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अंत्योदय का संकल्प: 5 लाख भूमिहीन परिवारों को 500 करोड़ की सौगात देंगे सीएम विष्णुदेव साय,25 मार्च को होगा भव्य कार्यक्रम।

 

 

छत्तीसगढ़ सरकार भूमिहीन कृषि मजदूरों के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय 25 मार्च 2026 को बलौदाबाजार में आयोजित भव्य कार्यक्रम में करीब 5 लाख भूमिहीन परिवारों को लगभग 500 करोड़ रुपये की राशि अंतरित करेंगे।

यह सहायता ‘दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना’ के अंतर्गत दी जाएगी, जिसके तहत इस वर्ष 4,95,965 हितग्राहियों को प्रति व्यक्ति 10,000 रुपये सीधे उनके बैंक खातों में भेजे जाएंगे। इसके लिए सरकार ने 495 करोड़ 96 लाख 50 हजार रुपये का प्रावधान किया है।

इस योजना का लाभ 22,028 बैगा और गुनिया परिवारों को भी मिलेगा, जो राज्य की पारंपरिक और सांस्कृतिक विरासत के महत्वपूर्ण संरक्षक माने जाते हैं।

गौरतलब है कि वर्ष 2025 में भी इस योजना के तहत 5,62,112 हितग्राहियों को 562 करोड़ 11 लाख 20 हजार रुपये वितरित किए गए थे, जो सरकार की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

सरकार का उद्देश्य भूमिहीन मजदूर परिवारों को सालाना आर्थिक सहायता देकर उनकी बुनियादी जरूरतों—जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य और दैनिक खर्च—को पूरा करने में मदद करना है। पहले दी जाने वाली 7,000 रुपये की राशि को बढ़ाकर अब 10,000 रुपये प्रति वर्ष कर दिया गया है।

यह योजना न केवल आर्थिक सहयोग का माध्यम है, बल्कि ‘अंत्योदय’ के संकल्प को साकार करते हुए समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाने का प्रयास भी है।

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तिलहन उत्पादन बढ़ाने पर जोर, मुख्यमंत्री साय ने किसान मेले का किया शुभारंभ।

 

 

 

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सरगुजा जिले के अंबिकापुर स्थित राजमोहिनी देवी कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केन्द्र में दो दिवसीय राज्य स्तरीय तिलहन किसान मेले का शुभारंभ किया। इस दौरान उन्होंने विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टॉलों का अवलोकन कर किसानों को दी जा रही आधुनिक कृषि तकनीकों और तिलहन उत्पादन बढ़ाने के प्रयासों की सराहना की।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने विश्व वानिकी दिवस के अवसर पर “एक पेड़ मां के नाम” अभियान के तहत साल का पौधा रोपित किया और पर्यावरण संरक्षण के लिए अधिक से अधिक पौधारोपण करने की अपील की।

अपने संबोधन में मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ कृषि प्रधान राज्य है, जहां लगभग 80 प्रतिशत आबादी कृषि पर निर्भर है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार किसानों से 21 क्विंटल प्रति एकड़ की दर से 3100 रुपए में धान खरीदी कर रही है और अंतर की राशि का भुगतान एकमुश्त किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों से किए हर वादे को पूरा कर रही है।

मुख्यमंत्री ने तिलहन उत्पादन बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि देश वर्तमान में अपनी जरूरत का केवल 57 प्रतिशत तिलहन ही उत्पादन कर पा रहा है, जबकि 43 प्रतिशत आयात करना पड़ता है। इस कमी को दूर करने के लिए राज्य में तिलहन विकास परियोजनाएं संचालित की जा रही हैं। उन्होंने किसानों से वैज्ञानिकों के सुझाव अपनाकर उत्पादन बढ़ाने की अपील की। साथ ही तिलहन फसलों के लिए प्रति एकड़ 11 हजार रुपए प्रोत्साहन राशि देने की जानकारी भी दी।

उन्होंने किसानों को आय बढ़ाने के लिए पशुपालन, दुग्ध उत्पादन और मत्स्य पालन जैसे सहायक व्यवसाय अपनाने की सलाह दी। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि जीएसटी में सुधार के बाद कृषि यंत्रों की कीमतों में कमी आई है, जिससे किसानों को लाभ मिल रहा है।

इस अवसर पर कृषि मंत्री राम विचार नेताम ने नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत के आह्वान का उल्लेख करते हुए दलहन एवं तिलहन उत्पादन बढ़ाने पर जोर दिया।

कार्यक्रम में इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल ने बताया कि राज्य में किसानों को उन्नत बीज उपलब्ध कराए जा रहे हैं तथा कृषि महाविद्यालयों और कृषि विज्ञान केंद्रों के माध्यम से हर वर्ष हजारों किसानों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

कार्यक्रम में जनप्रतिनिधि, अधिकारी एवं बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।

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ग्रामीण विकास की नई दिशा: ‘VB-G-RAM-G’ से बदलेगा भारत का भविष्य गणेश शंकर मिश्रा।

 

 

भारत सरकार के पत्र सूचना कार्यालय (PIB), रायपुर द्वारा कवर्धा में ‘विबी-जी-राम-जी (VB-G-RAM-G): ग्रामीण भारत का परिवर्तनकारी बदलाव’ विषय पर एक दिवसीय ‘वार्तालाप’ (मीडिया कार्यशाला) का आयोजन किया गया।कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में गणेश शंकर मिश्रा (उपाध्यक्ष, छत्तीसगढ़ राज्य नीति आयोग) तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में गोपाल वर्मा (कलेक्टर, कबीरधाम) उपस्थित रहे।

मुख्य अतिथि श्री मिश्रा ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि ‘VB-G-RAM-G’ केवल रोजगार देने की योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत के संपूर्ण आजीविका तंत्र को मजबूत करने वाली एक परिवर्तनकारी पहल है। उन्होंने बताया कि योजना में 60 दिनों का विशेष ‘ब्लॉक’ रखा गया है, ताकि कृषि कार्यों विशेषकर फसल कटाई के दौरान किसानों की आजीविका प्रभावित न हो।

उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि भारत की लगभग 73% आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करती है, ऐसे में यह योजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने में अहम भूमिका निभाएगी। श्री मिश्रा ने इसे विकसित भारत 2047 के विजन को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया और नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना की।

कार्यक्रम के दौरान कलेक्टर गोपाल वर्मा ने योजना के क्रियान्वयन की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि इस योजना के तहत ग्रामीण परिवारों को 125 दिनों का गारंटीकृत रोजगार प्रदान किया जाएगा, जिससे उनकी आय और जीवन स्तर में सुधार होगा।

यह कार्यशाला मीडिया प्रतिनिधियों के लिए योजना की समझ बढ़ाने और उसके प्रभावी प्रचार-प्रसार के उद्देश्य से आयोजित की गई थी, ताकि अधिक से अधिक ग्रामीण परिवार इसका लाभ उठा सकें।

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सीएम साय की बड़ी घोषणा: बैगाओं को आर्थिक सहायता, अखरा विकास हेतु ₹15–25 लाख का प्रावधान; सरहुल महोत्सव में शामिल हुए।

 

 

 

 

 जशपुर के दीपू बगीचा में आयोजित सरहुल महोत्सव में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने जनजातीय संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन के लिए महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार जनजातीय परंपराओं और सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने के लिए प्रतिबद्ध है। इसी कड़ी में गांव के बैगाओं को प्रतिवर्ष ₹5000 की आर्थिक सहायता दी जाएगी, वहीं पारंपरिक अखरा के विकास के लिए ₹15 से ₹25 लाख तक की राशि उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि यह पहल जनजातीय समाज की पहचान और सांस्कृतिक विरासत को मजबूत करने में सहायक होगी।

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने धरती माता, सूर्य देव एवं साल वृक्ष की विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर प्रदेश की सुख-समृद्धि, अच्छी वर्षा और भरपूर फसल की कामना की। पारंपरिक रीति के अनुसार बैगा द्वारा उनके कान में सरई (साल फूल) खोंचकर शुभ रस्म निभाई गई।

महोत्सव में बड़ी संख्या में महिलाएं और युवतियां पारंपरिक वेशभूषा में शामिल हुईं और सरहुल नृत्य प्रस्तुत किया। मांदर की थाप पर पूरा वातावरण उत्साह और उल्लास से गूंज उठा। मुख्यमंत्री ने सभी को सरहुल पर्व एवं हिंदू नववर्ष की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह पर्व प्रकृति, आस्था और सामाजिक एकता का प्रतीक है।

इस अवसर पर विभिन्न जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी और बड़ी संख्या में आम नागरिक उपस्थित रहे। सरहुल महोत्सव के माध्यम से जनजातीय समाज की समृद्ध परंपरा, प्रकृति प्रेम और सामूहिक जीवन की झलक देखने को मिली, जिसने कार्यक्रम को यादगार बना दिया।

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नववर्ष पर CM विष्णु देव साय का संदेश: नव ऊर्जा, नव संकल्प के साथ आगे बढ़े छत्तीसगढ़।

 

 

 

 मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रदेशवासियों को चैत्र नवरात्रि, हिंदू नववर्ष (नव संवत्सर) एवं गुड़ी पड़वा के पावन अवसर पर हार्दिक शुभकामनाएं दी हैं।

 

 उन्होंने सभी के जीवन में सुख, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और शांति की कामना की।

मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि चैत्र मास के प्रथम दिन से प्रारंभ होने वाला हिंदू नववर्ष नव ऊर्जा, नव संकल्प और नव चेतना का प्रतीक है। इसी दिन से शक्ति उपासना के महापर्व चैत्र नवरात्रि का भी शुभारंभ होता है, जिसे पूरे देश में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है।

उन्होंने कहा कि गुड़ी पड़वा विशेष रूप से महाराष्ट्र सहित देश के विभिन्न हिस्सों में नववर्ष के स्वागत का उत्सव है, जो आशा, उत्साह और समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं का प्रतीक है।

मुख्यमंत्री साय ने छत्तीसगढ़ की समृद्ध देवी परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि मां शीतला, मां दंतेश्वरी, महामाया, बम्लेश्वरी, कंकाली, बिलईमाता और चंद्रहासिनी देवी के विविध स्वरूप प्रदेश की आस्था और संस्कृति में गहराई से रचे-बसे हैं। यह आध्यात्मिक विरासत प्रदेश की पहचान को और मजबूत बनाती है।

उन्होंने कहा कि नवरात्रि के पावन दिनों में छत्तीसगढ़ की धरती भक्ति, साधना और शक्ति आराधना से आलोकित हो उठती है। देवी उपासना जहां आध्यात्मिक ऊर्जा देती है, वहीं सामाजिक समरसता और सकारात्मक सोच का भी संचार करती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को सहेजते हुए विकास और विश्वास के नए आयाम स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने मां भगवती से प्रार्थना की कि उनकी कृपा से छत्तीसगढ़ निरंतर विकास के पथ पर अग्रसर रहे और हर परिवार में सुख-शांति व समृद्धि बनी रहे।

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मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में जिले में लिखी जा रही है विकास की नई गाथा।

 

 

 मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के दूरदर्शी नेतृत्व और विकासोन्मुखी सोच के अनुरूप जशपुर जिले में विकास की नई इबारत लिखी जा रही है। जिले में आधारभूत संरचना को मजबूत बनाने की दिशा में लगातार ठोस पहल की जा रही है इसके परिणामस्वरूप आने वाले समय में जिला विकास के नए आयाम स्थापित करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में बीते दो वर्षों से अधिक के कार्यकाल में आम नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से योजनाबद्ध तरीके से विकास कार्यों का संचालन किया जा रहा है। इन योजनाओं का प्रभाव अब स्पष्ट रूप से धरातल पर दिखाई देने लगा है। जिले के गांवों से लेकर शहरों तक सड़कों, पुलों और पुलियों का निर्माण तेजी से किया जा रहा है, जिससे आवागमन सुविधाजनक और सुरक्षित बन रहा है।

     इसी क्रम में वित्तीय वर्ष 2025-26 के अंतर्गत प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत जिले में 42 नई सड़कों को स्वीकृति प्रदान की गई है। इन सड़कों का निर्माण 126 करोड़ रुपए की लागत से किया जाएगा। वर्तमान में सभी सड़कों की निविदा प्रक्रिया जारी कर दी गई है और जल्द ही निर्माण कार्य प्रारंभ होगा। स्वीकृत सड़कों में जशपुर विकासखंड में 5 सड़कें, मनोरा विकासखंड में 7 सड़कें, दुलदुला विकासखंड में 7 सड़कें, कुनकुरी विकासखंड में 13 सड़कें तथा फरसाबहार विकासखंड में 10 सड़कों का निर्माण किया जाएगा। 

*मुख्यमंत्री नेतृत्व में सड़कों और पुल-पुलिया के निर्माण से बदल रही है जिले की तस्वीर*

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के निर्देशानुसार जिले में अधोसंरचना विकास को प्राथमिकता देते हुए व्यापक स्तर पर कार्य किए जा रहे हैं। इन प्रयासों के परिणामस्वरूप जिले के दूरस्थ और ग्रामीण क्षेत्रों तक भी विकास की रोशनी पहुँच रही है। लगातार सड़कों, पुलों और पुलियाओं को मिल रही स्वीकृति तथा उनके निर्माण से न केवल आवागमन सुगम हो रहा है, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल रही है। बेहतर सड़क संपर्क के कारण कृषि उत्पादों का परिवहन आसान हो रहा है, जिससे किसानों को अपने उत्पाद समय पर बाजार तक पहुँचाने में सुविधा मिल रही है। साथ ही निर्माण कार्यों के माध्यम से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसरों में भी वृद्धि हो रही है। इसके अतिरिक्त विद्यार्थियों के लिए विद्यालयों और महाविद्यालयों तक पहुँचना अधिक सरल हो रहा है। बेहतर संपर्क मार्गों के कारण स्वास्थ्य सेवाओं तक भी लोगों की पहुँच आसान हो रही है और आपातकालीन परिस्थितियों में मरीजों को शीघ्र अस्पताल पहुँचाने में मदद मिल रही है। जिले के दूरस्थ क्षेत्रों में निवास कर रहे विशेष पिछड़ी जनजाति समुदायों को भी इन सड़कों से विशेष लाभ मिल रहा है। सड़कों के निर्माण से इन समुदायों का संपर्क विद्यालयों, स्वास्थ्य सेवाओं, मंडियों तथा अन्य आवश्यक सुविधाओं से सुदृढ़ हो रहा है। इससे उन्हें विकास की मुख्यधारा से जोड़ने में भी महत्वपूर्ण सहायता मिल रही है। 

  *ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री के प्रति जताया आभार*

जिले में सड़कों के व्यापक विस्तार से न केवल आवागमन पहले की तुलना में अधिक सुगम और सुरक्षित हुआ है, बल्कि इससे ग्रामीणों के जीवन स्तर में भी उल्लेखनीय सुधार देखने को मिल रहा है। इन विकास कार्यों के लिए ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय और राज्य सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया है। ग्रामीणों का कहना है कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में क्षेत्र में विकास की गति तेज हुई है और इसका सकारात्मक प्रभाव अब स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है।

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कलेक्टर श्री रोहित व्यास ने जनदर्शन में सुनी आमजन की समस्याएं।

 

 

 कलेक्टर श्री रोहित व्यास ने आज मंगलवार को जिला कार्यालय में आयोजित जनदर्शन कार्यक्रम में आम नागरिकों से सीधे रूबरू होकर उनकी समस्याओं और मांगों को गंभीरतापूर्वक सुना। जनदर्शन में जिले के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे नागरिकों ने अपनी व्यक्तिगत एवं सामूहिक समस्याओं से संबंधित आवेदन प्रस्तुत किए। कलेक्टर ने सभी आवेदनों का ध्यानपूर्वक अवलोकन करते हुए संबंधित विभागों के अधिकारियों को प्रत्येक प्रकरण का त्वरित, पारदर्शी एवं गुणवत्तापूर्ण निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

     आज आयोजित जनदर्शन में कुल 28 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें प्रमुख रूप से राजस्व प्रकरण, स्वच्छता एवं साफ-सफाई, अधोसंरचना निर्माण, आजीविका उन्नयन, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ, तथा विभिन्न शासकीय योजनाओं से संबंधित समस्याएँ और मांगें शामिल थीं। कलेक्टर श्री व्यास ने संबंधित विभागीय अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि सभी आवेदनों को प्राथमिकता के आधार पर समय-सीमा के भीतर उनका निराकरण किया जाए, ताकि नागरिकों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े। 

   कलेक्टर श्री रोहित व्यास ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि आवेदनों पर की गई कार्यवाही की जानकारी संबंधित आवेदकों को समय-समय पर उपलब्ध कराई जाए, जिससे उन्हें अपने प्रकरण की स्थिति की स्पष्ट जानकारी मिल सके। उन्होंने विशेष रूप से जनसुविधाओं से जुड़े मामलों, जैसे पेयजल, सड़क, स्वच्छता और शासकीय योजनाओं के लाभ से संबंधित प्रकरणों पर संवेदनशीलता और जवाबदेही के साथ कार्रवाई करने पर जोर दिया।

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ओडिशा के कटक स्थित एससीबी मेडिकल कॉलेज में हुई दुर्घटना पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने जताया गहरा शोक।

 

 मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने ओडिशा के कटक स्थित एससीबी मेडिकल कॉलेज के ट्रॉमा केयर आईसीयू में आग लगने की दुर्घटना में हुई जनहानि पर गहरा दुःख व्यक्त किया है। उन्होंने इस घटना को अत्यंत पीड़ादायक और हृदयविदारक बताया है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने शोक संतप्त परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएँ व्यक्त करते हुए कहा कि इस दुखद घड़ी में छत्तीसगढ़ की जनता उनके साथ खड़ी है। उन्होंने ईश्वर से दिवंगत आत्माओं की शांति तथा घायलों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना की है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने महाप्रभु जगन्नाथ स्वामी से प्रार्थना करते हुए कहा कि वे दिवंगत पुण्यात्माओं को अपने श्रीचरणों में स्थान दें और शोकाकुल परिवारों को इस कठिन समय को सहने की शक्ति प्रदान करें।

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“मरीजों की सेहत से समझौता नहीं” - स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल का मनेन्द्रगढ़ सिविल अस्पताल में औचक निरीक्षण

 

 

 प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने रविवार को शासकीय सिविल अस्पताल मनेन्द्रगढ़ का औचक निरीक्षण कर अस्पताल की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने अस्पताल में भर्ती मरीजों से मुलाकात कर उनका हालचाल जाना तथा उन्हें मिल रही स्वास्थ्य सुविधाओं के बारे में जानकारी ली।

निरीक्षण के दौरान स्वास्थ्य मंत्री ने अस्पताल में उपचार व्यवस्था, दवाइयों की उपलब्धता, साफ-सफाई तथा अन्य व्यवस्थाओं की विस्तार से समीक्षा की। उन्होंने डॉक्टरों एवं अस्पताल प्रबंधन से आवश्यक जानकारी लेते हुए मरीजों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। मंत्री ने कहा कि मरीजों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने अस्पताल प्रबंधन को निर्देशित किया कि मरीजों को समय पर इलाज और आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं।

इस संबंध में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अविनाश खरे ने बताया कि स्वास्थ्य मंत्री ने अस्पताल का औपचारिक निरीक्षण किया। रविवार होने के कारण ओपीडी बंद थी, इसके बावजूद उन्होंने अस्पताल के विभिन्न वार्डों का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं की जानकारी ली और साफ-सफाई को लेकर संतोष व्यक्त किया।

सीएचएमओ डॉ. खरे ने बताया कि अस्पताल परिसर में अनावश्यक रूप से आने वाले अवांछनीय तत्वों की रोकथाम के लिए सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ किया गया है। ऐसे लोगों पर निगरानी रखने के लिए अस्पताल में सुरक्षा गार्ड की व्यवस्था की गई है, जो दो शिफ्टों में तैनात रहते हैं। उन्होंने बताया कि भविष्य में जब मेडिकल कॉलेज प्रारंभ होगा, तब सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत किया जाएगा। इस दौरान सीएचएमओ डॉ. अविनाश खरे, स्वप्निल तिवारी, मंडल अध्यक्ष रवि वर्मा सहित अस्पताल के चिकित्सक, अधिकारी एवं स्टाफ उपस्थित रहे।

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गढ़फुलझर नानकसागर में होला मोहल्ला कार्यक्रम में शामिल हुएमुख्यमंत्री विष्णु देव साय बनेगा आस्था और पर्यटन का प्रमुख केंद्र।

 

 

 

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय आज महासमुंद जिले के बसना क्षेत्र स्थित ऐतिहासिक एवं पवित्र स्थल गढ़फुलझर के नानकसागर में आयोजित होला मोहल्ला कार्यक्रम में शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने यहां पवित्र गुरु ग्रंथ साहिब के समक्ष माथा टेका तथा विशेष कीर्तन समागम और अरदास में भाग लेकर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि की कामना की। इस अवसर पर सिख समाज की ओर से मुख्यमंत्री को सरोफा भेंट कर आत्मीय सम्मान किया गया।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने अपने उद्बोधन में कहा कि गढ़फुलझर की पावन धरती स्थित नानकसागर अत्यंत श्रद्धा और आस्था का केंद्र है, जहां पूज्य गुरु नानक देव जी के चरण पड़े हैं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ संतों की तपोभूमि रही है, जहां अनेक महान संतों ने मानवता, सेवा और सद्भाव का संदेश दिया है। इस पवित्र स्थल पर आकर उन्हें अत्यंत गर्व और आत्मिक आनंद की अनुभूति हो रही है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश के सभी प्रमुख तीर्थस्थलों के संरक्षण और समुचित विकास के लिए प्रतिबद्ध है। इसी दिशा में गढ़फुलझर को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की घोषणा पहले ही की जा चुकी है। इसके विकास कार्यों के लिए लगभग 2 करोड़ 50 लाख रुपये की स्वीकृति प्रदान की गई है और निर्माण कार्य जारी है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि इन कार्यों को शीघ्र पूर्ण किया जाए तथा नानकसागर क्षेत्र में पर्यटन सुविधाओं का विस्तार किया जाए, जिससे यह स्थल प्रदेश और देश के श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बन सके।

बसना विधायक श्री संपत अग्रवाल ने अपने संबोधन में कहा कि सिख समाज सदैव संगठन, सेवा और सामाजिक समरसता की भावना के साथ आगे बढ़ने वाला समाज रहा है। 

उन्होंने कहा कि गढ़फुलझर न केवल सिख समाज की आस्था का केंद्र है, बल्कि यह सर्वधर्म समभाव और सद्भावना की जीवंत मिसाल भी है। 

कार्यक्रम में कृषि मंत्री श्री रामविचार नेताम, बसना विधायक श्री संपत अग्रवाल, छत्तीसगढ़ राज्य बीज निगम के अध्यक्ष श्री चंद्रहास चंद्राकर, छत्तीसगढ़ राज्य अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण के अध्यक्ष श्री भूपेंद्र सिंह सवन्नी, छत्तीसगढ़ राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष श्री अमरजीत छाबड़ा सहित सिख समाज के अनेक गणमान्यजन और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।

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साइबर ठगों से बचने के लिए विद्युत उपभोक्ता रहे सतर्क, सतर्कता ही समझदारी मोर बिजली मोबाइल एप केवल Play Store या App Store से ही डाउनलोड करें।

 

 

 मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना के पंजीयन अथवा किसी भी प्रकार के भुगतान के लिए किसी अनजान वॉट्सएप, मेल अथवा एसएमएस पर क्लिक करने से बचें । मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना के नाम पर किसी भी लिंक या एपीके फाइल को डाउनलोड न करें। छत्तीसगढ राज्य पॉवर कंपनी अपनी किसी भी योजना अथवा सेवा के लिए कभी भी कोई एपीके पाइल अथवा कोई वेब लिंक नहीं भेजती है।

          छत्तीसगढ राज्य पॉवर कंपनी से के एमडी श्री भीम सिंह से प्राप्त जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना को आम उपभोक्ता तक पहुँचाने पॉवर कंपनी मैदानी स्तर पर शिविर का करेगी। उपभोक्ता अपना कोई भी भुगतान सिर्फ मोर बिजली एप, कंपनी की वेबसाइट, एटीपी सेंटर अथवा नजदीकी कार्यालय में ही करें, किसी मैदानी कर्मचारी को भी नकद भुगतान न करने की सलाह दी गई है। पंजीयन राशि के भुगतान की सुविधा केवल मोर बिजली एप, एटीपी केंद्र और संबंधित विद्युत कार्यालय के माध्यम से ही उपलब्ध कराई गई है। बिजली बिल भुगतान हो या कोई अन्य सूचना पॉवर कंपनी अपने उपभोक्ताओं को संदेश सिर्फ CSPDCL-S सेंडर ID से ही भेजती है।

          मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना अथवा विद्युत सेवा से संबंधित किसी अन्य जानकारी के लिए पॉवर कंपनी की केंद्रीकृत कॉल सेंटर के टोल फ्री नंबर 1912 पर उपभोक्ता कॉल कर सकते हैं, अथवा नजदीकी सीएसपीडीसीएल के कार्यालय में संपर्क कर सकते हैं।

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बिजली बिल भुगतान समाधान योजना 2026 शुरू, 28 लाख से अधिक उपभोक्ताओं को 757 करोड़ की राहत।

 

 

 

विष्णु देव साय ने राजधानी रायपुर में “बिजली बिल भुगतान समाधान योजना 2026” का शुभारंभ किया। इस योजना के माध्यम से राज्य के लगभग 28 लाख 42 हजार बिजली उपभोक्ताओं को 757 करोड़ रुपये से अधिक की राहत मिलेगी। मुख्यमंत्री ने पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सालय के सभागार से योजना का शुभारंभ करते हुए हितग्राहियों को प्रमाण पत्र भी प्रदान किए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बिजली आज जीवन की मूलभूत आवश्यकता बन चुकी है, लेकिन आर्थिक कठिनाइयों के कारण कई परिवार समय पर बिजली बिल का भुगतान नहीं कर पाते, जिससे सरचार्ज बढ़ जाता है। इस समस्या को देखते हुए राज्य सरकार ने यह समाधान योजना शुरू की है, जिससे उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिलेगी।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत 2,931 हितग्राहियों को 8 करोड़ 79 लाख रुपये की सब्सिडी भी अंतरित की। उन्होंने बताया कि इस योजना के प्रति प्रदेश में लोगों की रुचि बढ़ रही है और अब तक करीब 36 हजार लोग इससे जुड़ चुके हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में वर्ष 2014 के बाद देश के लगभग 18 हजार गांवों तक बिजली पहुंचाई गई, जिससे लंबे समय से अंधेरे में रहे गांव भी रोशन हुए। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ में अपने संसाधनों से लगभग 30 हजार मेगावाट बिजली उत्पादन किया जा रहा है और सरकार प्रदेशवासियों को निर्बाध बिजली आपूर्ति के लिए प्रतिबद्ध है।

उन्होंने कहा कि कोरोना काल में कई उपभोक्ता बिजली बिल का भुगतान नहीं कर पाए थे, जिससे बकाया बढ़ गया था। राज्य सरकार ने उपभोक्ताओं की इसी परेशानी को ध्यान में रखते हुए समाधान योजना लागू की है।

योजना के तहत 31 मार्च 2023 की स्थिति में निष्क्रिय उपभोक्ता, सक्रिय एकल बत्ती कनेक्शनधारी उपभोक्ता तथा सक्रिय अशासकीय घरेलू व कृषि उपभोक्ताओं को लाभ मिलेगा। इनमें अधिभार (सरचार्ज) में 100 प्रतिशत छूट तथा मूल बकाया राशि में 75 प्रतिशत तक छूट का प्रावधान रखा गया है।

योजना का लाभ लेने के लिए उपभोक्ताओं को पंजीयन के समय बकाया राशि का कम से कम 10 प्रतिशत भुगतान करना होगा, जबकि शेष राशि किस्तों में जमा की जा सकेगी। यह योजना 30 जून 2026 तक प्रभावी रहेगी।

कार्यक्रम में रायपुर उत्तर विधायक पुरंदर मिश्रा, रायपुर नगर निगम महापौर मीनल चौबे, जिला पंचायत अध्यक्ष नवीन अग्रवाल सहित बड़ी संख्या में अधिकारी-कर्मचारी और विद्युत उपभोक्ता उपस्थित थे।

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नगरपालिकाओं एवं त्रिस्तरीय पंचायतों के आम / उप निर्वाचन 2026 हेतु निर्वाचक नामावली कार्यक्रम जारी।

 

 

छत्तीसगढ़ राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा नगरपालिकाओं एवं त्रिस्तरीय पंचायतों के आगामी आम एवं उप निर्वाचन 2026 के लिए निर्वाचक नामावली तैयार एवं पुनरीक्षित किए जाने हेतु कार्यक्रम जारी कर दिया गया है। आयोग द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार स्थानीय निकायों की निर्वाचक नामावली दिनांक 01 अप्रैल 2026 की स्थिति के आधार पर तैयार की जाएगी। जिन मतदाताओं के नाम संबंधित स्थानीय निकाय के क्षेत्र, वार्ड अथवा पंचायत से संबंधित भारत निर्वाचन आयोग की मतदाता सूची में दर्ज होंगे, वही मतदाता स्थानीय निकायों की निर्वाचक नामावली में नाम दर्ज कराने के पात्र होंगे।

जारी कार्यक्रम के अनुसार दावे-आपत्तियों के निपटारे की अंतिम तिथि 23 अप्रैल 2026 तक जिन मतदाताओं के नाम भारत निर्वाचन आयोग की विधानसभा निर्वाचक नामावली में दर्ज होंगे, वे आवश्यक दस्तावेजों के साथ प्रारूप क-1 में रजिस्ट्रीकरण अधिकारी अथवा सहायक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी के समक्ष आवेदन प्रस्तुत कर स्थानीय निकाय की निर्वाचक नामावली में अपना नाम दर्ज करा सकेंगे।

नगरीय निकाय उप निर्वाचन के अंतर्गत अध्यक्ष के कुल 02 पद, क्रमशः नगरपालिका परिषद सारंगढ़ (जिला-सारंगढ़-बिलाईगढ़) तथा नगरपालिका परिषद शिवपुर-चरचा (जिला-कोरिया) में रिक्त हैं, साथ ही पार्षदों के 15 पद भी रिक्त हैं। इसके अतिरिक्त नवगठित चार निकायों—नगर पंचायत घुमका (जिला-राजनांदगांव), नगर पंचायत बम्हनीडीह (जिला-जांजगीर-चांपा), नगर पंचायत शिवनंदनपुर (जिला-सूरजपुर) तथा नगर पंचायत पलारी (जिला-बलौद)—में अध्यक्ष के 04 पद तथा पार्षदों के कुल 60 पद रिक्त हैं।

इसी प्रकार त्रिस्तरीय पंचायतों में जनपद पंचायत सदस्य के 08 पद, सरपंच के 78 पद तथा पंच के 1056 पद रिक्त हैं। इस प्रकार प्रदेश के 33 जिलों में कुल 1142 पद रिक्त हैं, जिनका निर्वाचन कराया जाना है।

निर्वाचक नामावली तैयार करने हेतु जारी कार्यक्रम के अनुसार रजिस्ट्रीकरण अधिकारी, सहायक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी तथा प्राधिकृत अधिकारियों का प्रशिक्षण 24 मार्च 2026 तक कराया जाएगा तथा निर्वाचक नामावली का मुद्रण 09 अप्रैल 2026 तक किया जाएगा। निर्वाचक नामावली का प्रारंभिक प्रकाशन 13 अप्रैल 2026 को किया जाएगा, जिसके बाद दावे-आपत्तियां प्राप्त की जाएंगी। दावे-आपत्तियां प्राप्त करने की अंतिम तिथि 20 अप्रैल 2026 निर्धारित की गई है, जबकि प्रारूप क-1 में दावा प्रस्तुत करने की अंतिम तिथि 24 अप्रैल 2026 होगी। रजिस्ट्रीकरण अधिकारी द्वारा दावे-आपत्तियों के निराकरण के आदेश के विरुद्ध अपील ऐसा आदेश पारित होने के 05 दिवस के भीतर सक्षम अधिकारी के समक्ष की जा सकेगी। निर्वाचक नामावली का अंतिम प्रकाशन 05 मई 2026 को किया जाएगा।

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आम में मैंगो हॉपर का प्रकोप और नियंत्रण के उपाय

 

 

 

मैंगो हॉपर आम के पेड़ों में लगने वाला एक प्रमुख कीट है। यह खासकर फूल आने के समय-मंजर आने पर ज्यादा नुकसान करता है। यह कीट पत्तियों और मंजरियों का रस चूसता है जिससे फल बनने की क्षमता कम हो जाती है।

       उद्यान विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार मंजरियों और नई पत्तियों पर छोटे-छोटे हरे व भूरे कीट दिखाई देते हैं यही इसकी पहचान होती है। पत्तियां और मंजरियां चिपचिपी हो जाती हैं। उस पर काली फफूंदी जम जाती है। फूल झड़ जाते हैं और फल कम बनते हैं।

       इसके प्रभावी समाधान के लिये कृषकों सुबह या शाम के समय एजाडिरेक्टिन 10000 पीपीएम में 01 एमएल प्रति लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करना चाहिए। नीम तेल का 0.5 से 1 प्रतिशत 05 से 10 एमएल लीटर पानी के साथ छिड़काव करना चाहिए।  

       यदि प्रकोप ज्यादा हो तो इनमें से किसी एक दवा का छिड़काव करें कीटनाशक का नाम मात्रा छिड़काव किया जा सकता है। इनमें प्रति लीटर पानी के साथ इमिडाक्लोप्रिड 0.3 मिली प्रति लीटर पानी थियामेथोक्सम 0.4 ग्राम प्रति लीटर पानी लैम्ब्डा-साइहेलोथिन 1.0 मिली प्रति लीटर पानी 10-15 दिन के अन्तराल में 2-3 बार छिड़काव करने से अच्छा नियंत्रण मिलता है।

           इसके साथ ही पेडों की घनी टहनियों को काटें ताकि धूप और हवा अंदर तक जा सके, जिससे हॉपर का पनपना कम हो, बाग की नियमित सफाई करें। जब फल मटर के दाने के बराबर हो जाएं, तब हल्की सिंचाई शुरू करें और नमी बनाए रखें।

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विधानसभा में वित्त मंत्री ओपी चौधरी के विभागों के लिए 11,470 करोड़ से अधिक की अनुदान मांगें पारित जीएसटी 2.0 से जनता को राहत।

 

 

 

 

छत्तीसगढ़ विधानसभा में बुधवार को वित्त मंत्री ओपी चौधरी के विभागों के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 हेतु 11 हजार 470 करोड़ 62 लाख 50 हजार रुपए की अनुदान मांगें पारित कर दी गईं। इसमें वित्त विभाग के लिए 9,630 करोड़ 30 लाख 20 हजार रुपए, आवास एवं पर्यावरण विभाग के लिए 1,247 करोड़ रुपए, योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग के लिए 82 करोड़ 49 लाख 60 हजार रुपए तथा वाणिज्यिक कर विभाग के लिए 510 करोड़ 82 लाख 70 हजार रुपए शामिल हैं।

चर्चा का जवाब देते हुए वित्त मंत्री चौधरी ने कहा कि सरकार वित्तीय अनुशासन, पारदर्शिता और तकनीकी सुधारों के माध्यम से राज्य को मजबूत आर्थिक आधार देने के लिए प्रतिबद्ध है।

आवास और नवा रायपुर विकास पर जोर

मंत्री चौधरी ने बताया कि सरकार बनने के समय गृह निर्माण मंडल की 3,219 संपत्तियां अविक्रित थीं और मंडल पर 735 करोड़ रुपए का ऋण था। राज्य सरकार ने एकमुश्त भुगतान की व्यवस्था कर मंडल की वित्तीय स्थिति में सुधार किया है।

वन टाइम सेटलमेंट योजना के तहत अब तक 1,410 संपत्तियों का लगभग 210 करोड़ रुपए में विक्रय किया जा चुका है।

उन्होंने बताया कि पिछले दो वर्षों में प्रदेश के 27 जिलों में 3,069 करोड़ रुपए के 78 नए प्रोजेक्ट लॉन्च किए गए हैं, जिनके तहत 16,782 संपत्तियों का निर्माण लक्ष्य रखा गया है।

पर्यावरण निगरानी के लिए नई तकनीक

पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में सरकार ने फ्लाई ऐश परिवहन के लिए एसओपी लागू की है। साथ ही औद्योगिक अपशिष्ट की निगरानी के लिए आईडब्ल्यूएमएमएस सिस्टम विकसित किया गया है।

राज्य में CG Nigrani पोर्टल के माध्यम से 124 उद्योगों के उत्सर्जन और प्रदूषण स्तर की रियल-टाइम निगरानी की जा रही है।

नवा रायपुर बनेगा शिक्षा का बड़ा केंद्र

मंत्री चौधरी ने कहा कि नवा रायपुर में पहले से Indian Institute of Management Raipur, International Institute of Information Technology Naya Raipur और Hidayatullah National Law University जैसे संस्थान संचालित हैं।

इसके अलावा National Institute of Fashion Technology, National Institute of Electronics and Information Technology और National Forensic Sciences University जैसे राष्ट्रीय संस्थान भी यहां स्थापित किए जाएंगे।

जीएसटी 2.0 से जनता को राहत

मंत्री चौधरी ने बताया कि जीएसटी 2.0 के तहत कई वस्तुओं पर कर दरें कम की गई हैं। कपड़ों पर टैक्स 12% से घटाकर 5% और सीमेंट पर 28% से घटाकर 18% किया गया है।

इसके अलावा मोटरसाइकिल, कार, फ्रिज, टीवी और एसी पर भी टैक्स कम होने से उपभोक्ताओं को हजारों रुपये की बचत होगी।

पंजीयन विभाग में बड़े सुधार

पंजीयन विभाग में नागरिक सुविधा के लिए स्मार्ट रजिस्ट्री कार्यालय शुरू किए जा रहे हैं। पारिवारिक दानपत्र, हकत्याग पत्र और बंटवारा नामे की रजिस्ट्री फीस घटाकर मात्र 500 रुपये कर दी गई है।

वित्तीय स्थिरता के लिए नई पहल

राज्य सरकार ने दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता के लिए छत्तीसगढ़ ग्रोथ एंड स्टेबिलिटी फंड का गठन किया है। वर्तमान में इसमें 50 करोड़ रुपये निवेशित हैं और अगले वर्ष के लिए 250 करोड़ रुपये का प्रावधान रखा गया है।

वित्त मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में सरकार छत्तीसगढ़ को विकसित राज्य बनाने के लक्ष्य के साथ कार्य कर रही है।

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