हुआ। विवाद के दौरान आवेश में आकर सूरज ने घर में रखे सील-लोढ़ा से पिता के सिर पर वार कर दिया। गंभीर चोट लगने से उनकी मौत हो गई।

पुलिस ने आरोपी को 7 अगस्त को हिरासत में लेकर पूछताछ की। अपराध स्वीकार करने और पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद उसे विधिवत गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया। पुलिस ने घटना में प्रयुक्त सील-लोढ़ा भी जब्त किया है।

कार्रवाई में थाना तपकरा प्रभारी निरीक्षक संदीप कौशिक, ऊपर कछार चौकी प्रभारी सहायक उप निरीक्षक भुनेश्वर भगत, प्रधान आरक्षक अजय कुमार लकड़ा तथा आरक्षक दिलीप खलखो, सोनू सिंह और अमेश पैंकरा की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

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ग्राम सभा में तय होगी गांव के विकास की दिशा, सचिवों की मनमानी पर लगेगा अंकुश,30 जुलाई को पंचायतों में विशेष ग्राम सभा का आयोजन,SDM ने लगाई अधिकारियों की ड्यूटी।

जशपुर जंक्शन 30 जुलाई 

गांवों के विकास की दिशा अब बंद कमरों में नहीं, बल्कि ग्राम सभा के खुले मंच पर तय होगी। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के निर्देश पर 30 जुलाई 2026 को जिले की ग्राम पंचायतों में विशेष ग्राम सभाओं का आयोजन किया जाएगा। इनमें 16वें वित्त आयोग के तहत वित्तीय वर्ष 2026-27 की ग्राम पंचायत विकास योजना तैयार कर ग्राम सभा से अनुमोदित कराई जाएगी। इस संबंध में अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) बगीचा प्रदीप राठिया ने आदेश जारी करते हुए विभिन्न विभागों के अधिकारियों एवं कर्मचारियों की ग्राम पंचायतवार ड्यूटी निर्धारित की है, ताकि ग्राम सभाओं का सफल संचालन और प्रभावी निगरानी सुनिश्चित की जा सके। 

ग्रामीण क्षेत्रों में लंबे समय से यह शिकायत सामने आती रही है कि ग्राम पंचायतों की विकास कार्ययोजना कई बार ग्राम सभा में व्यापक चर्चा और सहमति के बिना तैयार कर ली जाती है। कई मामलों में सरपंच और पंचों को भी प्रस्तावित कार्यों की पूरी जानकारी नहीं मिल पाती, जिसका लाभ उठाकर कुछ सचिव अपनी सुविधा के अनुसार कार्ययोजना तैयार कर देते हैं। इससे गांव की वास्तविक जरूरतें पीछे छूट जाती हैं और विकास कार्यों में प्राथमिकताओं का संतुलन बिगड़ जाता है।

परिणामस्वरूप सरकारी राशि का समुचित उपयोग नहीं हो पाता और कई बार अनावश्यक कार्यों पर खर्च होने की शिकायतें भी सामने आती हैं।इसी व्यवस्था में पारदर्शिता और जनभागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने विशेष ग्राम सभा आयोजित करने का निर्णय लिया है। अब ग्राम विकास की कार्ययोजना गांव के पंच, सरपंच, जनप्रतिनिधि, महिला समूह, युवा और ग्रामीणों की सहमति से तैयार होगी, ताकि सड़क, पेयजल, नाली, शिक्षा, स्वास्थ्य, सिंचाई, स्वच्छता तथा अन्य आवश्यक विकास कार्यों को प्राथमिकता मिल सके।

प्रशासन ने सभी ग्राम पंचायतों में अधिक से अधिक ग्रामीणों की भागीदारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए विभिन्न विभागों के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को ग्राम पंचायतों का प्रभारी नियुक्त किया गया है, जो ग्राम सभा की कार्यवाही, उपस्थिति और विकास योजना के निर्माण की निगरानी करेंगे। 

गांव के विकास का फैसला गांव की जनता करे

ग्राम सभा लोकतंत्र की सबसे सशक्त इकाई है। यदि पंच, सरपंच, जनप्रतिनिधि और ग्रामीण सक्रिय होकर गांव की वास्तविक आवश्यकताओं के अनुरूप प्रस्ताव पारित करेंगे, तो न केवल संभावित मनमानी पर प्रभावी अंकुश लगेगा, बल्कि 16वें वित्त आयोग की राशि का सदुपयोग भी सुनिश्चित होगा। 

गांव का विकास तभी संभव है, जब विकास की योजना गांव की जनता स्वयं तय करे और ग्राम सभा उसे सर्वसम्मति से स्वीकृति प्रदान करे।

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अतिवृष्टि से ढहा कोरवा परिवार का आशियाना,रहने लायक नहीं बचा घर,शासन प्रशासन से राहत की गुहार।

जशपुर जंक्शन 01 अगस्त 2026 

जशपुर जिले के विकासखंड बगीचा के ग्राम पंचायत महुवा अंतर्गत ग्राम अंबाडीपा में बुधवार सुबह लगभग 8 बजे लगातार हो रही अतिवृष्टि के कारण सुनील राम कोरवा का कच्चा मकान क्षतिग्रस्त हो गया। मकान की एक दीवार अचानक ढह गई, जिससे खपरैल की छत भी गिर पड़ी। घटना में कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन मकान अब रहने योग्य नहीं बचा है।

ग्रामीणों से मिली जानकारी के अनुसार, सुनील राम कोरवा अपनी पत्नी और बच्चे के साथ इसी मकान में निवासरत था। घर गड्ढे में होने के कारण लगातार बारिश से पानी जमा हो गया और दीवार कमजोर हो गई जिसके चलते उसका एक हिस्सा भरभराकर गिर गया। दीवार गिरने के साथ ही खपरैल की छत भी ढह गई, जिससे परिवार का आशियाना पूरी तरह असुरक्षित हो गया। अब परिवार के सामने रहने की गंभीर समस्या खड़ी हो गई है।

सुनील राम कोरवा विशेष पिछड़ी जनजाति कोरवा समुदाय से हैं और आर्थिक रूप से अत्यंत कमजोर परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने प्रशासन से राहत राशि एवं आवास संबंधी सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है।

घटना के बाद ग्रामीणों ने भी प्रशासन से पीड़ित परिवार को तत्काल राहत सामग्री उपलब्ध कराने और नियमानुसार आर्थिक सहायता देने की मांग की है।

इस संबंध में राजस्व विभाग के उच्चाधिकारियों ने बताया कि घटना का सर्वे कराया जाएगा। सर्वे रिपोर्ट के आधार पर क्षति का आकलन कर शासन के नियमानुसार पात्रता के अनुसार राहत राशि एवं अन्य आवश्यक सहायता प्रदान की जाएगी।पीएम आवास के संबंध में जानकारी लेकर आगे की कार्यवाही किए जाने की बात अधिकारी कर रहे हैं।

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थाना बगीचा के वार्षिक निरीक्षण में मिलीं गंभीर खामियां, टीआई और मोहर्रिर को डीआईजी-एसएसपी की कड़ी फटकार

 

 

 

 

 डीआईजी एवं एसएसपी डॉ. लाल उमेद सिंह ने थाना बगीचा का वार्षिक निरीक्षण कर पुलिसिंग व्यवस्था, कार्यालयीन अभिलेखों, शासकीय संपत्ति, मालखाना और थाना परिसर की व्यवस्थाओं का गहन परीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान रिकॉर्ड संधारण, जप्त सामग्री के रखरखाव और कार्यालयीन व्यवस्था में गंभीर कमियां मिलने पर थाना प्रभारी (टीआई) और मोहर्रिर को कड़ी फटकार लगाई गई। साथ ही सभी कमियों को तत्काल दूर कर अभिलेखों को व्यवस्थित एवं अद्यतन रखने के सख्त निर्देश दिए गए।

निरीक्षण के दौरान ग्राम अपराध पुस्तिका, जरायम रजिस्टर, लंबित अपराध, शिकायतें, जप्ती माल तथा अन्य महत्वपूर्ण अभिलेखों की समीक्षा की गई। डीआईजी-एसएसपी ने लंबित मामलों का त्वरित एवं नियमानुसार निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश देते हुए कहा कि किसी भी प्रकरण में अनावश्यक विलंब नहीं होना चाहिए।

थाना परिसर की साफ-सफाई और स्वच्छता व्यवस्था का भी जायजा लिया गया। उन्होंने निर्देश दिए कि थाना परिसर हमेशा स्वच्छ, व्यवस्थित और नागरिकों के अनुकूल वातावरण वाला होना चाहिए। मालखाना और जप्त सामग्री के रखरखाव में भी कमियां मिलने पर संबंधित अधिकारियों को फटकार लगाते हुए नियमानुसार सुरक्षित संधारण सुनिश्चित करने को कहा गया।

डीआईजी-एसएसपी ने कानून-व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए गुंडा-बदमाशों की नियमित निगरानी, प्रभावी गश्त और बीट पुलिसिंग को सुदृढ़ करने पर जोर दिया। उन्होंने पुलिस मितानों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने, जन चौपाल में प्राप्त शिकायतों का प्राथमिकता के आधार पर निराकरण करने तथा आम जनता के साथ संवाद बढ़ाकर पुलिस के प्रति विश्वास मजबूत करने के निर्देश दिए।

महिला एवं बाल अपराधों में संवेदनशीलता के साथ त्वरित कार्रवाई, साइबर अपराध एवं ऑनलाइन ठगी के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने तथा तकनीकी संसाधनों का बेहतर उपयोग कर अपराध नियंत्रण को प्रभावी बनाने के भी निर्देश दिए गए।

निरीक्षण के दौरान पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों की समस्याओं पर भी चर्चा की गई। डॉ. लाल उमेद सिंह ने कहा कि पुलिस की प्राथमिक जिम्मेदारी आम नागरिकों को त्वरित, पारदर्शी और संवेदनशील पुलिस सेवा उपलब्ध कराना है। उन्होंने थाना स्तर पर अनुशासन, जवाबदेही और प्रभावी पुलिसिंग सुनिश्चित करने पर विशेष बल दिया।

निरीक्षण के दौरान पुलिस कार्यालय जशपुर से उप निरीक्षक (स्टेनो) रामानंद बहिदार, रीडर मुकेश झा सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

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स्मार्ट मीटर के खिलाफ फूटा ग्रामीणों का गुस्सा, उखाड़कर बिजली दफ्तर के सामने फेंके मीटर; कांग्रेस ने किया घेराव।

 

 

 

 

बढ़ते बिजली बिल और स्मार्ट मीटर के विरोध में शनिवार को पांडातराई में कांग्रेस ने जोरदार प्रदर्शन करते हुए बिजली विभाग के कार्यालय का घेराव किया। प्रदर्शन के दौरान माहौल तब और गरमा गया जब बड़ी संख्या में ग्रामीण अपने घरों से उखाड़कर लाए गए स्मार्ट मीटर बिजली दफ्तर के सामने फेंकने लगे। इस दौरान सरकार और बिजली विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी हुई।

जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष नवीन जायसवाल और ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष घनश्याम साहू के नेतृत्व में आयोजित प्रदर्शन में बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता और ग्रामीण शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद उपभोक्ताओं के बिजली बिलों में अप्रत्याशित बढ़ोतरी हुई है, जिससे आम लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।

कांग्रेस नेताओं ने स्मार्ट मीटर योजना को तत्काल वापस लेने, बढ़े हुए बिजली बिलों को संशोधित करने और उपभोक्ताओं को राहत देने की मांग की। प्रदर्शन के बाद कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल ने बिजली विभाग के अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन को जिला स्तर पर और उग्र किया जाएगा।

प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों द्वारा सैकड़ों स्मार्ट मीटर उखाड़कर बिजली कार्यालय के सामने फेंकना पूरे आंदोलन का सबसे चर्चित दृश्य रहा, जिसने क्षेत्र में स्मार्ट मीटर को लेकर बढ़ते जनाक्रोश को खुलकर सामने ला दिया।

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कैबिनेट का बड़ा फैसला: अग्निवीरों को 10% आरक्षण, उर्वरक व्यवस्था के लिए मंत्री उप समिति गठित

 

 

 

 मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में बुधवार को मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में किसानों और अग्निवीरों से जुड़े दो महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।

कैबिनेट ने खरीफ और रबी सीजन में किसानों को समय पर उर्वरक उपलब्ध कराने, आपूर्ति एवं वितरण व्यवस्था की निगरानी और आवश्यक सुझाव देने के लिए मंत्री-मंडलीय उप समिति के गठन को मंजूरी दी। समिति के अध्यक्ष उप मुख्यमंत्री होंगे, जबकि कृषि, सहकारिता और वित्त मंत्री इसके सदस्य रहेंगे। कृषि उत्पादन आयुक्त समिति के संयोजक होंगे। समिति आवश्यकता अनुसार विशेषज्ञों और संबंधित विभागों के अधिकारियों को भी आमंत्रित कर सकेगी।

बैठक में अग्निवीर सैनिकों के पुनर्वास और रोजगार को लेकर भी बड़ा फैसला लिया गया। राज्य सरकार ने पुलिस विभाग में आरक्षक, वन विभाग में वनरक्षक और जेल विभाग में प्रहरी के तृतीय श्रेणी के पदों की सीधी भर्ती में अग्निवीरों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण देने का निर्णय लिया है। इसके लिए छत्तीसगढ़ के अग्निवीर सैनिकों के लिए राज्य की सिविल सेवाओं में तृतीय श्रेणी के पदों में रिक्तियों का आरक्षण नियम-2026 बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई।

यह आरक्षण उन अग्निवीरों को मिलेगा जिन्होंने भारतीय सशस्त्र बलों में चार वर्ष की सेवा पूरी कर वैध सेवा प्रमाण-पत्र के साथ सेवामुक्ति प्राप्त की हो। सरकार का मानना है कि इस निर्णय से प्रशिक्षित एवं अनुशासित अग्निवीरों को रोजगार के बेहतर अवसर मिलेंगे और पुलिस, वन तथा जेल विभाग को उनके अनुभव का लाभ मिलेगा।

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राज्यपाल से प्रशिक्षु डिप्टी कलेक्टरों ने की सौजन्य मुलाकातसेवा भाव, संवेदनशीलता और तार्किक निर्णय से निभाएं दायित्व -श्री डेका।

 

 

 

 राज्यपाल रमेन डेका ने कहा कि प्रशासनिक सेवा केवल एक पद नहीं, बल्कि आम जनता की सेवा का महत्वपूर्ण अवसर है। इस अवसर का पूरी निष्ठा, संवेदनशीलता और ईमानदारी से निर्वहन करना प्रत्येक अधिकारी का दायित्व है। उन्होंने कहा कि जहां चुनौतियां होती हैं, वहीं नए अवसर भी मौजूद होते हैं। इसलिए प्रत्येक परिस्थिति का सकारात्मक दृष्टिकोण से सामना करते हुए जनता के हित में निर्णय लिए जाने चाहिए।

राज्यपाल आज लोकभवन में छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग के वर्ष 2025 बैच के प्रशिक्षु डिप्टी कलेक्टरों से चर्चा कर रहे थे। ये अधिकारी वर्तमान में छत्तीसगढ़ प्रशासनिक अकादमी, निमोरा में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। प्रशिक्षणार्थी अधिकारियों ने अकादमी के महानिदेशक श्री टी.सी. महावर के नेतृत्व में राज्यपाल से सौजन्य भेंट की।

राज्यपाल ने कहा कि प्रशासनिक निर्णय में मानवीय संवेदनाओं का भी समावेश होना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि प्रत्येक कार्य में ह्यूमन टच होना आवश्यक है, ताकि शासन की योजनाओं और निर्णयों का लाभ वास्तविक रूप से आम नागरिकों तक पहुंच सके। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को जनता से नियमित संवाद करना चाहिए, क्षेत्र का सतत भ्रमण करना चाहिए और लोगों की समस्याओं को प्रत्यक्ष रूप से समझना चाहिए। उन्होंने कहा कि जो कार्य संभव हो, उसे प्राथमिकता के साथ पूरा करें और यदि किसी कारणवश कोई कार्य संभव नहीं है तो उसकी स्पष्ट और पारदर्शी जानकारी संबंधित व्यक्ति को अवश्य दें। इससे प्रशासन के प्रति लोगों का विश्वास मजबूत होता है।

राज्यपाल ने कहा कि प्रशासनिक अधिकारियों के लिए तार्किक सोच और विवेकपूर्ण निष्कर्ष अत्यंत आवश्यक हैं। तथ्यों के आधार पर निष्पक्ष निर्णय लेना ही एक सक्षम अधिकारी की पहचान है। उन्होंने कहा कि जनता को न्याय दिलाना लोक सेवक का प्रथम कर्तव्य है और प्रत्येक अधिकारी को इस भावना के साथ कार्य करना चाहिए।

उन्होंने प्रशिक्षु अधिकारियों से कहा कि वे युवा हैं और उनके कंधों पर भविष्य के प्रशासन की बड़ी जिम्मेदारी है। उन्हें अपने कार्यों के माध्यम से सुशासन, पारदर्शिता और जनविश्वास को मजबूत करना होगा। राज्यपाल ने कहा कि आप सभी सौभाग्यशाली हैं कि आपको छत्तीसगढ़ जैसे शांत, समृद्ध और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध राज्य में सेवा करने का अवसर मिला है। यहां के लोगों में सेवा, सहयोग और आत्मीयता की भावना अत्यंत प्रबल है। इस विश्वास और अपनत्व को बनाए रखते हुए जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरना ही एक सफल प्रशासनिक अधिकारी की पहचान होगी।

इस अवसर पर छत्तीसगढ़ प्रशासनिक अकादमी की प्रशिक्षण निदेशक श्रीमती मेनका प्रधान एवं प्रशिक्षु अधिकारी उपस्थित थे।

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मेडिकल कॉलेज की मंजूरी से कांग्रेस की राजनीति हुई बेनकाब,कांग्रेस ने जनता को किया गुमराह - भरत सिंह,भाजपा जिलाध्यक्ष,सीएम साय के प्रयास से विकास को मिली नई उड़ान।

 

 

 

राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग द्वारा जशपुर कुनकुरी शासकीय मेडिकल कॉलेज को 50 एमबीबीएस सीटों के साथ अंतिम अनुमति मिलने पर भाजपा जिलाध्यक्ष भरत सिंह ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और राज्य सरकार को बधाई देते हुए इसे जशपुर के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि बताया है।

भरत सिंह ने जारी बयान में कहा कि पिछले दिनों मेडिकल कॉलेज की अनुमति को लेकर कांग्रेस ने अनावश्यक भ्रम फैलाने और राजनीतिक लाभ लेने का प्रयास किया। उन्होंने आरोप लगाया कि एक तकनीकी कारण से प्रक्रिया में अस्थायी विलंब हुआ था, लेकिन मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य शासन ने तत्परता से आवश्यक कार्रवाई की और सभी औपचारिकताएं पूरी कराकर मेडिकल कॉलेज की स्वीकृति सुनिश्चित की।

उन्होंने कहा कि "आज NMC की अंतिम अनुमति ने कांग्रेस के दावों की पोल खोल दी है। जनता को गुमराह करने की राजनीति करने वालों को मुंह की खानी पड़ी है।"

भाजपा जिलाध्यक्ष ने कहा कि विष्णुदेव साय सरकार विकास की राजनीति करती है, जबकि कांग्रेस केवल भ्रम और आरोपों की राजनीति में विश्वास रखती है। मेडिकल कॉलेज की स्वीकृति से यह स्पष्ट हो गया है कि सरकार जशपुर के विकास और युवाओं के भविष्य के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।

उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेज शुरू होने से जशपुर सहित पूरे उत्तर छत्तीसगढ़ के विद्यार्थियों को अपने क्षेत्र में ही चिकित्सा शिक्षा का अवसर मिलेगा और स्वास्थ्य सेवाओं को भी नई मजबूती मिलेगी।

भरत सिंह ने कहा कि यह जशपुर की जनता की जीत है और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में विकास कार्यों की गति आगे भी इसी तरह जारी रहेगी।

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जशपुर के चार वन परिक्षेत्रों में 32 हाथियों का दल सक्रिय, कई गांवों में अलर्ट,डीएफओ ने की ग्रामीणों से सतर्क रहने की अपील

 

 

 

 

जशपुर वनमंडल के चार वन परिक्षेत्रों में लगभग 32 हाथियों का दल सक्रिय रूप से विचरण कर रहा है। हाथियों की लगातार आवाजाही को देखते हुए वन विभाग ने प्रभावित गांवों में सतर्कता बढ़ा दी है। विभाग की रैपिड रिस्पांस टीम और मैदानी अमला चौबीसों घंटे हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखे हुए हैं तथा ग्रामीणों को समय-समय पर सूचना देकर सतर्क किया जा रहा है।

डीएफओ शशि कुमार ने बताया कि वर्तमान में दुलदुला, पत्थलगांव, कांसाबेल और बगीचा वन परिक्षेत्र के कई गांवों के आसपास हाथियों का दल विचरण कर रहा है। दुलदुला वन परिक्षेत्र के धुरीआम्बा, करडेगा, केंदापानी, धांधआम्बा, बुकना, मधुटोली और कोहड़ा पहरी,पत्थलगांव वन परिक्षेत्र के खाडामाचा,हरदीझरिया, पीटाआमा,राजाआमा, खमरगड़ा, महेशपुर, काडरो और झिमकी, कांसाबेल वन परिक्षेत्र के चेटबा, नारायण बहली, मड़ियाझरिया और सोनाजोरी तथा बगीचा वन परिक्षेत्र के झिकी, खंताडांड़, टटकेला, परसाडांड़, पेटा, कुरडेग, बिमड़ा, सामरबार, दुर्गापारा, सुईकोना, मैनी, बुचीडांड, जुजगु और कुरडेग के आसपास हाथियों की गतिविधियां दर्ज की गई हैं।

डीएफओ शशि कुमार ने बताया कि हाथियों की लोकेशन का नियमित रूप से पता लगाकर आसपास के गांवों में तत्काल सूचना पहुंचाई जा रही है। प्रभावित क्षेत्रों में लगातार मुनादी कर ग्रामीणों को हाथियों की मौजूदगी और सुरक्षा उपायों की जानकारी दी जा रही है, ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके।

उन्होंने ग्रामीणों से अपील की है कि हाथियों के विचरण वाले क्षेत्रों में लकड़ी, चारा या अन्य कार्यों के लिए जंगल में अनावश्यक प्रवेश न करें। किसी भी परिस्थिति में हाथियों के पास जाने, उन्हें उकसाने, उनका पीछा करने अथवा सेल्फी और वीडियो बनाने का प्रयास न करें। विशेष रूप से रात के समय हाथियों के विचरण वाले क्षेत्रों में जाने से बचें।

डीएफओ ने कहा कि यदि किसी क्षेत्र में हाथियों की मौजूदगी दिखाई दे या उनकी गतिविधियों की जानकारी मिले तो इसकी सूचना तत्काल निकटस्थ वन अधिकारी, वन कर्मचारी या आरआरटी को दें। अफवाहों पर विश्वास न करें और केवल वन विभाग द्वारा जारी आधिकारिक सूचनाओं का ही पालन करें।

वन विभाग का कहना है कि ग्रामीणों की सतर्कता, समय पर सूचना और विभाग के साथ सहयोग से हाथी-मानव द्वंद्व की घटनाओं को प्रभावी ढंग से रोका जा सकता है।

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शाला प्रवेश उत्सव में नवप्रवेशी बच्चों का आत्मीय स्वागत, मंत्री राजेश अग्रवाल ने बांटी अध्ययन सामग्री।

 

 

 

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने शनिवार को स्वामी आत्मानंद गवर्नमेंट अंग्रेजी माध्यम स्कूल, उदयपुर में आयोजित विकासखंड स्तरीय शाला प्रवेश उत्सव में शामिल होकर नवप्रवेशी विद्यार्थियों का आत्मीय स्वागत किया। उन्होंने बच्चों को मिठाई खिलाकर नए शैक्षणिक सत्र की शुभकामनाएं दीं तथा अध्ययन सामग्री वितरित कर उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

इस अवसर पर मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता प्रत्येक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और आगे बढ़ने के समान अवसर उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल ज्ञान प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर, संस्कारित और सशक्त समाज की मजबूत नींव है। प्रत्येक विद्यार्थी को अपनी प्रतिभा निखारने और सपनों को साकार करने के लिए बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिलना चाहिए।

उन्होंने विद्यार्थियों से नियमित विद्यालय आने, मन लगाकर अध्ययन करने और जीवन में ऊंचे लक्ष्य निर्धारित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि विद्यालय केवल पढ़ाई का केंद्र नहीं, बल्कि संस्कार, अनुशासन, आत्मविश्वास और व्यक्तित्व निर्माण की पाठशाला भी है।

कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं, जिनकी मंत्री ने सराहना की। इस अवसर पर मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित कर उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन की प्रशंसा की गई तथा भविष्य में भी बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित किया गया।

मंत्री राजेश अग्रवाल ने नए शैक्षणिक सत्र के लिए विद्यार्थियों, अभिभावकों और शिक्षकों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि बच्चों के सर्वांगीण विकास में परिवार और शिक्षकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उनके संयुक्त प्रयासों से ही शिक्षित, जागरूक और सशक्त समाज का निर्माण संभव है।

कार्यक्रम में जनप्रतिनिधि, शिक्षक, अभिभावक और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने जारी की महतारी वंदन योजना की 29वीं किश्त, 66 लाख महिलाओं के खातों में पहुंचे 626.25 करोड़ रुपये

 

 

 

 मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने शनिवार को मुख्यमंत्री निवास कार्यालय से महतारी वंदन योजना की 29वीं किश्त जारी करते हुए प्रदेश की 66 लाख से अधिक महिलाओं के बैंक खातों में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के माध्यम से 626.25 करोड़ रुपये की राशि अंतरित की। इस अवसर पर महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े भी उपस्थित रहीं।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि महतारी वंदन योजना महिलाओं के सम्मान, आत्मनिर्भरता और आर्थिक स्वावलंबन की नई पहचान बन चुकी है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए लगातार कार्य कर रही है। आज जारी की गई किश्त के साथ योजना के तहत अब तक 29 किश्तों में कुल 18,805.83 करोड़ रुपये सीधे हितग्राही महिलाओं के बैंक खातों में पहुंचाए जा चुके हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देशभर में महिला सशक्तिकरण के लिए चलाए जा रहे अभियान को छत्तीसगढ़ सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ा रही है। उन्होंने बताया कि प्रदेश के विभिन्न जिलों के दौरे के दौरान अनेक महिलाओं ने उन्हें बताया कि योजना से मिलने वाली राशि से उन्होंने छोटे व्यवसाय शुरू किए, सिलाई-कढ़ाई एवं स्वरोजगार अपनाया, जबकि कई परिवारों ने बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और दैनिक जरूरतों को पूरा करने में इस राशि का उपयोग किया है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार महतारी वंदन योजना के साथ-साथ 'लखपति दीदी' जैसी योजनाओं के माध्यम से भी महिलाओं की आय बढ़ाने और उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में लगातार काम कर रही है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को ई-केवाईसी की प्रक्रिया शीघ्र पूर्ण कर सभी पात्र महिलाओं तक योजना का लाभ सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। विशेष रूप से बस्तर संभाग में इस कार्य को प्राथमिकता के साथ पूरा करने पर जोर दिया गया।

उल्लेखनीय है कि महतारी वंदन योजना 1 मार्च 2024 से प्रदेश में लागू है। इसके तहत 21 वर्ष या उससे अधिक आयु की पात्र विवाहित महिलाओं को प्रतिमाह 1,000 रुपये की आर्थिक सहायता सीधे उनके बैंक खातों में प्रदान की जाती है। योजना का उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक संबल प्रदान करने के साथ परिवार के पोषण, बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य, कुपोषण एवं एनीमिया की रोकथाम तथा स्वरोजगार को बढ़ावा देना है।

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बारिश के मौसम में करंट से होने वाली दुर्घटनाओं से बचने विद्युत कंपनी ने जारी की एडवाइजरी।

 

 

 

 बारिश का मौसम शुरू होते ही विद्युत करंट से होने वाली दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ जाती है। बिजली के खंभों, एचटी लाइनों, टूटे तारों तथा विद्युत उपकरणों के संपर्क में आने से हर वर्ष कई हादसे होते हैं, जिनमें कई बार लोगों की जान तक चली जाती है। इन दुर्घटनाओं से बचाव के लिए छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड ने आम नागरिकों के लिए सुरक्षा संबंधी एडवाइजरी जारी करते हुए विशेष सावधानी बरतने की अपील की है।

 कंपनी ने कहा है कि थोड़ी-सी लापरवाही भी गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकती है। इसलिए विद्युत लाइनों, ट्रांसफार्मरों एवं अन्य विद्युत उपकरणों से सुरक्षित दूरी बनाए रखें तथा किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ न करें। यदि आंधी-तूफान या बारिश के दौरान बिजली के खंभे, तार अथवा अन्य उपकरण क्षतिग्रस्त दिखाई दें, तो इसकी सूचना तत्काल कंपनी के टोल-फ्री नंबर 1912, मोर बिजली ऐप अथवा निकटतम वितरण केंद्र या जोन कार्यालय में दें।

 बारिश के दौरान बिजली के खंभों, तारों और ट्रांसफार्मरों से दूर रहें। जहां विद्युत तार या उपकरण मौजूद हों, वहां पानी में करंट फैलने की संभावना रहती है। ऐसे स्थानों पर पानी में चलने या तैरने से बचें। विद्युत उपकरणों का उपयोग करते समय हाथ-पैर सूखे रखें तथा रबर या प्लास्टिक के जूते-चप्पलों का उपयोग करें। विभाग ने बताया कि बारिश से पहले सभी फीडरों, ट्रांसफार्मरों एवं विद्युत लाइनों का निरीक्षण और आवश्यक रखरखाव किया जा चुका है। इसके बावजूद नागरिकों की सतर्कता अत्यंत आवश्यक है।

*दुर्घटनाओं से बचने के लिए इन सावधानियों का रखें-*

 घरों, खेतों एवं अन्य स्थानों पर केवल गुणवत्तापूर्ण विद्युत उपकरणों का उपयोग करें। खेत या बाड़ी की बाड़ तथा कंटीले तारों में बिजली प्रवाहित न करें। यह अवैध होने के साथ-साथ जानलेवा भी हो सकता है तथा संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। 

 विद्युत लाइनों, ट्रांसफार्मरों या अन्य उपकरणों में खराबी आने पर स्वयं सुधार करने का प्रयास न करें। बिजली की लाइनों के नीचे अथवा उनके समीप स्थायी या अस्थायी निर्माण न करें तथा सुरक्षित दूरी बनाए रखें। यदि कोई विद्युत तार टूटकर जमीन, नदी, नाले या तालाब में गिरा हुआ मिले, तो उससे पर्याप्त दूरी बनाए रखें और तत्काल संबंधित लाइनमैन, कनिष्ठ अभियंता अथवा टोल-फ्री नंबर 1912 पर सूचना देकर विद्युत प्रवाह बंद कराएं।

 बिजली की लाइनों से हुकिंग कर अनाधिकृत रूप से बिजली का उपयोग न करें। कपड़े सुखाने के लिए बिजली के खंभों या स्टे वायर का उपयोग न करें तथा कपड़े सुखाने वाले तार को विद्युत लाइनों से पर्याप्त दूरी पर रखें। अस्थायी विद्युत कनेक्शन के लिए कटे-फटे तारों का उपयोग न करें तथा बच्चों को विद्युत उपकरणों एवं लाइनों के आसपास खेलने से रोकें।

*यदि कोई व्यक्ति करंट की चपेट में आ जाए तो यह करें-*

सबसे पहले मुख्य स्विच बंद कर विद्युत प्रवाह तत्काल रोकें। यदि स्विच बंद करना संभव न हो, तो सूखी लकड़ी, सूखी रस्सी या सूखे कपड़े की सहायता से पीड़ित को बिजली के स्रोत से अलग करें। सीधे हाथ लगाने का प्रयास न करें। पीड़ित को सूखी जगह पर लिटाकर प्राथमिक उपचार दें, आवश्यकता होने पर कृत्रिम श्वास दें तथा तत्काल निकटतम अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था करें।

 छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड, बिलासपुर क्षेत्र के कार्यपालक निदेशक श्री ए.के. अंबस्थ ने कहा कि भीषण गर्मी, आंधी-तूफान और बारिश के दौरान विद्युत व्यवस्था बनाए रखना बिजली कर्मियों के लिए चुनौतीपूर्ण कार्य होता है। ऐसे मौसम में फॉल्ट ढूंढ़ने और उसे सुधारने के लिए कर्मचारियों को प्रतिकूल परिस्थितियों में लगातार कार्य करना पड़ता है। उन्होंने उपभोक्ताओं से अपील की कि बिजली आपूर्ति बाधित होने पर घबराने के बजाय 5 से 10 मिनट प्रतीक्षा करें और आवश्यकता होने पर टोल-फ्री नंबर 1912 पर शिकायत दर्ज कराएं। साथ ही, लाइन कर्मचारियों को सुधार कार्य में सहयोग दें तथा विद्युत लाइनों एवं उपकरणों से किसी प्रकार की छेड़छाड़ न करें।

 उन्होंने कहा कि विद्युत व्यवस्था के सुरक्षित एवं सुचारु संचालन में उपभोक्ताओं का सहयोग भी उतना ही महत्वपूर्ण है। थोड़ी-सी सावधानी अपनाकर न केवल दुर्घटनाओं को रोका जा सकता है, बल्कि लोगों के जीवन और संपत्ति की भी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है जान है तो जहान है।

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मानसून में भी पर्यटन का आनंद: बारनावापारा अभयारण्य 31 अक्टूबर तक बंद बफर क्षेत्रों में शुरू हुआ नया पर्यटन सर्किट

 

 

 

 

 वन्यजीवों की सुरक्षा और प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने के लिए बारनावापारा वन्यजीव अभयारण्य 1 जुलाई से 31 अक्टूबर 2026 तक पर्यटकों के लिए बंद रहेगा। हर वर्ष मानसून के दौरान वन्यजीवों के प्रजनन काल को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से यह निर्णय लिया जाता है।

हालांकि, इस दौरान पर्यटकों को प्रकृति और संस्कृति से जोड़ने के लिए बलौदाबाजार वनमंडल ने "बारनावापारा–सिरपुर पर्यटन सर्किट : द सेक्रेड गारलैंड" की शुरुआत की है। इस पहल के माध्यम से राजधानी रायपुर के आसपास स्थित प्राकृतिक, धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक स्थलों को एक पर्यटन परिपथ के रूप में विकसित किया जा रहा है।

इस पर्यटन सर्किट में सिरपुर, धसकुंड जलप्रपात, तुरतुरिया ईको कल्चरल सेंटर, गिरौदपुरी धाम, सिद्धखोल जलप्रपात, सोनाखान, शहीद वीर नारायण सिंह स्मारक, देवपुर नेचर कैंप, अचानकपुर का देव हिल्स ईको एथनिक स्टे, कोडार जलाशय सहित कई प्रमुख पर्यटन स्थल शामिल हैं। यहां पर्यटक हरियाली, झरनों, पहाड़ियों, वन क्षेत्र, धार्मिक स्थलों, पुरातात्विक धरोहरों और जनजातीय संस्कृति का अनूठा अनुभव प्राप्त कर सकेंगे।

मानसून के मौसम में पूरा क्षेत्र हरियाली से भर जाता है, जिससे इसकी प्राकृतिक सुंदरता और भी बढ़ जाती है। देवपुर नेचर कैंप, देव हिल्स ईको एथनिक स्टे, सिद्धखोल जलप्रपात, तुरतुरिया धाम, धामनी ईको विलेज, धसकुंड फॉल और सिरपुर इस मौसम के प्रमुख आकर्षण होंगे।

इस पर्यटन सर्किट को देशभर में पहचान दिलाने के लिए टूर ऑपरेटरों, ट्रैवल एजेंसियों, ट्रैवल इन्फ्लुएंसर्स, कंटेंट क्रिएटर्स और नेचर फोटोग्राफर्स को भी जोड़ा जा रहा है। इसका उद्देश्य जिम्मेदार और सतत पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ-साथ स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराना है।

वनमंडलाधिकारी धम्मशील गणवीर ने बताया कि वन मंत्री श्री केदार कश्यप के निर्देशानुसार यह पहल प्रकृति, संस्कृति, विरासत और स्थानीय समुदायों को एक मंच पर लाने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि अभयारण्य बंद रहने के दौरान भी पर्यटक बारनावापारा–सिरपुर बफर क्षेत्रों के प्राकृतिक, सांस्कृतिक और धार्मिक स्थलों का आनंद ले सकेंगे। साथ ही स्थानीय समुदायों की भागीदारी बढ़ाकर सतत पर्यटन और रोजगार सृजन को भी प्रोत्साहन दिया जाएगा।

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पद्म विभूषण स्व. तीजन बाई को 8 जुलाई को मुक्ताकाशी मंच से छत्तीसगढ़ के लोक कलाकार देंगे श्रद्धांजलि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय एवं मंत्रीगण, सांसद व विधायकगण होंगे शामिल

 

 

 

 पंडवानी की अप्रतिम साधिका, पद्मविभूषण एवं डी.लिट. से सम्मानित डॉ. श्रीमती तीजन बाई को 8 जुलाई को श्रद्धांजलि अर्पित की जाएगी। संस्कृति विभाग द्वारा स्व. तीजन बाई को संगीतमय श्रद्धांजलि अर्पण का यह कार्यक्रम दोपहर 2 बजे महंत घासीदास संग्रहालय परिसर, स्थित मुक्ताकाशी मंच से आयोजित होगा। 

इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय, संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल सहित मंत्रीगण, सांसद, विधायक एवं जनप्रतिनिधियों के साथ छत्तीसगढ़ के पद्मश्री एवं राज्य अलंकरण से सम्मानित कलाकार, साहित्यकार, संस्कृति कर्मी तथा बड़ी संख्या में कला प्रेमी उपस्थित रहेंगे।

कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के प्रतिष्ठित लोक कलाकार अपनी-अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से उस महान विभूति को श्रद्धासुमन अर्पित करेंगे, जिन्होंने पंडवानी जैसी लोकवाचिक परंपरा को गांव के चौपाल से उठाकर विश्व के प्रतिष्ठित सांस्कृतिक मंचों तक पहुंचाया। गीत, संगीत, पंडवानी, लोकगायन और अन्य लोककलाओं की प्रस्तुतियों के माध्यम से उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व का स्मरण किया जाएगा। यह आयोजन केवल एक श्रद्धांजलि समारोह नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक चेतना के उस स्वर्णिम अध्याय को नमन है, जिसे डॉ. श्रीमती तीजन बाई ने अपने संपूर्ण जीवन की साधना से रचा।

पद्मविभूषण श्रीमती तीजन बाई का निधन 5 जुलाई 2026 को हुआ। उनके निधन से न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे देश और विश्व के कला जगत में शोक की लहर दौड़ गई। उनके साथ भारतीय लोककला का एक ऐसा स्वर्णिम अध्याय समाप्त हुआ, जिसने पंडवानी को नई प्रतिष्ठा, नई पहचान और वैश्विक सम्मान दिलाया।

24 अप्रैल 1956 को दुर्ग जिले के गनियारी गांव में जन्मी पद्मविभूषण श्रीमती तीजन बाई का बचपन अत्यंत साधारण परिस्थितियों में बीता। महज 13 वर्ष की आयु में उन्होंने अपना पहला सार्वजनिक मंच प्रदर्शन किया और उसी समय यह संकल्प लिया कि वे पंडवानी को ही अपने जीवन का लक्ष्य बनाएंगी। उस दौर में महिलाओं द्वारा पारंपरिक वेदमती शैली में बैठकर पंडवानी प्रस्तुत करने की परंपरा थी, लेकिन उन्होंने साहस के साथ कपालिक शैली में खड़े होकर पंडवानी प्रस्तुत की। अपनी दमदार आवाज, सशक्त अभिनय और प्रभावशाली भावाभिव्यक्तियों से उन्होंने पंडवानी को नई पहचान दिलाई और इसे जन-जन तक पहुंचाया।

प्रख्यात रंगकर्मी हबीब तनवीर ने उनकी असाधारण प्रतिभा को पहचानते हुए उन्हें राष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके बाद डॉ. तीजन बाई ने 17 से अधिक देशों में पंडवानी की प्रस्तुति देकर न केवल इस लोककला को वैश्विक पहचान दिलाई। वे विश्व मंच पर छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान बन गईं।

पांच दशक से अधिक समय तक उन्होंने महाभारत की कथाओं को अपनी अनूठी शैली में जीवंत किया। उनके मंचन में गायन, अभिनय, संवाद, भावाभिव्यक्ति और लोकभाषा का अद्भुत समन्वय था। उन्होंने सिद्ध किया कि लोककला किसी क्षेत्र विशेष की धरोहर नहीं, बल्कि संपूर्ण मानवता की सांस्कृतिक विरासत है।

उनकी अनुपम कला साधना के लिए उन्हें पद्मश्री (1988), संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार (1995), पद्मभूषण (2003), जापान का प्रतिष्ठित फुकुओका पुरस्कार (2018), पद्मविभूषण (2019) तथा डी.लिट. (मानद उपाधि) सहित अनेक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मान मिले। इन सम्मानों ने उनके गौरवशाली सांस्कृतिक योगदान को राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर मान्यता प्रदान की।

संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित यह सांगीतिक श्रद्धांजलि कार्यक्रम वास्तव में उनके अमूल्य योगदान का स्मरण है। लोक कलाकार अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से उनकी कला साधना, संघर्ष और पंडवानी की गौरवशाली परंपरा को साकार करेंगे।

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कोसा बीज केंद्र मोदकपाल से 5,700 तसर स्वस्थ डिम्ब समूहों का वितरण रेशम विभाग की योजना से हितग्राहियों को 79,800 रुपए की सब्सिडी, तसर पालन से बढ़ेगी आय

 

 

 

 

 राज्य शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं के तहत बीजापुर जिले में रेशम विभाग द्वारा संचालित कोसा बीज केंद्र, मोदकपाल में तसर पालन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से हितग्राहियों को 5,700 तसर स्वस्थ डिम्ब समूहों का वितरण किया गया।

इन डिम्ब समूहों की कुल लागत 91,200 रुपए रही। इसमें राज्य शासन ने 79,800 रुपए की सब्सिडी प्रदान की, जबकि हितग्राहियों से केवल 11,400 रुपए का अंशदान लिया गया। इससे कम लागत में गुणवत्तायुक्त तसर बीज उपलब्ध कराकर तसर पालन को प्रोत्साहन दिया जा रहा है।

इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों के लोगों की आय बढ़ाना तथा उन्हें स्वरोजगार से जोड़ना है। विभाग द्वारा उपलब्ध कराए गए गुणवत्तायुक्त स्वस्थ डिम्ब समूहों से बेहतर उत्पादन की संभावना है। इससे हितग्राही वैज्ञानिक तरीके से तसर पालन कर अधिक आर्थिक लाभ प्राप्त कर सकेंगे।

रेशम विभाग के विशेषज्ञों के अनुसार, वितरित डिम्ब समूहों से लगभग 2 लाख कोसों का उत्पादन होने का अनुमान है। इससे न केवल हितग्राहियों की आय में वृद्धि होगी, बल्कि जिले में तसर उत्पादन को भी नई गति मिलेगी।

रेशम विभाग ने बताया कि राज्य शासन की अनुदान आधारित योजनाओं के माध्यम से हितग्राहियों को कम लागत पर गुणवत्तायुक्त तसर बीज उपलब्ध कराया जा रहा है। साथ ही उन्हें तकनीकी मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और आवश्यक सहयोग भी लगातार दिया जाएगा, ताकि तसर पालन को बढ़ावा मिले और ग्रामीण परिवारों के लिए रोजगार एवं आजीविका के नए अवसर सृजित हों।

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डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जीवन राष्ट्रनिष्ठा, त्याग और संकल्प का प्रेरक उदाहरण : वित्त मंत्री ओपी चौधरी।

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जशपुर जंक्शन 08 जुलाई 

देश की एकता, अखंडता और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के प्रखर पुरोधा, प्रखर शिक्षाविद् डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती के अवसर पर शहीद नंदकुमार पटेल विश्वविद्यालय में व्याख्यान समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में प्रदेश के वित्त मंत्री श्री ओपी चौधरी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने भारत माता एवं डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर दीप प्रज्वलित किया तथा उनके राष्ट्रनिर्माण में योगदान को नमन किया।

वित्त मंत्री श्री चौधरी ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का संपूर्ण जीवन राष्ट्रभक्ति, त्याग, शिक्षा, सिद्धांतों के प्रति अटूट निष्ठा और अदम्य साहस का अनुपम उदाहरण है। उन्होंने व्यक्तिगत हितों से ऊपर राष्ट्रहित को सर्वोच्च स्थान दिया और भारतीय लोकतंत्र तथा राष्ट्रीय एकता को नई दिशा प्रदान की। उनका जीवन आज भी युवाओं के लिए प्रेरणा का अक्षय स्रोत है। इस अवसर पर उन्होंने नेताजी सुभाष चंद्र बोस के राष्ट्र के प्रति योगदान का भी स्मरण किया।

*सकारात्मक सोच, स्पष्ट लक्ष्य और अनुशासन ही सफलता की कुंजी*

युवाओं को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री श्री ओपी चौधरी ने कहा कि सफलता केवल प्रतिभा से नहीं, बल्कि स्पष्ट लक्ष्य, अनुशासन, निरंतर परिश्रम और सकारात्मक सोच से प्राप्त होती है। व्यक्ति जैसा सोचता है, वैसा ही बनता है। उन्होंने कहा कि किसी भी निर्णय से पहले उसके परिणामों पर विचार करना चाहिए तथा अपने निर्णयों की जिम्मेदारी स्वयं स्वीकार करनी चाहिए। असफलताओं के लिए दूसरों को दोष देने के बजाय आत्ममंथन और निरंतर सीखने की प्रवृत्ति अपनानी चाहिए। उन्होंने युवाओं से आधुनिकता के साथ अपनी संस्कृति, भाषा और परंपराओं पर गर्व करने का भी आह्वान किया।

*युवा संवाद में विद्यार्थियों के सवालों का दिया जवाब*

कार्यक्रम के दौरान वित्त मंत्री श्री चौधरी ने विद्यार्थियों के साथ संवाद करते हुए प्रशासनिक सेवा, प्रतियोगी परीक्षाओं, महिला सशक्तिकरण, व्यक्तित्व विकास एवं स्वास्थ्य से जुड़े प्रश्नों के उत्तर दिए। प्रशासनिक सेवा में करियर संबंधी प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि प्रशासनिक सेवा केवल रोजगार नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र की सेवा का प्रभावी माध्यम है। इसके लिए दृढ़ संकल्प, अनुशासित अध्ययन और निरंतर परिश्रम आवश्यक है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार अन्य पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को संघ लोक सेवा आयोग की तैयारी के लिए विशेष योजना के तहत दिल्ली भेज रही है, जिससे उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा का बेहतर अवसर मिल सके।

प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी पर उन्होंने कहा कि सफलता के लिए लक्ष्य स्पष्ट होना चाहिए। समय का सदुपयोग, गुणवत्तापूर्ण अध्ययन, आत्मअनुशासन और निरंतर प्रयास ही सफलता की कुंजी हैं। उन्होंने अपने जीवन के अनुभव साझा करते हुए कहा कि कठिन परिस्थितियां भी मजबूत संकल्प रखने वाले व्यक्ति की राह नहीं रोक सकतीं।

*बेटियों को आगे बढ़ने के लिए अवसरों का लाभ उठाना होगा*

महिला सशक्तिकरण पर पूछे गए प्रश्न के उत्तर में वित्त मंत्री ने कहा कि बेटियों की शिक्षा, कौशल विकास, रोजगार और नेतृत्व क्षमता को बढ़ावा देने के लिए सरकार अनेक योजनाएं संचालित कर रही है। उन्होंने कहा कि आज आवश्यकता इस बात की है कि बेटियां आत्मविश्वास के साथ उपलब्ध अवसरों का लाभ उठाते हुए अपने सपनों को साकार करें।

*स्वस्थ शरीर और स्वस्थ मन सफलता की पहली शर्त*

स्वास्थ्य संबंधी प्रश्नों का उत्तर देते हुए श्री चौधरी ने युवाओं को नियमित दिनचर्या, संतुलित आहार, पर्याप्त नींद और व्यायाम अपनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि स्वस्थ शरीर और स्वस्थ मन ही किसी भी बड़ी सफलता की पहली शर्त हैं।

कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. विनय चौहान, महापौर श्री जीवर्धन चौहान, जनपद पंचायत अध्यक्ष श्रीमती हेमलता चौहान, नगर निगम सभापति श्री डिग्री लाल साहू, कलेक्टर श्री मयंक चतुर्वेदी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री शशिमोहन सिंह, विश्वविद्यालय के प्राध्यापक, छात्र-छात्राएं एवं बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रीय सेवा योजना के उत्कृष्ट स्वयंसेवकों को सम्मानित किया गया तथा विश्वविद्यालय परिवार द्वारा अतिथियों का शाल, श्रीफल एवं स्मृति चिन्ह भेंटकर अभिनंदन किया गया।

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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती पर किया नमन।

 

 

 

 मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती के अवसर पर पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय में आयोजित प्रदेश स्तरीय समारोह में उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए कहा कि डॉ. मुखर्जी का जीवन राष्ट्रभक्ति, शिक्षा, त्याग और अखंड भारत के संकल्प का अद्वितीय उदाहरण है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश आज डॉ. मुखर्जी के सपनों को साकार करने की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रहा है। धारा 370 का हटना, अंत्योदय की भावना पर आधारित विकास तथा राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ करने वाले अनेक निर्णय उनके विचारों को मूर्त रूप देने वाले ऐतिहासिक कदम हैं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की स्मृति को चिरस्थायी बनाने के लिए राज्य के सभी संभागीय एवं जिला मुख्यालयों में उनकी प्रतिमाएं स्थापित की जाएंगी। इसके लिए 10 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉ. मुखर्जी केवल एक दूरदर्शी राजनेता ही नहीं, बल्कि विलक्षण शिक्षाविद भी थे। मात्र 33 वर्ष की आयु में विश्वविद्यालय के कुलपति बनने का गौरव प्राप्त करने वाले डॉ. मुखर्जी ने स्वतंत्र भारत के प्रथम उद्योग मंत्री के रूप में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। राष्ट्रहित सर्वोपरि रखने की उनकी प्रतिबद्धता ऐसी थी कि उन्होंने सिद्धांतों से समझौता करने के बजाय मंत्रिमंडल से इस्तीफा देना स्वीकार किया।

उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में 'एक देश में दो निशान, दो विधान और दो प्रधान' की व्यवस्था के विरुद्ध डॉ. मुखर्जी ने ऐतिहासिक संघर्ष किया और राष्ट्र की एकता एवं अखंडता के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। आज पूरा देश उनके त्याग और राष्ट्रनिष्ठा को कृतज्ञतापूर्वक स्मरण करता है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने देश के गौरवशाली इतिहास और भूले-बिसरे स्वतंत्रता सेनानियों को उचित सम्मान दिलाने का कार्य किया है। हर घर तिरंगा जैसे जनआंदोलन ने राष्ट्रभक्ति की भावना को नई ऊर्जा दी है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने भी नया रायपुर स्थित शहीद वीरनारायण सिंह स्मारक सह जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय में छत्तीसगढ़ के 14 वीर स्वतंत्रता सेनानियों की स्मृति में विशेष दीर्घा स्थापित की है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार पंडित दीनदयाल उपाध्याय और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के अंत्योदय के विचारों को आधार बनाकर कार्य कर रही है। पिछले ढाई वर्षों में मोदी की गारंटी के अधिकांश संकल्प पूरे किए गए हैं। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में नियद नेल्लानार योजना के माध्यम से सड़क, बिजली, पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा और संचार जैसी मूलभूत सुविधाएं तेजी से पहुंचाई जा रही हैं। 500 से अधिक गांवों तक आधारभूत सुविधाओं का विस्तार हुआ है, 700 से अधिक मोबाइल टावर स्थापित किए गए हैं तथा बस्तर अंचल में व्यापक स्वास्थ्य परीक्षण एवं उपचार अभियान संचालित किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि वे डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के राष्ट्रसेवा, शिक्षा, त्याग और समर्पण के आदर्शों को अपने जीवन में आत्मसात करें तथा विकसित भारत और विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाएं।

इस अवसर पर पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सच्चिदानंद शुक्ल, कुलसचिव डॉ. शैलेन्द्र कुमार पटेल, प्रबुद्धजन, शिक्षक, छात्र-छात्राएं एवं बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

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अंतरराष्ट्रीय सहकारिता दिवस पर सहकारिता के भविष्य पर हुआ मंथन विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को साकार करने में सहकारिता की भूमिका पर हुई पैनल चर्च

 

 

 अंतरराष्ट्रीय सहकारिता दिवस के अवसर पर राजधानी स्थित कृषि मंडपम, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, लाभांडी में सहकारिता क्षेत्र की चुनौतियों, उपलब्धियों और भविष्य की संभावनाओं पर केंद्रित एक विशेष पैनल चर्चा आयोजित की गई। कार्यक्रम में विकसित भारत-2047 के संकल्प को साकार करने में सहकारिता की भूमिका पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ अपेक्स बैंक के प्राधिकृत अधिकारी श्री केदारनाथ गुप्ता, मार्कफेड के प्राधिकृत अधिकारी श्री शशिकांत द्विवेदी तथा जिला सहकारी केंद्रीय बैंक अंबिकापुर के अध्यक्ष श्री रामकिशुन सिंह ने किया।

उल्लेखनीय है कि भारत सरकार के सहकारिता मंत्रालय के गठन के पाँच वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में प्रदेशभर में 29 जून से 6 जुलाई तक सहकारी सप्ताह मनाया जा रहा है। इसी श्रृंखला में विगत 4 जून को अंतरराष्ट्रीय सहकारिता दिवस पर यह विशेष आयोजन किया गया।

पैनल चर्चा में विकसित भारत-2047 के लिए सहकारिता क्षेत्र से अपेक्षाओं पर विस्तार से चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने वनांचल क्षेत्रों में लघु वनोपज सहकारी समितियों की भूमिका, दुग्ध सहकारिता के विस्तार, महिला सशक्तिकरण में दुग्ध सहकारी संस्थाओं के योगदान, ग्रामीण रोजगार सृजन में मत्स्य सहकारी समितियों की भूमिका तथा नाबार्ड, अपेक्स बैंक और जिला सहकारी बैंकों की जिम्मेदारियों पर अपने विचार रखे।

कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि सहकारिता ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने, किसानों की आय बढ़ाने, महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और रोजगार के नए अवसर सृजित करने का प्रभावी माध्यम है। सहकारिता के माध्यम से विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को गति देने के लिए सभी संस्थाओं के समन्वित प्रयास आवश्यक हैं।

कार्यक्रम में जिला सहकारी केंद्रीय बैंक रायपुर के उपाध्यक्ष श्री अभिनेष कश्यप, राज्य सहकारी संघ के अध्यक्ष श्री सौरभ शर्मा, अपेक्स बैंक के प्रबंध संचालक एवं अपर आयुक्त श्री के.एन. कांडे, मत्स्य विभाग के संचालक श्री नाग, अपर आयुक्त श्रीमती सावित्री भगत, उपायुक्त श्रीमती किरण गुप्ता, संयुक्त आयुक्त श्री बसंत कुमार, श्री मुकेश ध्रुव, श्री तिग्गा, श्री बुनकर, श्री गौरीशंकर शर्मा, उपायुक्त श्री युगल किशोर तथा अपेक्स बैंक के डीजीएम श्री भूपेश चंद्रवंशी सहित सहकारिता विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

इसके अलावा अपेक्स बैंक, जिला सहकारी केंद्रीय बैंकों, लघु वनोपज संघ, दुग्ध महासंघ, सहकारी शक्कर कारखानों, एनसीडीसी तथा विभिन्न सहकारी संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों (पैक्स) के प्रतिनिधि और किसान उपस्थित रहे।

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"गुरु माँ, अब मंच पर आपकी जगह खाली रहेगी..."पद्म विभूषण तीजन बाई को उनकी शिष्या की अश्रुपूरित श्रद्धांजलि

 

 

 

 

विश्वविख्यात पंडवानी गायिका और पद्म विभूषण तीजन बाई पंचतत्व में विलीन हो गईं, लेकिन उनके जाने के बाद उनके शिष्यों के मन में जो खालीपन है, उसे शब्दों में बयां करना आसान नहीं है। उनकी शिष्या तरुणा साहू ने सोशल मीडिया पर एक अत्यंत भावुक संस्मरण साझा किया है, जो गुरु-शिष्य परंपरा, स्नेह और संस्कार का जीवंत दस्तावेज बन गया है।

 

तरुणा साहू लिखती हैं कि धमतरी जिले के छोटे से गांव गिधावा की एक साधारण बच्ची होने के नाते उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि एक दिन उनका जीवन पंडवानी की विश्वविख्यात साधिका तीजन बाई से जुड़ जाएगा। जवाहर नवोदय विद्यालय में कक्षा छठवीं के दौरान आयोजित एक प्रशिक्षण शिविर में करीब 200 बच्चों के बीच से तीजन बाई ने उन्हें अपनी शिष्या के रूप में चुना। यही पल उनके जीवन का सबसे बड़ा सौभाग्य बन गया।

 

उनके अनुसार, गुरु माँ ने उन्हें केवल पंडवानी की कला ही नहीं सिखाई, बल्कि अनुशासन, समर्पण, मेहनत, विनम्रता और जीवन जीने की सीख भी दी। समय के साथ उनका रिश्ता गुरु-शिष्या से आगे बढ़कर माँ-बेटी जैसा हो गया। जब भी वे गुरु माँ के घर जातीं, तीजन बाई अपने हाथों से खाना खिलातीं, बाल संवारतीं, मेकअप करतीं और अपने पास सुलातीं।

 

संस्मरण में बचपन की एक मासूम याद भी है। तरुणा बताती हैं कि गुरु माँ को पान खाना बहुत पसंद था। उन्हें लगता था कि शायद पान खाए बिना पंडवानी नहीं गाई जा सकती, इसलिए वे प्रस्तुति से पहले गुरु माँ से पान मांगती थीं। गुरु माँ मुस्कुराकर उन्हें पान देतीं और फिर वे पूरे उत्साह से पंडवानी गाती थीं। आज वही छोटी-सी याद उनकी सबसे बड़ी धरोहर बन गई है।

 

गुरु माँ के साथ उन्हें दिल्ली, भोपाल, उज्जैन के कालिदास समारोह, रायपुर सहित देश के कई प्रतिष्ठित मंचों पर प्रस्तुति देने का अवसर मिला। कई बार तीजन बाई एक प्रसंग का आधा भाग स्वयं गातीं और शेष भाग अपनी शिष्या को सौंप देतीं। यह विश्वास और स्नेह तरुणा के लिए जीवन का सबसे बड़ा सम्मान रहा।

बाद में तरुणा साहू ने रेलवे सुरक्षा बल (RPF) में निरीक्षक के रूप में सेवा का दायित्व संभाला, लेकिन उन्होंने पंडवानी और लोकसंस्कृति से अपना रिश्ता कभी नहीं तोड़ा। उनका कहना है कि वर्दी पहनकर देश की सेवा करना और मंच पर अपनी संस्कृति की सेवा करना—दोनों ही उन्हें गुरु माँ की प्रेरणा से मिले।

गुरु माँ की अंतिम विदाई के बाद भावुक शब्दों में उन्होंने लिखा कि आज ऐसा लगता है जैसे जीवन का एक मजबूत स्तंभ टूट गया हो। लेकिन उनकी आवाज, उनकी सीख, उनके संस्कार और उनकी पंडवानी हमेशा जीवित रहेंगे। जब भी वे मंच पर पंडवानी प्रस्तुत करेंगी, उन्हें महसूस होगा कि गुरु माँ सामने बैठकर मुस्कुरा रही हैं और उन्हें आशीर्वाद दे रही हैं।

अपने संस्मरण का समापन तरुणा साहू इन शब्दों के साथ करती हैं—

"मैं जीवन भर गर्व से कहती रहूँगी— मैं पद्म विभूषण तीजन बाई जी की शिष्या हूँ। यही मेरी सबसे बड़ी पहचान है, यही मेरा सबसे बड़ा सम्मान है।"

यह संस्मरण केवल एक शिष्या की श्रद्धांजलि नहीं, बल्कि उस गुरु-शिष्य परंपरा का भावनात्मक दस्तावेज है, जिसने छत्तीसगढ़ की लोककला को विश्वभर में पहचान दिलाई।

साभार : तरुणा साहू की सार्वजनिक फेसबुक पोस्ट पर आधारित संस्मरण

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मानदेय, विकास निधि और पेंशन की मांग को लेकर एकजुट हुए जनपद सदस्य, राजधानी भेजा जाएगा प्रतिनिधिमंडल

 

 

 जिले के जनपद सदस्यों (बीडीसी) की विभिन्न लंबित मांगों को लेकर रविवार को कैलाश गुफा स्थित सामुदायिक भवन में जिला स्तरीय बीडीसी संघ की बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिलेभर से पहुंचे जनपद सदस्यों ने मानदेय, भत्ता, जनपद विकास निधि और 15वें वित्त आयोग की राशि में बढ़ोतरी सहित कई मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। बैठक में इन मांगों को शासन के समक्ष रखने के लिए संघ के पदाधिकारियों का प्रतिनिधिमंडल राजधानी रायपुर भेजने का निर्णय लिया गया।

बैठक में वक्ताओं ने कहा कि जनपद सदस्य पंचायत स्तर पर विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, लेकिन उन्हें मिलने वाला मानदेय और विकास के लिए उपलब्ध संसाधन पर्याप्त नहीं हैं। इसलिए जनपद सदस्यों के मानदेय एवं भत्ते में वृद्धि के साथ जनपद विकास निधि बढ़ाने की मांग शासन से की जाएगी।

बैठक को संबोधित करते हुए बीडीसी संघ के जिला अध्यक्ष गंगा राम भगत ने कहा कि जनपद सदस्यों की समस्याओं और मांगों को सरकार तक मजबूती से पहुंचाने के लिए संघ संगठित होकर कार्य करेगा। उन्होंने बताया कि जल्द ही प्रतिनिधिमंडल रायपुर जाकर शासन के समक्ष मांगपत्र प्रस्तुत करेगा।

बैठक का नेतृत्व कर रहीं कुनकुरी जनपद अध्यक्ष सुशीला साय ने कहा कि जनपद सदस्यों को अपने क्षेत्र के विकास के लिए पर्याप्त अधिकार और संसाधन मिलना जरूरी है। उन्होंने विधायक और सांसदों की तरह जनपद सदस्यों के लिए भी पेंशन व्यवस्था लागू करने की मांग उठाई। उनका कहना था कि इससे जनप्रतिनिधियों को सामाजिक सुरक्षा मिलेगी और पंचायत स्तर पर विकास कार्यों को भी गति मिलेगी।

जिला पंचायत सदस्य गेंद बिहारी ने भी जनपद सदस्यों की मांगों का समर्थन करते हुए कहा कि ये मांगें पूरी तरह न्यायसंगत हैं और सरकार को इस दिशा में सकारात्मक पहल करनी चाहिए।

बैठक में बीडीसी संघ के जिला उपाध्यक्ष विश्वनाथ सिदार, जिला सचिव कलम विश्वकर्मा, जिला मीडिया प्रभारी राकेश गुप्ता सहित कुनकुरी, पत्थलगांव, फरसाबहार और बगीचा जनपद पंचायतों के अध्यक्ष-उपाध्यक्ष तथा जिलेभर के सैकड़ों जनपद सदस्य मौजूद रहे। बैठक के समापन के बाद सभी जनप्रतिनिधियों ने सामूहिक भोजन भी किया।

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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई को दी भावभीनी श्रद्धांजलि, कहा– छत्तीसगढ़ ने खो दी अपनी सांस्कृतिक धरोहर

 

 

 

 मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने पद्म विभूषण एवं पद्मश्री से सम्मानित विश्वविख्यात पंडवानी गायिका डॉ. तीजन बाई के निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। डॉ. तीजन बाई का रविवार को रायपुर में लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। वे 70 वर्ष की थीं। 

मुख्यमंत्री ने अपने शोक संदेश में कहा कि डॉ. तीजन बाई ने अपनी अद्वितीय कला, संघर्ष और आजीवन साधना से छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति को विश्व पटल पर नई पहचान दिलाई। पंडवानी जैसी लोककला को उन्होंने देश-विदेश तक पहुंचाकर प्रदेश का गौरव बढ़ाया। उनका योगदान सदैव अविस्मरणीय रहेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा, "पद्म विभूषण और पद्मश्री से सम्मानित डॉ. तीजन बाई का निधन हम सभी के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्होंने पूरे देश और विश्व में छत्तीसगढ़ का गौरव बढ़ाया। हम उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।"

मुख्यमंत्री ने ईश्वर से दिवंगत पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करने तथा शोकाकुल परिजनों और उनके असंख्य प्रशंसकों को यह दुःख सहने की शक्ति देने की प्रार्थना की।

डॉ. तीजन बाई ने पंडवानी की पारंपरिक शैली को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया और अपनी ओजस्वी प्रस्तुति के माध्यम से भारतीय लोककला को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर स्थापित किया। उनके निधन से छत्तीसगढ़ ही नहीं, पूरे देश के कला एवं संस्कृति जगत में शोक की लहर है।

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छत्तीसगढ़ में शिक्षकों को बड़ी राहत, शिक्षा सत्र 2026-27 के अंत तक मिलेगी पुनर्नियुक्ति।

 

 

 

 

 छत्तीसगढ़ शासन के स्कूल शिक्षा विभाग ने शासकीय एवं शत-प्रतिशत अनुदान प्राप्त विद्यालयों में कार्यरत शिक्षक संवर्ग (सहायक शिक्षक से प्राचार्य तक) को शिक्षा सत्र 2026-27 के अंत तक पुनर्नियुक्ति प्रदान करने की प्रशासकीय स्वीकृति जारी कर दी है।

मंत्रालय महानदी भवन, नवा रायपुर अटल नगर से जारी आदेश के अनुसार यह स्वीकृति लोक शिक्षण संचालनालय के प्रस्ताव पर प्रदान की गई है। शासन ने संचालक, लोक शिक्षण संचालनालय को निर्देश दिए हैं कि जारी दिशा-निर्देशों के अनुरूप पात्र शिक्षकों को शिक्षा सत्र 2026-27 के अंत तक पुनर्नियुक्ति देने की प्रक्रिया शीघ्र पूरी की जाए।

सरकार के इस निर्णय से प्रदेश के शासकीय एवं शत-प्रतिशत अनुदान प्राप्त विद्यालयों में शिक्षण व्यवस्था की निरंतरता बनी रहेगी। साथ ही विद्यार्थियों की पढ़ाई बिना किसी व्यवधान के जारी रखने में मदद मिलेगी।

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रामगढ़ महोत्सव में पहुंचे मुख्यमंत्री साय, सीताबेंगरा-जोगीमारा गुफाओं की विरासत को बताया विश्वस्तरीय धरोहर

रामगढ़ महोत्सव में पहुंचे मुख्यमंत्री साय, सीताबेंगरा-जोगीमारा गुफाओं की विरासत को बताया विश्वस्तरीय धरोहर

जशपुर जंक्शन 30  जून 

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मंगलवार को सरगुजा जिले के उदयपुर विकासखंड स्थित ऐतिहासिक रामगढ़ में आयोजित दो दिवसीय रामगढ़ महोत्सव-2026 के समापन समारोह में भाग लिया। इस दौरान उन्होंने विश्व की प्राचीनतम नाट्यशाला मानी जाने वाली सीताबेंगरा गुफा, जोगीमारा गुफा के प्राचीन शिलालेख और भित्तिचित्रों तथा प्राकृतिक सुरंग हाथीपोल का अवलोकन किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि रामगढ़ हजारों वर्ष पुरानी सांस्कृतिक चेतना, कला, आस्था और गौरवशाली इतिहास का जीवंत प्रतीक है। उन्होंने कहा कि यह स्थल संस्कृति, इतिहास, साहित्य और पर्यटन का अद्भुत संगम है तथा छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक एवं पुरातात्विक विरासत को विश्व स्तर पर पहचान दिलाता है।

उन्होंने कहा कि रामगढ़ जैसी ऐतिहासिक धरोहरें हमारी सांस्कृतिक अस्मिता की अमूल्य निधि हैं। इनका संरक्षण और संवर्धन सामूहिक जिम्मेदारी है। राज्य सरकार इन धरोहरों को संरक्षित करने और पर्यटन के रूप में विकसित करने के लिए लगातार कार्य कर रही है, जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार के नए अवसर भी मिलेंगे।

कार्यक्रम के दौरान कृषि मंत्री रामविचार नेताम, पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल सहित अन्य जनप्रतिनिधि और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

रामगढ़ की ऐतिहासिक पहचान

रामगढ़ पर्वत की पश्चिमी ढलान पर स्थित सीताबेंगरा और जोगीमारा गुफाएं भारतीय इतिहास, स्थापत्य, शिलालेख और चित्रकला की अनमोल धरोहर मानी जाती हैं। मान्यता है कि महाकवि कालिदास ने यहीं अपनी प्रसिद्ध कृति 'मेघदूतम्' की रचना की थी। इसी स्मृति में हर वर्ष आषाढ़ के प्रथम दिवस पर रामगढ़ महोत्सव आयोजित किया जाता है।

करीब 44 फीट लंबी सीताबेंगरा गुफा का प्राकृतिक रंगमंच, जोगीमारा गुफा के दूसरी-तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व के भित्तिचित्र और प्राचीन शिलालेख इसे विश्वस्तरीय पुरातात्विक महत्व प्रदान करते हैं। वहीं लगभग 180 फीट लंबी हाथीपोल प्राकृतिक सुरंग अपनी अनूठी संरचना और प्राकृतिक सौंदर्य के कारण पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र है।

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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज सरगुजा और रायगढ़ के दौरे पर, रामगढ़ महोत्सव में होंगे शामिल

 

 

 

 मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय मंगलवार को सरगुजा और रायगढ़ जिले के दौरे पर रहेंगे। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार मुख्यमंत्री सुबह 11:00 बजे मुख्यमंत्री निवास, सिविल लाइन रायपुर में खेल एवं युवा कल्याण विभाग की बैठक लेंगे।

बैठक के बाद मुख्यमंत्री हेलीकॉप्टर से सरगुजा जिले के उदयपुर पहुंचेंगे। दोपहर 1:00 बजे से 2:00 बजे तक वे रामगढ़, उदयपुर में आयोजित "रामगढ़ महोत्सव-2026" में शामिल होंगे। इसके बाद उनका आरक्षित कार्यक्रम रहेगा।

दोपहर बाद मुख्यमंत्री रायगढ़ जिले के खरसिया पहुंचेंगे, जहां 3:35 बजे से 4:05 बजे तक उनका आरक्षित कार्यक्रम निर्धारित है। इसके बाद वे हेलीकॉप्टर से रायपुर लौटेंगे और शाम 5:15 बजे मुख्यमंत्री निवास पहुंचकर दिनभर के कार्यक्रम का समापन करेंगे।

मुख्यमंत्री के इस दौरे को लेकर सरगुजा और रायगढ़ जिला प्रशासन ने सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली हैं। सुरक्षा व्यवस्था और कार्यक्रम स्थल पर प्रशासनिक अधिकारियों की तैनाती सुनिश्चित की गई है।

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पीएम सूर्यघर योजना के हितग्राहियों को बड़ा तोहफा: अब अतिरिक्त सोलर बिजली भी खरीदेगी सरकार, बिजली बिल में मिलेगा सीधा लाभ

 प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के तहत रूफटॉप सोलर संयंत्र लगाने वाले उपभोक्ताओं के लिए राहत भरी खबर है। अब घरों में जरूरत से अधिक उत्पादित सौर ऊर्जा को ग्रिड में भेजने पर सरकार निर्धारित दर पर उसकी खरीद करेगी। इससे उपभोक्ताओं को अतिरिक्त आय का लाभ मिलेगा और उसकी राशि आगामी बिजली बिलों में क्रेडिट के रूप में समायोजित की जाएगी।

छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी ने सोलर एनर्जी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (SECI) द्वारा वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए निर्धारित बायबैक दर को अपनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी के लिए छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग (CSERC) के पास भेजा गया है। आयोग की स्वीकृति मिलते ही उपभोक्ताओं को अधिशेष बिजली का लाभ सीधे बिजली बिलों में दिखाई देगा।

नेट मीटरिंग व्यवस्था के तहत सोलर संयंत्र से बनने वाली बिजली का पहले उपभोक्ता की घरेलू खपत में समायोजन किया जाता है। इसके बाद बची हुई बिजली ग्रिड में चली जाती है, जिसका वर्ष के अंत में निर्धारित दर पर बायबैक किया जाता है। इस राशि को उपभोक्ता के खाते में जमा कर अगले बिजली बिलों में समायोजित किया जाएगा।

पावर कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया है कि प्रत्येक नए वित्तीय वर्ष में यूनिटों का लेखा-जोखा शून्य से शुरू होता है। इसलिए पिछले वर्ष की अतिरिक्त यूनिट नए बिल में दिखाई नहीं देतीं, लेकिन उनकी राशि सुरक्षित रहती है और आगामी बिलों में क्रेडिट के रूप में समायोजित कर दी जाती है।

राज्य सरकार का कहना है कि प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के तहत अपनाई गई यह पारदर्शी व्यवस्था हजारों सौर ऊर्जा उपभोक्ताओं को आर्थिक रूप से लाभान्वित करेगी और स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को भी बढ़ावा देगी।

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बारिश के बीच घर पर गिरी मौत बनकर बिजली, 12 वर्षीय मासूम की मौत, एक ही परिवार के 6 सदस्य घायल।

 

 

 

जशपुर जिले के सन्ना क्षेत्र के कप्तुरापाठ गांव में सोमवार रात करीब 8 बजे आकाशीय बिजली गिरने से एक दर्दनाक हादसा हो गया। घर के भीतर मौजूद 12 वर्षीय प्रमोद राम की वज्रपात की चपेट में आने से मौत हो गई, जबकि एक ही परिवार के छह अन्य सदस्य घायल हो गए।

पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार घटना के समय परिवार के सभी सदस्य मकान के अंदर थे। अचानक तेज गर्जना के साथ आकाशीय बिजली गिरने से पूरा परिवार इसकी चपेट में आ गया। हादसे में प्रमोद राम ने मौके पर ही दम तोड़ दिया, जबकि छह अन्य सदस्य घायल हो गए।

घटना के बाद ग्रामीणों की मदद से सभी घायलों को तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सन्ना पहुंचाया गया। घायलों में मृतक की मां बंधनी बाई भी शामिल हैं, जिन्हें अचेत अवस्था में अस्पताल लाया गया था। चिकित्सकों और स्वास्थ्य कर्मियों के त्वरित उपचार से उनकी हालत में सुधार हुआ।

अस्पताल सूत्रों के अनुसार सभी घायल अब खतरे से बाहर हैं और उनका उपचार जारी है।

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सन्ना के चिकित्सक डॉ. नितीश सोनवानी ने बताया कि बरसात के मौसम में आकाशीय बिजली गिरने की घटनाएं बढ़ जाती हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि खराब मौसम, तेज गर्जना और बिजली चमकने के दौरान घर या सुरक्षित स्थान पर रहें तथा मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करें।

इस हृदयविदारक घटना से कप्तुरापाठ गांव सहित पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल है। ग्रामीणों ने मृतक बालक को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए शोक संतप्त परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की है।

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‘‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ‘‘ योजना के तहत् किशोरी बालिकाओं का सिकल सेल-हीमोग्लोबिन परीक्षण शिविर का किया गया आयोजन

 

 

 

 

 

 

 

कलेक्टर श्री रोहित व्यास के निर्देशानुसार महिला बाल विकास विभाग द्वारा 18 जून को संगम चौक स्थित जिला कार्यक्रम अधिकारी कार्यालय सभाकक्ष में निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर आयोजित किया गया   

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना अंतर्गत महिला सशक्तिकरण केंद्र मिशन शक्ति हब द्वारा किशोरी बालिकाओं का सिकल सेल एनीमिया एवं हीमोग्लोबिन परीक्षण किया गया। शिविर का उद्देश्य बालिकाओं को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक कर विशेष ध्यान रखने के लिए प्रेरित करना था।

 सिकली सेल संगवारी टीम जिला चिकित्सालय ने 60 बालिकाओं की स्क्रीनिंग की, जिसमें 4 पॉजिटिव पाई गईं। इन्हें स्वास्थ्य विभाग द्वारा आगे जांच व उपचार हेतु चिन्हित किया गया। साथ ही इस दौरान स्वास्थ्य व करियर पर मार्गदर्शन दिया। एकीकृत बाल सेवा परियोजना के श्री योगेश भगत ने पोषण, स्वास्थ्य व माहवारी स्वच्छता पर जानकारी दी। संरक्षण अधिकारी श्रीमती शिखा शर्मा ने घरेलू हिंसा, सखी वन स्टॉप सेंटर-181 व महिला हेल्पलाइन पर बताया।

मिशन हब समन्वयक सुश्री नेहा नायक ने मासिक धर्म स्वच्छता समझाई। चाइल्ड हेल्पलाइन 1098, बाल विवाह, बाल श्रम व मोबाइल दुरुपयोग पर अंजना देवी ने जानकारी दी। कार्यक्रम में अधिकारी, परियोजना समन्वयक, संगवारी टीम, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व सहायिका सहित कुल 130 प्रतिभागी शामिल रहे।

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कलेक्टर श्री व्यास ने जनदर्शन में लोगों की समस्याएं सुनी जनदर्शन में 55 आवेदन प्राप्त हुए

 

 

 

 

 कलेक्टर श्री रोहित व्यास ने आज कलेक्टोरेट में आयोजित साप्ताहिक जनदर्शन कार्यक्रम में जिले के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे नागरिकों की समस्याएं सुनीं। कलेक्टर श्री व्यास ने जनदर्शन में प्राप्त आवेदनों के निराकरण के लिए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। जनदर्शन में आमजन ने अपनी व्यक्तिगत एवं सामुदायिक समस्याओं से संबंधित आवेदन प्रस्तुत किए। आज आयोजित जनदर्शन में कुल 55 आवेदन प्राप्त हुए। इनमें मुख्य रूप से राजस्व संबंधी प्रकरण, पेयजल, सड़क, स्वच्छता, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ, अधोसंरचना विकास, आजीविका संवर्धन तथा विभिन्न शासकीय योजनाओं से जुड़ी मांगें एवं समस्याएं शामिल थीं।

कलेक्टर श्री रोहित व्यास ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि प्राप्त सभी आवेदनों का प्राथमिकता के आधार पर परीक्षण कर उनका समयबद्ध, पारदर्शी एवं गुणवत्तापूर्ण निराकरण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि जनदर्शन शासन और जनता के बीच सीधा संवाद स्थापित करने का प्रभावी माध्यम है, इसलिए प्रत्येक आवेदन पर संवेदनशीलता एवं जवाबदेही के साथ कार्रवाई की जानी चाहिए।

उन्होंने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए कि आवेदनों पर की गई कार्रवाई की जानकारी संबंधित आवेदकों को समय पर उपलब्ध कराई जाए, ताकि उन्हें अपने प्रकरण की स्थिति की स्पष्ट जानकारी मिल सके। कलेक्टर ने विशेष रूप से जनसुविधाओं से जुड़े मामलों जैसे पेयजल, सड़क, स्वच्छता तथा शासकीय योजनाओं के लाभ से संबंधित प्रकरणों पर गंभीरता से कार्रवाई करने पर जोर दिया।

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मुख्य सचिव ने सुघ्घर छत्तीसगढ़ अभियान की तैयारियों की अधिकारियों से ली जानकारी।

मुख्य सचिव ने सुघ्घर छत्तीसगढ़ अभियान की तैयारियों की अधिकारियों से ली जानकारी।

जशपुर जंक्शन 25 जून 

छत्तीसगढ़ शासन की महत्वकांक्षी सुघ्घर छत्तीसगढ़ अभियान शीघ्र ही प्रारंभ होगा। अभियान के तहत शासन की 31 जनकल्याणकारी योजनाओं का फायदा प्रत्येक पात्र परिवारों को पहुंचाया जाएगा। यह अभियान रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, और सरगुजा संभाग के 23 जिलों में प्रारंभ किया जाएगा।

मुख्य सचिव श्री विकासशील ने आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में इस संबंध में अधिकारियों से की जा रही व्यापक तैयारियों के संबंध में विस्तार से जानकारी ली। उल्लेखनीय है सुघ्घर छत्तीसगढ़ योजना छत्तीसगढ़ शासन की नई पहल है। जिससे शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का फायदा सभी पात्र परिवारों को दिया जाएगा। योजना के फायदें से कोई वंचित न रहें इसके लिए व्यापक कार्यक्रम तैयार किया जा रहा है। सुघ्घर छत्तीसगढ़ के तहत अधिकारियों ने प्रस्तुतिकरण के जरिये विस्तार से जानकारी दी।

बैठक में आवास एवं पर्यावरण विभाग के सचिव श्री अंकित आनंद, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सचिव श्री भीम सिंह सहित पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग सहित अन्य विभागों के अधिकारी शामिल हुए।

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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देश पर अवैध खनन के खिलाफ सख्त अभियान, 7 वाहन जप्त।

 

 

 

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश में अवैध खनन, परिवहन एवं भंडारण के विरुद्ध कार्रवाई लगातार तेज की जा रही है। राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि खनिज संपदा के अवैध दोहन तथा शासकीय कार्य में बाधा पहुंचाने जैसी गतिविधियों को किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

इसी कड़ी में संचालक भौमिकी एवं खनिकर्म तथा केंद्रीय खनि उड़नदस्ता प्रभारी श्री रजत बंसल के निर्देशन में केंद्रीय खनि उड़नदस्ता और संबंधित जिला प्रशासन की संयुक्त टीमों ने 22 जून को मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर, सूरजपुर और सरगुजा जिलों में व्यापक जांच अभियान चलाया। शिकायतों के आधार पर की गई इस कार्रवाई में विभिन्न स्थानों पर खनिजों के अवैध परिवहन में संलिप्त कुल सात वाहनों को जप्त किया गया।

जांच के दौरान मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के बरबसपुर क्षेत्र में निम्न श्रेणी चूना पत्थर से लदे दो हाइवा, सूरजपुर जिले के लटोरी में रेत से भरा एक हाइवा तथा खड़गवां में एक टिप्पर पकड़ा गया। वहीं सरगुजा जिले के सकालो और अंबिकापुर क्षेत्र में रेत परिवहन कर रहे तीन टिप्परों पर कार्रवाई की गई। सभी वाहनों को खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957 के प्रावधानों के तहत जप्त कर संबंधित थानों में सुरक्षित रखा गया है।

कार्रवाई के दौरान अंबिकापुर के गांधी चौक क्षेत्र में एक गंभीर घटना भी सामने आई। जांच कर रही टीम के साथ वाहन मालिक, चालक और उनके सहयोगियों द्वारा कथित रूप से अभद्र व्यवहार, गाली-गलौच और धमकी दी गई तथा शासकीय कार्य में व्यवधान उत्पन्न किया गया। मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत थाना गांधीनगर में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है।

खनिज विभाग ने दोहराया है कि अवैध खनन और परिवहन के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा। विभाग ने चेतावनी दी है कि कानून का उल्लंघन करने, अधिकारियों को धमकाने अथवा अवैध गतिविधियों को संरक्षण देने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

राज्य शासन का मानना है कि प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा और राजस्व हितों की रक्षा के लिए प्रभावी प्रवर्तन आवश्यक है। इसी उद्देश्य से प्रदेशभर में संयुक्त निरीक्षण, निगरानी और कार्रवाई की प्रक्रिया को और अधिक सुदृढ़ किया जा रहा है, ताकि अवैध खनन गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके।

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योग को दिनचर्या का हिस्सा बनाएं, स्वस्थ समाज के निर्माण में योगदान दें : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

 

 

 

 

 

 12वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अम्बिकापुर के पीजी कॉलेज मैदान में आयोजित राज्य स्तरीय सामूहिक योगाभ्यास कार्यक्रम में हजारों नागरिकों, विद्यार्थियों, महिलाओं, युवाओं, जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के साथ योगाभ्यास किया। उन्होंने प्रदेशवासियों को योग दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि योग भारत की सनातन ऋषि परंपरा की अमूल्य धरोहर है, जिसने पूरी दुनिया को स्वस्थ, संतुलित और शांतिपूर्ण जीवन का मार्ग दिखाया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि शरीर, मन और आत्मा के बीच सामंजस्य स्थापित करने वाली जीवन पद्धति है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष योग दिवस की थीम "स्वस्थ आयु के लिए योग" वर्तमान समय की आवश्यकता को दर्शाती है। बदलती जीवनशैली, बढ़ते तनाव और स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों के बीच योग प्रत्येक आयु वर्ग के लिए स्वास्थ्य सुरक्षा का सबसे सरल और प्रभावी माध्यम बनकर उभरा है।

उन्होंने कहा कि स्वस्थ व्यक्ति ही स्वस्थ परिवार, स्वस्थ समाज और विकसित राष्ट्र की आधारशिला होता है, इसलिए योग को केवल एक दिवस तक सीमित न रखकर जीवन का हिस्सा बनाना आवश्यक है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों से योग को वैश्विक पहचान मिली है और आज पूरी दुनिया 21 जून को उत्साहपूर्वक अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मना रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि योग मधुमेह, उच्च रक्तचाप, तनाव, अनिद्रा और मोटापे जैसी जीवनशैली जनित समस्याओं से बचाव में अत्यंत प्रभावी है। आधुनिक चिकित्सा विज्ञान भी इसकी उपयोगिता को स्वीकार कर रहा है। उन्होंने महर्षि पतंजलि और भगवान शिव को आदियोगी के रूप में स्मरण करते हुए कहा कि भारत की सांस्कृतिक चेतना में योग सदियों से जीवन का अभिन्न अंग रहा है।

उन्होंने बताया कि राज्य सरकार योग के विस्तार और संस्थागत विकास के लिए प्रतिबद्ध है तथा योग विषय को समाज कल्याण विभाग से चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधीन लाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। इससे योग शिक्षा, प्रशिक्षण, अनुसंधान और जनजागरूकता गतिविधियों को नई दिशा मिलेगी। राज्य सरकार का लक्ष्य योग को गांव-गांव, स्कूलों और कॉलेजों तक पहुंचाकर स्वस्थ जीवनशैली को जनआंदोलन का स्वरूप देना है।

मुख्यमंत्री ने बच्चों और युवाओं से योग को अपनी दिनचर्या में शामिल करने का आह्वान करते हुए कहा कि इससे एकाग्रता, आत्मविश्वास, अनुशासन और सकारात्मक सोच का विकास होता है। उन्होंने कहा कि जो लोग अभी तक योग से नहीं जुड़े हैं, वे आज से इसकी शुरुआत करें।

इस अवसर पर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि ब्रह्ममुहूर्त में योगाभ्यास सबसे अधिक लाभकारी माना गया है। कार्यक्रम में विधायक प्रबोध मिंज, रामकुमार टोप्पो, छत्तीसगढ़ योग आयोग के अध्यक्ष संजय अग्रवाल सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, अधिकारी और नागरिक उपस्थित थे।

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जशपुर में मनाया गया 12वां विश्व योग दिवस, पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल बोले- करें योग, रहें निरोग

 

 

 

12वें विश्व योग दिवस के अवसर पर जिला प्रशासन द्वारा वशिष्ठ कम्युनिटी हॉल में जिला स्तरीय योग दिवस का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। योग प्रशिक्षक डमरूधर स्वर्णकार और स्मिता जैन के मार्गदर्शन में जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, विद्यार्थियों और नागरिकों ने सामूहिक योगाभ्यास कर स्वस्थ जीवन का संदेश दिया।

इस अवसर पर जशपुर विधायक रायमुनि भगत, पत्थलगांव विधायक एवं सरगुजा आदिवासी विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष गोमती साय, माटी कला बोर्ड के अध्यक्ष शम्भूनाथ चक्रवर्ती, छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अध्यक्ष रामप्रताप सिंह, नगर पालिका अध्यक्ष अरविन्द भगत, जनपद पंचायत अध्यक्ष गंगाराम भगत, कलेक्टर रोहित व्यास, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. लाल उमेद सिंह, जिला पंचायत सीईओ अभिषेक कुमार सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, अधिकारी, गणमान्य नागरिक एवं स्कूली बच्चे उपस्थित रहे।

सामूहिक योगाभ्यास के दौरान ताड़ासन, त्रिकोणासन, भुजंगासन, वज्रासन, पवनमुक्तासन, अर्धचक्रासन और शवासन सहित विभिन्न योगासन तथा अनुलोम-विलोम, कपालभाति एवं ध्यान का अभ्यास कराया गया। प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक योगाभ्यास कर स्वस्थ एवं संतुलित जीवन का संकल्प लिया।

मुख्य अतिथि राजेश अग्रवाल ने सभी को विश्व योग दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि योग भारत की प्राचीन संस्कृति और ऋषि परंपरा की अमूल्य धरोहर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों से आज योग को वैश्विक पहचान मिली है और दुनिया के अनेक देशों ने इसे अपनाया है। उन्होंने कहा कि योग शरीर को स्वस्थ रखने के साथ मन को शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में योग को नियमित दिनचर्या का हिस्सा बनाना आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि योग केवल एक दिन का कार्यक्रम नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवन की निरंतर साधना है। "करें योग, रहें निरोग" का संदेश देते हुए उन्होंने विभिन्न आसनों का अभ्यास किया और उपस्थित लोगों को नशामुक्ति की शपथ भी दिलाई।

जशपुर विधायक रायमुनि भगत ने कहा कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवन जीने की संपूर्ण पद्धति है। नियमित योगाभ्यास से शरीर स्वस्थ, मन प्रसन्न और कार्यक्षमता में वृद्धि होती है। उन्होंने कहा कि ऋषि-मुनियों के समय से चली आ रही यह परंपरा अनेक बीमारियों से बचाव में सहायक है।

पत्थलगांव विधायक गोमती साय ने कहा कि यह गर्व का विषय है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर आज पूरा विश्व योग को अपना रहा है। उन्होंने योग को जीवन की आत्मा और साधना बताते हुए इसे दैनिक जीवन में अपनाने का आह्वान किया।

नगर पालिका अध्यक्ष अरविन्द भगत ने भी नागरिकों से नियमित योगाभ्यास करने की अपील की। कार्यक्रम के माध्यम से जिलेवासियों को निरोगी जीवन, मानसिक शांति और स्वस्थ समाज के निर्माण के लिए योग अपनाने का संदेश दिया गया।

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आमाकोनी को मिली 28 लाख के विकास कार्यों की सौगात, राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने किया लोकार्पण।

 

 

 

 

 

 

राजस्व मंत्री श्री टंक राम वर्मा अपने जिला प्रवास के दौरान रविवार को तहसील सुहेला के ग्राम आमाकोनी पहुंचे। इस दौरान उन्होंने ग्रामवासियों को बड़ी सौगात देते हुए 10 लाख रुपए की लागत से नवनिर्मित सामुदायिक भवन तथा 18 लाख रुपए की लागत से तैयार प्रार्थना शेड एवं अहाता निर्माण का लोकार्पण किया।

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर क्षेत्रवासियों को शुभकामनाएं देते हुए राजस्व मंत्री श्री वर्मा ने कहा कि सुहेला क्षेत्र में अब विकास के कार्य लगातार गति पकड़ रहे हैं, जिससे यह क्षेत्र प्रगति के नए आयाम स्थापित कर रहा है। उन्होंने ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि क्षेत्र की जो भी समस्याएं हैं, उन सभी का प्राथमिकता के आधार पर त्वरित समाधान किया जाएगा।

*समग्र विकास के लिए सरकार कृत संकल्पित*

राजस्व मंत्री ने राज्य सरकार की प्राथमिकताओं को रेखांकित करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के कुशल नेतृत्व में हमारी सरकार प्रदेश के चहुंमुखी विकास के लिए पूरी तरह कृत संकल्पित है। हमने जनता से की गई 'मोदी की गारंटी' के सभी प्रमुख वादों को पूरा कर दिया है।

*3 से 4 वर्षों में हर परिवार को मिलेगा पक्का आशियाना*

 ग्रामीणों को बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने का भरोसा देते हुए श्री वर्मा ने बताया कि वर्तमान में आमाकोनी ग्राम में 51 प्रधानमंत्री आवासों का निर्माण तेजी से चल रहा है और आने वाले समय में और भी आवास स्वीकृत किए जाएंगे। उन्होंने दावा किया कि अगले 3 से 4 साल के भीतर क्षेत्र में कोई भी घर कच्चा नहीं रहेगा। सरकार हर घर में शुद्ध पेयजल, बिजली और शौचालय की व्यवस्था सुनिश्चित कर रही है। पात्र लोगों को जनकल्याणकारी योजनाओं का सीधा लाभ मिलने से हर परिवार में खुशहाली आएगी। 

उन्होंने ग्रामीणों से आपसी प्रेम, सद्भाव और भाईचारे के साथ रहकर गांव के विकास में अपनी सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया।

लोकार्पण समारोह के इस अवसर पर जिला पंचायत सदस्य,जनपद सदस्य, सरपंच सहित अन्य स्थानीय जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक और बड़ी संख्या में ग्रामवासी

उपस्थित थे।

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आसमान में उड़ता ड्रोन और सुधरती तकदीर सारंगढ़ की सुनीता पटेल ऐसे बनीं 'लखपति ड्रोन दीदी'

 

 

कहते हैं कि अगर हौसलों को सही तकनीक और अवसरों के पंख मिल जाएं, तो ग्रामीण परिवेश की साधारण सी दिखने वाली महिलाएं भी कामयाबी की नई उड़ान भर सकती हैं। कुछ ऐसी ही कहानी है सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के एक छोटे से गांव खोरीगांव की रहने वाली सुनीता पटेल की। सुनीता आज सिर्फ अपने घर की दहलीज तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे आसमान में ड्रोन उड़ाकर अपने खेतों को समृद्ध बना रही हैं और खुद 'लखपति दीदी' बनकर ग्रामीण सशक्तिकरण की नई मिसाल पेश कर रही हैं।

*शुरुआत एक सपने की, जिसने बदली जिंदगी*

इस बदलाव की नींव तब पड़ी जब 15 अगस्त 2023 को प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने "नमो ड्रोन दीदी" योजना की घोषणा की थी। इस योजना का मकसद देश की ग्रामीण महिलाओं को तकनीक से जोड़कर उनकी सालाना आय को 1 लाख रुपये से ऊपर ले जाना था। सुनीता पटेल ने इस सुनहरे मौके को हाथ से जाने नहीं दिया।

दिसंबर 2023 में वे अपने सपनों की पोटली बांधकर 15 दिनों के कड़े प्रशिक्षण के लिए ग्वालियर गईं। वहां उन्होंने न सिर्फ ड्रोन उड़ाने की बारीकियां सीखीं, बल्कि खेतों में कीटनाशकों और नैनो उर्वरकों के सही इस्तेमाल का तकनीकी ज्ञान भी हासिल किया। ट्रेनिंग पूरी होने के बाद जब उन्हें उर्वरक कंपनी 'इफको' (IFFCO) की ओर से कृषि ड्रोन मिला, तो मानो उनकी आजीविका को नए पंख मिल गए।

*खेतों में तकनीक की क्रांति और 2 लाख रुपए तक की आय*

साल 2024 से शुरू हुआ सुनीता का यह सफर आज 2026 में सफलता के शिखर पर है। सुनीता अब हर साल खेतों में दवा और खाद का छिड़काव करके 1 से 2 लाख रुपये की सम्मानजनक वार्षिक आय कमा रही हैं। सबसे खूबसूरत बात यह है कि सुनीता अपने काम को सिर्फ एक व्यवसाय नहीं मानतीं। ग्रामीण परिवेश से जुड़ी होने के कारण वे अमीर-गरीब का भेद किए बिना, पैसों की परवाह किए बगैर हर किसान के खेत में उतनी ही शिद्दत से काम करती हैं।

शनिवार को सारंगढ़ मंडी प्रांगण में जब 'खेती बचाओं अभियान' और 'प्राकृतिक खेती कार्यशाला' का आयोजन हुआ, तो सुनीता के हुनर को देखने भारी भीड़ उमड़ी। वहां मौजूद प्रदेश के राजस्व मंत्री श्री टंक राम वर्मा के सामने जब सुनीता ने पानी से भरे भारी-भरकम ड्रोन को रिमोट के जरिए आसमान में उड़ाया और मैदान में छिड़काव का सजीव प्रदर्शन किया, तो पूरा प्रांगण तालियों से गूंज उठा। मंत्री जी ने भी उनके इस जज्बे और तकनीकी कुशलता की जमकर सराहना की।

*कैसे काम करती है यह योजना और आप कैसे उठा सकते हैं लाभ?*

 सुनीता की यह सफलता दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) की ताकत को दर्शाती है। इस योजना के तहत देश की सात प्रमुख उर्वरक कंपनियां महिलाओं को ट्रेनिंग और ड्रोन सप्लाई में मदद कर रही हैं।

अगर गांव की कोई भी अन्य महिला सुनीता की तरह 'ड्रोन दीदी' बनना चाहती है, तो उसकी प्रक्रिया बेहद सरल है। इसके लिए महिला की उम्र 18 वर्ष से अधिक हो, वह कम से कम 10वीं पास हो और किसी पंजीकृत स्वयं सहायता समूह (SHG) की सदस्य हो। चयन होने के बाद नजदीकी रिमोट पायलट ट्रेनिंग ऑर्गनाइजेशन (RPTO) में 15 दिनों की मुफ्त पायलट और असिस्टेंट ट्रेनिंग दी जाती है, जिसके बाद DGCA द्वारा आधिकारिक 'रिमोट पायलट सर्टिफिकेट' मिलता है। ड्रोन खरीदने के लिए सरकार की तरफ से 80 प्रतिशत या अधिकतम 8 लाख रुपये तक की भारी सब्सिडी दी जाती है। बाकी बची रकम पर भी एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड (AIF) के जरिए महज 3 प्रतिशत की रियायती ब्याज दर पर लोन मिल जाता है।

*प्रेरणा की नई मिसाल*

 आज सुनीता पटेल सिर्फ अपने गांव की नहीं, बल्कि पूरे जिले और पड़ोसी राज्यों की महिलाओं के लिए एक रोल मॉडल बन चुकी हैं। शासकीय कार्यक्रमों में जब वे अपने ड्रोन के साथ पहुंचती हैं, तो उन्हें देखकर सैकड़ों अन्य ग्रामीण महिलाओं की आंखों में भी आत्मनिर्भर बनने के सपने तैरने लगते हैं। सुनीता ने साबित कर दिया है कि भारत के गांवों की तरक्की का रास्ता अब खेतों से होते हुए आसमान की तरफ जाता है। यदि योजना के बारे में अधिक जानना चाहते हैं, तो इसकी आधिकारिक वेबसाइट https://namodronedidi.da.gov.in/ पर जाकर जानकारी ले सकते हैं।

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जशपुर में निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर सख्त हुए पीडब्ल्यूडी सचिव मुकेश बंसल, अधिकारियों को दिए समय-सीमा में काम पूरा करने के निर्देश

 

 

 

 

लोक निर्माण विभाग के सचिव मुकेश बंसल ने जशपुर जिले के दो दिवसीय दौरे के दौरान विभाग के अंतर्गत संचालित विभिन्न निर्माण कार्यों का निरीक्षण कर अधिकारियों को गुणवत्ता और समय-सीमा का विशेष ध्यान रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्य निर्धारित मानकों के अनुरूप और तय समयावधि में पूरे किए जाएं।

सचिव मुकेश बंसल ने 18 एवं 19 जून को रानीबहार बगीचा मार्ग, बगीचा चराईडांड़ मार्ग तथा नवीन मेडिकल कॉलेज जशपुर के लिए प्रस्तावित पहुंच मार्ग का निरीक्षण किया।

 मेडिकल कॉलेज तक बेहतर आवागमन के लिए फोरलेन सड़क निर्माण के प्रस्ताव के संबंध में भी आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।

इस दौरान उन्होंने जशपुर पत्थलगांव राष्ट्रीय राजमार्ग का भी निरीक्षण किया और संबंधित अधिकारियों को कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए। इसके बाद जशपुर और पत्थलगांव में विभाग के अधीन चल रहे सभी निर्माण कार्यों की विस्तृत समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें नई और अधूरी परियोजनाओं की प्रगति का आकलन किया गया।

बैठक में कलेक्टर रोहित व्यास, प्रमुख अभियंता बीके भट्टवर्मा, मुख्य अभियंता सरगुजा परिक्षेत्र बीएल उपाध्याय, मुख्य अभियंता राष्ट्रीय राजमार्ग ज्ञानेश्वर कश्यप, मुख्य अभियंता विद्युत, यांत्रिकी एवं सेतु निर्माण जीएस मंडावी समेत विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

पीडब्ल्यूडी सचिव ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी निर्माण कार्यों में गुणवत्ता से कोई समझौता न हो और तय समय-सीमा के भीतर कार्यों को पूर्ण कराया जाए।

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बस्तर में मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना में 17 जोड़े बंधे परिणय सूत्र में विधायक किरण सिंह देव ने नव विवाहितों को दिया आशीर्वाद

जशपुर जंक्शन 17 जून 

मुख्यमंत्री कन्या विवाह' राज्य सरकार द्वारा चलाई जाने वाली एक कल्याणकारी योजना है, जिसका मुख्य उद्देश्य गरीब, निराश्रित, और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बेटियों की शादी के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करना है। यह योजना मुख्य रूप से सामूहिक विवाह के माध्यम से सम्पन्न होती है, जिससे गरीब परिवारों पर विवाह का भारी आर्थिक बोझ कम हो सके और फिजूलखर्ची पर रोक लगे।

जगदलपुर स्थित पंडित श्यामा प्रसाद मुखर्जी सभागार (टाउन हॉल) में सोमवार को मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत एक भव्य और गरिमामय सामूहिक विवाह समारोह का आयोजन किया गया। इस पावन अवसर पर मंत्रोच्चार और शहनाई की गूंज के बीच कुल 17 जोड़े सदा-सदा के लिए एक-दूसरे के साथ दाम्पत्य सूत्र में बंध गए। समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित जगदलपुर विधायक श्री किरण सिंह देव ने नवविवाहित जोड़ों के ऊपर अक्षत और पुष्प वर्षा कर उन्हें सुखी और समृद्ध दांपत्य जीवन का आशीर्वाद दिया। 

दो पुनर्वासित जोड़ों ने भी गृहस्थ जीवन को अपनाया

इस विवाह समारोह की सबसे अनूठी और गौरवशाली विशेषता यह रही कि इसमें पुनर्वासित 2 विशेष जोड़े भी शामिल हुए। नारायणपुर जिले में आत्मसमर्पण करने वाले इन पूर्व नक्सली दंपत्तियों में पिलसाय सलाम संग सिरबत्ती और पतिराम संग मनाय कश्यप शामिल हैं, जिन्होंने गृहस्थ जीवन अपनाकर समाज की मुख्यधारा में आगे बढ़ने का संकल्प लिया। विधायक श्री किरण सिंह देव ने इन जोड़ों की सराहना करते हुए कहा कि राज्य सरकार की पुनर्वास नीति के तहत ऐसे कदमों से बस्तर में शांति और खुशहाली के एक नए युग की शुरुआत हो रही है।

बेटियों का सम्मानपूर्ण विवाह समाज का सबसे पुनीत कार्य

विवाह समारोह को संबोधित करते हुए जगदलपुर विधायक श्री किरण सिंह देव ने मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना की महत्ता पर प्रकाश डाला और कहा कि बेटियो का विवाह सबसे महत्वपूर्ण कार्य होता है। हमारी संवेदनशील सरकार के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय एवं महिला बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी रजवाड़े जी के नेतृत्व में पूरे प्रदेश में सामूहिक कन्या विवाह योजना के तहत विवाह हो रहा है। इस योजना के माध्यम से गरीब और जरूरतमंद परिवारों की बेटियों का सम्मानपूर्ण विवाह कराना समाज का सबसे पुनीत कार्य है, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को बड़ी राहत मिलती है। 

आर्थिक बोझ कम कर समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंच रहा लाभ

विधायक श्री देव ने कहा कि आज विवाह के बंधन में बंधे सभी 17 जोड़े एक सशक्त समाज और समृद्ध राष्ट्र के निर्माण में अपनी सहभागिता देंगे। इसके साथ ही यह योजना गरीब बेटियों के विवाह में होने वाले आर्थिक बोझ को कम कर समाज के अंतिम व्यक्ति तक लाभ पहुंचा रही है। उन्होंने कहा कि विगत दिनों प्रदेश के विधायक बेमेतरा ने मुख्यमंत्री सामूहिक कन्या विवाह योजना में विवाह कर सभी को इस योजना का लाभ लेने के लिए प्रेरणा दी।

इस कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष श्री रूपसिंह मंडावी, नगर निगम सभापति श्री खेमसिंह देवांगन, जनपद अध्यक्ष श्री पदलाम नाग, उपाध्यक्ष श्री पुरुषोत्तम कश्यप, पुलिस अधीक्षक श्री शलभ सिन्हा सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि, नवविवाहित जोड़ों के परिजन तथा बड़ी संख्या में प्रबुद्ध नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने वर-वधू को उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।

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सीएम साय के प्रयासों से जशपुर को मिली ऐतिहासिक सौगात।

 

 

 

 

 

 

 जशपुर जिले के विकास इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया है। भारत सरकार के रेल मंत्रालय द्वारा धरमजयगढ़–पत्थलगांव–लोहरदगा नई रेल लाइन परियोजना को विशेष रेल परियोजना के रूप में अधिसूचित कर दिया गया है। इसके साथ ही पहली बार जशपुर जिले को रेल नेटवर्क से जोड़ने का मार्ग प्रशस्त हो गया है।

करीब 291.881 किलोमीटर लंबी यह रेल लाइन रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ से प्रारंभ होकर जशपुर जिले के पत्थलगांव होते हुए झारखंड के लोहरदगा तक विकसित की जाएगी। अधिसूचना जारी होने के साथ ही यह परियोजना प्रभावशील हो गई है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के विशेष प्रयासों और प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देशभर में विकसित की जा रही आधुनिक आधारभूत संरचना के तहत लंबे समय से क्षेत्रवासियों की बहुप्रतीक्षित मांग को बड़ी सफलता मिली है। दशकों से रेल सुविधा की प्रतीक्षा कर रहे जशपुरवासियों के लिए यह उपलब्धि किसी ऐतिहासिक सौगात से कम नहीं है।

नई रेल लाइन से जिले की कनेक्टिविटी में व्यापक सुधार होगा। किसानों, व्यापारियों, विद्यार्थियों और रोजगार की तलाश में बाहर जाने वाले युवाओं को आवागमन की बेहतर सुविधा मिलेगी। वहीं कृषि एवं उद्यानिकी उत्पादों को राष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने में भी आसानी होगी, जिससे किसानों की आय बढ़ने की संभावना है।

परियोजना से पर्यटन गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी। जशपुर के प्राकृतिक एवं धार्मिक पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान होने से स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। साथ ही शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं तक लोगों की पहुंच भी पहले की अपेक्षा अधिक सुगम हो सकेगी।

परियोजना की अधिसूचना जारी होने के बाद जशपुर सहित पूरे क्षेत्र में खुशी का माहौल है। लोगों का मानना है कि यह रेल लाइन क्षेत्र के समग्र सामाजिक और आर्थिक विकास की मजबूत आधारशिला साबित होगी।

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प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने जशपुर को दी बड़ी सौगात, वशिष्ठ कम्युनिटी हॉल का 80 लाख रुपए की लागत से होगा जीर्णोद्धार.....।

जशपुर जंक्शन 09 जून 

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की घोषणा पर अमल करते हुए जशपुर नगरवासियों को एक बड़ी सौगात मिली है। छत्तीसगढ़ शासन द्वारा नगर पालिका परिषद जशपुरनगर के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2026-27 में अधोसंरचना मद से 80 लाख रुपये की तकनीकी स्वीकृति प्रदान की गई है।इस स्वीकृति के तहत वशिष्ठ कम्युनिटी हॉल, जशपुरनगर के जीर्णोद्धार कार्य के लिए 80 लाख रुपये की राशि मंजूर की गई है। लंबे समय से हॉल के उन्नयन की मांग की जा रही थी, जिसे मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने गंभीरता से लेते हुए अपनी घोषणा के अनुरूप स्वीकृति दी है।

इस कार्य के पूर्ण होने से सामाजिक, सांस्कृतिक एवं सामुदायिक कार्यक्रमों के आयोजन के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी तथा नगरवासियों को आधुनिक और सुसज्जित कम्युनिटी हॉल का लाभ मिलेगा।

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सुशासन तिहार 2026 के तहत बालोद और मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिलों की विस्तृत समीक्षा

 

 

 

 मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में सुशासन तिहार 2026 के अंतर्गत बालोद तथा मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिलों में संचालित विकास कार्यों और जनकल्याणकारी योजनाओं की व्यापक समीक्षा की। समीक्षा बैठक में कलेक्टरों, पुलिस अधीक्षकों तथा वरिष्ठ अधिकारियों के साथ राजस्व प्रकरणों, ग्रामीण एवं शहरी विकास, कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, कानून-व्यवस्था तथा विभिन्न विभागीय योजनाओं की प्रगति का विस्तृत आकलन किया गया।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि सुशासन तिहार केवल एक प्रशासनिक अभियान नहीं, बल्कि शासन और जनता के बीच विश्वास को मजबूत करने का माध्यम है। उन्होंने बताया कि इस अभियान के अंतर्गत उन्होंने जनसमस्या निवारण शिविरों और चौपालों के माध्यम से सीधे लोगों से संवाद किया, उनकी समस्याओं को सुना और योजनाओं के क्रियान्वयन की वास्तविक स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने कहा कि भीषण गर्मी के बावजूद प्रशासनिक अमले ने आमजन की समस्याओं के समाधान के लिए समर्पित भाव से कार्य किया है और इस प्रतिबद्धता को आगे भी बनाए रखना होगा।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सुशासन का वास्तविक उद्देश्य नागरिकों की समस्याओं का समयबद्ध, पारदर्शी और संवेदनशील समाधान सुनिश्चित करना है। उन्होंने अधिकारियों को सकारात्मक सोच, जवाबदेही और जनसेवा की भावना के साथ कार्य करने के निर्देश देते हुए कहा कि शासन की किसी भी योजना का पात्र हितग्राही लाभ से वंचित नहीं रहना चाहिए।

*राजस्व प्रकरणों के त्वरित निराकरण और स्वामित्व योजना पर जोर*

मुख्यमंत्री श्री साय ने दोनों जिलों में लंबित राजस्व प्रकरणों की समीक्षा करते हुए नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन तथा नक्शा सुधार से संबंधित मामलों के शीघ्र निराकरण के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि पुराने लंबित मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाया जाए, ताकि नागरिकों को अनावश्यक परेशानियों का सामना न करना पड़े। मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री स्वामित्व योजना तथा राजस्व अभिलेखों के अद्यतन कार्यों में तेजी लाने के भी निर्देश दिए।

*प्रधानमंत्री आवास और पीएम सूर्यघर योजना को मिशन मोड में आगे बढ़ाने के निर्देश*

प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण एवं शहरी) की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्षा ऋतु प्रारंभ होने से पहले अधिकतम स्वीकृत आवासों का निर्माण पूर्ण किया जाए, ताकि हितग्राहियों को शीघ्र लाभ मिल सके। उन्होंने कहा कि आवास निर्माण कार्यों को गति देने के लिए अधिक से अधिक कारीगरों को मेसन प्रशिक्षण प्रदान किया जाए, जिससे भविष्य की आवश्यकताओं की पूर्ति भी सुनिश्चित हो सके।

प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2027 तक प्रदेश में पांच लाख सौर संयंत्र स्थापित करने का लक्ष्य प्राप्त करना है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाकर अधिक से अधिक परिवारों को इस योजना से जोड़ा जाए तथा योजना से मिलने वाले आर्थिक और ऊर्जा संबंधी लाभों की जानकारी लोगों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाई जाए।

*किसानों को खाद-बीज की कमी न हो, नैनो उर्वरकों के उपयोग को बढ़ावा दें*

मुख्यमंत्री श्री साय ने खरीफ सीजन की तैयारियों की समीक्षा करते हुए कहा कि किसानों को खाद एवं बीज की उपलब्धता में किसी प्रकार की कमी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि नैनो यूरिया और नैनो डीएपी के उपयोग के संबंध में किसानों को जागरूक किया जाए तथा इसके लाभों की जानकारी गांव-गांव तक पहुंचाई जाए।

मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के सभी पात्र किसानों को योजना से लाभान्वित करने और एग्रीस्टैक पंजीयन कार्य को प्राथमिकता के आधार पर पूर्ण करने के निर्देश दिए। धान उपार्जन और धान उठाव की समीक्षा करते हुए उन्होंने समयबद्ध उठाव सुनिश्चित करने तथा स्थानीय स्तर पर राइस मिलों की स्थापना के लिए उद्योग विभाग के साथ समन्वय स्थापित कर आवश्यक पहल करने को कहा।

*महिला सशक्तिकरण, आजीविका और कुपोषण उन्मूलन पर विशेष फोकस*

बिहान योजना की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने महिला स्व-सहायता समूहों की आर्थिक गतिविधियों को और अधिक सशक्त बनाने पर बल दिया। उन्होंने रेडी-टू-ईट खाद्य सामग्री निर्माण में महिला समूहों की भागीदारी बढ़ाने तथा दोनों जिलों में इस कार्य को प्रारंभ करने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने आंगनबाड़ी केन्द्रों की स्थिति, कुपोषित बच्चों की संख्या और सुपोषण अभियान की प्रगति की समीक्षा करते हुए कुपोषण उन्मूलन के लिए संचालित योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन तथा सतत निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

समीक्षा के दौरान जानकारी दी गई कि मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले में 20 हजार 245 तथा बालोद जिले में 36 हजार 312 लखपति दीदी तैयार हो चुकी हैं। इसके अलावा औराटोला को लखपति ग्राम के रूप में विकसित किया गया है, जो महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण आजीविका संवर्धन का प्रेरक उदाहरण बनकर उभरा है।

*स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर बरसात पूर्व तैयारी सुनिश्चित करने के निर्देश*

मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य विभाग को निर्देशित किया कि वर्षा ऋतु के दौरान संभावित मौसमी बीमारियों की रोकथाम के लिए अग्रिम तैयारी सुनिश्चित की जाए। उन्होंने प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों और जिला अस्पतालों में आवश्यक दवाओं की उपलब्धता बनाए रखने पर विशेष जोर दिया।

उन्होंने टीबी मुक्त पंचायत अभियान, संस्थागत प्रसव तथा विभिन्न जनस्वास्थ्य कार्यक्रमों की भी समीक्षा की। बालोद जिले में डॉग बाइट की बढ़ती घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री ने आवश्यक रोकथाम, जागरूकता और उपचार संबंधी व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

*पेयजल, सड़क और डिजिटल सेवाओं की प्रगति की समीक्षा*

जल जीवन मिशन के अंतर्गत पेयजल आपूर्ति की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने गर्मी और आगामी वर्षा ऋतु के दौरान निर्बाध पेयजल उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की समीक्षा के दौरान अधिकारियों ने बताया कि मोहला-मानपुर क्षेत्र में स्वीकृत 60 किलोमीटर सड़क निर्माण में से 50 किलोमीटर कार्य पूर्ण किया जा चुका है तथा शेष 10 किलोमीटर सड़क का निर्माण कार्य शीघ्र पूरा कर लिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने ऐसे मार्गों की भी समीक्षा की जो वर्षा ऋतु में आवागमन के लिए कठिन हो जाते हैं और उन्हें बारिश से पहले दुरुस्त करने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ई-ऑफिस, ई-डिस्ट्रिक्ट और अटल डिजिटल सेवा केन्द्रों के माध्यम से नागरिक सेवाओं को अधिक सरल और प्रभावी बनाया गया है। उन्होंने बताया कि आने वाले समय में सेवा सेतु पोर्टल में और अधिक सेवाओं को जोड़ा जाएगा, जिससे ऑनलाइन सेवाओं का दायरा बढ़ेगा और नागरिकों को घर बैठे सुविधाओं का लाभ मिलेगा। उन्होंने अधिकारियों को इसके प्रभावी क्रियान्वयन और सतत निगरानी के निर्देश दिए।

*शिक्षा की गुणवत्ता, कानून-व्यवस्था और सड़क सुरक्षा पर विशेष बल*

मुख्यमंत्री ने पीएम श्री स्कूलों तथा शिक्षा की गुणवत्ता से जुड़े प्रयासों की समीक्षा करते हुए विद्यार्थियों के सीखने के स्तर में सुधार के लिए सतत निगरानी, नवाचार आधारित शिक्षण और परिणामोन्मुखी कार्यप्रणाली अपनाने पर बल दिया।

पुलिस विभाग की समीक्षा के दौरान नए तीन आपराधिक कानूनों के क्रियान्वयन, कानून-व्यवस्था की स्थिति तथा सड़क सुरक्षा संबंधी उपायों की जानकारी ली गई। समीक्षा में बताया गया कि बालोद जिले में सड़क दुर्घटनाओं और उनसे होने वाली मृत्यु दर में कमी दर्ज की गई है।

मुख्यमंत्री ने सड़क सुरक्षा के प्रति व्यापक जनजागरूकता अभियान जारी रखने के निर्देश देते हुए कहा कि हेलमेट पहनने तथा अन्य सुरक्षा मानकों का पालन करने के लिए लोगों को प्रेरित किया जाए।

बैठक में तेंदूपत्ता संग्रहण, खनिज राजस्व प्राप्ति, डीजल, पेट्रोल एवं एलपीजी की उपलब्धता सहित विभिन्न विषयों पर भी चर्चा की गई। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि शासन की सभी जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना प्रशासन की सर्वोच्च जिम्मेदारी है और इसी भावना के साथ सभी अधिकारियों को कार्य करना होगा।

बैठक में मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव श्री राहुल भगत, मुख्यमंत्री के विशेष सचिव श्री रजत बंसल, मुख्यमंत्री के संयुक्त सचिव श्री प्रभात मलिक, दुर्ग संभाग के कमिश्नर श्री एस.एन. राठौर, दुर्ग एवं राजनांदगांव रेंज के आईजी, बालोद तथा मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले के कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक सहित वरिष्ठ अधिकारी वर्चुअल माध्यम से उपस्थित थे।

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जंगल के बीच क्रिकेट का मैदान और उप मुख्यमंत्री अरुण साव के हाथ में बैट बदलते बस्तर की खुशनुमा तस्वीर

 

 

 

सुकमा के जंगलों के बीच मैदान में युवाओं को क्रिकेट खेलते देख उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव खुद को रोक न सके। उन्होंने गाड़ी रुकवाई, खिलाड़ियों के बीच मैदान में पहुंचे और क्रीज पर जाकर बैट थाम लिया। टूर्नामेंट खेल रहे कुशल गेंदबाजों की गेंदों पर कुछ करारे शॉट भी लगाए। यह बदलते बस्तर की खुशनुमा तस्वीर है।

किरंदुल से सुकमा के रास्ते का यह मुनगा गांव था जहां श्री साव ने मैदान में बल्ला भांजा। सुकमा जिले के ग्राम पंचायत कोर्रा का आश्रित गांव है यह। मैदान पर खेलने के लिए जुटे युवाओं से पता चला कि यहां 7 जून से क्रिकेट टूर्नामेंट चल रहा है जिसमें आसपास के गांवों की 16 टीमों ने भाग लिया है। मैदान के एक छोर पर खिलाड़ियों का झुंड तो दूसरे छोर पर दर्शकों का झुंड था।

उप मुख्यमंत्री श्री साव ने कुछ गेंदे खेलने के बाद पिच पर ही खिलाड़ियों से अपने सहज-सरल अंदाज में बातचीत शुरू की, जिससे इस टूर्नामेंट की जानकारी मिली। उन्होंने खिलाड़ियों के मांगे बिना ही सभी 16 टीमों को क्रिकेट किट देने का वादा किया, जिससे वे पूरे साजो-सामान के साथ अपने खेल का आनंद ले सकें। श्री साव से चर्चा के बीच खिलाड़ियों ने खेल मैदान की कमी की बात रखी, जिस पर उन्होंने कलेक्टर को निर्देशित कर समुचित व्यवस्था का आश्वासन दिया।

उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव इन दिनों चार दिनों के बस्तर प्रवास पर हैं। वे रोज दिनभर निर्माण कार्यों और विकास योजनाओं का निरीक्षण कर रहे हैं। साथ ही अधिकारियों की बैठक लेकर इनकी प्रगति की समीक्षा भी कर रहे हैं। बस्तर संभाग के प्रगतिरत काम जल्दी कैसे पूरे हों... अप्रारंभ कार्यों को तत्काल शुरू कर कैसे तेजी से अंजाम तक पहुंचाएं, इन पर बैठकों में मंथन भी कर रहे हैं।

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उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव का बस्तर में निर्माण कार्यों का निरीक्षण जारी।

 

 

 

 उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने अपने बस्तर प्रवास के चौथे दिन आज सुकमा में मिशन अमृत 2.0 के अंतर्गत शहर में पेयजल आपूर्ति की व्यवस्था को मजबूत करने बनाए जा रहे वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के कार्यों का निरीक्षण किया। उन्होंने योजना के तहत शबरी नदी पर निर्माणाधीन इंटेक-वेल के कार्यों को भी देखा। उन्होंने पानी टंकी और पाइपलाइन विस्तार के कार्यों को भी तेजी से पूर्ण करते हुए जनवरी-2027 से मिशन अमृत की इस योजना से सुकमा में जल की आपूर्ति प्रारंभ करने के निर्देश दिए।

केंद्र सरकार की मिशन अमृत 2.0 के तहत नगर पालिका द्वारा 86 करोड़ की लागत से सुकमा शहर की पेयजल व्यवस्था का सुदृढ़ीकरण किया जा रहा है। इसका 54 प्रतिशत काम पूरा कर लिया गया है। उप मुख्यमंत्री श्री साव ने नगरीय प्रशासन विभाग के अधिकारियों से कहा कि सुकमा की आगामी 25 वर्षों की जरूरत को ध्यान में रखकर इसका निर्माण किया जा रहा है। निर्माण और निर्माण सामग्री की गुणवत्ता से किसी प्रकार का समझौता नहीं करना है। काम में तेजी बरकरार रखते हुए नियत समय में इसे पूर्ण करना है। 

उप मुख्यमंत्री श्री साव ने लोक निर्माण विभाग द्वारा सुकमा के कुम्हाररास में 11 करोड़ 62 लाख रुपए की लागत से बनाए जा रहे स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स का भी निरीक्षण किया। उन्होंने कार्यों में तेजी लाते हुए अधिकारियों और निर्माण एजेंसी से दिसम्बर तक इसे पूर्ण करने को कहा।

करीब 10 एकड़ में बन रहे स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में फुटबॉल मैदान, एथलेटिक्स ट्रैक, इंडोर बैडमिंटन कोर्ट, प्रशासनिक भवन, बॉक्स-क्रिकेट, स्वीमिंग-पूल जैसी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। इसके निर्माण से सुकमा की खेल प्रतिभाओं को अपने कौशल को निखारने एक सर्वसुविधायुक्त अधोसंरचना और सुविधाएं मिलेंगी। अब तक इसका 50 प्रतिशत काम पूरा हो गया है। तीनों कार्यों के निरीक्षण के दौरान कलेक्टर श्री अमित कुमार भी उप मुख्यमंत्री के साथ थे।

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राज्यपाल श्री रमेन डेका ने रेत के वैज्ञानिक एवं व्यवस्थित खनन पर दिया जोर।

 

 

 

 

 

 राज्यपाल श्री रमेन डेका ने छत्तीसगढ़ की नदियों और बड़े नालों में रेत खनन की गतिविधियों को वैज्ञानिक, संतुलित और व्यवस्थित ढंग से संचालित किए जाने की आवश्यकता पर बल दिया है। उन्होंने कहा कि रेत राज्य के विकास और आधारभूत संरचना निर्माण के लिए महत्वपूर्ण संसाधन है, इसलिए इसके उपयोग और संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है, क्योंकि इनके अनियंत्रित दोहन से पर्यावरण और जल संसाधनों पर गंभीर दुष्प्रभाव पड़ने की संभावना बनी रहती है। 

लोक भवन में आज राज्यपाल ने खनिज विभाग के सचिव पी. दयानंद से इस विषय पर चर्चा की और आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि रेत खनन निर्धारित नियमों एवं वैज्ञानिक मानकों के अनुरूप किया जाना चाहिए, ताकि पर्यावरण संरक्षण और विकास दोनों उद्देश्यों को समान रूप से साधा जा सके। राज्यपाल ने राज्य में चल रहे ड्रोन आधारित निगरानी और खनिज 2.0 पोर्टल के माध्यम से मॉनिटरिंग की जानकारी लेते हुए इसकी सराहना की।

राज्यपाल ने कहा कि नदियों और बड़े नालों की प्राकृतिक संरचना तथा जलधारण क्षमता को सुरक्षित रखना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि अनियोजित खनन गतिविधियों से नदी तटों, भू-जल स्तर और स्थानीय पारिस्थितिकी पर प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए खनन कार्यों की नियमित निगरानी और अवैध खनन पर प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि नदियों एवं जलस्रोतों की क्षमता बढ़ाने तथा भू-जल संरक्षण के लिए दीर्घकालिक और समन्वित प्रयास किए जाने की आवश्यकता है।

राज्यपाल ने निर्देश दिए कि रेत खनन से संबंधित क्षेत्रों का वैज्ञानिक अध्ययन कराया जाए। उन्होंने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) जैसे विशेषज्ञ संस्थानों से सर्वे और तकनीकी अध्ययन कराया जा सकता है, ताकि खनन गतिविधियों के प्रभावों का आकलन कर बेहतर प्रबंधन की दिशा में कदम उठाए जा सकें।

राज्यपाल डेका ने कहा कि रेत जैसे खनिज संसाधनों का उपयोग राज्य के विकास के लिए आवश्यक है, लेकिन इसके साथ प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को भी प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

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आजादी के 78 साल बाद रोशन होंगे दूरस्थ मजराटोले, सुशासन तिहार में जिले को मिली बड़ी सौगात।

 

 

 

 'सुशासन तिहार-2026' के अवसर पर खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि सामने आई है। जिला प्रशासन और विद्युत विभाग के समन्वित प्रयासों से जिले के 10 दूरस्थ एवं अब तक विद्युत सुविधा से वंचित मजराटोलों के विद्युतीकरण के लिए प्रशासनिक स्वीकृति प्राप्त हो गई है। निविदा प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद इन क्षेत्रों में इसी सत्र के दौरान तेजी से विद्युतीकरण कार्य प्रारंभ कर पूर्ण किया जाएगा।

आजादी के 78 वर्षों बाद जिले के ऐसे दूरस्थ वनांचल एवं ग्रामीण क्षेत्रों में पहली बार बिजली पहुंचने का मार्ग प्रशस्त हुआ है, जहां अब तक अंधेरा ही ग्रामीणों की नियति बना हुआ था। मुख्यमंत्री मजराटोला विद्युतीकरण योजना के तहत निजामडीह, तुम्दादाह, बलरामपुर, कोहकझोरी, संजारी-टाटीघाट, झिलमिली एवं गाताभर्री, घाघरा, लमरा, रिहाडबरा तथा टिनगीपुर जैसे गांवों के मजराटोलों में विद्युत नेटवर्क का विस्तार किया जाएगा।

*ग्रामीण विकास की नई रोशनी, शिक्षा-स्वास्थ्य और आजीविका को मिलेगा बल*

विद्युतीकरण से न केवल घरों में रोशनी पहुंचेगी, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, कृषि और आजीविका के क्षेत्र में भी सकारात्मक बदलाव आएगा। बिजली उपलब्ध होने से बच्चों की पढ़ाई, किसानों की सुविधाएं, छोटे व्यवसाय और शासकीय सेवाओं की पहुंच में उल्लेखनीय सुधार होगा। लंबे समय से बिजली की मांग कर रहे ग्रामीणों के लिए यह निर्णय किसी सपने के साकार होने से कम नहीं है।

*कलेक्टर और विद्युत विभाग के प्रयासों से मिली सफलता*

इस महत्वपूर्ण उपलब्धि के पीछे कलेक्टर श्री इंद्रजीत चन्द्रवाल तथा विद्युत वितरण कंपनी के प्रबंध निदेशक श्री भीम सिंह का विशेष मार्गदर्शन और सतत प्रयास रहा है। उनके नेतृत्व में विभागीय प्रक्रियाओं को गति मिली और वर्षों से लंबित विद्युतीकरण प्रस्तावों को स्वीकृति दिलाने में सफलता प्राप्त हुई।

सुशासन तिहार के दौरान मिली यह सौगात जिले के दूरस्थ ग्रामीण अंचलों के विकास में मील का पत्थर साबित होगी। आने वाले समय में इन मजराटोलों में जगमगाती रोशनी के साथ विकास की नई किरण भी पहुंचेगी, जिससे ग्रामीणों के जीवन में व्यापक बदलाव देखने को मिलेगा।

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जशपुर इचकेला में आयोजित वुमेन टी-20 क्रिकेट चैंपियनशिप 2026 का सफल समापन रांची की जीडी गोयंका अकादमी बनी विजेता, महारानी क्रिकेट क्लब जशपुर उपविजेता

 

 

 

 जिले के ग्राम इचकेला में 28 मई से 1 जून 2026 तक आयोजित वुमेन टी-20 क्रिकेट चैंपियनशिप 2026 का रोमांचक समापन हुआ। महिला क्रिकेट को प्रोत्साहित करने और उभरती प्रतिभाओं को मंच प्रदान करने के उद्देश्य से आयोजित इस प्रतियोगिता में कुल पांच टीमों ने भाग लिया।

फाइनल मुकाबले में जीडी गोयंका अकादमी रांची ने शानदार प्रदर्शन करते हुए महारानी क्रिकेट क्लब जशपुर को पराजित कर चैंपियनशिप का खिताब अपने नाम किया। विजेता टीम को प्रथम पुरस्कार के रूप में 31 हजार रुपये की नगद राशि प्रदान की गई। वहीं उपविजेता महारानी क्रिकेट क्लब जशपुर को 15 हजार रुपये तथा तीसरे स्थान पर रही रायगढ़ जिंदल क्रिकेट अकादमी (जेसीए) को 11 हजार रुपये की पुरस्कार राशि दी गई। फाइनल मुकाबले में प्रिया को उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ चुना गया।

पूरे टूर्नामेंट में कई खिलाड़ियों ने अपनी प्रतिभा से दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। पहले राउंड में जीडी गोयंका अकादमी रांची के खिलाफ मुकाबले में महारानी क्रिकेट क्लब जशपुर की खिलाड़ी आकांक्षा रानी ने शानदार बल्लेबाजी का प्रदर्शन करते हुए 41 गेंदों में 88 रन की विस्फोटक पारी खेली। इसके अलावा स्टार-11 जशपुर के विरुद्ध भी उन्होंने मात्र 32 गेंदों में 88 रन बनाकर अपनी बल्लेबाजी क्षमता का परिचय दिया। पूरे टूर्नामेंट में आकांक्षा रानी ने 10 छक्के और 27 चौके लगाए। वहीं मात्र 11 वर्षीय आस्था रानी ने अपनी गेंदबाजी से सभी को प्रभावित किया।

उन्होंने एक मुकाबले में लगातार चार गेंदों पर चार विकेट लेकर शानदार उपलब्धि हासिल की। उस मैच में उन्होंने कुल सात विकेट अपने नाम किए और अपनी प्रतिभा का बेहतरीन प्रदर्शन किया। प्रतियोगिता में जीडी गोयंका अकादमी रांची, अंबिकापुर क्रिकेट टीम, रायगढ़ जिंदल क्रिकेट अकादमी, महारानी क्रिकेट क्लब जशपुर तथा स्टार-11 जशपुर की टीमों ने हिस्सा लिया। प्रतियोगिता के दौरान बड़ी संख्या में उपस्थित दर्शकों ने रोमांचक मुकाबलों का आनंद लिया तथा आयोजन को महिला क्रिकेट और ग्रामीण क्षेत्र की प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने की सराहनीय पहल बताया।

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विकास, विश्वास और सुशासन का सेतु बना कोण्डापल्ली का बेली ब्रिज मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने किया निरीक्षण, कहा - दूरस्थ क्षेत्रों तक विकास पहुंचाना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता।

 

 

 

जहां कभी दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियां विकास की राह में चुनौती बनती थीं, वहां आज आधुनिक अधोसंरचना नए अवसरों के द्वार खोल रही है। 

प्रदेशव्यापी सुशासन तिहार के अंतर्गत मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज बीजापुर जिले के सुदूर वनांचल क्षेत्र स्थित ग्राम कोण्डापल्ली पहुंचकर बीजापुर-पूवर्ती मार्ग पर निर्मित बेली ब्रिज का निरीक्षण किया। उन्होंने पुल की निर्माण तकनीक, उपयोगिता और क्षेत्र के विकास में उसकी भूमिका की जानकारी लेते हुए इसे बदलते बस्तर की नई तस्वीर का प्रतीक बताया।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सड़क, पुल और अन्य आधारभूत सुविधाएं केवल निर्माण कार्य नहीं हैं, बल्कि वे दूरस्थ क्षेत्रों को शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और विकास की मुख्यधारा से जोड़ने वाले मजबूत माध्यम हैं। राज्य सरकार का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि विकास की पहुंच समाज के अंतिम व्यक्ति तक हो।

*कम समय, कम लागत और अधिक मजबूती की तकनीक*

भारतीय सीमा सड़क संगठन (BRO) द्वारा निर्मित यह बेली ब्रिज बीजापुर-पूवर्ती सड़क परियोजना का महत्वपूर्ण हिस्सा है। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि बेली ब्रिज पारंपरिक पुलों की तुलना में अधिक किफायती, मजबूत और टिकाऊ होते हैं। इनका निर्माण सामान्य पुलों की अपेक्षा लगभग पांच गुना कम लागत में किया जा सकता है तथा इन्हें मात्र एक माह के भीतर तैयार किया जा सकता है। दुर्गम और संवेदनशील क्षेत्रों में त्वरित कनेक्टिविटी स्थापित करने के लिए यह तकनीक अत्यंत प्रभावी सिद्ध हो रही है।

*बीजापुर में 21 बेली ब्रिज बने विकास के वाहक*

उल्लेखनीय है कि बीजापुर जिले में अब तक 21 बेली ब्रिजों का निर्माण किया जा चुका है। इन पुलों के निर्माण से दूरस्थ गांवों तक आवागमन सुगम हुआ है तथा लोगों को आवागमन, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा और आवश्यक सुविधाओं तक पहुंच में बड़ी राहत मिली है। इन संरचनाओं ने क्षेत्र में विकास और जनसेवाओं के विस्तार को नई गति प्रदान की है।

मुख्यमंत्री ने श्रमिकों की मेहनत और समर्पण की सराहना करते हुए कहा कि राज्य के श्रमिक और युवा ही विकास यात्रा के वास्तविक निर्माणकर्ता हैं। उन्होंने श्रमिकों का उत्साहवर्धन करते हुए उनके अनुभव भी साझा किए।

*बदलते बस्तर की नई पहचान*

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि बस्तर में अधोसंरचना विकास के माध्यम से नई संभावनाओं का निर्माण हो रहा है। कोण्डापल्ली का यह बेली ब्रिज केवल एक पुल नहीं, बल्कि विकास, विश्वास और सुशासन का सशक्त प्रतीक है। यह उस नए बस्तर की पहचान है, जहां विकास अब दूरस्थ गांवों और दुर्गम अंचलों तक मजबूती से पहुंच रहा है तथा लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रहा है।

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वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने जन्मदिवस पर किया सुंदरकांड पाठ, प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि की कामना।

 

 

 

वित्त मंत्री श्री ओपी चौधरी अपने जन्मदिवस के अवसर पर रायगढ़ के महापल्ली में आयोजित रामचरितमानस सुंदरकांड पाठ में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने विधि-विधान से हनुमान जी की पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की खुशहाली, सुख-शांति और समृद्धि की कामना की। वित्त मंत्री श्री चौधरी ने कहा कि जन्मदिवस के इस विशेष अवसर पर प्रभु श्रीराम एवं संकटमोचन हनुमान जी का आशीर्वाद प्राप्त करना उनके लिए सौभाग्य की बात है। उन्होंने प्रदेश के विकास, जनकल्याण और सभी नागरिकों के सुखमय जीवन की प्रार्थना की।

श्री चौधरी ने जन्मदिवस पर उन्हें शुभकामनाएं देने वाले सभी नागरिकों, समर्थकों, शुभचिंतकों एवं क्षेत्रवासियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आप सभी का स्नेह, प्रेम और आशीर्वाद उन्हें जनसेवा के लिए निरंतर प्रेरित करता है। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु, जनप्रतिनिधि एवं स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।

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जन्मदिवस पर मौसमी फलों और लड्डू से तौले गए वित्त मंत्री श्री ओपी चौधरी।

 

 

 

वित्त मंत्री श्री ओपी चौधरी के जन्मदिवस के अवसर पर रायगढ़ में क्षेत्रवासियों ने अनूठे अंदाज में उनका सम्मान किया। इस दौरान उन्हें मौसमी फलों एवं लड्डुओं से तौलकर शुभकामनाएं दी गईं। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में नागरिक, समर्थक और शुभचिंतक उपस्थित रहे।

 इस अवसर पर वित्त मंत्री श्री ओपी चौधरी ने भावुक होते हुए कहा कि रायगढ़ क्षेत्रवासियों द्वारा उन्हें जन्मदिवस पर विभिन्न फलों एवं मिठाइयों से तौलना उनके जीवन के सबसे अनमोल क्षणों में से एक है। उन्होंने कहा कि यह सम्मान क्षेत्रवासियों के स्नेह, प्रेम और उन पर किए गए अटूट विश्वास का प्रतीक है।

श्री चौधरी ने सभी नागरिकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि जनता का यह अपनापन और आशीर्वाद उन्हें जनसेवा के प्रति और अधिक समर्पण के साथ कार्य करने की प्रेरणा देता है। उन्होंने सभी शुभचिंतकों, कार्यकर्ताओं और क्षेत्रवासियों को जन्मदिवस पर मिली शुभकामनाओं और स्नेह के लिए धन्यवाद दिया।कार्यक्रम का माहौल उत्साह और उल्लास से भरा रहा तथा उपस्थित लोगों ने वित्त मंत्री के स्वस्थ, दीर्घायु और सफल जीवन की कामना की।

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रोशनी लौटाने की मुहिम में छत्तीसगढ़ आगे: 1.63 लाख से अधिक मोतियाबिंद ऑपरेशन से हजारों चेहरों पर लौटी मुस्कान।

 

 

 

 

 

छत्तीसगढ़ में आंखों की रोशनी बचाने और मोतियाबिंद से दृष्टिहिनता मुक्त समाज की दिशा में स्वास्थ्य विभाग की पहल लगातार प्रभावी साबित हो रही है। राष्ट्रीय दृष्टिहीनता एवं अल्प दृष्टि नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत राज्य ने वर्ष 2025-26 में निर्धारित लक्ष्य की तुलना में उल्लेखनीय उपलब्धि दर्ज करते हुए 1 लाख 63 हजार 641 से अधिक मोतियाबिंद ऑपरेशन पूरे किए गए हैं। यह कुल निर्धारित लक्ष्य का लगभग 91 प्रतिशत है, जिसने प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण और सुलभ नेत्र चिकित्सा सेवाओं की मजबूत तस्वीर प्रस्तुत की है।

स्वास्थ्य विभाग द्वारा Vision 20-20 की अवधारणा के अनुरूप शासकीय संस्थानों, गैर-शासकीय संगठनों (NGO) और निजी अस्पतालों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया गया है। इसका परिणाम यह है कि दूरस्थ क्षेत्रों तक भी नेत्र उपचार सेवाएं पहुँच रही हैं और आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को निःशुल्क उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है। शासन द्वारा अनुबंधित संस्थाओं को नियमानुसार भुगतान सुनिश्चित किए जाने से सेवाओं की निरंतरता और प्रभावशीलता भी बनी हुई है। राज्य में कुल उपलब्धि में शासकीय एवं NGO अस्पतालों की भागीदारी 51 प्रतिशत रही, जबकि निजी क्षेत्र ने 49 प्रतिशत योगदान देकर इस स्वास्थ्य अभियान को गति दी। विभागीय अधिकारियों के अनुसार यह साझेदारी मॉडल न केवल उपचार की पहुँच बढ़ा रहा है, बल्कि समयबद्ध और व्यवस्थित नेत्र चिकित्सा प्रबंधन का भी उदाहरण बन रहा है।

कोविड काल में नेत्र ऑपरेशन प्रभावित होने के कारण मोतियाबिंद के लंबित मामलों में वृद्धि हुई थी, लेकिन अब स्वास्थ्य विभाग ने विशेष अभियान चलाकर स्थिति को तेजी से सुधारा है। भारत सरकार की राष्ट्रीय नेत्र ज्योति योजना के तहत घर-घर सर्वे कर चिन्हित मरीजों का उपचार सुनिश्चित किया जा रहा है, जिससे जिलों को कैटरेक्ट ब्लाइंडनेस बैकलॉग फ्री स्टेटस (CBBFS) दिलाने की दिशा में ठोस प्रगति हो रही है।

प्रदेश के 15 जिले अब तक यह स्टेटस प्राप्त कर चुके हैं, जबकि अन्य जिलों में भी अभियान तेज गति से जारी है। रायपुर स्थित माना का 150 बिस्तरीय नेत्र चिकित्सालय राज्य स्तरीय रेफरल सेंटर के रूप में कार्य करते हुए दूर-दराज के मरीजों को विशेषज्ञ उपचार उपलब्ध करा रहा है। वहीं, बड़े शहरों में स्थित NGO बेस अस्पतालों के माध्यम से विभिन्न जिलों के मरीजों का प्रोटोकॉल आधारित सुरक्षित ऑपरेशन सुनिश्चित किया जा रहा है। समय पर जांच, पहचान और निःशुल्क उपचार की यह व्यवस्था हजारों लोगों के जीवन में नई रोशनी लेकर आई है और छत्तीसगढ़ को नेत्र स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक मजबूत मॉडल के रूप में स्थापित कर रही है।

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जन्मदिवस के अवसर पर वित्त मंत्री श्री ओपी चौधरी ने की गौ-सेवा, संरक्षण के प्रयासों को सराहा।

 

 

 

 जन्मदिवस के विशेष अवसर पर छत्तीसगढ़ के वित्त मंत्री श्री ओपी चौधरी ने रायगढ़ स्थित ऐतिहासिक सेठ किरोड़ीमल गौशाला पहुंचकर गौ-माता की सेवा की और उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। इस दौरान उन्होंने गौशाला परिसर का भ्रमण कर वहां संचालित विभिन्न गतिविधियों का बारीकी से अवलोकन किया और गौ-संरक्षण एवं संवर्धन के लिए किए जा रहे कार्यों की भूरि-भूरि सराहना की।

*गौ-सेवा सनातन परंपरा का अमूल्य प्रतीक*

वित्त मंत्री श्री चौधरी ने उपस्थित जनों को संबोधित करते हुए कहा कि गौ-माता की सेवा भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा का अमूल्य प्रतीक है। अपने जन्मदिवस के अवसर पर गौ-माता की सेवा करने का सौभाग्य प्राप्त होना मेरे लिए अत्यंत सुखद, संतोषजनक और प्रेरणादायी अनुभव है। उन्होंने आगे जोड़ते हुए कहा कि गौ-संरक्षण और संवर्धन के लिए इस गौशाला द्वारा किया जा रहा कार्य पूरे समाज के लिए अनुकरणीय है। गौवंश की सुरक्षा और उनकी उचित देखभाल करना हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के साथ-साथ हमारी सामाजिक जिम्मेदारी का भी एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

*सेवाभावी कार्यकर्ताओं का जताया आभार*

श्री चौधरी ने निस्वार्थ भाव से जुटे गौशाला के संचालकों और सेवाभावी कार्यकर्ताओं की मुक्तकंठ से प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि इन कार्यकर्ताओं के समर्पण, कड़ी मेहनत और अटूट प्रयासों के कारण ही क्षेत्र में गौ-संरक्षण की दिशा में उल्लेखनीय और सकारात्मक कार्य हो रहे हैं। कार्यक्रम के समापन पर वित्त मंत्री ने प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और कल्याण की कामना करते हुए सभी के प्रति अपना आभार व्यक्त किया। इस गरिमामय अवसर पर गौशाला प्रबंधन समिति के सदस्य, स्थानीय जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु व गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

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सुशासन तिहार में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय पहुंचे बीजापुर के सुदूर गांव कोण्डापल्ली : चौपाल में सुनीं ग्रामीणों की समस्याएं।

जशपुर जंक्शन 02 जून

प्रदेशव्यापी सुशासन तिहार के अंतर्गत मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय आज बीजापुर जिले के सुदूर वनांचल क्षेत्र स्थित ग्राम कोण्डापल्ली पहुंचे। मुख्यमंत्री ने यहां आयोजित जनचौपाल में ग्रामीणों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं, योजनाओं के क्रियान्वयन की जमीनी स्थिति जानी तथा शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों से मुलाकात कर उनके जीवन में आए सकारात्मक बदलावों की जानकारी ली।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सुशासन तिहार केवल एक प्रशासनिक अभियान नहीं, बल्कि सरकार और जनता के बीच विश्वास को और मजबूत करने का माध्यम है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि शासन की योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और किसी भी जरूरतमंद को अपने अधिकारों एवं सुविधाओं के लिए भटकना न पड़े। इसी भावना के साथ सरकार स्वयं गांव-गांव पहुंचकर लोगों की समस्याएं सुन रही है और उनके समाधान का प्रयास कर रही है।

जनचौपाल के दौरान मुख्यमंत्री ने विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टॉलों का अवलोकन किया तथा हितग्राहियों को वनाधिकार मान्यता पत्र, जाति एवं निवास प्रमाण पत्र, प्रधानमंत्री आवास योजना, श्रम कार्ड, किसान हितग्राही योजनाओं सहित विभिन्न योजनाओं के तहत लाभ वितरित किए। उन्होंने लाभार्थियों से चर्चा कर योजनाओं के प्रभाव और उनके अनुभवों की जानकारी भी प्राप्त की।

मुख्यमंत्री श्री साय ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि ग्रामीण क्षेत्रों से प्राप्त आवेदनों एवं शिकायतों का प्राथमिकता के आधार पर समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि किसी भी योजना की वास्तविक सफलता तब मानी जाएगी जब उसका लाभ पात्र व्यक्ति तक सही समय पर पहुंचे और आमजन को शासन की संवेदनशीलता का अनुभव हो।

मुख्यमंत्री ने ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि उनकी समस्याओं के समाधान के लिए सरकार पूरी प्रतिबद्धता और संवेदनशीलता के साथ कार्य कर रही है तथा क्षेत्र के विकास में कोई कमी नहीं आने दी जाएगी।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि बस्तर सहित प्रदेश के दूरस्थ और वनांचल क्षेत्रों में विकास की नई धारा पहुंचाना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। सुशासन तिहार के माध्यम से शासन लोगों के द्वार तक पहुंच रहा है, जिससे न केवल समस्याओं का त्वरित निराकरण हो रहा है, बल्कि शासन के प्रति आमजन का विश्वास भी लगातार मजबूत हो रहा है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के विशेष सचिव श्री रजत बंसल सहित अन्य गणमान्यजन उपस्थित थे।

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