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"गुरु माँ, अब मंच पर आपकी जगह खाली रहेगी..."पद्म विभूषण तीजन बाई को उनकी शिष्या की अश्रुपूरित श्रद्धांजलि
विश्वविख्यात पंडवानी गायिका और पद्म विभूषण तीजन बाई पंचतत्व में विलीन हो गईं, लेकिन उनके जाने के बाद उनके शिष्यों के मन में जो खालीपन है, उसे शब्दों में बयां करना आसान नहीं है। उनकी शिष्या तरुणा साहू ने सोशल मीडिया पर एक अत्यंत भावुक संस्मरण साझा किया है, जो गुरु-शिष्य परंपरा, स्नेह और संस्कार का जीवंत दस्तावेज बन गया है।
तरुणा साहू लिखती हैं कि धमतरी जिले के छोटे से गांव गिधावा की एक साधारण बच्ची होने के नाते उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि एक दिन उनका जीवन पंडवानी की विश्वविख्यात साधिका तीजन बाई से जुड़ जाएगा। जवाहर नवोदय विद्यालय में कक्षा छठवीं के दौरान आयोजित एक प्रशिक्षण शिविर में करीब 200 बच्चों के बीच से तीजन बाई ने उन्हें अपनी शिष्या के रूप में चुना। यही पल उनके जीवन का सबसे बड़ा सौभाग्य बन गया।
उनके अनुसार, गुरु माँ ने उन्हें केवल पंडवानी की कला ही नहीं सिखाई, बल्कि अनुशासन, समर्पण, मेहनत, विनम्रता और जीवन जीने की सीख भी दी। समय के साथ उनका रिश्ता गुरु-शिष्या से आगे बढ़कर माँ-बेटी जैसा हो गया। जब भी वे गुरु माँ के घर जातीं, तीजन बाई अपने हाथों से खाना खिलातीं, बाल संवारतीं, मेकअप करतीं और अपने पास सुलातीं।
संस्मरण में बचपन की एक मासूम याद भी है। तरुणा बताती हैं कि गुरु माँ को पान खाना बहुत पसंद था। उन्हें लगता था कि शायद पान खाए बिना पंडवानी नहीं गाई जा सकती, इसलिए वे प्रस्तुति से पहले गुरु माँ से पान मांगती थीं। गुरु माँ मुस्कुराकर उन्हें पान देतीं और फिर वे पूरे उत्साह से पंडवानी गाती थीं। आज वही छोटी-सी याद उनकी सबसे बड़ी धरोहर बन गई है।
गुरु माँ के साथ उन्हें दिल्ली, भोपाल, उज्जैन के कालिदास समारोह, रायपुर सहित देश के कई प्रतिष्ठित मंचों पर प्रस्तुति देने का अवसर मिला। कई बार तीजन बाई एक प्रसंग का आधा भाग स्वयं गातीं और शेष भाग अपनी शिष्या को सौंप देतीं। यह विश्वास और स्नेह तरुणा के लिए जीवन का सबसे बड़ा सम्मान रहा।
बाद में तरुणा साहू ने रेलवे सुरक्षा बल (RPF) में निरीक्षक के रूप में सेवा का दायित्व संभाला, लेकिन उन्होंने पंडवानी और लोकसंस्कृति से अपना रिश्ता कभी नहीं तोड़ा। उनका कहना है कि वर्दी पहनकर देश की सेवा करना और मंच पर अपनी संस्कृति की सेवा करना—दोनों ही उन्हें गुरु माँ की प्रेरणा से मिले।
गुरु माँ की अंतिम विदाई के बाद भावुक शब्दों में उन्होंने लिखा कि आज ऐसा लगता है जैसे जीवन का एक मजबूत स्तंभ टूट गया हो। लेकिन उनकी आवाज, उनकी सीख, उनके संस्कार और उनकी पंडवानी हमेशा जीवित रहेंगे। जब भी वे मंच पर पंडवानी प्रस्तुत करेंगी, उन्हें महसूस होगा कि गुरु माँ सामने बैठकर मुस्कुरा रही हैं और उन्हें आशीर्वाद दे रही हैं।
अपने संस्मरण का समापन तरुणा साहू इन शब्दों के साथ करती हैं—
"मैं जीवन भर गर्व से कहती रहूँगी— मैं पद्म विभूषण तीजन बाई जी की शिष्या हूँ। यही मेरी सबसे बड़ी पहचान है, यही मेरा सबसे बड़ा सम्मान है।"
यह संस्मरण केवल एक शिष्या की श्रद्धांजलि नहीं, बल्कि उस गुरु-शिष्य परंपरा का भावनात्मक दस्तावेज है, जिसने छत्तीसगढ़ की लोककला को विश्वभर में पहचान दिलाई।
साभार : तरुणा साहू की सार्वजनिक फेसबुक पोस्ट पर आधारित संस्मरण
मानदेय, विकास निधि और पेंशन की मांग को लेकर एकजुट हुए जनपद सदस्य, राजधानी भेजा जाएगा प्रतिनिधिमंडल
जिले के जनपद सदस्यों (बीडीसी) की विभिन्न लंबित मांगों को लेकर रविवार को कैलाश गुफा स्थित सामुदायिक भवन में जिला स्तरीय बीडीसी संघ की बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिलेभर से पहुंचे जनपद सदस्यों ने मानदेय, भत्ता, जनपद विकास निधि और 15वें वित्त आयोग की राशि में बढ़ोतरी सहित कई मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। बैठक में इन मांगों को शासन के समक्ष रखने के लिए संघ के पदाधिकारियों का प्रतिनिधिमंडल राजधानी रायपुर भेजने का निर्णय लिया गया।
बैठक में वक्ताओं ने कहा कि जनपद सदस्य पंचायत स्तर पर विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, लेकिन उन्हें मिलने वाला मानदेय और विकास के लिए उपलब्ध संसाधन पर्याप्त नहीं हैं। इसलिए जनपद सदस्यों के मानदेय एवं भत्ते में वृद्धि के साथ जनपद विकास निधि बढ़ाने की मांग शासन से की जाएगी।
बैठक को संबोधित करते हुए बीडीसी संघ के जिला अध्यक्ष गंगा राम भगत ने कहा कि जनपद सदस्यों की समस्याओं और मांगों को सरकार तक मजबूती से पहुंचाने के लिए संघ संगठित होकर कार्य करेगा। उन्होंने बताया कि जल्द ही प्रतिनिधिमंडल रायपुर जाकर शासन के समक्ष मांगपत्र प्रस्तुत करेगा।
बैठक का नेतृत्व कर रहीं कुनकुरी जनपद अध्यक्ष सुशीला साय ने कहा कि जनपद सदस्यों को अपने क्षेत्र के विकास के लिए पर्याप्त अधिकार और संसाधन मिलना जरूरी है। उन्होंने विधायक और सांसदों की तरह जनपद सदस्यों के लिए भी पेंशन व्यवस्था लागू करने की मांग उठाई। उनका कहना था कि इससे जनप्रतिनिधियों को सामाजिक सुरक्षा मिलेगी और पंचायत स्तर पर विकास कार्यों को भी गति मिलेगी।
जिला पंचायत सदस्य गेंद बिहारी ने भी जनपद सदस्यों की मांगों का समर्थन करते हुए कहा कि ये मांगें पूरी तरह न्यायसंगत हैं और सरकार को इस दिशा में सकारात्मक पहल करनी चाहिए।
बैठक में बीडीसी संघ के जिला उपाध्यक्ष विश्वनाथ सिदार, जिला सचिव कलम विश्वकर्मा, जिला मीडिया प्रभारी राकेश गुप्ता सहित कुनकुरी, पत्थलगांव, फरसाबहार और बगीचा जनपद पंचायतों के अध्यक्ष-उपाध्यक्ष तथा जिलेभर के सैकड़ों जनपद सदस्य मौजूद रहे। बैठक के समापन के बाद सभी जनप्रतिनिधियों ने सामूहिक भोजन भी किया।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई को दी भावभीनी श्रद्धांजलि, कहा– छत्तीसगढ़ ने खो दी अपनी सांस्कृतिक धरोहर
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने पद्म विभूषण एवं पद्मश्री से सम्मानित विश्वविख्यात पंडवानी गायिका डॉ. तीजन बाई के निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। डॉ. तीजन बाई का रविवार को रायपुर में लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। वे 70 वर्ष की थीं।
मुख्यमंत्री ने अपने शोक संदेश में कहा कि डॉ. तीजन बाई ने अपनी अद्वितीय कला, संघर्ष और आजीवन साधना से छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति को विश्व पटल पर नई पहचान दिलाई। पंडवानी जैसी लोककला को उन्होंने देश-विदेश तक पहुंचाकर प्रदेश का गौरव बढ़ाया। उनका योगदान सदैव अविस्मरणीय रहेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा, "पद्म विभूषण और पद्मश्री से सम्मानित डॉ. तीजन बाई का निधन हम सभी के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्होंने पूरे देश और विश्व में छत्तीसगढ़ का गौरव बढ़ाया। हम उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।"
मुख्यमंत्री ने ईश्वर से दिवंगत पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करने तथा शोकाकुल परिजनों और उनके असंख्य प्रशंसकों को यह दुःख सहने की शक्ति देने की प्रार्थना की।
डॉ. तीजन बाई ने पंडवानी की पारंपरिक शैली को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया और अपनी ओजस्वी प्रस्तुति के माध्यम से भारतीय लोककला को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर स्थापित किया। उनके निधन से छत्तीसगढ़ ही नहीं, पूरे देश के कला एवं संस्कृति जगत में शोक की लहर है।
छत्तीसगढ़ में शिक्षकों को बड़ी राहत, शिक्षा सत्र 2026-27 के अंत तक मिलेगी पुनर्नियुक्ति।
छत्तीसगढ़ शासन के स्कूल शिक्षा विभाग ने शासकीय एवं शत-प्रतिशत अनुदान प्राप्त विद्यालयों में कार्यरत शिक्षक संवर्ग (सहायक शिक्षक से प्राचार्य तक) को शिक्षा सत्र 2026-27 के अंत तक पुनर्नियुक्ति प्रदान करने की प्रशासकीय स्वीकृति जारी कर दी है।
मंत्रालय महानदी भवन, नवा रायपुर अटल नगर से जारी आदेश के अनुसार यह स्वीकृति लोक शिक्षण संचालनालय के प्रस्ताव पर प्रदान की गई है। शासन ने संचालक, लोक शिक्षण संचालनालय को निर्देश दिए हैं कि जारी दिशा-निर्देशों के अनुरूप पात्र शिक्षकों को शिक्षा सत्र 2026-27 के अंत तक पुनर्नियुक्ति देने की प्रक्रिया शीघ्र पूरी की जाए।
सरकार के इस निर्णय से प्रदेश के शासकीय एवं शत-प्रतिशत अनुदान प्राप्त विद्यालयों में शिक्षण व्यवस्था की निरंतरता बनी रहेगी। साथ ही विद्यार्थियों की पढ़ाई बिना किसी व्यवधान के जारी रखने में मदद मिलेगी।
रामगढ़ महोत्सव में पहुंचे मुख्यमंत्री साय, सीताबेंगरा-जोगीमारा गुफाओं की विरासत को बताया विश्वस्तरीय धरोहर
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मंगलवार को सरगुजा जिले के उदयपुर विकासखंड स्थित ऐतिहासिक रामगढ़ में आयोजित दो दिवसीय रामगढ़ महोत्सव-2026 के समापन समारोह में भाग लिया। इस दौरान उन्होंने विश्व की प्राचीनतम नाट्यशाला मानी जाने वाली सीताबेंगरा गुफा, जोगीमारा गुफा के प्राचीन शिलालेख और भित्तिचित्रों तथा प्राकृतिक सुरंग हाथीपोल का अवलोकन किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि रामगढ़ हजारों वर्ष पुरानी सांस्कृतिक चेतना, कला, आस्था और गौरवशाली इतिहास का जीवंत प्रतीक है। उन्होंने कहा कि यह स्थल संस्कृति, इतिहास, साहित्य और पर्यटन का अद्भुत संगम है तथा छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक एवं पुरातात्विक विरासत को विश्व स्तर पर पहचान दिलाता है।
उन्होंने कहा कि रामगढ़ जैसी ऐतिहासिक धरोहरें हमारी सांस्कृतिक अस्मिता की अमूल्य निधि हैं। इनका संरक्षण और संवर्धन सामूहिक जिम्मेदारी है। राज्य सरकार इन धरोहरों को संरक्षित करने और पर्यटन के रूप में विकसित करने के लिए लगातार कार्य कर रही है, जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार के नए अवसर भी मिलेंगे।
कार्यक्रम के दौरान कृषि मंत्री रामविचार नेताम, पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल सहित अन्य जनप्रतिनिधि और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
रामगढ़ की ऐतिहासिक पहचान
रामगढ़ पर्वत की पश्चिमी ढलान पर स्थित सीताबेंगरा और जोगीमारा गुफाएं भारतीय इतिहास, स्थापत्य, शिलालेख और चित्रकला की अनमोल धरोहर मानी जाती हैं। मान्यता है कि महाकवि कालिदास ने यहीं अपनी प्रसिद्ध कृति 'मेघदूतम्' की रचना की थी। इसी स्मृति में हर वर्ष आषाढ़ के प्रथम दिवस पर रामगढ़ महोत्सव आयोजित किया जाता है।
करीब 44 फीट लंबी सीताबेंगरा गुफा का प्राकृतिक रंगमंच, जोगीमारा गुफा के दूसरी-तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व के भित्तिचित्र और प्राचीन शिलालेख इसे विश्वस्तरीय पुरातात्विक महत्व प्रदान करते हैं। वहीं लगभग 180 फीट लंबी हाथीपोल प्राकृतिक सुरंग अपनी अनूठी संरचना और प्राकृतिक सौंदर्य के कारण पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज सरगुजा और रायगढ़ के दौरे पर, रामगढ़ महोत्सव में होंगे शामिल
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय मंगलवार को सरगुजा और रायगढ़ जिले के दौरे पर रहेंगे। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार मुख्यमंत्री सुबह 11:00 बजे मुख्यमंत्री निवास, सिविल लाइन रायपुर में खेल एवं युवा कल्याण विभाग की बैठक लेंगे।
बैठक के बाद मुख्यमंत्री हेलीकॉप्टर से सरगुजा जिले के उदयपुर पहुंचेंगे। दोपहर 1:00 बजे से 2:00 बजे तक वे रामगढ़, उदयपुर में आयोजित "रामगढ़ महोत्सव-2026" में शामिल होंगे। इसके बाद उनका आरक्षित कार्यक्रम रहेगा।
दोपहर बाद मुख्यमंत्री रायगढ़ जिले के खरसिया पहुंचेंगे, जहां 3:35 बजे से 4:05 बजे तक उनका आरक्षित कार्यक्रम निर्धारित है। इसके बाद वे हेलीकॉप्टर से रायपुर लौटेंगे और शाम 5:15 बजे मुख्यमंत्री निवास पहुंचकर दिनभर के कार्यक्रम का समापन करेंगे।
मुख्यमंत्री के इस दौरे को लेकर सरगुजा और रायगढ़ जिला प्रशासन ने सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली हैं। सुरक्षा व्यवस्था और कार्यक्रम स्थल पर प्रशासनिक अधिकारियों की तैनाती सुनिश्चित की गई है।
पीएम सूर्यघर योजना के हितग्राहियों को बड़ा तोहफा: अब अतिरिक्त सोलर बिजली भी खरीदेगी सरकार, बिजली बिल में मिलेगा सीधा लाभ
प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के तहत रूफटॉप सोलर संयंत्र लगाने वाले उपभोक्ताओं के लिए राहत भरी खबर है। अब घरों में जरूरत से अधिक उत्पादित सौर ऊर्जा को ग्रिड में भेजने पर सरकार निर्धारित दर पर उसकी खरीद करेगी। इससे उपभोक्ताओं को अतिरिक्त आय का लाभ मिलेगा और उसकी राशि आगामी बिजली बिलों में क्रेडिट के रूप में समायोजित की जाएगी।
छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी ने सोलर एनर्जी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (SECI) द्वारा वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए निर्धारित बायबैक दर को अपनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी के लिए छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग (CSERC) के पास भेजा गया है। आयोग की स्वीकृति मिलते ही उपभोक्ताओं को अधिशेष बिजली का लाभ सीधे बिजली बिलों में दिखाई देगा।
नेट मीटरिंग व्यवस्था के तहत सोलर संयंत्र से बनने वाली बिजली का पहले उपभोक्ता की घरेलू खपत में समायोजन किया जाता है। इसके बाद बची हुई बिजली ग्रिड में चली जाती है, जिसका वर्ष के अंत में निर्धारित दर पर बायबैक किया जाता है। इस राशि को उपभोक्ता के खाते में जमा कर अगले बिजली बिलों में समायोजित किया जाएगा।
पावर कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया है कि प्रत्येक नए वित्तीय वर्ष में यूनिटों का लेखा-जोखा शून्य से शुरू होता है। इसलिए पिछले वर्ष की अतिरिक्त यूनिट नए बिल में दिखाई नहीं देतीं, लेकिन उनकी राशि सुरक्षित रहती है और आगामी बिलों में क्रेडिट के रूप में समायोजित कर दी जाती है।
राज्य सरकार का कहना है कि प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के तहत अपनाई गई यह पारदर्शी व्यवस्था हजारों सौर ऊर्जा उपभोक्ताओं को आर्थिक रूप से लाभान्वित करेगी और स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को भी बढ़ावा देगी।
बारिश के बीच घर पर गिरी मौत बनकर बिजली, 12 वर्षीय मासूम की मौत, एक ही परिवार के 6 सदस्य घायल।
जशपुर जिले के सन्ना क्षेत्र के कप्तुरापाठ गांव में सोमवार रात करीब 8 बजे आकाशीय बिजली गिरने से एक दर्दनाक हादसा हो गया। घर के भीतर मौजूद 12 वर्षीय प्रमोद राम की वज्रपात की चपेट में आने से मौत हो गई, जबकि एक ही परिवार के छह अन्य सदस्य घायल हो गए।
पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार घटना के समय परिवार के सभी सदस्य मकान के अंदर थे। अचानक तेज गर्जना के साथ आकाशीय बिजली गिरने से पूरा परिवार इसकी चपेट में आ गया। हादसे में प्रमोद राम ने मौके पर ही दम तोड़ दिया, जबकि छह अन्य सदस्य घायल हो गए।
घटना के बाद ग्रामीणों की मदद से सभी घायलों को तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सन्ना पहुंचाया गया। घायलों में मृतक की मां बंधनी बाई भी शामिल हैं, जिन्हें अचेत अवस्था में अस्पताल लाया गया था। चिकित्सकों और स्वास्थ्य कर्मियों के त्वरित उपचार से उनकी हालत में सुधार हुआ।
अस्पताल सूत्रों के अनुसार सभी घायल अब खतरे से बाहर हैं और उनका उपचार जारी है।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सन्ना के चिकित्सक डॉ. नितीश सोनवानी ने बताया कि बरसात के मौसम में आकाशीय बिजली गिरने की घटनाएं बढ़ जाती हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि खराब मौसम, तेज गर्जना और बिजली चमकने के दौरान घर या सुरक्षित स्थान पर रहें तथा मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करें।
इस हृदयविदारक घटना से कप्तुरापाठ गांव सहित पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल है। ग्रामीणों ने मृतक बालक को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए शोक संतप्त परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की है।
‘‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ‘‘ योजना के तहत् किशोरी बालिकाओं का सिकल सेल-हीमोग्लोबिन परीक्षण शिविर का किया गया आयोजन
कलेक्टर श्री रोहित व्यास के निर्देशानुसार महिला बाल विकास विभाग द्वारा 18 जून को संगम चौक स्थित जिला कार्यक्रम अधिकारी कार्यालय सभाकक्ष में निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर आयोजित किया गया
बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना अंतर्गत महिला सशक्तिकरण केंद्र मिशन शक्ति हब द्वारा किशोरी बालिकाओं का सिकल सेल एनीमिया एवं हीमोग्लोबिन परीक्षण किया गया। शिविर का उद्देश्य बालिकाओं को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक कर विशेष ध्यान रखने के लिए प्रेरित करना था।
सिकली सेल संगवारी टीम जिला चिकित्सालय ने 60 बालिकाओं की स्क्रीनिंग की, जिसमें 4 पॉजिटिव पाई गईं। इन्हें स्वास्थ्य विभाग द्वारा आगे जांच व उपचार हेतु चिन्हित किया गया। साथ ही इस दौरान स्वास्थ्य व करियर पर मार्गदर्शन दिया। एकीकृत बाल सेवा परियोजना के श्री योगेश भगत ने पोषण, स्वास्थ्य व माहवारी स्वच्छता पर जानकारी दी। संरक्षण अधिकारी श्रीमती शिखा शर्मा ने घरेलू हिंसा, सखी वन स्टॉप सेंटर-181 व महिला हेल्पलाइन पर बताया।
मिशन हब समन्वयक सुश्री नेहा नायक ने मासिक धर्म स्वच्छता समझाई। चाइल्ड हेल्पलाइन 1098, बाल विवाह, बाल श्रम व मोबाइल दुरुपयोग पर अंजना देवी ने जानकारी दी। कार्यक्रम में अधिकारी, परियोजना समन्वयक, संगवारी टीम, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व सहायिका सहित कुल 130 प्रतिभागी शामिल रहे।
कलेक्टर श्री व्यास ने जनदर्शन में लोगों की समस्याएं सुनी जनदर्शन में 55 आवेदन प्राप्त हुए
कलेक्टर श्री रोहित व्यास ने आज कलेक्टोरेट में आयोजित साप्ताहिक जनदर्शन कार्यक्रम में जिले के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे नागरिकों की समस्याएं सुनीं। कलेक्टर श्री व्यास ने जनदर्शन में प्राप्त आवेदनों के निराकरण के लिए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। जनदर्शन में आमजन ने अपनी व्यक्तिगत एवं सामुदायिक समस्याओं से संबंधित आवेदन प्रस्तुत किए। आज आयोजित जनदर्शन में कुल 55 आवेदन प्राप्त हुए। इनमें मुख्य रूप से राजस्व संबंधी प्रकरण, पेयजल, सड़क, स्वच्छता, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ, अधोसंरचना विकास, आजीविका संवर्धन तथा विभिन्न शासकीय योजनाओं से जुड़ी मांगें एवं समस्याएं शामिल थीं।
कलेक्टर श्री रोहित व्यास ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि प्राप्त सभी आवेदनों का प्राथमिकता के आधार पर परीक्षण कर उनका समयबद्ध, पारदर्शी एवं गुणवत्तापूर्ण निराकरण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि जनदर्शन शासन और जनता के बीच सीधा संवाद स्थापित करने का प्रभावी माध्यम है, इसलिए प्रत्येक आवेदन पर संवेदनशीलता एवं जवाबदेही के साथ कार्रवाई की जानी चाहिए।
उन्होंने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए कि आवेदनों पर की गई कार्रवाई की जानकारी संबंधित आवेदकों को समय पर उपलब्ध कराई जाए, ताकि उन्हें अपने प्रकरण की स्थिति की स्पष्ट जानकारी मिल सके। कलेक्टर ने विशेष रूप से जनसुविधाओं से जुड़े मामलों जैसे पेयजल, सड़क, स्वच्छता तथा शासकीय योजनाओं के लाभ से संबंधित प्रकरणों पर गंभीरता से कार्रवाई करने पर जोर दिया।
मुख्य सचिव ने सुघ्घर छत्तीसगढ़ अभियान की तैयारियों की अधिकारियों से ली जानकारी।
छत्तीसगढ़ शासन की महत्वकांक्षी सुघ्घर छत्तीसगढ़ अभियान शीघ्र ही प्रारंभ होगा। अभियान के तहत शासन की 31 जनकल्याणकारी योजनाओं का फायदा प्रत्येक पात्र परिवारों को पहुंचाया जाएगा। यह अभियान रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, और सरगुजा संभाग के 23 जिलों में प्रारंभ किया जाएगा।
मुख्य सचिव श्री विकासशील ने आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में इस संबंध में अधिकारियों से की जा रही व्यापक तैयारियों के संबंध में विस्तार से जानकारी ली। उल्लेखनीय है सुघ्घर छत्तीसगढ़ योजना छत्तीसगढ़ शासन की नई पहल है। जिससे शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का फायदा सभी पात्र परिवारों को दिया जाएगा। योजना के फायदें से कोई वंचित न रहें इसके लिए व्यापक कार्यक्रम तैयार किया जा रहा है। सुघ्घर छत्तीसगढ़ के तहत अधिकारियों ने प्रस्तुतिकरण के जरिये विस्तार से जानकारी दी।
बैठक में आवास एवं पर्यावरण विभाग के सचिव श्री अंकित आनंद, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सचिव श्री भीम सिंह सहित पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग सहित अन्य विभागों के अधिकारी शामिल हुए।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देश पर अवैध खनन के खिलाफ सख्त अभियान, 7 वाहन जप्त।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश में अवैध खनन, परिवहन एवं भंडारण के विरुद्ध कार्रवाई लगातार तेज की जा रही है। राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि खनिज संपदा के अवैध दोहन तथा शासकीय कार्य में बाधा पहुंचाने जैसी गतिविधियों को किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
इसी कड़ी में संचालक भौमिकी एवं खनिकर्म तथा केंद्रीय खनि उड़नदस्ता प्रभारी श्री रजत बंसल के निर्देशन में केंद्रीय खनि उड़नदस्ता और संबंधित जिला प्रशासन की संयुक्त टीमों ने 22 जून को मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर, सूरजपुर और सरगुजा जिलों में व्यापक जांच अभियान चलाया। शिकायतों के आधार पर की गई इस कार्रवाई में विभिन्न स्थानों पर खनिजों के अवैध परिवहन में संलिप्त कुल सात वाहनों को जप्त किया गया।
जांच के दौरान मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के बरबसपुर क्षेत्र में निम्न श्रेणी चूना पत्थर से लदे दो हाइवा, सूरजपुर जिले के लटोरी में रेत से भरा एक हाइवा तथा खड़गवां में एक टिप्पर पकड़ा गया। वहीं सरगुजा जिले के सकालो और अंबिकापुर क्षेत्र में रेत परिवहन कर रहे तीन टिप्परों पर कार्रवाई की गई। सभी वाहनों को खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957 के प्रावधानों के तहत जप्त कर संबंधित थानों में सुरक्षित रखा गया है।
कार्रवाई के दौरान अंबिकापुर के गांधी चौक क्षेत्र में एक गंभीर घटना भी सामने आई। जांच कर रही टीम के साथ वाहन मालिक, चालक और उनके सहयोगियों द्वारा कथित रूप से अभद्र व्यवहार, गाली-गलौच और धमकी दी गई तथा शासकीय कार्य में व्यवधान उत्पन्न किया गया। मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत थाना गांधीनगर में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है।
खनिज विभाग ने दोहराया है कि अवैध खनन और परिवहन के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा। विभाग ने चेतावनी दी है कि कानून का उल्लंघन करने, अधिकारियों को धमकाने अथवा अवैध गतिविधियों को संरक्षण देने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
राज्य शासन का मानना है कि प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा और राजस्व हितों की रक्षा के लिए प्रभावी प्रवर्तन आवश्यक है। इसी उद्देश्य से प्रदेशभर में संयुक्त निरीक्षण, निगरानी और कार्रवाई की प्रक्रिया को और अधिक सुदृढ़ किया जा रहा है, ताकि अवैध खनन गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके।
योग को दिनचर्या का हिस्सा बनाएं, स्वस्थ समाज के निर्माण में योगदान दें : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय
12वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अम्बिकापुर के पीजी कॉलेज मैदान में आयोजित राज्य स्तरीय सामूहिक योगाभ्यास कार्यक्रम में हजारों नागरिकों, विद्यार्थियों, महिलाओं, युवाओं, जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के साथ योगाभ्यास किया। उन्होंने प्रदेशवासियों को योग दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि योग भारत की सनातन ऋषि परंपरा की अमूल्य धरोहर है, जिसने पूरी दुनिया को स्वस्थ, संतुलित और शांतिपूर्ण जीवन का मार्ग दिखाया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि शरीर, मन और आत्मा के बीच सामंजस्य स्थापित करने वाली जीवन पद्धति है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष योग दिवस की थीम "स्वस्थ आयु के लिए योग" वर्तमान समय की आवश्यकता को दर्शाती है। बदलती जीवनशैली, बढ़ते तनाव और स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों के बीच योग प्रत्येक आयु वर्ग के लिए स्वास्थ्य सुरक्षा का सबसे सरल और प्रभावी माध्यम बनकर उभरा है।
उन्होंने कहा कि स्वस्थ व्यक्ति ही स्वस्थ परिवार, स्वस्थ समाज और विकसित राष्ट्र की आधारशिला होता है, इसलिए योग को केवल एक दिवस तक सीमित न रखकर जीवन का हिस्सा बनाना आवश्यक है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों से योग को वैश्विक पहचान मिली है और आज पूरी दुनिया 21 जून को उत्साहपूर्वक अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मना रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि योग मधुमेह, उच्च रक्तचाप, तनाव, अनिद्रा और मोटापे जैसी जीवनशैली जनित समस्याओं से बचाव में अत्यंत प्रभावी है। आधुनिक चिकित्सा विज्ञान भी इसकी उपयोगिता को स्वीकार कर रहा है। उन्होंने महर्षि पतंजलि और भगवान शिव को आदियोगी के रूप में स्मरण करते हुए कहा कि भारत की सांस्कृतिक चेतना में योग सदियों से जीवन का अभिन्न अंग रहा है।
उन्होंने बताया कि राज्य सरकार योग के विस्तार और संस्थागत विकास के लिए प्रतिबद्ध है तथा योग विषय को समाज कल्याण विभाग से चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधीन लाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। इससे योग शिक्षा, प्रशिक्षण, अनुसंधान और जनजागरूकता गतिविधियों को नई दिशा मिलेगी। राज्य सरकार का लक्ष्य योग को गांव-गांव, स्कूलों और कॉलेजों तक पहुंचाकर स्वस्थ जीवनशैली को जनआंदोलन का स्वरूप देना है।
मुख्यमंत्री ने बच्चों और युवाओं से योग को अपनी दिनचर्या में शामिल करने का आह्वान करते हुए कहा कि इससे एकाग्रता, आत्मविश्वास, अनुशासन और सकारात्मक सोच का विकास होता है। उन्होंने कहा कि जो लोग अभी तक योग से नहीं जुड़े हैं, वे आज से इसकी शुरुआत करें।
इस अवसर पर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि ब्रह्ममुहूर्त में योगाभ्यास सबसे अधिक लाभकारी माना गया है। कार्यक्रम में विधायक प्रबोध मिंज, रामकुमार टोप्पो, छत्तीसगढ़ योग आयोग के अध्यक्ष संजय अग्रवाल सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, अधिकारी और नागरिक उपस्थित थे।
जशपुर में मनाया गया 12वां विश्व योग दिवस, पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल बोले- करें योग, रहें निरोग
12वें विश्व योग दिवस के अवसर पर जिला प्रशासन द्वारा वशिष्ठ कम्युनिटी हॉल में जिला स्तरीय योग दिवस का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। योग प्रशिक्षक डमरूधर स्वर्णकार और स्मिता जैन के मार्गदर्शन में जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, विद्यार्थियों और नागरिकों ने सामूहिक योगाभ्यास कर स्वस्थ जीवन का संदेश दिया।
इस अवसर पर जशपुर विधायक रायमुनि भगत, पत्थलगांव विधायक एवं सरगुजा आदिवासी विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष गोमती साय, माटी कला बोर्ड के अध्यक्ष शम्भूनाथ चक्रवर्ती, छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अध्यक्ष रामप्रताप सिंह, नगर पालिका अध्यक्ष अरविन्द भगत, जनपद पंचायत अध्यक्ष गंगाराम भगत, कलेक्टर रोहित व्यास, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. लाल उमेद सिंह, जिला पंचायत सीईओ अभिषेक कुमार सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, अधिकारी, गणमान्य नागरिक एवं स्कूली बच्चे उपस्थित रहे।
सामूहिक योगाभ्यास के दौरान ताड़ासन, त्रिकोणासन, भुजंगासन, वज्रासन, पवनमुक्तासन, अर्धचक्रासन और शवासन सहित विभिन्न योगासन तथा अनुलोम-विलोम, कपालभाति एवं ध्यान का अभ्यास कराया गया। प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक योगाभ्यास कर स्वस्थ एवं संतुलित जीवन का संकल्प लिया।
मुख्य अतिथि राजेश अग्रवाल ने सभी को विश्व योग दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि योग भारत की प्राचीन संस्कृति और ऋषि परंपरा की अमूल्य धरोहर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों से आज योग को वैश्विक पहचान मिली है और दुनिया के अनेक देशों ने इसे अपनाया है। उन्होंने कहा कि योग शरीर को स्वस्थ रखने के साथ मन को शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में योग को नियमित दिनचर्या का हिस्सा बनाना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि योग केवल एक दिन का कार्यक्रम नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवन की निरंतर साधना है। "करें योग, रहें निरोग" का संदेश देते हुए उन्होंने विभिन्न आसनों का अभ्यास किया और उपस्थित लोगों को नशामुक्ति की शपथ भी दिलाई।
जशपुर विधायक रायमुनि भगत ने कहा कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवन जीने की संपूर्ण पद्धति है। नियमित योगाभ्यास से शरीर स्वस्थ, मन प्रसन्न और कार्यक्षमता में वृद्धि होती है। उन्होंने कहा कि ऋषि-मुनियों के समय से चली आ रही यह परंपरा अनेक बीमारियों से बचाव में सहायक है।
पत्थलगांव विधायक गोमती साय ने कहा कि यह गर्व का विषय है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर आज पूरा विश्व योग को अपना रहा है। उन्होंने योग को जीवन की आत्मा और साधना बताते हुए इसे दैनिक जीवन में अपनाने का आह्वान किया।
नगर पालिका अध्यक्ष अरविन्द भगत ने भी नागरिकों से नियमित योगाभ्यास करने की अपील की। कार्यक्रम के माध्यम से जिलेवासियों को निरोगी जीवन, मानसिक शांति और स्वस्थ समाज के निर्माण के लिए योग अपनाने का संदेश दिया गया।
आमाकोनी को मिली 28 लाख के विकास कार्यों की सौगात, राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने किया लोकार्पण।
राजस्व मंत्री श्री टंक राम वर्मा अपने जिला प्रवास के दौरान रविवार को तहसील सुहेला के ग्राम आमाकोनी पहुंचे। इस दौरान उन्होंने ग्रामवासियों को बड़ी सौगात देते हुए 10 लाख रुपए की लागत से नवनिर्मित सामुदायिक भवन तथा 18 लाख रुपए की लागत से तैयार प्रार्थना शेड एवं अहाता निर्माण का लोकार्पण किया।
अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर क्षेत्रवासियों को शुभकामनाएं देते हुए राजस्व मंत्री श्री वर्मा ने कहा कि सुहेला क्षेत्र में अब विकास के कार्य लगातार गति पकड़ रहे हैं, जिससे यह क्षेत्र प्रगति के नए आयाम स्थापित कर रहा है। उन्होंने ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि क्षेत्र की जो भी समस्याएं हैं, उन सभी का प्राथमिकता के आधार पर त्वरित समाधान किया जाएगा।
*समग्र विकास के लिए सरकार कृत संकल्पित*
राजस्व मंत्री ने राज्य सरकार की प्राथमिकताओं को रेखांकित करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के कुशल नेतृत्व में हमारी सरकार प्रदेश के चहुंमुखी विकास के लिए पूरी तरह कृत संकल्पित है। हमने जनता से की गई 'मोदी की गारंटी' के सभी प्रमुख वादों को पूरा कर दिया है।
*3 से 4 वर्षों में हर परिवार को मिलेगा पक्का आशियाना*
ग्रामीणों को बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने का भरोसा देते हुए श्री वर्मा ने बताया कि वर्तमान में आमाकोनी ग्राम में 51 प्रधानमंत्री आवासों का निर्माण तेजी से चल रहा है और आने वाले समय में और भी आवास स्वीकृत किए जाएंगे। उन्होंने दावा किया कि अगले 3 से 4 साल के भीतर क्षेत्र में कोई भी घर कच्चा नहीं रहेगा। सरकार हर घर में शुद्ध पेयजल, बिजली और शौचालय की व्यवस्था सुनिश्चित कर रही है। पात्र लोगों को जनकल्याणकारी योजनाओं का सीधा लाभ मिलने से हर परिवार में खुशहाली आएगी।
उन्होंने ग्रामीणों से आपसी प्रेम, सद्भाव और भाईचारे के साथ रहकर गांव के विकास में अपनी सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया।
लोकार्पण समारोह के इस अवसर पर जिला पंचायत सदस्य,जनपद सदस्य, सरपंच सहित अन्य स्थानीय जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक और बड़ी संख्या में ग्रामवासी
उपस्थित थे।
आसमान में उड़ता ड्रोन और सुधरती तकदीर सारंगढ़ की सुनीता पटेल ऐसे बनीं 'लखपति ड्रोन दीदी'
कहते हैं कि अगर हौसलों को सही तकनीक और अवसरों के पंख मिल जाएं, तो ग्रामीण परिवेश की साधारण सी दिखने वाली महिलाएं भी कामयाबी की नई उड़ान भर सकती हैं। कुछ ऐसी ही कहानी है सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के एक छोटे से गांव खोरीगांव की रहने वाली सुनीता पटेल की। सुनीता आज सिर्फ अपने घर की दहलीज तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे आसमान में ड्रोन उड़ाकर अपने खेतों को समृद्ध बना रही हैं और खुद 'लखपति दीदी' बनकर ग्रामीण सशक्तिकरण की नई मिसाल पेश कर रही हैं।
*शुरुआत एक सपने की, जिसने बदली जिंदगी*
इस बदलाव की नींव तब पड़ी जब 15 अगस्त 2023 को प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने "नमो ड्रोन दीदी" योजना की घोषणा की थी। इस योजना का मकसद देश की ग्रामीण महिलाओं को तकनीक से जोड़कर उनकी सालाना आय को 1 लाख रुपये से ऊपर ले जाना था। सुनीता पटेल ने इस सुनहरे मौके को हाथ से जाने नहीं दिया।
दिसंबर 2023 में वे अपने सपनों की पोटली बांधकर 15 दिनों के कड़े प्रशिक्षण के लिए ग्वालियर गईं। वहां उन्होंने न सिर्फ ड्रोन उड़ाने की बारीकियां सीखीं, बल्कि खेतों में कीटनाशकों और नैनो उर्वरकों के सही इस्तेमाल का तकनीकी ज्ञान भी हासिल किया। ट्रेनिंग पूरी होने के बाद जब उन्हें उर्वरक कंपनी 'इफको' (IFFCO) की ओर से कृषि ड्रोन मिला, तो मानो उनकी आजीविका को नए पंख मिल गए।
*खेतों में तकनीक की क्रांति और 2 लाख रुपए तक की आय*
साल 2024 से शुरू हुआ सुनीता का यह सफर आज 2026 में सफलता के शिखर पर है। सुनीता अब हर साल खेतों में दवा और खाद का छिड़काव करके 1 से 2 लाख रुपये की सम्मानजनक वार्षिक आय कमा रही हैं। सबसे खूबसूरत बात यह है कि सुनीता अपने काम को सिर्फ एक व्यवसाय नहीं मानतीं। ग्रामीण परिवेश से जुड़ी होने के कारण वे अमीर-गरीब का भेद किए बिना, पैसों की परवाह किए बगैर हर किसान के खेत में उतनी ही शिद्दत से काम करती हैं।
शनिवार को सारंगढ़ मंडी प्रांगण में जब 'खेती बचाओं अभियान' और 'प्राकृतिक खेती कार्यशाला' का आयोजन हुआ, तो सुनीता के हुनर को देखने भारी भीड़ उमड़ी। वहां मौजूद प्रदेश के राजस्व मंत्री श्री टंक राम वर्मा के सामने जब सुनीता ने पानी से भरे भारी-भरकम ड्रोन को रिमोट के जरिए आसमान में उड़ाया और मैदान में छिड़काव का सजीव प्रदर्शन किया, तो पूरा प्रांगण तालियों से गूंज उठा। मंत्री जी ने भी उनके इस जज्बे और तकनीकी कुशलता की जमकर सराहना की।
*कैसे काम करती है यह योजना और आप कैसे उठा सकते हैं लाभ?*
सुनीता की यह सफलता दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) की ताकत को दर्शाती है। इस योजना के तहत देश की सात प्रमुख उर्वरक कंपनियां महिलाओं को ट्रेनिंग और ड्रोन सप्लाई में मदद कर रही हैं।
अगर गांव की कोई भी अन्य महिला सुनीता की तरह 'ड्रोन दीदी' बनना चाहती है, तो उसकी प्रक्रिया बेहद सरल है। इसके लिए महिला की उम्र 18 वर्ष से अधिक हो, वह कम से कम 10वीं पास हो और किसी पंजीकृत स्वयं सहायता समूह (SHG) की सदस्य हो। चयन होने के बाद नजदीकी रिमोट पायलट ट्रेनिंग ऑर्गनाइजेशन (RPTO) में 15 दिनों की मुफ्त पायलट और असिस्टेंट ट्रेनिंग दी जाती है, जिसके बाद DGCA द्वारा आधिकारिक 'रिमोट पायलट सर्टिफिकेट' मिलता है। ड्रोन खरीदने के लिए सरकार की तरफ से 80 प्रतिशत या अधिकतम 8 लाख रुपये तक की भारी सब्सिडी दी जाती है। बाकी बची रकम पर भी एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड (AIF) के जरिए महज 3 प्रतिशत की रियायती ब्याज दर पर लोन मिल जाता है।
*प्रेरणा की नई मिसाल*
आज सुनीता पटेल सिर्फ अपने गांव की नहीं, बल्कि पूरे जिले और पड़ोसी राज्यों की महिलाओं के लिए एक रोल मॉडल बन चुकी हैं। शासकीय कार्यक्रमों में जब वे अपने ड्रोन के साथ पहुंचती हैं, तो उन्हें देखकर सैकड़ों अन्य ग्रामीण महिलाओं की आंखों में भी आत्मनिर्भर बनने के सपने तैरने लगते हैं। सुनीता ने साबित कर दिया है कि भारत के गांवों की तरक्की का रास्ता अब खेतों से होते हुए आसमान की तरफ जाता है। यदि योजना के बारे में अधिक जानना चाहते हैं, तो इसकी आधिकारिक वेबसाइट https://namodronedidi.da.gov.in/ पर जाकर जानकारी ले सकते हैं।
