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पत्रकारिता ने राष्ट्र निर्माण और सामाजिक परिवर्तन में निभाई ऐतिहासिक भूमिका : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

जशपुर जंक्शन,31  मई 

पत्रकार लोकतंत्र के सच्चे सेनानी हैं, जो कठिन परिस्थितियों में भी निरंतर परिश्रम करते हुए सूचनाओं को जन-जन तक पहुंचाते हैं और समाज को सही दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। मीडिया की सकारात्मक आलोचना केवल व्यक्ति को ही नहीं, बल्कि प्रशासन और सरकार को भी आत्ममंथन और बेहतर कार्य की दिशा प्रदान करती है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज राजधानी रायपुर के वीआईपी रोड स्थित राम मंदिर परिसर के सुंदर सदन में आयोजित पत्रकारिता गौरव मार्तंड उत्सव को संबोधित करते हुए यह बात कही। यह आयोजन हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित किया गया।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि माता कौशल्या की धरती और भगवान श्रीराम के ननिहाल छत्तीसगढ़ में पत्रकारिता की गौरवशाली परंपरा पर आधारित ऐसा अद्भुत आयोजन निश्चित रूप से अभिनंदनीय है। उन्होंने आयोजन के लिए रायपुर प्रेस क्लब को बधाई देते हुए कहा कि रायपुर प्रेस क्लब देश के पुराने और प्रतिष्ठित प्रेस क्लबों में से एक है, जिसका इतिहास समृद्ध और प्रेरणादायी रहा है। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता और पत्रकारों के सम्मान में आयोजित ऐसे कार्यक्रम प्रेस क्लब की प्रतिबद्धता और संवेदनशीलता का सशक्त प्रमाण हैं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने रायपुर की पत्रकारिता परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि इस शहर ने पत्रकारिता जगत को अनेक शिखर पुरुष दिए हैं। उन्होंने मधुकर खेर, मायाराम सुरजन, ललित सुरजन, रमेश नैय्यर और बबन प्रसाद मिश्र सहित अनेक प्रतिष्ठित संपादकों और पत्रकारों का स्मरण करते हुए कहा कि इन विभूतियों ने पत्रकारिता की सशक्त और वैचारिक परंपरा को समृद्ध किया है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि मीडिया लोकतंत्र की आधारशिला है और देश के स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर सामाजिक कुरीतियों के उन्मूलन तक पत्रकारिता ने हमेशा परिवर्तनकारी भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि 30 मई 1826 को कोलकाता से श्री जुगल किशोर शुक्ल द्वारा प्रकाशित देश के प्रथम हिंदी समाचार पत्र उदंत मार्तंड ने भारतीय पत्रकारिता की मजबूत नींव रखी। हिंदी पत्रकारिता के दो सौ वर्षों की यह गौरवशाली यात्रा देशवासियों के लिए गर्व का विषय है।

मुख्यमंत्री ने भारतीय सनातन परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि देवर्षि नारद को आदि पत्रकार माना जाता है और इसी कारण पत्रकार बंधु नारद जयंती को सम्मानपूर्वक मनाते हैं। उन्होंने कहा कि यह अत्यंत रोचक और प्रेरक तथ्य है कि उदंत मार्तंड का प्रकाशन भी नारद जयंती के दिन आरंभ हुआ, जो इस बात का प्रतीक है कि भारतीय पत्रकारिता की जड़ें हमारी सांस्कृतिक चेतना और सनातन मूल्यों से गहराई से जुड़ी रही हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय पत्रकारिता ने राष्ट्रवादी चेतना को स्वर देने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि महात्मा गांधी, लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक, माधवराव सप्रे और सुभाषचंद्र बोस सहित अनेक स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने पत्रकारिता को सामाजिक जागरण और राष्ट्रीय चेतना के माध्यम के रूप में उपयोग किया। उन्होंने कहा कि जब भी भारतीय पत्रकारिता का गौरवशाली इतिहास लिखा जाएगा, तब छत्तीसगढ़ का नाम स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज होगा। 

उन्होंने मां भारती के सपूत माधवराव सप्रे का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने छत्तीसगढ़ से छत्तीसगढ़ मित्र का संपादन कर स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान लोगों को जागृत और संगठित करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि पत्रकारिता की चर्चा जब भी होगी, तब भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी का स्मरण स्वाभाविक रूप से होगा। उन्होंने कहा कि अटल जी ने अपनी पत्रकारिता के माध्यम से राष्ट्रवाद और राष्ट्रीय चेतना की जो अलख जगाई, उसने स्वतंत्र भारत में लाखों लोगों को प्रेरित किया। स्वदेश और राष्ट्रधर्म जैसे प्रकाशनों ने राष्ट्र चेतना और राष्ट्रीय अस्मिता को जन-जन तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राज्य सरकार ने मोदी की गारंटियों को धरातल पर उतारने का कार्य किया है और प्रदेश की अनेक जनकल्याणकारी योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने में मीडिया की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। उन्होंने विशेष रूप से नक्सलवाद उन्मूलन का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के नेतृत्व, सुरक्षा बलों के अदम्य साहस तथा जनसहभागिता के साथ-साथ पत्रकारों की महत्वपूर्ण भूमिका के कारण प्रदेश में शांति और विकास का वातावरण मजबूत हुआ है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हिंसा और भटकाव के रास्ते पर जाने वाले लोगों को शांति, विकास और मुख्यधारा की ओर प्रेरित करने में पत्रकारों ने बड़ी भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि आज जब मीडिया बस्तर में हो रहे सकारात्मक बदलाव, विकास, पर्यटन, प्राकृतिक सौंदर्य और बढ़ती संभावनाओं की खबरें सामने लाता है, तब देश और दुनिया में छत्तीसगढ़ की नई पहचान बनती है। जो बस्तर कभी बंदूक और हिंसा की खबरों से पहचाना जाता था, आज वही बस्तर पर्यटन, प्रकृति और विकास की नई संभावनाओं का केंद्र बनकर उभर रहा है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री श्री ओपी चौधरी ने कहा कि हिंदी पत्रकारिता की 200 वर्षों की यात्रा अत्यंत गौरवशाली रही है। उन्होंने कहा कि 1826 में जब उदंत मार्तंड की शुरुआत हुई, तब देश अंग्रेजी शासन के कठिन दौर से गुजर रहा था। ऐसे समय में पत्रकारिता ने अंधकार को सामने लाने के साथ समाज को उजाले की दिशा दिखाने का कार्य किया। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता का मूल धर्म समाज और राष्ट्र को सही दिशा प्रदान करना है।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता वरिष्ठ पत्रकार एवं इंडिया हैबिटेट सेंटर के डायरेक्टर डॉ. के.जी. सुरेश ने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर स्वतंत्र भारत तक पत्रकारिता ने राष्ट्रधर्म और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखा है। उन्होंने कहा कि हिंदी पत्रकारिता ने समय के साथ बदलती तकनीकों के अनुरूप स्वयं को विकसित किया है, किंतु सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव और नागरिक पत्रकारिता की अवधारणा ने कई नई चुनौतियां भी उत्पन्न की हैं। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता को शोधपरक, तथ्यात्मक और साक्ष्य आधारित बनाए रखना समय की आवश्यकता है, ताकि पत्रकारिता की विश्वसनीयता और सामाजिक भूमिका और मजबूत हो सके।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने पत्रकारिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले विशिष्टजनों को लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड प्रदान कर सम्मानित किया। उन्होंने हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में प्रकाशित नवप्रदेश के विशेष अंक, रायपुर प्रेस क्लब की पत्रकार डायरेक्टरी तथा श्री दिनेश यदु की पुस्तक 'मैं अगहन हूं' का विमोचन भी किया।

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार श्री पंकज झा, मुख्यमंत्री के सलाहकार श्री कृष्णा दास, विधायक श्री पुरंदर मिश्रा, छत्तीसगढ़ राज्य नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष श्री संजय श्रीवास्तव, सीएसआईडीसी के अध्यक्ष श्री राजीव अग्रवाल, राज्य बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष श्रीमती वर्णिका शर्मा, राम मंदिर ट्रस्ट के उपाध्यक्ष श्री सुनील रामदास, रायपुर प्रेस क्लब के अध्यक्ष श्री मोहन तिवारी, प्रेस क्लब के पदाधिकारीगण, गणमान्य नागरिक एवं बड़ी संख्या में आमजन उपस्थित थे।

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विकास कार्यों में लापरवाही बर्दाश्त नहीं,प्रभारी मंत्री ओपी चौधरी,शिलापट्ट नहीं लगाने पर अधिकारियों पर होगी कार्रवाई।

 

 

 

 

वित्त एवं जशपुर जिले के प्रभारी मंत्री ओपी चौधरी ने रविवार को जिला पंचायत सभाकक्ष में जिला स्तरीय अधिकारियों की समीक्षा बैठक लेकर विभिन्न विभागों की योजनाओं और विकास कार्यों की विस्तार से समीक्षा की। उन्होंने स्पष्ट कहा कि मुख्यमंत्री का गृह जिला होने के कारण जशपुर के अधिकारियों की जिम्मेदारी और अधिक बढ़ जाती है, इसलिए सभी अधिकारी अपने दायित्वों का गंभीरता से निर्वहन करें तथा विकास कार्यों को समयसीमा में पूर्ण करें।

बैठक में जशपुर विधायक श्रीमती रायमुनि भगत, पत्थलगांव विधायक श्रीमती गोमती साय, जिला पंचायत अध्यक्ष सालिक साय, नगर पालिका अध्यक्ष अरविंद भगत, जिला पंचायत उपाध्यक्ष शौर्य प्रताप सिंह जूदेव, कलेक्टर रोहित व्यास, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. लाल उमेद सिंह, जिला पंचायत सीईओ अभिषेक कुमार, डीएफओ शशि कुमार सहित जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित रहे।

प्रभारी मंत्री श्री चौधरी ने कहा कि पिछले दस वर्षों की तुलना में वर्तमान सरकार ने जशपुर जिले के लिए रिकॉर्ड संख्या में विकास कार्य स्वीकृत किए हैं। उन्होंने अधिकारियों को जनप्रतिनिधियों के साथ समन्वय बनाकर कार्य करने के निर्देश दिए।

उन्होंने विशेष रूप से कहा कि जिन कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन हो चुका है, उनके शिलापट्ट संबंधित गांवों में स्थानीय जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में अनिवार्य रूप से लगाए जाएं। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि किसी विभाग का शिलापट्ट इधर-उधर पड़ा मिला या शिकायत प्राप्त हुई तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

बैठक में प्रभारी मंत्री ने महिलाओं और किसानों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि महतारी वंदन योजना के तहत महिलाओं को हर महीने एक हजार रुपए की सहायता राशि दी जा रही है, जिसका उपयोग वे अपने बच्चों के भविष्य के लिए बचत योजनाओं में कर सकती हैं। साथ ही महतारी शक्ति ऋण योजना के तहत महिलाओं को कम ब्याज दर पर 25 हजार रुपए तक का ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है।

उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना के निर्माण कार्यों को गंभीरता से पूर्ण करने के निर्देश दिए तथा कृषि विभाग को किसानों के लिए पर्याप्त मात्रा में खाद और बीज की उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा। साथ ही किसानों को मछली पालन, केला एवं लिची की खेती के लिए प्रोत्साहित करने के निर्देश भी दिए।

बैठक में कलेक्टर श्री रोहित व्यास ने बताया कि जिले में मुख्यमंत्री घोषणाओं के अनुरूप मेडिकल कॉलेज, शासकीय नर्सिंग कॉलेज, प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र, क्रिटिकल केयर सेंटर सहित कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर तेजी से कार्य किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि सन्ना विकासखंड के पंडरापाठ में विशेष पिछड़ी जनजाति पहाड़ी कोरवा बच्चों के लिए तीरंदाजी केंद्र का निर्माण शुरू हो गया है, वहीं कुनकुरी सलियाटोली में एडवेंचर स्पोर्ट्स परियोजना भी प्रारंभ की जा चुकी है।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. लाल उमेद सिंह ने बैठक में कहा कि चौक-चौराहों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने की आवश्यकता है, जिससे पुलिस व्यवस्था को मजबूती मिलेगी। उन्होंने हेलमेट और सीट बेल्ट जागरूकता अभियान की जानकारी देते हुए बताया कि अब तक 2000 से अधिक लोगों के अपील वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित किए जा चुके हैं।

बैठक में सुशासन तिहार, मनरेगा, प्रधानमंत्री आवास योजना, वन विभाग, स्वास्थ्य, महिला एवं बाल विकास, कृषि, पशुपालन, मत्स्य पालन, खेल एवं युवा कल्याण सहित विभिन्न विभागों की योजनाओं की विस्तृत समीक्षा की गई।

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कलेक्टर रोहित व्यास ने एम-कैड योजना के निर्माण कार्य का किया निरीक्षण जशपुर बनेगा आधुनिक दाबित सिंचाई प्रणाली का राष्ट्रीय मॉडल जिला

 

 

 

 

 कलेक्टर श्री रोहित व्यास ने आज कांसाबेल विकासखंड के ग्राम बगिया में संचालित समृद्धि कमांड क्षेत्र विकास एवं जल प्रबंधन आधुनिकीकरण (एम-कैड) योजना के निर्माण कार्य का निरीक्षण किया। वर्तमान में परियोजना के प्रारंभिक चरण में ले-आउट एवं खुदाई कार्य प्रगति पर है। यह महत्वाकांक्षी परियोजना मैनी नदी पर निर्मित बगिया बैराज सह दाबित उद्वहन सिंचाई योजना के माध्यम से संचालित की जा रही है।

निरीक्षण के दौरान कलेक्टर श्री व्यास ने कहा कि आधुनिक एवं नवीनतम तकनीकों का उपयोग कर इस सिंचाई परियोजना का निर्माण किया जा रहा है, जो भविष्य में एक आदर्श सिंचाई मॉडल के रूप में स्थापित होगी। उन्होंने निर्माण कार्य को निर्धारित समय-सीमा में सभी गुणवत्ता मानकों के अनुरूप पूर्ण करने के निर्देश अधिकारियों को दिए।

*आधुनिक तकनीक, सौर ऊर्जा और स्मार्ट जल प्रबंधन से किसानों को मिलेगा लाभ*

 परियोजना के तहत पारंपरिक नहर प्रणाली के स्थान पर आधुनिक प्रेसराइज्ड पाइप इरिगेशन नेटवर्क विकसित किया जाएगा, जिससे जल उपयोग दक्षता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। इसके तहत जमीन के अंदर पाइप बिछेगी, जिससे जमीन अधिग्रहण की भी समस्या नहीं होगी। पहले सिंचाई के लिए बारिश के पानी पर ही निर्भर रहना पड़ता था। अब इस योजना से पानी की कमी दूर होगी। साथ ही किसानों को पर्याप्त पानी भी मिलेगा। देश में 23 राज्यों में 34 योजना स्वीकृत किए गए है। इसमें प्रदेश का एकमात्र बगिया क्लस्टर शामिल है। जिसके लिए भारत सरकार द्वारा 95.89 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान की गई है। योजना की कुल लागत लगभग 119 करोड़ रुपए है। इसके अंतर्गत बगिया, उसकुटी, रजोती, सुजीबहार, चोंगरीबहार, बांसबहार, डोकड़ा, सिकरिया, पतराटोली, गहिराडोहर, बीहाबल, नरियरडांड एवं ढुढुडांड सहित 13 ग्रामों के लगभग 4933 हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। परियोजना का मुख्य उद्देश्य जल उपयोग दक्षता को बढ़ाना, पानी की हर बूंद का समुचित उपयोग करते हुए कृषि उत्पादन में वृद्धि करना तथा किसानों की आय में स्थायी सुधार लाना है।

परियोजना में विद्युत आपूर्ति सौर ऊर्जा के माध्यम से की जाएगी। साथ ही जल के नियंत्रित एवं वैज्ञानिक उपयोग के लिए सुपरवाइजरी कंट्रोल एंड डेटा एक्विज़िशन तथा इंटरनेट ऑफ थिंग्स जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाएगा। इस परियोजना के माध्यम से सिंचाई परिसंपत्तियों पाइप नेटवर्क संरचना एवं जल प्रबंधन के संचालन में किसानों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। डेटा एवं विश्लेषण के आधार पर यह निर्धारित किया जाएगा कि कहां, कब और कितना पानी देना है। बेहतर सिंचाई व्यवस्था के साथ उन्नत कृषि पद्धतियों को अपनाकर किसानों को जलवायु परिवर्तन से जुड़े जोखिमों से निपटने में सक्षम बनाया जा रहा है, जिससे दीर्घकालीन उत्पादकता, लाभप्रदता और किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार सुनिश्चित होगा।

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जनभागीदारी सबसे दूर सबसे पहले अभियान के तहत गांवों में लगाया गया शिविर ।

 

 

 

 भारत सरकार जनजातीय कार्य मंत्रालय के निर्देशानुसार "जन भागीदारी सबसे दूर सबसे पहले" अभियान के तहत फरसाबहार विकास खंड के ग्राम पुराईनबंध कांसाबेल विकास खंड के ग्राम कुसुमताल बगीचा विकास खंड के देवडाड़, पतराटोली, ग्राम पंचायत पीठा आमा, जशपुर विकास खंड के ग्राम घोलेंगे , कुनकुरी विकास खंड के ग्राम कलिबा, ग्राम गोरिया, ग्राम चटकपुर, आदि अन्य ग्राम पंचायतों में शिविर लगाया गया।

जिसमें विशेष पिछड़ी जनजाति पहाड़ी कोरवा परिवारों का राशनकार्ड बनाकर दिया गया लोगों का पेंशन स्वीकृत आदेश दिया गया।

 ग्रामवासियों का स्वास्थ्य परीक्षण और आधार अपडेट,आय जाति, निवास प्रमाण के आनलाइन आवेदन और आयुष्मान कार्ड बनाया गया।

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जनभागीदारी सबसे दूर सबसे पहले अभियान के तहत गांवों में लगाया गया शिविर ।

 

 

 

 भारत सरकार जनजातीय कार्य मंत्रालय के निर्देशानुसार "जन भागीदारी सबसे दूर सबसे पहले" अभियान के तहत फरसाबहार विकास खंड के ग्राम पुराईनबंध कांसाबेल विकास खंड के ग्राम कुसुमताल बगीचा विकास खंड के देवडाड़, पतराटोली, ग्राम पंचायत पीठा आमा, जशपुर विकास खंड के ग्राम घोलेंगे , कुनकुरी विकास खंड के ग्राम कलिबा, ग्राम गोरिया, ग्राम चटकपुर, आदि अन्य ग्राम पंचायतों में शिविर लगाया गया।

जिसमें विशेष पिछड़ी जनजाति पहाड़ी कोरवा परिवारों का राशनकार्ड बनाकर दिया गया लोगों का पेंशन स्वीकृत आदेश दिया गया।

 ग्रामवासियों का स्वास्थ्य परीक्षण और आधार अपडेट,आय जाति, निवास प्रमाण के आनलाइन आवेदन और आयुष्मान कार्ड बनाया गया।

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जनभागीदारी सबसे दूर सबसे पहले अभियान के तहत गांवों में लगाया गया शिविर ।

 

 

 

 भारत सरकार जनजातीय कार्य मंत्रालय के निर्देशानुसार "जन भागीदारी सबसे दूर सबसे पहले" अभियान के तहत फरसाबहार विकास खंड के ग्राम पुराईनबंध कांसाबेल विकास खंड के ग्राम कुसुमताल बगीचा विकास खंड के देवडाड़, पतराटोली, ग्राम पंचायत पीठा आमा, जशपुर विकास खंड के ग्राम घोलेंगे , कुनकुरी विकास खंड के ग्राम कलिबा, ग्राम गोरिया, ग्राम चटकपुर, आदि अन्य ग्राम पंचायतों में शिविर लगाया गया।

जिसमें विशेष पिछड़ी जनजाति पहाड़ी कोरवा परिवारों का राशनकार्ड बनाकर दिया गया लोगों का पेंशन स्वीकृत आदेश दिया गया।

 ग्रामवासियों का स्वास्थ्य परीक्षण और आधार अपडेट,आय जाति, निवास प्रमाण के आनलाइन आवेदन और आयुष्मान कार्ड बनाया गया।

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सुशासन तिहार में लगातार मिल रहा योजनाओं का लाभ, कुसुमताल में मिली खुशियों की सौगात

 

 

 

 

 

 सुशासन तिहार 2026 के अंतर्गत जिलेवासियों को लगातार शासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ मिल रहा है। इसी कड़ी में जनपद पंचायत कांसाबेल के ग्राम पंचायत कुसुमताल में आयोजित जनसमस्या निवारण शिविर में ग्रामीणों को खुशियों की सौगात मिली। शिविर में जहां समस्याओं का त्वरित निराकरण किया गया, वहीं पात्र हितग्राहियों को मौके पर ही विभिन्न योजनाओं से लाभान्वित किया गया। शिविर में प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत हितग्राहियों को उनके पक्के घर के सपने को साकार करने हेतु “खुशियों की चाबी” प्रदान की गई, जिससे ग्रामीणों में विशेष उत्साह देखा गया।

इसके साथ ही समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित योजनाओं के अंतर्गत हितग्राहियों को पेंशन प्रमाण पत्र वितरित किए गए। दिव्यांग हितग्राहियों को भी शिविर में विशेष रूप से लाभान्वित किया गया। हितग्राही को सहायक उपकरण के रूप में व्हीलचेयर प्रदान की गई, जिससे उसकी दैनिक जीवन की गतिविधियां सरल हो सकेंगी और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा। कार्यक्रम में जनपद पंचायत अध्यक्ष श्रीमती सरिता भगत, जिला पंचायत सदस्य श्रीमती हीरामती पैंकरा, वरिष्ठ नागरिक श्री सुदाम पांडा तथा अन्य जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति रही। सभी ने हितग्राहियों को योजनाओं का लाभ प्रदान करते हुए शासन की जनकल्याणकारी पहल की सराहना की।

शिविर के दौरान “नशा मुक्त भारत अभियान” के तहत उपस्थित ग्रामीणों को शपथ भी दिलाई गई, जिसमें सभी ने नशे से दूर रहने और समाज को नशामुक्त बनाने का संकल्प लिया। ग्रामीणों ने कहा कि सुशासन तिहार के माध्यम से उन्हें योजनाओं का लाभ घर के पास ही मिल रहा है, जिससे समय, धन और श्रम की बचत हो रही है। यह पहल न केवल लोगों की समस्याओं का समाधान कर रही है, बल्कि उनके जीवन स्तर को भी बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

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जिला चिकित्सालय सूरजपुर में स्वास्थ्य सेवाओं की बड़ी सौगात : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने किया अत्याधुनिक सीटी स्कैन सुविधा का वर्चुअल शुभारंभ

 

 

 मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज सुशासन तिहार के अवसर पर जिला चिकित्सालय सूरजपुर में 32 स्लाइस अत्याधुनिक सीटी स्कैन मशीन का वर्चुअल शुभारंभ किया। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, छत्तीसगढ़ शासन, सीजीएमएससी तथा मुख्यमंत्री शासकीय अस्पताल रूपांतरण कोष (CMPHTF) के माध्यम से लगभग 449.99 लाख रुपये की लागत से यह सुविधा स्थापित की गई है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि यह पहल जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को नई मजबूती प्रदान करेगी और आम नागरिकों को बेहतर एवं समयबद्ध उपचार उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। यह अत्याधुनिक सीटी स्कैन सुविधा सूरजपुर जिले में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और सुदृढ़ीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित होगी।

सीटी स्कैन सुविधा प्रारंभ होने से सूरजपुर जिले की लगभग 9 लाख 11 हजार आबादी के साथ-साथ पड़ोसी जिलों के मरीजों को भी सीधा लाभ मिलेगा। अब सड़क दुर्घटनाओं में हेड इंजरी, मस्तिष्क में रक्तस्राव या खून का थक्का जमना, कैंसर, ट्यूमर, स्ट्रोक (पैरालिसिस), छाती संबंधी संक्रमण, पेट की गंभीर बीमारियां तथा मिर्गी जैसी जटिल बीमारियों की जांच जिला चिकित्सालय में ही संभव हो सकेगी।

अब तक इन जांचों के लिए मरीजों को अंबिकापुर रेफर किया जाता था, जिससे समय और आर्थिक दोनों प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ता था। नई सुविधा शुरू होने से मरीजों को बाहर जाने की आवश्यकता नहीं होगी तथा निजी केंद्रों की तुलना में काफी कम दर पर सीटी स्कैन की सुविधा उपलब्ध हो सकेगी।

जिला चिकित्सालय में रेडियोलॉजिस्ट और प्रशिक्षित टेक्नीशियनों की 24×7 टीम भी तैनात की गई है, जिससे मरीजों को निरंतर और गुणवत्तापूर्ण सेवाएं मिल सकेंगी। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार इस सुविधा से मरीजों और उनके परिजनों पर आर्थिक बोझ कम होगा तथा जिले में बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और अधिक मजबूत होगी।

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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने ‘कामयाबी वेन’ को दिखाई हरी झंडी : दूरस्थ गांवों के विद्यार्थियों तक पहुंचेगी डिजिटल शिक्षा की नई रोशनी

 

 मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सुशासन तिहार के अंतर्गत कोरिया जिले के सोनहत विकासखंड के ग्राम कुशहा में आयोजित चौपाल के दौरान नीति आयोग द्वारा वित्तपोषित ‘मिशन कामयाबी’ के तहत संचालित ‘कामयाबी वेन’ को हरी झंडी दिखाकर शुभारंभ किया। इस पहल के माध्यम से दूरस्थ एवं ग्रामीण अंचलों के विद्यार्थियों तक आधुनिक डिजिटल शिक्षा और तकनीकी आधारित सीखने के अवसर पहुंचाए जाएंगे, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता और सीखने के अनुभव में सकारात्मक बदलाव आएगा।

मुख्यमंत्री श्री साय ने इस अवसर पर कहा कि प्रदेश सरकार का प्रयास है कि गांवों और दूरस्थ क्षेत्रों के बच्चों को भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और आधुनिक तकनीक का समान अवसर मिले। उन्होंने कहा कि आज का दौर ज्ञान, नवाचार और तकनीक का है, ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों को भी डिजिटल संसाधनों और नई शिक्षण पद्धतियों से जोड़ना आवश्यक है, ताकि वे भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार हो सकें।

उल्लेखनीय है कि ‘कामयाबी वेन’ के माध्यम से विद्यार्थियों को वर्चुअल रियलिटी (VR) एवं ऑगमेंटेड रियलिटी (AR) तकनीक आधारित शिक्षण उपलब्ध कराया जाएगा। यह वेन विज्ञान, गणित, तकनीकी अवधारणाओं और अन्य विषयों को अधिक रोचक, अनुभवात्मक और व्यवहारिक तरीके से समझाने में सहायक होगी। इससे विद्यार्थियों की सीखने की क्षमता, तकनीकी जागरूकता तथा बोर्ड परीक्षाओं के परिणामों में सुधार आने की संभावना है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने विश्वास व्यक्त किया कि यह अभिनव पहल दूरस्थ गांवों के विद्यार्थियों के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोलेगी तथा उन्हें विज्ञान, डिजिटल तकनीक और आधुनिक शिक्षा से सरल एवं प्रभावी ढंग से जोड़ने का माध्यम बनेगी।

इस अवसर पर विधायक श्री भैया लाल राजवाड़े, स्थानीय जनप्रतिनिधिगण, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध सिंह, विशेष सचिव श्री रजत बंसल, कलेक्टर श्रीमती रोक्तिमा यादव, पुलिस अधीक्षक श्री रवि कुमार कुर्रे सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित थे।

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सबसे दूर, सबसे पहले: नारायणपुर के 262 आदिवासी गाँवों में पहुँचेगा विकास'जनजाति गरिमा उत्सव' का शंखनाद

 

 

 

 

 

 

 छत्तीसगढ़ के अंदरूनी और दूरस्थ अंचलों में बसे जनजातीय परिवारों के सशक्तिकरण और समग्र विकास के लिए नारायणपुर जिले में “सबसे दूर, सबसे पहले” की अनूठी थीम पर 'जनजाति गरिमा उत्सव' जन भागीदारी अभियान की शुरुआत हो गई है। जिले के 262 जनजातीय बाहुल्य गाँवों को पूरी तरह संतृप्त (Saturated) करने के उद्देश्य से जिला स्तरीय उन्मुखीकरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें कलेक्टर ने अधिकारियों को मिशन मोड में काम करने के कड़े निर्देश दिए।

 कलेक्टर ने कहा कि इस अभियान का मुख्य ध्येय शासन की हर एक कल्याणकारी योजना का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाना है। इसके लिए ज़िला प्रशासन और नोडल अधिकारियों की टीम सीधे जमीनी स्तर पर मोर्चा संभालेगी।

*तीन बड़े अभियानों का त्रिवेणी संगम: गाँव-गाँव शिविर*

 इस अभियान के तहत जिले के दुर्गम और दूरस्थ क्षेत्रों में विकास की रफ्तार तेज करने के लिए त्रिस्तरीय रणनीति तैयार की गई है। जिले के सभी 262 जनजातीय बाहुल्य गाँवों में विशेष जन भागीदारी शिविर लगाए जाएंगे। इसके अंतर्गत 255 गाँवों को कवर किया जाएगा, जहाँ 'आदि सेवा केंद्रों' के माध्यम से जनसुनवाई होगी और ग्रामीणों की समस्याओं का मौके पर ही त्वरित निराकरण किया जाएगा। विशेष रूप से पिछड़ी जनजातियों के विकास के लिए 204 गाँवों में पात्र हितग्राहियों को चिह्नित कर सीधे शासकीय योजनाओं से जोड़ा जाएगा।

*एक ही छत के नीचे मिलेंगी सभी सुविधाएँ*

18 मई से 25 मई 2026 तक चलने वाले इस विशेष अभियान के दौरान गाँवों में ही एकीकृत शिविरों का आयोजन हो रहा है। इन शिविरों के माध्यम से दूरस्थ अंचलों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच सुनिश्चित करने के लिए विशेष मेडिकल कैंप,पात्रता के अनुसार ऑन-द-स्पॉट जनकल्याणकारी योजनाओं के फॉर्म भरना और मौके पर ही लाभान्वित करना तथा विभिन्न विभागों के अधिकारी एक ही स्थान पर मौजूद रहकर ग्रामीणों की समस्याओं का समाधान करेंगे।

 सामूहिक सहयोग और जनभागीदारी से ही जनजातीय क्षेत्रों का समग्र विकास संभव है। यह अभियान केवल सरकारी योजनाओं का वितरण नहीं, बल्कि शासन और ग्रामीणों के बीच के विश्वास को और मजबूत करने का माध्यम है। यह आदिवासी समुदायों के सशक्तिकरण, सम्मान और विकास की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा।"

*जनप्रतिनिधियों और समाज से सहयोग की अपील*

कलेक्टर ने जिले के सभी जनप्रतिनिधियों, त्रिस्तरीय पंचायत पदाधिकारियों, सामाजिक संगठनों तथा जागरूक ग्रामीणों से इस अभियान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की अपील की है। प्रशासन का मुख्य फोकस ग्रामीणों को उनके अधिकारों और सुविधाओं के प्रति जागरूक कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है, ताकि कोई भी पात्र व्यक्ति हक से

वंचित न रहे।

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धमतरी के शिवचरण की टूटी उम्मीदों को समाधान शिविर ने दिया नया संबल राजस्व मंत्री के हाथों मिली मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल

 

 

 

जब शासन संवेदनशील हो और नीतियां जन-सरोकार से जुड़ी हों, तो आपदा से हारा इंसान भी दोबारा सम्मान से सिर उठाकर जीने की ताकत पा लेता है। धमतरी जिले के ग्राम पीपरछेड़ी में आयोजित समाधान शिविर इसका जीवंत उदाहरण बना। आकाशीय बिजली की एक गड़गड़ाहट ने ग्राम पीपरछेड़ी निवासी शिवचरण कंवर की जिंदगी को मानो एक पल में थाम दिया था। वर्ष 2022 में हुई इस दर्दनाक दुर्घटना में शिवचरण ने अपने दोनों पैरों की सक्रियता खो दी। जो हाथ कभी कड़ी मेहनत कर परिवार का भरण-पोषण करते थे, वे अचानक दूसरों के सहारे के मोहताज हो गए। घर की कमजोर आर्थिक स्थिति और शारीरिक असमर्थता ने शिवचरण को गहरे अवसाद में धकेल दिया था। लेकिन छत्तीसगढ़ शासन के 'सुशासन तिहार' ने उनकी जिंदगी का रुख मोड़ दिया है।

*समाधान शिविर से मिला नया जीवन*

 ग्राम पीपरछेड़ी में आयोजित राज्य शासन के 'समाधान शिविर' में शिवचरण की इस लाचारी को बेहद संवेदनशीलता से सुना गया। शिविर में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे प्रदेश के राजस्व मंत्री श्री टंक राम वर्मा ने मामले की गंभीरता को देखते हुए शिवचरण को तुरंत मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल प्रदान की।

बैटरी चलित इस ट्राईसाइकिल की चाबी जैसे ही शिवचरण के हाथों में आई, उनके चेहरे पर खोया हुआ आत्मविश्वास लौट आया। भावुक होते हुए शिवचरण ने कहा कि आकाशीय बिजली ने मुझसे मेरे पैर छीन लिए थे, मुझे लगता था कि अब मैं जिंदगी भर एक कमरे में कैद रह जाऊंगा। लेकिन आज इस मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल ने मुझे फिर से अपने पैरों पर खड़ा कर दिया है। अब मैं बिना किसी सहारे के अपने काम खुद कर सकूंगा और समाज में आत्मनिर्भर होकर घूम सकूंगा।

*त्रिवेणी संगम: राशन,सम्मान और महतारी वंदन का साथ*

शिवचरण के परिवार के लिए यह समाधान शिविर केवल एक ट्राईसाइकिल मिलने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि शासन की अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं ने भी उनके घर के चूल्हे को बुझने से बचाया है। शिवचरण के जीवन को सुरक्षित करने के लिए शासन की तीन बड़ी योजनाओं ने सुरक्षा कवच का काम किया है। मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल,नया राशन कार्ड और महतारी वंदन योजना के तहत शिवचरण की पत्नी को हर महीने नियमित रूप से मिल रही 1000 रुपये की सहायता राशि, जिससे परिवार को मजबूत आर्थिक संबल मिलेगा।

मुख्यमंत्री और प्रशासन का जताया आभार कागजों से निकलकर जिंदगी बदलती योजनाएं

इस संवेदनशीलता के लिए शिवचरण और उनके पूरे परिवार ने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय और जिला प्रशासन धमतरी के प्रति सहृदय आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि यह सरकार सचमुच गरीबों और दिव्यांगों की तकलीफ को समझती है।

पीपरछेड़ी का यह समाधान शिविर केवल सरकारी फाइलों के निपटारे का माध्यम नहीं था, बल्कि यह इस बात का सशक्त प्रमाण है कि जब सरकार प्रतिबद्धता के साथ जनता के द्वार पहुंचती है, तो योजनाएं केवल कागजों तक सीमित नहीं रहतीं। वे सीधे जरूरतमंदों के जीवन में सम्मान, स्वावलंबन और नई उम्मीद का सवेरा लेकर आती हैं। शिवचरण की यह कहानी छत्तीसगढ़ शासन के 'अंत्योदय' के संकल्प को पूरी तरह चरितार्थ करती है।

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“लखपति से करोड़पति दीदी” बनने का मुख्यमंत्री ने दिया मंत्र, महिलाओं को उद्यम विस्तार के लिए किया प्रेरित

 

 

 

 

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज ग्राम रामपुर में सुशासन तिहार के अंतर्गत आयोजित जनसमस्या निवारण शिविर में विभिन्न शासकीय योजनाओं के हितग्राहियों से आत्मीय संवाद कर उनके जीवन में आए सकारात्मक बदलावों को करीब से जाना। मुख्यमंत्री ने महिलाओं, किसानों और ग्रामीण परिवारों से योजनाओं के लाभ, आयवृद्धि, आजीविका और जीवनस्तर में आए सुधारों की जानकारी लेते हुए कहा कि जब शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुँचता है, तभी सुशासन की वास्तविक सार्थकता सिद्ध होती है।

संवाद के दौरान मुख्यमंत्री श्री साय ने साधना महिला स्व-सहायता समूह से जुड़ी श्रीमती जागेश्वरी प्रजापति से उनके समूह द्वारा तैयार किए जा रहे आलू चिप्स के व्यवसाय की जानकारी ली। श्रीमती जागेश्वरी ने बताया कि समूह अब तक आलू चिप्स की बिक्री से लगभग 1 लाख 85 हजार रुपये की आय अर्जित कर चुका है। यह सुनकर मुख्यमंत्री ने सहज मुस्कान के साथ कहा, “आलू चिप्स का नाम सुनकर ही मुंह में पानी आ रहा है।” मुख्यमंत्री की इस आत्मीय टिप्पणी से शिविर स्थल पर हर्ष और आत्मीयता का वातावरण बन गया। 

मुख्यमंत्री ने समूह की महिलाओं की मेहनत और उद्यमशीलता की सराहना करते हुए उन्हें अपने उत्पादों का विस्तार करने, बेहतर पैकेजिंग और बाज़ार से जुड़कर आय बढ़ाने के लिए प्रेरित किया। मुख्यमंत्री ने इस दौरान महिलाओं से “लखपति दीदी योजना” की प्रगति पर चर्चा करते हुए कहा कि प्रदेश में अब तक 8 लाख से अधिक महिलाएं “लखपति दीदी” बन चुकी हैं तथा सरकार का लक्ष्य 10 लाख लखपति दीदियां तैयार करना है। उन्होंने महिलाओं का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि अब समय केवल लखपति बनने का नहीं, बल्कि आगे बढ़कर “करोड़पति दीदी” बनने का है। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि आर्थिक रूप से सशक्त महिलाएं परिवार, समाज और राज्य के विकास की सबसे मजबूत आधारशिला होती हैं।शिविर में मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राही श्री प्राण साय प्रजापति से भी आत्मीय चर्चा की। हितग्राही ने बताया कि योजना के माध्यम से उनके परिवार का पक्के मकान का सपना पूरा हुआ है। मुख्यमंत्री ने उन्हें शुभकामनाएं देते हुए कहा कि हर गरीब परिवार को सम्मानपूर्वक पक्की छत उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है और इस दिशा में तेजी से कार्य किया जा रहा है।

सुशासन तिहार की सार्थकता उस समय और स्पष्ट दिखी जब ग्राम चंद्रपुर निवासी श्रीमती प्रिया सिंह ने मुख्यमंत्री को बताया कि उन्होंने शिविर में राशन कार्ड के लिए आवेदन दिया था और उसी दिन उनका आवेदन निराकृत कर राशन कार्ड उपलब्ध करा दिया गया। मुख्यमंत्री ने इसे प्रशासन की तत्परता और संवेदनशीलता का उदाहरण बताते हुए संबंधित अधिकारियों की सराहना की तथा कहा कि सुशासन तिहार का मूल उद्देश्य ही आम नागरिकों की समस्याओं का त्वरित, सरल और प्रभावी समाधान सुनिश्चित करना है, ताकि लोगों को सरकारी कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें और सरकार स्वयं उनके द्वार तक पहुँचे।

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के एक लाभार्थी से भी संवाद किया, जिन्होंने बताया कि वे प्राप्त राशि का उपयोग सब्जी उत्पादन में कर रहे हैं, जिससे उनकी आय और आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है। मुख्यमंत्री ने उनकी पहल की सराहना करते हुए उन्हें प्रधानमंत्री कुसुम योजना के अंतर्गत सोलर पंप लगाने के लिए प्रेरित किया, ताकि सिंचाई लागत कम हो, खेती अधिक लाभकारी बने और किसानों को बिजली खर्च से राहत मिल सके। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक, नवीकरणीय ऊर्जा और नवाचार आधारित खेती ही किसानों की आय वृद्धि का मजबूत आधार बनेगी।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने हितग्राहियों के अनुभव सुनने के बाद प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि योजनाओं का वास्तविक प्रभाव तभी दिखाई देता है जब उसका लाभ पात्र व्यक्ति तक पहुँचकर उसके जीवन में बदलाव लाए। उन्होंने ग्रामीणों से आह्वान किया कि वे शासन की योजनाओं की जानकारी लेकर उनका अधिकाधिक लाभ उठाएं और आत्मनिर्भर, समृद्ध तथा विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में सहभागी बनें।

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जशपुर जिले के 417 ग्रामों में जनजातीय गरिमा उत्सव का आयोजन।

 

 

 

भारत सरकार जनजातीय कार्य मंत्रालय के निर्देशानुसार “जन भागीदारी – सबसे दूर, सबसे पहले” अभियान के अंतर्गत जशपुर जिले के 417 धरती आबा ग्राम तथा पीएम जनमन ग्रामों में व्यापक स्तर पर जनजातीय गरिमा उत्सव का आयोजन किया जाएगा। यह अभियान 18 मई से 25 मई 2026 तक संचालित होगा।  

इस अभियान के तहत 18 मई 2026 को जिला कलेक्टर रोहित व्यास की अध्यक्षता में सभी विभाग प्रमुखों तथा एसडीएम की बैठक आयोजित की जाएगी । 19 मई से 24 मई तक जिले के 42 क्लस्टर में संतृप्तिकरण शिविर का आयोजन किया जाएगा ।

21 से 23 मई तक आदि सेवा केंद्रों में जनसुनवाई कार्यक्रम होंगे जहाँ लोग अपनी समस्याएं बतायेंगे तथा उसका वहीं निवारण किया जाएगा ।

उक्त अभियान का मुख्य उद्देश्य दूरस्थ जनजातीय क्षेत्रों में शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी पहुंचाना, हितग्राहियों को योजनाओं से जोड़ना तथा जनजातीय समाज की संस्कृति, परंपरा एवं गौरव को सम्मान देना है। अभियान के दौरान स्वास्थ्य शिविर, जागरूकता कार्यक्रम, जनसंवाद, हितग्राही संतृप्तिकरण शिविर एवं विभिन्न विभागों द्वारा सेवा प्रदाय गतिविधियां आयोजित की जाएंगी।  

कार्यक्रमों में स्थानीय जनप्रतिनिधि, पारंपरिक मुखिया, जनजातीय कलाकार, युवा समूह, स्वयं सहायता समूह, आंगनबाड़ी एवं स्वास्थ्य कार्यकर्ता सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारी सहभागिता करेंगे। उत्सव के दौरान जनजातीय लोकनृत्य, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, योजनाओं की जानकारी, हितग्राही अनुभव साझा करने तथा जनजागरूकता गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा।  

अभियान के अंतर्गत स्वास्थ्य परीक्षण शिविरों में सामान्य स्वास्थ्य जांच के साथ सिकल सेल एनीमिया एवं टीबी जांच पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। साथ ही पात्र हितग्राहियों को विभिन्न शासकीय योजनाओं से लाभान्वित करने हेतु विशेष शिविर लगाए जाएंगे।  

जिला प्रशासन जशपुर द्वारा अभियान के सफल संचालन हेतु सभी संबंधित विभागों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।

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अंतर्राष्ट्रीय नर्सेस दिवस पर बड़ा ऐलान “नर्सिंग सिस्टर” अब कहलाएंगी “सीनियर नर्सिंग ऑफिसर”

 

 

 

अंतर्राष्ट्रीय नर्सेस दिवस के अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने राज्य के नर्सिंग संवर्ग के सम्मान में बड़ा निर्णय लेते हुए पदनाम परिवर्तन की घोषणा की है। अब “नर्सिंग सिस्टर” को “सीनियर नर्सिंग ऑफिसर” और “स्टाफ नर्स” को “नर्सिंग ऑफिसर” के नाम से जाना जाएगा।

यह घोषणा डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय रायपुर में आयोजित विशेष कार्यक्रम के दौरान की गई। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में नर्सिंग अधिकारी, नर्सिंग छात्र-छात्राएं तथा अस्पताल के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।

स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि नर्सें स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ हैं, जो दिन-रात समर्पण भाव से मरीजों की सेवा करती हैं। उन्होंने कहा कि चिकित्सा सेवा में मानवीय संवेदनाओं और सेवा भावना का सबसे बड़ा उदाहरण नर्सिंग स्टाफ प्रस्तुत करता है।

उन्होंने कोविड काल को याद करते हुए कहा कि कठिन परिस्थितियों में भी नर्सिंग स्टाफ ने पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ अपनी जिम्मेदारियां निभाईं। मंत्री ने कहा कि “चिकित्सा सेवा में नर्स माँ के समान होती है, क्योंकि वे मरीजों की देखभाल परिवार की तरह करती हैं।”

स्वास्थ्य मंत्री ने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए लगातार कार्य कर रही है और वर्षों से लंबित सुविधाओं एवं व्यवस्थाओं को पूरा किया जा रहा है।

इस अवसर पर सीनियर नर्सिंग ऑफिसर डॉ. रीना राजपूत, नीलिमा शर्मा, रंजना सिंह ठाकुर, सुमन देवांगन, कोमेश्वरी नवरंगे, प्रगति सतपुते, शीतल सोनी और नमिता डेनियल सहित समस्त नर्सिंग अधिकारियों को बधाई देते हुए उनके कार्यों की सराहना की गई।

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07 मई को ग्राम पंचायतों में चावल महोत्सव, रोजगार और आवास दिवस का त्रिवेणी संगम।

 

 

 

 

रायपुर, 07 मई 2026/

छत्तीसगढ़ की ग्राम पंचायतों में कल 07 मई को विकास और जन-सेवा का एक बड़ा अभियान शुरू होने जा रहा है। सुशासन तिहार के तत्वावधान में राज्य भर की पंचायतों में एक साथ चावल महोत्सव, रोजगार दिवस और आवास दिवस का भव्य आयोजन किया जाएगा। इस विशेष पहल का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण विकास की योजनाओं को गति देना और धरातल पर मौजूद समस्याओं का तत्काल समाधान करना है।

*प्रमुख उद्देश्य एवं समाधान*

        इस अभियान के केंद्र में ग्रामीण हितग्राही हैं। आयोजन का मुख्य लक्ष्य मनरेगा और प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) से संबंधित लंबित शिकायतों और तकनीकी समस्याओं का मौके पर ही निपटारा। पात्र हितग्राहियों को शासन की जनहितकारी योजनाओं की विस्तृत जानकारी प्रदान करना।

*विकास के तीन मुख्य स्तंभ*

        रोजगार दिवस 7 मई को मनरेगा कार्यों की सघन समीक्षा की जाएगी और आने वाले समय के लिए रोजगार के नए अवसरों के सृजन पर कार्ययोजना बनाई जाएगी। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत लंबित मामलों को प्राथमिकता दी जाएगी। शासन का विशेष लक्ष्य स्वीकृत आवासों को आगामी 90 दिनों के भीतर पूर्ण कराना है। जल संरक्षण हेतु “मोर गांव- मोर पानी- मोर तरिया” अभियान के अंतर्गत “नवा तरिया आय के जरिया” थीम पर विशेष चर्चा और कार्य होंगे, जिससे मत्स्य पालन या अन्य माध्यमों से आजीविका बढ़ सके।

*तकनीक और सहभागिता से सुशासन*

        अब योजनाओं की जानकारी हासिल करना और भी आसान होगा। सरकार क्यूआर (फत्) कोड आधारित सूचना प्रणाली को बढ़ावा दे रही है, जिससे पारदर्शिता सुनिश्चित होगी। इस अभियान को सफल बनाने के लिए स्थानीय जनप्रतिनिधियों, महिला स्व-सहायता समूहों और युवाओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की गई है। यह आयोजन केवल एक सरकारी प्रक्रिया नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के गांवों को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

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सैनिकों और पूर्व सैनिकों को स्टाम्प शुल्क में 25% छूट।

 

 

 

 छत्तीसगढ़ सरकार ने सेवारत सैनिकों, भूतपूर्व सैनिकों एवं उनकी विधवाओं के सम्मान और कल्याण को ध्यान में रखते हुए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। राज्य सरकार ने ₹25 लाख तक की संपत्ति की रजिस्ट्री पर स्टाम्प शुल्क में 25 प्रतिशत की छूट देने का निर्णय लिया है। माननीय मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में पंजीयन मंत्री श्री ओपी चौधरी की पहल पर विभाग द्वारा यह प्रस्ताव तैयार किया गया । अधिसूचना जारी होने पश्चात सैनिक एवं भूतपूर्व सैनिको को मिलने वाली यह छूट प्रभावशील हो गई है।

अधिसूचना के अनुसार, सैनिकों एवं भूतपूर्व सैनिकों एवं दिवंगत होने पर उनके जीवन साथी को इस छूट की पात्रता केवल एक बार के लिए होगी। ₹25 लाख तक की सीमा तक यह छूट मिलेगी । यदि संपत्ति का मूल्य इससे अधिक होता है, तो अतिरिक्त राशि पर नियमानुसार स्टाम्प शुल्क देय होगा।

देश की सेवा करने वाले सैनिकों के योगदान को सम्मान देने के लिए यह एक महत्वपूर्ण और संवेदनशील निर्णय है।

 वर्तमान में अचल संपत्ति के क्रय-विक्रय विलेखों पर लगभग 5 प्रतिशत स्टाम्प शुल्क देय होता है, अब इस नई व्यवस्था से पात्र हितग्राहियों को स्टाम्प शुल्क में राहत मिलेगी। मातृभूमि की रक्षा के लिए अपनी जन्मभूमि से दूर रहकर सेवा करने वाले सैनिकों को आवास क्रय लागत में कमी की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम है।

अधिसूचना में यह भी स्पष्ट किया गया है कि छूट का लाभ लेने के लिए छत्तीसगढ़ का मूल निवासी प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। साथ ही, लाभ केवल एक बार ही लिया जा सकेगा, जिसके लिए शपथ पत्र देना होगा तथा संबंधित सैनिक/पूर्व सैनिक या विधवा होने के दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे।

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महिलाओं के नाम जमीन रजिस्ट्री पर 50% शुल्क छूट महिला सशक्तिकरण की दिशा में छत्तीसगढ़ सरकार का बड़ा निर्णय

जशपुर जंक्शन  07 मई 

छत्तीसगढ़ सरकार ने महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए उनके नाम पर कराए जा रहे भूमि रजिस्ट्रेशन शुल्क में 50 प्रतिशत की कमी करने का फैसला लिया है। माननीय मुख्यमंत्री जी श्री विष्णुदेव साय के मार्गदर्शन में माननीय पंजीयन मंत्री श्री ओ पी चौधरी की पहल पर यह प्रस्ताव तैयार किया गया .मंत्रिपरिषद द्वारा इस प्रस्ताव को मंजूरी दिेये जाने के उपरान्त अधिसूचना प्रकाशन से यह छूट प्रभावशील हो गई है।इस निर्णय से महिलाओं के नाम संपत्ति के रजिस्ट्री को बढ़ावा मिलेगा जिससे महिला सशक्तिकरण को बल मिलेगा.  

 अधिसूचना के अनुसार, महिलाओं के पक्ष में निष्पादित अचल संपत्ति अंतरण से जुड़े दस्तावेजों पर लागू पंजीयन शुल्क में पचास फीसदी की छूट दी जाएगी। वर्तमान में ऐसे दस्तावेजों पर संपत्ति के बाजार मूल्य के आधार पर 4 प्रतिशत की दर से पंजीयन शुल्क लिया जाता है। अब महिलाओं के नाम पर होने वाले रजिस्ट्री में पंजीयन शुल्क दो प्रतिशत लगेगा।

महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन को बढ़ावा देने के लिए यह एक दूरदर्शी और सकारात्मक पहल है। वर्ष 2024-25 में महिलाओं के नाम पर 82,755 दस्तावेजों का पंजीयन हुआ है।नए प्रावधान के लागू होने से अनुमानित रूप से करीब 200 करोड़ रुपये के राजस्व में कमी आ सकती है।राजस्व में कमी के बावजूद महिलाओं को सशक्त, समृद्ध और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में यह कदम महत्वपूर्ण है।इस निर्णय से महिलाओं के नाम पर संपत्ति पंजीयन में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और समाज में उनकी आर्थिक भागीदारी मजबूत होगी।

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सिमड़ा ग्राम पंचायत में ग्रामवासियों ने श्रमदान कर दिया स्वच्छता का संदेश

 

 

 

 

 कलेक्टर श्री रोहित व्यास के निर्देश में सुशासन तिहार के तहत ग्राम पंचायतों और नगरीय में जिला स्तरीय जनसमस्या निवारण शिविर आयोजन किया जा रहा है।

इसी कड़ी में दुलदुला विकास खंड के ग्राम पंचायत सिमड़ा में सुशासन तिहार के उपलक्ष्य में सामूहिक स्वच्छता श्रमदान किया गया जिसमें समस्त अधिकारी कर्मचारी ग्राम पंचायत के ग्रामीण एवं जनप्रधिनिधि उपस्थित रहे‌।

स्वच्छता अभियान के तहत गांव के परिसर की साफ सफाई की गई और लोगों को स्वच्छता के प्रति जागरूक किया गया।

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मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के निर्देश के मात्र 3 दिन भीतर बच्चों को मिली क्रिकेट किट और स्पोर्ट्स ड्रेस

 

 

 मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के सुशासन तिहार के दौरान 03 मई को दिए गए निर्देशों पर त्वरित अमल करते हुए प्रशासन ने आज ग्राम भैंसामुड़ा गांव के बच्चों को क्रिकेट किट और स्पोर्ट्स ड्रेस वितरित की। मुख्यमंत्री के निर्देशों का इतने कम समय में पालन होने पर खिलाड़ियों ने खुशी जाहिर करते हुए इसे अपने लिए बड़ी सौगात बताया। मुख्यमंत्री श्री साय अपने जशपुर जिला प्रवास के दौरान पत्थलगांव विकासखंड के ग्राम भैंसामुड़ा स्थित शासकीय प्राथमिक शाला चंदागढ़ के स्कूल मैदान पहुंचे थे।

यहां उन्होंने बच्चों को क्रिकेट खेलते देखा और उनके उत्साह से प्रभावित होकर स्वयं मैदान में उतरकर बच्चों के साथ क्रिकेट खेला। इस दौरान उन्होंने बच्चों से संवाद कर उनकी खेल के प्रति रुचि और नियमित अभ्यास के बारे में जानकारी ली। बच्चों में खेल के प्रति बढ़ते उत्साह को देखते हुए मुख्यमंत्री ने मौके पर ही कलेक्टर को निर्देशित किया कि स्कूल के बच्चों के लिए आवश्यक क्रिकेट किट और स्पोर्ट्स ड्रेस उपलब्ध कराई जाए। साथ ही ग्रामीण प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से गांव में मिनी स्टेडियम निर्माण की घोषणा भी की थी।

        मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार आज बच्चों को खेल सामग्री उपलब्ध कराई गई। सामग्री मिलने के बाद खिलाड़ियों में खासा उत्साह देखने को मिला और उनके चेहरों पर खुशी साफ झलक रही थी। खिलाड़ी प्रकाश ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री का बच्चों के बीच पहुंचना और उनके साथ समय बिताना गांव के खिलाड़ियों के लिए किसी सपने के सच होने जैसा है। इससे बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ा है और आगे बढ़ने की नई प्रेरणा मिली है। गांव के सरपंच रोशन प्रताप सिंह एवं समाजसेवी रम्मू शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री ने केवल क्रिकेट किट ही नहीं दी, बल्कि ग्रामीण बच्चों के सपनों को नई पहचान और उड़ान देने का काम किया है। उन्होंने बताया कि खेल सामग्री और प्रस्तावित मिनी स्टेडियम से गांव की प्रतिभाओं को आगे बढ़ने का बेहतर अवसर मिलेगा।

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मनरेगा श्रमिकों की ई- के वाय सी में छत्तीसगढ़ देश में अव्वल मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के मार्गदर्शन में प्रदेश ने रचा नया कीर्तिमान।

 

 

 

 महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के अंतर्गत श्रमिकों के ई-के वाय सी कार्य में छत्तीसगढ़ ने पूरे देश में प्रथम स्थान प्राप्त कर उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। भारत सरकार द्वारा जारी ताजा रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में 97.11 प्रतिशत सक्रिय श्रमिकों का ई-के वाय सी पूर्ण कर लिया गया है, जो राष्ट्रीय स्तर पर सर्वाधिक है। खास बात यह है कि छत्तीसगढ़ ने केरलम, त्रिपुरा, मिजोरम जैसे छोटे राज्यों तथा कर्नाटक, तमिलनाडु जैसे बड़े राज्यों को भी पछाड़कर यह उपलब्धि हासिल की है।

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना ;मनरेगा के तहत श्रमिकों की ई.केवाईसी (e-KYC) प्रक्रिया को पूरा करने में छत्तीसगढ़ ने देश भर में अग्रणी स्थान हासिल किया है। प्रदेश में लगभग 56.87 लाख से ज्यादा मजदूरों की डिजिटल वेरिफिकेशन (e-KYC) पूरी की गई है जो भुगतान में पारदर्शिता सुनिश्चित करती है। यह डिजिटल प्रक्रिया फर्जी जॉब कार्डों को हटाने और सीधे वास्तविक लाभार्थियों के बैंक खातों में मजदूरी पहुंचाने में मदद कर रही है।

 यह उपलब्धि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के कुशल मार्गदर्शन एवं उप मुख्यमंत्री तथा पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री विजय शर्मा के सतत नेतृत्व, मॉनिटरिंग और प्रभावी रणनीति का परिणाम है। राज्य में योजनाबद्ध ढंग से अभियान चलाकर ई-के वाय सी की प्रक्रिया को तेज किया गया, जिससे बड़ी संख्या में श्रमिकों को समयबद्ध रूप से इससे जोड़ा जा सका।

 रिपोर्ट के अनुसार छत्तीसगढ़ में कुल 58 लाख से अधिक सक्रिय श्रमिकों में से 56 लाख से अधिक का ई-के वाय सी सफलतापूर्वक पूर्ण किया जा चुका है। यह उपलब्धि न केवल प्रशासनिक दक्षता को दर्शाती है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल सशक्तिकरण की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है।

 मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार गरीब और श्रमिक वर्ग के हितों के संरक्षण एवं उन्हें योजनाओं का पारदर्शी लाभ दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। ई-के वाय सी के माध्यम से श्रमिकों को समय पर भुगतान एवं योजनाओं का सीधा लाभ सुनिश्चित हो रहा है।

 उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने कहा कि यह उपलब्धि प्रदेश के अधिकारियों, कर्मचारियों और ग्राम स्तर पर कार्यरत टीमों के समन्वित प्रयास का परिणाम है। उन्होंने बताया कि ई-के वाय सी से न केवल फर्जीवाड़े पर रोक लगी है, बल्कि वास्तविक हितग्राहियों तक लाभ पहुंचाने में भी पारदर्शिता आई है। श्री शर्मा ने सभी संबंधित अधिकारियों को बधाई देते हुए निर्देशित किया कि शेष लंबित प्रकरणों को भी शीघ्र पूर्ण कर प्रदेश को 100 प्रतिशत e-KYC (ई - के वाय सी) लक्ष्य की ओर अग्रसर किया जाए।

 प्रदेश में चलाए गए विशेष अभियान, ग्राम पंचायत स्तर पर जनजागरूकता और तकनीकी संसाधनों के प्रभावी उपयोग से यह सफलता हासिल हुई है। यह उपलब्धि छत्तीसगढ़ को डिजिटल गवर्नेंस और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में एक अग्रणी राज्य के रूप में स्थापित करती है।

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बस्तर में स्वास्थ्य अभियान ने पकड़ी रफ्तार, दूरस्थ अंचलों तक बढ़ा भरोसा 10 दिनों में 6.39 लाख से निःशुल्क उपचार

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बस्तर संभाग के घने जंगलों, ऊबड़-खाबड़ पहाड़ियों और दूरस्थ बसाहटों में अब स्वास्थ्य सेवाओं की दस्तक साफ महसूस की जा रही है। जहां कभी इलाज के लिए लंबी दूरी और अनिश्चितता ही विकल्प थी, वहां अब स्वास्थ्य विभाग की टीमें खुद लोगों के द्वार तक पहुंच रही हैं। मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बस्तर अभियान के दस दिन पूरे होते-होते यह पहल न केवल स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने में सफल हो रही है, बल्कि सुदूर अंचलों में रहने वाले लोगों के मन में भरोसे की नई किरण भी जगा रही है।

अभियान के तहत अब तक 6.39 लाख से अधिक लोगों की स्वास्थ्य जांच की जा चुकी है। बड़ी संख्या में मरीजों को मौके पर ही निःशुल्क दवा और उपचार उपलब्ध कराया गया है, जिससे दूरस्थ क्षेत्रों में तत्काल राहत मिली है। गंभीर स्थिति वाले मरीजों को प्राथमिकता के साथ चिन्हित कर त्वरित रेफरल की व्यवस्था की गई है। अब तक 8055 मरीजों को उच्च स्वास्थ्य संस्थानों में भेजकर विशेषज्ञ उपचार सुनिश्चित किया गया है।

जांच के दौरान मलेरिया के 1125, टीबी के 3245, कुष्ठ के 2803, मुख कैंसर के 1999, सिकल सेल के 1527 और मोतियाबिंद के 2496 मामलों की पहचान की गई है। समय पर पहचान और उपचार शुरू होने से इन बीमारियों की जटिलताओं को कम करने में मदद मिल रही है, साथ ही गंभीर स्थितियों को टालने की दिशा में भी यह पहल महत्वपूर्ण साबित हो रही है।

अभियान को प्रभावी बनाने के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों से लेकर जिला अस्पताल, मेडिकल कॉलेज और सुपर स्पेशियलिटी संस्थानों तक एक समन्वित व्यवस्था बनाई गई है। मोबाइल मेडिकल यूनिट्स और स्वास्थ्य शिविरों के जरिए उन इलाकों तक भी सेवाएं पहुंच रही हैं, जहां पहले इलाज की सुविधा सीमित थी।

इसके साथ ही लोगों के डिजिटल स्वास्थ्य प्रोफाइल (आभा) तैयार किए जा रहे हैं, ताकि आगे भी इलाज की निरंतरता बनी रहे और जरूरत पड़ने पर तुरंत स्वास्थ्य जानकारी उपलब्ध हो सके। अब बस्तर के सुदूर गांवों में भी लोग इलाज के लिए लंबी दूरी तय करने को मजबूर नहीं हैं, बल्कि स्वास्थ्य सेवाएं खुद उनके द्वार तक पहुंच रही हैं। यही बदलाव इस अभियान को खास बना रहा है।

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NHAI ने 3,147 करोड़ के मेगा प्रोजेक्ट का निर्माण शुरू किया, जशपुर को मिलेगा बड़ा लाभ।

 

 

छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले के लिए बड़ी सौगात के रूप में रायपुर-धनबाद इकोनॉमिक कॉरिडोर के अंतर्गत पत्थलगांव-कुनकुरी से छत्तीसगढ़-झारखंड सीमा NH-43 तक 3,147 करोड़ रुपए की लागत वाली सड़क परियोजना का निर्माण कार्य शुरू हो गया है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा इस महत्वाकांक्षी परियोजना को धरातल पर उतार दिया गया है, जिससे जशपुर जिले की कनेक्टिविटी और विकास को नई गति मिलेगी।

यह कॉरिडोर 627 किलोमीटर लंबा है, जिसमें से लगभग 384 किलोमीटर हिस्सा छत्तीसगढ़ से होकर गुजरता है। वर्तमान में 104.250 किलोमीटर लंबे पत्थलगांव-झारखंड सीमा खंड पर तेजी से निर्माण कार्य जारी है, जो इस परियोजना का अहम हिस्सा माना जा रहा है।

इस खंड में कुल 382 छोटी-बड़ी संरचनाओं का निर्माण किया जाएगा, जिसमें 7 बड़े पुल, 30 छोटे पुल, 6 फ्लाईओवर, 1 एलीवेटेड वायडक्ट, 10 वेहिकुलर अंडरपास, 18 लाइट वेहिकुलर अंडरपास, 26 स्मॉल वेहिकुलर अंडरपास, 21 पैदल व मवेशी अंडरपास तथा 278 बॉक्स पुलिया शामिल हैं। इससे मार्ग पूरी तरह बाधारहित और सुरक्षित बनेगा।

परियोजना निदेशक डीडी पार्लावर के अनुसार, यह खंड रायपुर-धनबाद कॉरिडोर की रीढ़ है और इसे निर्धारित समय-सीमा में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके पूरा होने से छत्तीसगढ़ और झारखंड के बीच अंतर-राज्यीय कनेक्टिविटी और व्यापारिक गतिविधियों को मजबूती मिलेगी।

जशपुर जिले के लिए यह परियोजना किसी लाइफलाइन से कम नहीं होगी। यह मार्ग पत्थलगांव, कांसाबेल, कुनकुरी, दुलदुला और जशपुर जैसे प्रमुख नगरों को सीधे जोड़ते हुए क्षेत्र के विकास को नई दिशा देगा। साथ ही, रायपुर, बिलासपुर, रायगढ़ और कोरबा जैसे औद्योगिक शहरों को झारखंड के धनबाद से जोड़कर व्यापारिक सुगमता बढ़ाएगा।

बेहतर सड़क कनेक्टिविटी से यात्रा समय, ईंधन और परिवहन लागत में कमी आएगी, वहीं दुर्घटनाओं और प्रदूषण में भी कमी होने की संभावना है। इसके साथ ही स्थानीय स्तर पर रोजगार और व्यवसाय के नए अवसर भी सृजित होंगे, जिससे जशपुर सहित पूरे क्षेत्र की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।

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जशपुर में प्लेन क्रैश की अफवाह, प्रशासन की सर्चिंग जारी, क्रैश की कोई पुष्टि नहीं

 

 

 

 

जशपुर जिले के नारायणपुर क्षेत्र के पहाड़ों में कथित प्लेन क्रैश की खबर सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गया है। सोमवार दोपहर करीब 2 बजे क्षेत्र के ग्रामीणों ने एक विमान को कम ऊंचाई पर उड़ते हुए पहाड़ों की ओर जाते देखा, जो कुछ देर बाद ओझल हो गया। इसके बाद पहाड़ों के बीच से धुएं का गुबार उठता दिखाई दिया, जिससे प्लेन क्रैश की आशंका जताई जाने लगी।

सूचना मिलते ही जिला कलेक्टर रोहित व्यास, एसएसपी डॉ. लाल उमेद सिंह सहित वन विभाग और पुलिस की टीम तत्काल मौके पर पहुंची और सघन सर्चिंग अभियान शुरू किया गया। हालांकि देर शाम तक पहाड़ों और आसपास के क्षेत्रों में व्यापक खोजबीन के बावजूद किसी भी प्रकार के विमान हादसे या मलबे के प्रमाण नहीं मिले हैं।

बताया जा रहा है कि जिस पहाड़ी क्षेत्र में घटना की आशंका जताई जा रही थी, वह नारायणपुर के बरडांड गांव से करीब 2 किलोमीटर दूर ऊंचाई पर स्थित अत्यंत दुर्गम इलाका है। इसके बावजूद प्रशासन की टीम लगातार जंगलों और पहाड़ी इलाकों में पहुंचकर सर्चिंग में जुटी हुई है। घटना की खबर फैलते ही आसपास के गांवों के ग्रामीण भी बड़ी संख्या में मौके पर पहुंचे और प्रशासन के साथ मिलकर खोजबीन में सहयोग करते रहे।

प्रशासन ने एहतियातन रेस्क्यू के लिए पुलिस और मेडिकल टीम को भी तैनात कर दिया है।

कलेक्टर रोहित व्यास ने बताया कि सूचना मिलते ही पूरी टीम को सर्चिंग में लगाया गया है। साथ ही उड़ीसा, झारखंड और छत्तीसगढ़ के एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) से संपर्क किया गया है, जहां अब तक किसी भी विमान के संपर्क टूटने की जानकारी सामने नहीं आई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि एहतियातन पूरी रात सर्चिंग अभियान जारी रहेगा और प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में है।

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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का जशपुर आगमन, हेलीपैड पर हुआ भव्य स्वागत।

 

 

 

 मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज जिला मुख्यालय जशपुर पहुंचे, जहां पुलिस लाइन स्थित हेलीपैड पर आमजनों, जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों ने उनका आत्मीय स्वागत किया। उनके साथ उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा एवं प्रबल प्रताप सिंह जूदेव भी पहुंचे।

मुख्यमंत्री के आगमन पर जनजातीय समुदाय के सदस्यों ने पारंपरिक आदिवासी नृत्य प्रस्तुत कर अतिथियों का स्वागत किया, जिससे पूरा वातावरण उत्साहपूर्ण हो उठा।

इस अवसर पर पत्थलगांव विधायक गोमती साय, जशपुर विधायक रायमुनी भगत, जिला पंचायत अध्यक्ष सालिक साय, नगर पालिका अध्यक्ष अरविंद भगत, जिला पंचायत उपाध्यक्ष शौर्य प्रताप सिंह जूदेव, नगर पालिका उपाध्यक्ष यश प्रताप सिंह जूदेव सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण उपस्थित रहे।

इसके अलावा सरगुजा संभाग के कमिश्नर नरेंद्र दुग्गा, पुलिस कमिश्नर दीपक कुमार झा, कलेक्टर रोहित व्यास एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक लाल उमेंद सिंह सहित अधिकारियों ने पुष्पगुच्छ भेंट कर मुख्यमंत्री का भव्य स्वागत किया।

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इसरो की ‘स्पेस ऑन व्हील्स’ से जशपुर में विज्ञान की नई उड़ान।

 

 

 

जशपुर जिले में अंतरिक्ष विज्ञान के प्रति जिज्ञासा और वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित “स्पेस ऑन व्हील्स” कार्यक्रम ने बच्चों में नई ऊर्जा भर दी है। रणजीता स्टेडियम, जशपुर में आज भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की इस विशेष मोबाइल प्रदर्शनी बस का आगमन हुआ, जिसका अवलोकन मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने किया।

मुख्यमंत्री ने प्रदर्शनी में प्रदर्शित रॉकेट, उपग्रह और अंतरिक्ष मिशनों से जुड़े विभिन्न मॉडलों का अवलोकन करते हुए विद्यार्थियों से संवाद किया। इस दौरान शासकीय महारानी लक्ष्मी बाई उच्चतर माध्यमिक विद्यालय की छात्राओं—अंशु पासवान, भूमिका डाहरे और सारिका साहनी—ने आत्मविश्वास के साथ चंद्रयान, मंगलयान, PSLV और GSLV सहित विभिन्न अंतरिक्ष तकनीकों की कार्यप्रणाली को सरल भाषा में समझाया।

मुख्यमंत्री श्री साय ने बच्चों की वैज्ञानिक समझ और आत्मविश्वास की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम दूरस्थ क्षेत्रों में विज्ञान के प्रति रुचि विकसित करने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि विज्ञान और तकनीक आज विकास की आधारशिला हैं और “स्पेस ऑन व्हील्स” जैसे प्रयास ग्रामीण बच्चों में नवाचार और जिज्ञासा को बढ़ावा देते हैं।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने जिले में स्पेस ऑन व्हील्स के माध्यम से जागरूकता फैलाने वाले 17 विद्यार्थियों को प्रशस्ति पत्र प्रदान किए और “द मैजिक ऑफ नाइट स्काई” पुस्तिका का वितरण भी किया।

जिले के 10 हजार से अधिक विद्यार्थियों को मिलेगा लाभ

मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप “अन्वेषण” कार्यक्रम के तहत इस पहल का आयोजन किया जा रहा है। कलेक्टर रोहित व्यास की पहल और विज्ञान भारती के सहयोग से यह कार्यक्रम जिले के सभी विकासखंडों में संचालित होगा। 7 अप्रैल से प्रारंभ यह अभियान 14 दिनों तक विभिन्न विद्यालयों में चल रहा है और प्रतिदिन सुबह 8 बजे से शाम 5 बजे तक विद्यार्थियों को अंतरिक्ष विज्ञान की जानकारी दी जा रही है। इस अभियान से 10,000 से अधिक विद्यार्थी प्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित होंगे।

क्या है ‘स्पेस ऑन व्हील्स’

“स्पेस ऑन व्हील्स” इसरो की एक अत्याधुनिक मोबाइल प्रदर्शनी है, जिसे विशेष रूप से एक बस के रूप में तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य अंतरिक्ष विज्ञान को सीधे छात्रों और आमजन तक पहुंचाना है, खासकर ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में। इसमें रॉकेट, उपग्रह, रिमोट सेंसिंग, कम्युनिकेशन और नेविगेशन तकनीकों के मॉडल, ऑडियो-विजुअल डिस्प्ले और इंटरएक्टिव पैनल के माध्यम से जानकारी दी जाती है।

वैज्ञानिक सोच और करियर के लिए प्रेरणा

यह पहल केवल जागरूकता तक सीमित नहीं है, बल्कि युवाओं को विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (STEM) के क्षेत्र में करियर बनाने के लिए प्रेरित भी कर रही है। विशेषज्ञों और शिक्षकों के मार्गदर्शन से विद्यार्थियों को नई दिशा मिल रही है, जिससे वे भविष्य में वैज्ञानिक विकास में योगदान देने के लिए प्रेरित हो रहे हैं।

जशपुर में “स्पेस ऑन व्हील्स” का आगमन न केवल एक प्रदर्शनी, बल्कि युवाओं के सपनों को नई उड़ान देने वाला अभियान बन गया है, जो जिले को विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में नई पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

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ड्रोन दीदी योजना से जशपुर की महिलाएं भरेंगी आर्थिक उन्नति की उड़ान।

 

 

 मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने आज रणजीता स्टेडियम जशपुर में जिला प्रशासन द्वारा लगाए गए स्टॉल का अवलोकन किया। इस दौरान “लखपति दीदी” पहल के अंतर्गत महिलाओं को “ड्रोन दीदी” योजना के तहत ड्रोन एवं उन्नत सॉयल टेस्टिंग मशीन प्रदान की गई।

मुख्यमंत्री ने महिलाओं को संबोधित करते हुए कहा कि आधुनिक तकनीक के उपयोग से महिलाएं आत्मनिर्भर बनें और अपनी आय में वृद्धि करें। उन्होंने ड्रोन के माध्यम से कृषि कार्यों को आसान बनाते हुए आर्थिक उन्नति की दिशा में आगे बढ़ने का संदेश दिया।

इस अवसर पर जशपुर विधायक रायमुनि भगत, पत्थलगांव विधायक गोमती साय, जिला पंचायत अध्यक्ष सालिक साय, उपाध्यक्ष शौर्य प्रताप सिंह जुदेव, नगर पालिका अध्यक्ष अरविन्द भगत, उपाध्यक्ष यश प्रताप सिंह जुदेव, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की प्रमुख सचिव निहारिका बारिक, सरगुजा कमिश्नर नरेन्द्र दुग्गा, पुलिस कमिश्नर दीपक कुमार झा, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. लाल उमेंद सिंह, जिला पंचायत सीईओ अभिषेक कुमार सहित अन्य अधिकारीगण उपस्थित थे।

उल्लेखनीय है कि इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं के आय संवर्धन के साथ उन्हें आधुनिक कृषि तकनीकों से सशक्त बनाना है। सॉयल टेस्टिंग मशीन के माध्यम से अब मिट्टी के विभिन्न महत्वपूर्ण मानकों की त्वरित और सटीक जांच संभव हो रही है, जिससे संतुलित उर्वरक उपयोग, भूमि की गुणवत्ता में सुधार तथा फसल उत्पादन में वृद्धि सुनिश्चित की जा सकेगी।

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जहां गूंजता था लाल आतंक, वहां सजी बाल चौपाल: बस्तर में बदलाव की नई तस्वीर, बस्तर में बच्चों की मुस्कान बनी बदलाव की पहचान।

 

 

 

एक समय नक्सल प्रभावित रहे बस्तर अंचल की तस्वीर अब तेजी से बदल रही है। जहां कभी लाल आतंक का साया था, वहीं अब बच्चों की हंसी और उम्मीदों की गूंज सुनाई दे रही है। उत्तर बस्तर कांकेर जिले के दुर्गकोंडल क्षेत्र में आयोजित “बाल चौपाल” इस बदलाव का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आया।

छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा के कार्यकाल का एक वर्ष पूर्ण होने पर आयोजित इस कार्यक्रम में महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े और हस्तशिल्प विकास बोर्ड की अध्यक्ष शालिनी राजपूत भी शामिल हुईं। कार्यक्रम के दौरान बच्चों और ग्रामीणों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याओं और जरूरतों को समझा गया।

मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता है कि योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। उन्होंने भरोसा दिलाया कि दूरस्थ और संवेदनशील क्षेत्रों में भी विकास और सुविधाएं सुनिश्चित की जाएंगी।

बाल चौपाल में बच्चों को उनके अधिकारों, सुरक्षा और आत्मरक्षा के प्रति जागरूक किया गया। “गुड टच और बैड टच” जैसे संवेदनशील विषय को सरल तरीके से समझाया गया, जिसे बच्चों ने गंभीरता से समझते हुए अपनी जागरूकता का परिचय दिया।

कार्यक्रम की खासियत यह रही कि बच्चों को खेल-खेल में नैतिक शिक्षा दी गई। अनुशासन, ईमानदारी और सामाजिक जिम्मेदारी जैसे मूल्यों को रोचक गतिविधियों के माध्यम से समझाया गया। साथ ही चाइल्ड हेल्पलाइन की जानकारी भी दी गई, जिससे जरूरत पड़ने पर वे सहायता ले सकें।

इस दौरान डिजिटल सुविधाओं की कमी का मुद्दा भी सामने आया। अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि जिला शिक्षा अधिकारी से समन्वय कर आगामी सत्र से डिजिटल शिक्षा की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे।

डॉ. वर्णिका शर्मा ने कहा कि यह बाल चौपाल बदलते बस्तर की नई कहानी है, जो दिखाती है कि सामूहिक प्रयासों से चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में भी सकारात्मक परिवर्तन संभव है।

कार्यक्रम के बाद मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े, डॉ. वर्णिका शर्मा और शालिनी राजपूत ने पुनर्वास केंद्र पहुंचकर मुख्यधारा में लौटे नक्सलियों और उनके परिवारों से मुलाकात की। उन्होंने उनके पुनर्वास और सम्मानजनक जीवन सुनिश्चित करने के प्रयासों की जानकारी ली।

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शहीद चंद्रशेखर आजाद की प्रतिमा का मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने किया अनावरण।

 

 

 

 सरगुजा प्रवास के दौरान प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अंबिकापुर के आकाशवाणी चौक पर अमर क्रांतिकारी शहीद चंद्रशेखर आजाद की प्रतिमा का विधिवत अनावरण किया। इस अवसर पर उन्होंने महान स्वतंत्रता सेनानी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके अद्वितीय बलिदान को नमन किया।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि चंद्रशेखर आजाद का जीवन साहस, त्याग और राष्ट्रभक्ति की अनुपम मिसाल है। उन्होंने देश की आजादी के लिए अपने प्राणों का बलिदान देकर आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्रसेवा के लिए प्रेरित किया। उनके आदर्श आज भी युवाओं को देश के प्रति समर्पण और कर्तव्यनिष्ठा का संदेश देते हैं।

कार्यक्रम में कृषि मंत्री रामविचार नेताम, पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष प्रेम प्रकाश पाण्डेय, पूर्व नेता प्रतिपक्ष नारायण चन्देल, लुण्ड्रा विधायक प्रबोध मिंज, जिला पंचायत अध्यक्ष निरूपा सिंह, अंबिकापुर महापौर मंजूषा भगत, सभापति हरमिंदर सिंह टिन्नी, सरगुजा संभागायुक्त नरेंद्र दुग्गा, आईजी सरगुजा दीपक झा, कलेक्टर अजीत वसंत, एसपी राजेश अग्रवाल सहित जनप्रतिनिधि, अधिकारी-कर्मचारी और बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे।

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गढ़फुलझर नानकसागर में होला मोहल्ला कार्यक्रम में शामिल हुएमुख्यमंत्री विष्णु देव साय बनेगा आस्था और पर्यटन का प्रमुख केंद्र।

BY जशपुर जंक्शन,15 मार्च 

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय आज महासमुंद जिले के बसना क्षेत्र स्थित ऐतिहासिक एवं पवित्र स्थल गढ़फुलझर के नानकसागर में आयोजित होला मोहल्ला कार्यक्रम में शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने यहां पवित्र गुरु ग्रंथ साहिब के समक्ष माथा टेका तथा विशेष कीर्तन समागम और अरदास में भाग लेकर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि की कामना की। इस अवसर पर सिख समाज की ओर से मुख्यमंत्री को सरोफा भेंट कर आत्मीय सम्मान किया गया।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने अपने उद्बोधन में कहा कि गढ़फुलझर की पावन धरती स्थित नानकसागर अत्यंत श्रद्धा और आस्था का केंद्र है, जहां पूज्य गुरु नानक देव जी के चरण पड़े हैं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ संतों की तपोभूमि रही है, जहां अनेक महान संतों ने मानवता, सेवा और सद्भाव का संदेश दिया है। इस पवित्र स्थल पर आकर उन्हें अत्यंत गर्व और आत्मिक आनंद की अनुभूति हो रही है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश के सभी प्रमुख तीर्थस्थलों के संरक्षण और समुचित विकास के लिए प्रतिबद्ध है। इसी दिशा में गढ़फुलझर को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की घोषणा पहले ही की जा चुकी है। इसके विकास कार्यों के लिए लगभग 2 करोड़ 50 लाख रुपये की स्वीकृति प्रदान की गई है और निर्माण कार्य जारी है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि इन कार्यों को शीघ्र पूर्ण किया जाए तथा नानकसागर क्षेत्र में पर्यटन सुविधाओं का विस्तार किया जाए, जिससे यह स्थल प्रदेश और देश के श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बन सके।

बसना विधायक श्री संपत अग्रवाल ने अपने संबोधन में कहा कि सिख समाज सदैव संगठन, सेवा और सामाजिक समरसता की भावना के साथ आगे बढ़ने वाला समाज रहा है। 

उन्होंने कहा कि गढ़फुलझर न केवल सिख समाज की आस्था का केंद्र है, बल्कि यह सर्वधर्म समभाव और सद्भावना की जीवंत मिसाल भी है। 

कार्यक्रम में कृषि मंत्री श्री रामविचार नेताम, बसना विधायक श्री संपत अग्रवाल, छत्तीसगढ़ राज्य बीज निगम के अध्यक्ष श्री चंद्रहास चंद्राकर, छत्तीसगढ़ राज्य अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण के अध्यक्ष श्री भूपेंद्र सिंह सवन्नी, छत्तीसगढ़ राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष श्री अमरजीत छाबड़ा सहित सिख समाज के अनेक गणमान्यजन और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।

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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से जापान दूतावास के राजनीतिक मामलों के मंत्री आबे नोरिआकि ने की सौजन्य मुलाकात।

BY जशपुर जंक्शन,07 मार्च 

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय से आज छत्तीसगढ़ विधानसभा स्थित मुख्यमंत्री कार्यालय कक्ष में जापान दूतावास के राजनीतिक मामलों के मंत्री श्री आबे नोरिआकि ने सौजन्य मुलाकात की। इस अवसर पर दोनों के बीच छत्तीसगढ़ में औद्योगिक निवेश, आर्थिक सहयोग तथा विकास की संभावनाओं को लेकर सार्थक चर्चा हुई।

मुख्यमंत्री श्री साय ने श्री आबे नोरिआकि का शॉल ओढ़ाकर तथा भगवान श्री राम की प्रतिमा भेंट कर आत्मीय स्वागत किया। मुख्यमंत्री श्री साय ने इस अवसर पर अपनी जापान यात्रा का जिक्र करते हुए श्री आबे को प्रदेश सरकार की नई औद्योगिक नीति, निवेश को प्रोत्साहित करने वाली नीतियों तथा विभिन्न क्षेत्रों में उपलब्ध अवसरों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि राज्य में उद्योगों के विकास के लिए बेहतर आधारभूत संरचना, प्रचुर प्राकृतिक संसाधन और निवेश के लिए अनुकूल वातावरण उपलब्ध है, जिससे निवेशकों को आकर्षक अवसर प्राप्त हो रहे हैं।

इस अवसर पर विधायक किरण देव एवं विधायक सुशांत शुक्ला उपस्थित थे।

 

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय से आज छत्तीसगढ़ विधानसभा स्थित मुख्यमंत्री कार्यालय कक्ष में जापान दूतावास के राजनीतिक मामलों के मंत्री श्री आबे नोरिआकि ने सौजन्य मुलाकात की। इस अवसर पर दोनों के बीच छत्तीसगढ़ में औद्योगिक निवेश, आर्थिक सहयोग तथा विकास की संभावनाओं को लेकर सार्थक चर्चा हुई।

मुख्यमंत्री श्री साय ने श्री आबे नोरिआकि का शॉल ओढ़ाकर तथा भगवान श्री राम की प्रतिमा भेंट कर आत्मीय स्वागत किया। मुख्यमंत्री श्री साय ने इस अवसर पर अपनी जापान यात्रा का जिक्र करते हुए श्री आबे को प्रदेश सरकार की नई औद्योगिक नीति, निवेश को प्रोत्साहित करने वाली नीतियों तथा विभिन्न क्षेत्रों में उपलब्ध अवसरों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि राज्य में उद्योगों के विकास के लिए बेहतर आधारभूत संरचना, प्रचुर प्राकृतिक संसाधन और निवेश के लिए अनुकूल वातावरण उपलब्ध है, जिससे निवेशकों को आकर्षक अवसर प्राप्त हो रहे हैं।

इस अवसर पर विधायक किरण देव एवं विधायक सुशांत शुक्ला उपस्थित थे।

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बच्चा चोरी के अफवाह से पुलिस आई हरकत में,पुलिस की जांच में संदिग्ध निकला मानसिक रूप से अस्वस्थ।

 

 

जशपुर जिले के बगीचा क्षेत्र से एक अहम मामला सामने आया है, जहां दो छोटे बच्चों को साथ लेकर जा रहे एक व्यक्ति को ग्रामीणों ने सतर्कता दिखाते हुए पकड़ा और पुलिस के हवाले कर दिया। घटना के बाद क्षेत्र में कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया, लेकिन पुलिस जांच में मामला स्पष्ट हो गया कि मामला बच्चा चोरी का नहीं है।

जानकारी के अनुसार बगीचा रोहित सोनी के दो बच्चे—एक 3 वर्षीय बच्ची और 7 वर्षीय बालक—घर के पास खेल रहे थे। इसी दौरान एक व्यक्ति बस्ती में पहुंचा और बच्चों को अपने साथ लेकर मुख्य मार्ग की ओर जाने लगा। परिजनों को जब बच्चे आसपास नहीं दिखे तो उन्होंने खोजबीन शुरू की।

करीब एक किलोमीटर दूर तहसील चौक के पास दोनों बच्चे उसी व्यक्ति के साथ दिखाई दिए। परिजनों और ग्रामीणों ने तत्परता दिखाते हुए बच्चों को सुरक्षित अपने कब्जे में लिया और संदिग्ध व्यक्ति को रोक लिया। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और व्यक्ति को थाने ले जाकर जांच शुरू की।

पुलिस की जांच में सामने आया कि संबंधित व्यक्ति मानसिक रूप से अस्वस्थ (विक्षिप्त) है और पिछले लगभग दो वर्षों से बगीचा क्षेत्र के बाजार डांड में रह रहा है। वह इधर-उधर घूमकर भीख मांगकर अपना जीवन यापन करता है। स्थानीय लोगों के अनुसार उसे बच्चों से विशेष लगाव है और वह अक्सर बच्चों को देखकर उनसे हंसी-मजाक करने की कोशिश करता है। वह बोलने में असमर्थ है और इशारों के माध्यम से ही संवाद करता है।पिछले दो वर्षों में कभी भी संदिग्ध परिस्थितियों में उसे नहीं देखा गया है।

पुलिस ने स्पष्ट किया है कि प्रथम दृष्टया यह मामला चोरी का नहीं बल्कि मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्ति की हरकत का प्रतीत होता है। बच्चों को पूरी तरह सुरक्षित उनके परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया है।

फिलहाल पुलिस पूरे मामले की गंभीरता से जांच कर रही है और क्षेत्र में लोगों से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध स्थिति में तुरंत सूचना दें, लेकिन अफवाहों से बचें,अफवाहों में आकर कोई भी कानून हाथ में न लें।

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श्रीराम कथा में शामिल हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, चिन्मयानंद बापूजी के श्रीमुख से गूंज रही रामकथा, भक्ति में डूबा कुनकुरी

 

 

 

कुनकुरी में आयोजित भव्य संगीतमय श्रीराम कथा महोत्सव में आज पंचम दिवस पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय श्रद्धाभाव से शामिल हुए। सालियाटोली मिनी स्टेडियम ग्राउंड में आयोजित इस दिव्य आयोजन में उनके साथ उनकी धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या साय भी उपस्थित रहीं। दोनों ने परम पूजनीय संत चिन्मयानंद बापू से आशीर्वाद ग्रहण किया।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में भगवान श्रीराम के आदर्श जीवन और चरित्र को आत्मसात करने का संदेश देते हुए कहा कि रामकथा केवल कथा नहीं, बल्कि जीवन को दिशा देने वाली प्रेरणा है।

 छत्तीसगढ़ की धरती के कण-कण में बसे हैं प्रभु श्रीराम

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि कुनकुरी की यह पावन भूमि आज धन्य हो गई है। पूरा वातावरण ‘जय श्रीराम’ के उद्घोष से गुंजायमान है और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ माता कौशल्या की धरती है और भगवान श्रीराम का ननिहाल होने के कारण यहां के कण-कण में राम बसते हैं।

उन्होंने वनवास काल का उल्लेख करते हुए कहा कि भगवान श्रीराम ने अपना अधिकांश समय दंडकारण्य और छत्तीसगढ़ के अंचलों में बिताया। यहां आज भी सीता रसोई जैसे पौराणिक स्थल इस इतिहास के साक्षी हैं।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि अयोध्या में श्रीरामलला की प्राण प्रतिष्ठा देश के लिए गौरव का क्षण है, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दृढ़ संकल्प से संभव हो सका। राज्य सरकार द्वारा शुरू की गई रामलला दर्शन योजना के तहत अब तक हजारों श्रद्धालु अयोध्या जाकर दर्शन कर चुके हैं।

 रामभक्ति का अद्भुत संगम उमड़ रही श्रद्धालुओं की भीड़

कथा स्थल पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। रामकथा की अमृतमयी धारा में जनमानस सराबोर होकर भक्ति रस का आनंद ले रहा है। विशेष रूप से रामनामी समाज की भक्ति परंपरा का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उनका समर्पण अद्वितीय है।

इस अवसर पर रोहित व्यास, लाल उमेद सिंह, जिला पंचायत सीईओ अभिषेक कुमार सहित जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

 08 अप्रैल तक चलेगी रामकथा की पावन धारा

02 अप्रैल से प्रारंभ हुई श्रीराम कथा 08 अप्रैल तक निरंतर प्रवाहित होगी। इस आयोजन को लेकर कुनकुरी सहित पूरे क्षेत्र में धार्मिक और आध्यात्मिक माहौल बना हुआ है। दूर-दराज से पहुंचे श्रद्धालु कथा श्रवण कर प्रभु श्रीराम के आदर्शों को अपने जीवन में उतारने का संकल्प ले रहे हैं।

 भक्ति, आस्था और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर यह आयोजन क्षेत्र में अद्भुत धार्मिक चेतना का संचार कर रहा है।

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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कार्यकर्ताओं को दिया संगठन मजबूत करने का संदेश,भाजपा स्थापना दिवस पर बगिया में फहरा पार्टी का ध्वज

 

 

भारतीय जनता पार्टी के स्थापना दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अपने निज निवास बगिया में पार्टी का ध्वज फहराया। इस दौरान उन्होंने उपस्थित कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए भाजपा की विचारधारा, राष्ट्र सेवा और संगठन की मजबूती पर विशेष जोर दिया।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि भाजपा एक विचारधारा आधारित पार्टी है, जो देशहित और जनकल्याण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे संगठन को और सशक्त बनाएं तथा आम जनता की सेवा में पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ जुटे रहें।

कार्यक्रम में सुनील गुप्ता, ठाकुर पुरुषोत्तम सिंह सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि, पार्टी पदाधिकारी और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

पूरे आयोजन के दौरान उत्साह, अनुशासन और संगठन के प्रति समर्पण का माहौल देखने को मिला।

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खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स के बाद सामुदायिक पावर हाउस के रूप में जाने जाएंगे सिद्दी पहलवान।

 

 

 'प्रतिभा को किसी परिचय की जरूरत नहीं होती'- यह कहावत 'खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स- 2026' में सच साबित हुई, जहां कर्नाटक के 'सिद्दी समुदाय' के पहलवानों ने मैट पर अपनी जबरदस्त छाप छोड़ी है। उनकी यह सफलता अब सिर्फ़ पदकों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे समुदाय के कुश्ती के क्षेत्र में एक ताकत के तौर पर उभरने का प्रतीक है। अफ़्रीकी मूल के भारत में लगभग 50,000 सिद्दी लोग रहते हैं, जिनमें से एक-तिहाई कर्नाटक में निवास करते हैं।

 खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स-2026 में कर्नाटक के 9 पहलवानों ने हिस्सा लिया, जिनमें से 4 सिद्दी समुदाय से थे। इन चार पहलवानों में से तीन ने स्वर्ण पदक अपने नाम किया जबकि एक को रजत पदक मिला। स्वर्ण पदक जीतने वाले पहलवानों में मनीषा जुआवा सिद्दी (76 किग्रा), रोहन एम डोड़ामणि (ग्रीको रोमन 60 किग्रा) और प्रिंसिता पेदरू फर्नांडिस सिद्दी (68 किग्रा) शामिल हैं जबकि शालिना सेयर सिद्दी (57 किग्रा) को रजत पदक से संतोष करना पड़ा।

 इन पहलवानों की सफलता न सिर्फ उनके संघर्ष और मेहनत की कहानी कहती है, बल्कि कुश्ती जैसे खेलो में सिद्दी समुदाय के बढ़ते वर्चस्व को भी दिखाता है। कर्नाटक के इन चारों पहलवानों का दिल्ली के इंदिरा गांधी स्टेडियम में ट्रायल हुआ था और वहां भी ये पहले नंबर पर रहे थे। 

सिद्दी समुदाय के प्रदर्शन से कर्नाटक कुश्ती टीम की कोच ममता बेहद गौरवान्वित महसूस कर रही हैं।

ममता ने कहा, ''जैसे हमारे देश में कुश्ती में हरियाणा का दबदबा है तो ठीक वैसे ही हमारे राज्य में अहलियाल क्षेत्र का कुश्ती में वर्चस्व रहता है। राज्य में डिपार्टमेंट ऑफ यूथ एंड डेवलपमेंट एंड सेंटर मुख्य रूप से इन्हीं सिद्दी समुदाय के लिए है। इनके बच्चे यहीं पर ट्रेनिंग करते हैं। पिछले कुछ समय से इस समुदाय के लोगों के अंदर कुश्ती का क्रेज बढ़ा है और वे अब अपने बच्चों को कुश्ती में भेजने लगे हैं।

उत्तरी कर्नाटक के धारवाड़ जिले से आने वाले पुरुष पहलवान रोहन एम. डोड़ामणि भी इसी समुदाय से आते हैं। डोड़ामणि की मां सरकारी स्कूल में खाना पकाती हैं जबकि पिता का छह साल पहले ही देहांत हो चुका है।

 रोहन ने कहा, “सिद्दी समुदाय के अंदर समय-समय पर छोटे दंगल होते रहते हैं और जो इनमें जीतता है, उन्हें ज्यादा से ज्यादा पुरस्कार राशि देकर सम्मानित किया जाता है। खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स-2026 में स्वर्ण जीतने से पहले मैं सीनियर नेशनल चैंपियनशिप, नेशनल गेम्स और ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स में भी भाग ले चुका हूं।''

देश में खिलाड़ियों के अंदर छिपी प्रतिभा की पहचान करने और उन्हें एक बेहतर मंच देने के लिए भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) और खेल मंत्रालय ने मिलकर 2018 में खेलो इंडिया यूथ गेम्स की शुरुआत की थी। उसके बाद खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स और अब खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स की शुरुआत हुई है। 

साई के टैलेंट डेवलपमेंट कमेटी के सदस्य महा सिंह राव कहते हैं, '' साई और खेल मंत्रालय की तरफ से हम कम उम्र के प्रतिभाशाली बच्चों की पहचान करते हैं ताकि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी का जो सपना है कि 2036 ओलंपिक खेल भारत में हो, उस सपने को साकार करने के लिए ये सरकार की रणनीति का एक हिस्सा है। प्रधानमंत्री के अलावा खेल मंत्री, साई और हम इस सपने को साकार करने में लगे हुए हैं कि आगे आने वाले ओलंपिक खेलों में हम ज्यादा से ज्यादा मेडल जीते।''

उत्तर कन्नड़ कारवार जिले से आने वाली शालिना सेयर सिद्दी ने इस प्रतियोगिता में रजत पदक जीतने के बाद कहा, ''हमारे समुदाय में कुश्ती को लेकर अब लोग दिलचस्पी लेने लगे हैं। मैंने अपने अंकल के कहने पर कुश्ती शुरू की थी और शुरू से ही वह मुझे ट्रेनिंग देते आ रहे हैं। मैंने इस प्रतियोगिता के लिए मेहनत तो पूरी की थी, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था और मैं स्वर्ण जीतने से चूक गई।'' 

कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ कारवार जिले से ही आने वाली प्रिंसिता सिद्दी ने कहा, ''शुरुआत में मुझे कुश्ती में दिलचस्पी नहीं थी और मैं बहुत रोई थी। लेकिन फिर धीरे-धीरे जब हमारे समुदाय के बच्चे इसमें भाग लेने लगे तो उन्हें देखकर मैं भी प्रैक्टिस करने लगी। यहां तक पहुंचने के लिए मैं शाम-सुबह दो-दो घंटे प्रैक्टिस करती हूं। मुझे इंटरनेशनल लेवल पर मेडल लाना है और इसके लिए मैं कड़ी मेहनत कर रही हूं।''

इन पहलवानों की सफलता इस बात को सिद्ध करती है कि जब सही मंच, ट्रेनिंग और सपोर्ट मिलता है, तो दूरदराज के समुदायों से भी प्रतिभाएं शिखर तक पहुंच सकती हैं और भारत के खेल भविष्य को आकार दे सकती हैं।

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रात में मछुआरे का काम करने वाले अब्दुल फताह की छलांग ने लक्षद्वीप एथलेटिक्स के लिए एक नया अध्याय लिखा।

 

 

 अब्दुल फताह ज़्यादातर रातों को समुद्र में होते हैं, जहां वे मछुआरे बनकर अपने परिवार की रोज़ी-रोटी कमाने में मदद करते हैं। जैसे ही सुबह होती है, वे सीधे ट्रेनिंग ग्राउंड की ओर निकल पड़ते हैं और एक एक अलग सपने का पीछा करते हुए लक्षद्वीप को 'खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स' 2026 में पहला मेडल दिलाया।

                   कवरत्ती और कदमत द्वीपों के बीच स्थित, दूरदराज के अमीनी द्वीप जो लगभग 2.7 किमी लंबा और 1.2 किमी चौड़ा है, और जिसका कुल भू-क्षेत्रफल 2.60 वर्ग किमी है के 18 वर्षीय लॉन्ग जम्पर ने जगदलपुर के क्रीड़ा परिसर मैदान में 7.03 मीटर की अपनी करियर की सर्वश्रेष्ठ छलांग लगाकर स्वर्ण पदक जीता। यह इस छोटे से केंद्र शासित प्रदेश के लिए एक ऐतिहासिक क्षण था। केंद्र शासित प्रदेश के खेल अधिकारी अहमद जावेद हसन ने मुस्कुराते हुए कहा, वह लक्षद्वीप के पहले ऐसे एथलीट हैं जिन्होंने 7 मीटर की दूरी पार की है और यह वाकई एक खास बात है।'' 

               मछुआरे परिवार में जन्मे फताह भाई-बहनों में सबसे बड़े हैं और घर की बड़ी ज़िम्मेदारी संभालते हैं। 12वीं कक्षा पूरी करने के बाद, आर्थिक तंगी के कारण उन्हें अपनी पढ़ाई बीच में ही रोकनी पड़ी। इसके बजाय, उन्होंने अपने पिता के पारिवारिक व्यवसाय में हाथ बँटाने और खेल को अपने जुनून के तौर पर अपनाने का फ़ैसला किया।फताह ने कहा, '' कोई और चारा नहीं है, आपको चीज़ों में संतुलन बनाना ही पड़ता है। जब मैं स्कूल में था, तभी से मैं अपने पिता की मछली पकड़ने के काम में मदद करता आ रहा हूँ। यही हमारी आमदनी का एकमात्र ज़रिया है। हमारे परिवार में छह लोग हैं। सुबह मैं अपनी ट्रेनिंग के लिए जाता हूँ; मेरे परिवार को इस बारे में पता है, भले ही वे इस खेल के बारे में बहुत कम समझते हों।'' 

             दिलचस्प बात यह है कि एथलेटिक्स उनका पहला प्यार नहीं था। फताह शुरू में फुटबॉल खेलते थे, जैसा कि द्वीप के कई दूसरे युवा करते थे। हालांकि, कुछ साल पहले एक स्थानीय इंटर-आइलैंड प्रतियोगिता के दौरान उनकी यात्रा में एक अहम मोड़ आया। कोच मोहम्मद कासिम ने इस युवा की दौड़ने की ज़बरदस्त काबिलियत को पहचाना और उन्हें एथलेटिक्स में आने का सुझाव दिया। तब से, फताह ने लॉन्ग जंप और 100-मीटर स्प्रिंट में ट्रेनिंग शुरू कर दी। लगभग उसी समय, अमिनी एथलेटिक्स एसोसिएशन का गठन होने लगा, जिससे इस क्षेत्र में खेलों के विकास को एक सही ढाँचा मिला।

           फताह और कई अन्य युवा एथलीटों को धीरे-धीरे कोचिंग की मदद दी गई, जिससे उन्हें ज़्यादा व्यवस्थित तरीके से ट्रेनिंग करने में मदद मिली। सिर्फ़ दो सालों में, एसोसिएशन ने लगभग 384 एथलीटों को तैयार किया। इस समूह में से, 17 एथलीटों को गेम्स में लक्षद्वीप का प्रतिनिधित्व करने के लिए चुना गया। जगदलपुर में फत्ताह की 7.03 मीटर की गोल्ड-विनिंग जंप, वहां के हालात को देखते हुए, खास तौर पर संतोषजनक थी। ट्रेनिंग के दौरान, उन्होंने बताया था कि उनकी जंप आमतौर पर 6.5 से 6.7 मीटर के आस-पास रहती है। उन्होंने कहा. '' खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में आने से पहले, मैंने अपने लिए 7.15 मीटर तक पहुंचने का लक्ष्य तय किया था। मुझे खुशी है कि मैं सात मीटर का आँकड़ा पार कर पाया, और यह गोल्ड मेडल मुझे और बेहतर करने के लिए प्रेरित करेगा,” 

         लक्षद्वीप धीरे-धीरे भारत के एथलेटिक्स के नक्शे पर अपनी जगह बना रहा है। इस केंद्र शासित प्रदेश की सबसे जानी-मानी एथलीटों में से एक हैं मुबस्सिना मोहम्मद, जो 19 साल की लॉन्ग जंपर और हेप्टाथलीट हैं। कुवैत में हुए 2022 एशियन U18 एथलेटिक्स चैंपियनशिप में लॉन्ग जंप में सिल्वर मेडल जीतकर वह लक्षद्वीप की पहली इंटरनेशनल मेडलिस्ट बनीं। उन्होंने महिलाओं की लॉन्ग जंप में 6.30 मीटर के अपने पर्सनल बेस्ट के साथ जूनियर नेशनल टाइटल भी जीता।

         मुबस्सिना की तरह, फताह भी बिना किसी आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर की सुविधा के ट्रेनिंग करते हैं। लक्षद्वीप, जो सिर्फ़ 32 वर्ग किलोमीटर में फैला है और जिसकी आबादी 70,000 से भी कम है, वहां अभी तक कोई ठीक-ठाक सिंथेटिक ट्रैक या एथलेटिक्स स्टेडियम नहीं है। नतीजतन, कई एथलीट मिट्टी के ट्रैक पर प्रैक्टिस करते हैं, जबकि फत्ताह अक्सर अपने स्प्रिंट इवेंट्स की ट्रेनिंग के लिए पास के एक फुटबॉल मैदान का इस्तेमाल करते हैं। उन्होंने आगे कहा, '' खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स और दूसरे नेशनल लेवल के मुकाबलों में हमारी सफलता को देखते हुए, हमें उम्मीद है कि हमारे लिए हालात बदलेंगे। हो सकता है कि हमें कुछ नौकरियाँ और ट्रेनिंग की सुविधाएँ मिल जाएं.''

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गढ़पहाड़ की गुफा में मिली हजारों साल पुरानी सभ्यता की झलक, जयमरगा बना प्रागैतिहासिक धरोहर का केंद्र

 

 

प्राकृतिक सुंदरता के लिए पहचाने जाने वाले जशपुर जिले में अब प्रागैतिहासिक सभ्यता के महत्वपूर्ण प्रमाण भी सामने आए हैं। जिले के मनोरा विकासखंड अंतर्गत ग्राम जयमरगा स्थित गढ़पहाड़ की गुफा में आदिमकालीन शैलचित्र मिलने से यह क्षेत्र पुरातात्विक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण बन गया है। यह खोज इस बात के स्पष्ट संकेत देती है कि हजारों वर्ष पूर्व यहां आदिमानवों का निवास रहा होगा और उन्होंने अपने जीवन, शिकार और परिवेश को इन चित्रों के माध्यम से अभिव्यक्त किया।

जंगल और पहाड़ों के बीच छिपा है इतिहास

जिला मुख्यालय से लगभग 30 किलोमीटर दूर स्थित जयमरगा ग्राम, ग्राम पंचायत डड़गांव का आश्रित गांव है, जिसकी आबादी लगभग 1400 है। गांव तक पहुंचने के लिए सड़क सुविधा उपलब्ध है, लेकिन गुफा तक पहुंचने के लिए गढ़पहाड़ पर करीब 300 मीटर की कठिन चढ़ाई करनी पड़ती है। घने जंगलों और प्राकृतिक वातावरण से घिरा यह क्षेत्र अपने भीतर हजारों साल पुराना इतिहास समेटे हुए है।

स्थानीय ग्रामीणों के लिए यह गुफा आस्था का केंद्र भी है, जहां वे पूजा-अर्चना करते हैं। अब यह स्थल धार्मिक के साथ-साथ ऐतिहासिक महत्व भी प्राप्त कर चुका है।

शैलचित्रों में दर्ज है आदिमानव का जीवन

पुरातत्त्ववेत्ता डॉ. अंशुमाला तिर्की और बालेश्वर कुमार बेसरा के अनुसार, जयमरगा क्षेत्र प्रागैतिहासिक स्थलों से समृद्ध है। यहां के पहाड़, जंगल और समीप बहने वाले जल स्रोत आदिमानवों के लिए आदर्श निवास स्थल रहे होंगे।

गुफा में बने शैलचित्रों में—

मानव आकृतियों के समूह

शिकार करते हुए दृश्य

पशु आकृतियां जैसे बैल, तेंदुआ और हिरण

विभिन्न ज्यामितीय आकृतियां और रहस्यमयी चिन्ह

इन चित्रों में लाल और सफेद रंग का उपयोग किया गया है, जो संभवतः हेमाटाइट पत्थर से तैयार किए गए थे। इन चित्रों की शैली से यह भी संकेत मिलता है कि ये अलग-अलग कालखंडों में बनाए गए हैं।

मध्य पाषाण काल के उपकरणों की भी पुष्टि

इस स्थल से मध्य पाषाण काल (Mesolithic Period) के माइक्रोलिथिक उपकरण भी प्राप्त हुए हैं, जिनमें लुनैट, स्क्रैपर, पॉइंट, ट्रैपेज, साइड स्क्रैपर और ब्लेड शामिल हैं। ये उपकरण शिकार, काटने और अन्य दैनिक कार्यों में उपयोग किए जाते थे।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह गुफा केवल निवास स्थल नहीं बल्कि एक रणनीतिक स्थान भी रही होगी, जहां से आदिमानव ऊंचाई पर बैठकर शिकार के लिए जानवरों की गतिविधियों पर नजर रखते थे।

संरक्षण और शोध की जरूरत

इतिहास और पुरातत्व के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण इस स्थल पर अभी तक व्यापक स्तर पर संरक्षण और वैज्ञानिक अध्ययन की आवश्यकता है। यदि समय रहते इस गुफा और शैलचित्रों को संरक्षित नहीं किया गया, तो यह अमूल्य धरोहर क्षति का शिकार हो सकती है।

पर्यटन के रूप में उभर सकता है नया केंद्र

गढ़पहाड़ की यह गुफा जशपुर जिले के पर्यटन मानचित्र पर एक नया आकर्षण बन सकती है। प्राकृतिक सुंदरता, ऐतिहासिक महत्व और रोमांचक ट्रैकिंग का संगम इस स्थान को विशेष बनाता है। यदि यहां बुनियादी सुविधाएं विकसित की जाएं और प्रचार-प्रसार किया जाए, तो यह क्षेत्र पर्यटन के क्षेत्र में नई पहचान बना सकता है।

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रामनाम की पावन रसधारा में डूबा कुनकुरी,श्रद्धेय चिन्मयानंद बापू के मुखारविंद से श्रीराम कथा महोत्सव का भव्य शुभारंभ।

 

 

 

 

कुनकुरी नगर गुरुवार को पूरी तरह भक्ति और आस्था के रंग में रंगा नजर आया, जब सात दिवसीय श्रीराम कथा महोत्सव का भव्य शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम के आरंभ होते ही पूरा नगर ‘जय श्रीराम’ के जयघोष से गूंज उठा और वातावरण राममय हो गया।

इस पावन अवसर पर परम पूज्य श्रद्धेय संत चिन्मयानंद बापू जी के श्रीमुख से श्रीराम कथा का वाचन प्रारंभ हुआ, जिसे सुनने के लिए हजारों की संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। कथा स्थल सलियाटोली मिनी स्टेडियम में विशाल पंडाल सजाया गया है, जहां श्रद्धालु भक्ति रस में डूबकर कथा का श्रवण कर रहे हैं।

संत चिन्मयानंद बापू जी के आगमन पर उनका भव्य स्वागत किया गया। मुख्यमंत्री की धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या साय, आयोजन समिति के सदस्य एवं नगर के गणमान्य नागरिकों ने पुष्पगुच्छ एवं मालाओं से उनका अभिनंदन किया। जय स्तंभ चौक पर गाजे-बाजे और पारंपरिक वाद्य-यंत्रों के साथ भव्य स्वागत हुआ, वहीं महिलाओं ने आरती उतारकर वातावरण को और अधिक भक्तिमय बना दिया।

प्रतिदिन तीन घंटे होगा कथा का आयोजन

आयोजन समिति के अनुसार, यह श्रीराम कथा महोत्सव 2 अप्रैल से 8 अप्रैल 2026 तक आयोजित किया जाएगा। प्रतिदिन दोपहर 3 बजे से शाम 6 बजे तक कथा का आयोजन होगा, जिसमें भगवान श्रीराम के आदर्श जीवन, धर्म, मर्यादा, त्याग और कर्तव्य के प्रसंगों का विस्तार से वर्णन किया जाएगा।

भक्ति, ज्ञान और संस्कारों का संगम

यह कथा महोत्सव केवल धार्मिक आयोजन ही नहीं, बल्कि आत्मिक शुद्धि और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम भी बन रहा है। कथा के माध्यम से श्रद्धालुओं को भक्ति, ज्ञान और संस्कारों की अनमोल सीख प्राप्त हो रही है।

श्रद्धालुओं से अपील

आयोजन समिति ने सभी धर्मप्रेमी नागरिकों से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर श्रीराम कथा का श्रवण करें और इस पावन अवसर का लाभ उठाएं।

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अखिल विश्व गायत्री परिवार की उपजोन स्तरीय गोष्ठी सम्पन्न, संकल्पों के क्रियान्वयन पर जोर।

 

 

 

गायत्री शक्तिपीठ बतौली में रविवार को अखिल विश्व गायत्री परिवार के तत्वावधान में अम्बिकापुर उपजोन की उपजोन स्तरीय गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में शांतिकुंज हरिद्वार से पधारे छत्तीसगढ़ जोन समन्वयक सुकदेव निर्मलकर की गरिमामयी उपस्थिति रही। गोष्ठी में अम्बिकापुर, बलरामपुर एवं जशपुर जिले के परिजन शामिल हुए।

कार्यक्रम का शुभारंभ मां गायत्री की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। प्रारंभ में प्रांतीय युवा प्रकोष्ठ के सह संयोजक दौलतराम चौहान ने गोष्ठी की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए संगठन की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने शताब्दी कार्यक्रम बैरागी द्वीप में लिए गए संकल्पों की समीक्षा एवं उनके क्रियान्वयन हेतु कार्ययोजना बनाने पर विशेष जोर दिया।

इस दौरान बालिका सोनिया द्वारा युग निर्माण सत्संकल्प का मौखिक पाठ कराया गया। उपजोन संयोजक एस.जे. द्विवेदी ने सभी परिजनों को संबोधित करते हुए मिलजुलकर संकल्पों को पूर्ण करने का आह्वान किया।

छत्तीसगढ़ जोन समन्वयक सुकदेव निर्मलकर ने आदरणीय शैल जीजी एवं श्रद्धेय डॉ. साहब का संदेश सुनाते हुए सभी जिलों में ब्लॉक स्तर पर समन्वय समितियों के पुनर्गठन तथा साधना किट एवं सत्संकल्प पाठ को ग्राम, विद्यालय एवं महाविद्यालयों तक पहुंचाने पर बल दिया।

गोष्ठी में नारी जागरण की प्रगति अम्बिकापुर जिले से श्रीमती शांति दीदी एवं जशपुर जिले से श्रीमती पार्वती चौहान द्वारा प्रस्तुत की गई। वहीं जिला प्रगति प्रतिवेदन बलरामपुर से अम्बुज यादव, जशपुर से कांशीराम श्रीवास एवं अम्बिकापुर से नंदकिशोर गोस्वामी ने प्रस्तुत किया।

कार्यक्रम का सफल संचालन नंदकिशोर गोस्वामी ने किया। अंत में शांति पाठ के साथ गोष्ठी का समापन हुआ।

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सूरजपुर में माता कर्मा जयंती में शामिल हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, नक्सलवाद और ईंधन आपूर्ति पर दिया बड़ा बयान।

 

 

 

प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय रविवार को सूरजपुर दौरे पर पहुंचे, जहां उन्होंने साहू समाज द्वारा आयोजित माता कर्मा जयंती समारोह में शिरकत की। इस अवसर पर उन्होंने समाज का आभार जताते हुए कहा कि माता कर्मा का आशीर्वाद सदैव छत्तीसगढ़ पर बना रहे और प्रदेश में खुशहाली आए। उन्होंने साहू समाज की एकता, संगठन और सामाजिक योगदान की सराहना की।

मीडिया से चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री ने नक्सलवाद के मुद्दे पर कहा कि नरेंद्र मोदी और अमित शाह के दृढ़ निश्चय का परिणाम है कि छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद अब समाप्ति की कगार पर है। उन्होंने कहा कि बस्तर जैसे क्षेत्र, जो पिछले चार दशकों से विकास से वंचित थे, वहां अब विकास की किरणें पहुंच रही हैं और हालात तेजी से बदल रहे हैं।

अंतरराष्ट्रीय हालातों पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री ने ईरान-इजराइल तनाव और अमेरिका से जुड़े घटनाक्रम के बीच प्रदेशवासियों को आश्वस्त किया कि देश और प्रदेश में पेट्रोलियम पदार्थों और घरेलू गैस की कोई कमी नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री स्वयं स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और आम नागरिकों को घबराने की आवश्यकता नहीं है।

मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार द्वारा पेट्रोल और डीजल पर सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी में ₹10 की कटौती के फैसले को ऐतिहासिक बताते हुए प्रधानमंत्री का आभार जताया। उन्होंने कहा कि इस निर्णय से आम उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिलेगी। साथ ही उन्होंने प्रदेश में ईंधन की कालाबाजारी रोकने के लिए प्रशासन को सख्त निर्देश देने की बात भी दोहराई।

कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू, प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े सहित अन्य जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में समाज के लोग उपस्थित रहे।

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इचकेला की बेटियों ने क्रिकेट में रचा इतिहास मुख्यमंत्री श्री साय ने किया सम्मानित, किट देकर बढ़ाया हौसला।

 

 

 सीमित संसाधनों के बीच बड़े सपने देखने वाली जशपुर जिले के इचकेला की बेटियों ने क्रिकेट के मैदान में ऐसा प्रदर्शन किया कि आज वे जिले ही नहीं, पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणा बन गई हैं। उनकी इसी उपलब्धि पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने शनिवार को जशपुर नगर के मल्टीपरपज इंडोर बास्केटबॉल स्टेडियम में उनसे मुलाकात कर उन्हें क्रिकेट किट प्रदान की और उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।

 

 ग्राम इचकेला के शासकीय प्री-मैट्रिक कन्या छात्रावास की 16 बालिका खिलाड़ियों ने क्रिकेट में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए जिले को राष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित किया है। मुख्यमंत्री ने छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि उनकी मेहनत, अनुशासन और लगन ने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया है और वे आगे भी इसी तरह राज्य और देश का नाम रोशन करती रहें।

इचकेला एमसीसी एक क्रिकेट अकादमी के रूप में उभरकर सामने आई है, जहां से वर्तमान में 40 बालिकाएं नियमित रूप से क्रिकेट का प्रशिक्षण ले रही हैं। इनमें से 17 खिलाड़ी अंडर-17 और अंडर-19 वर्ग में राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में छत्तीसगढ़ टीम का प्रतिनिधित्व कर रही हैं और बोर्ड मैचों में लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रही हैं।

वर्ष 2025 में सरगुजा संभाग ने 25 वर्षों बाद राज्य स्तरीय अंडर-17 क्रिकेट प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक हासिल किया। इस ऐतिहासिक जीत में इचकेला एमसीसी की भूमिका निर्णायक रही। विजेता टीम के 11 खिलाड़ियों में से 9 खिलाड़ी इसी अकादमी की थीं। वहीं अंडर-19 वर्ग में भी सरगुजा संभाग ने रजत पदक जीता, जिसमें 11 में से 8 खिलाड़ी इचकेला एमसीसी से थीं। रायगढ़ में आयोजित वर्ष 2025 के इंटर-स्टेट क्रिकेट टूर्नामेंट में देशभर की टीमों के बीच इचकेला की बेटियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए प्रथम स्थान हासिल किया। अब तक इस समूह की 11 खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में भाग लेकर जिले और राज्य का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। इन उपलब्धियों के पीछे कोच श्री संतोष शंकर सोनी और श्रीमती पंडरी बाई का समर्पण और मार्गदर्शन प्रमुख रहा है।इचकेला की बेटियों की सफलता इस बात का सबूत है कि अगर मन में जुनून हो और सही मार्गदर्शन मिले तो संसाधनों की कमी भी सफलता के रास्ते में बाधा नहीं बनती।

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मुख्यमंत्री ने ‘डिजिटल डोर सुविधा’ का किया शुभारंभ, जशपुर में घर बैठे टैक्स भुगतान की सुविधा शुरू।

 

 

 

छत्तीसगढ़ में डिजिटल सेवाओं को बढ़ावा देते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने ‘डिजिटल डोर सुविधा’ का शुभारंभ किया। इस पहल के तहत अब जशपुर नगर पालिका क्षेत्र के नागरिक घर बैठे क्यूआर कोड स्कैन कर जल कर, संपत्ति कर और दुकान कर का भुगतान आसानी से कर सकेंगे।

यह सुविधा HDFC Bank के सहयोग से शुरू की गई है। इसके अंतर्गत नगर पालिका जशपुर के प्रत्येक घर के लिए अलग-अलग क्यूआर कोड तैयार किए गए हैं, जिन्हें घर-घर चस्पा किया जा रहा है। इस क्यूआर कोड में मकान मालिक का नाम, मकान नंबर, मोबाइल नंबर और बकाया कर की पूरी जानकारी उपलब्ध रहेगी।

नागरिक क्यूआर कोड स्कैन कर डी.डी.एन नंबर, मोबाइल नंबर या प्रॉपर्टी आईडी के माध्यम से अपनी देय राशि देख सकेंगे और यूटीआई, डेबिट कार्ड या नेट बैंकिंग के जरिए सुरक्षित भुगतान कर पाएंगे। भुगतान के तुरंत बाद डिजिटल रसीद भी प्राप्त होगी।

नगर पालिका जशपुर में लागू प्रॉपर्टी टैक्स इंफॉर्मेशन सिस्टम एक आधुनिक आईसीटी आधारित व्यवस्था है, जिसके माध्यम से लगभग 4600 हाउसहोल्ड—आवासीय, व्यावसायिक और औद्योगिक संपत्तियों को जोड़ा गया है। यह प्रणाली राजस्व संग्रहण को पारदर्शी, सरल और प्रभावी बनाएगी।

इस पहल से नागरिकों को समय और श्रम की बचत होगी, वहीं नगर पालिका के कार्यों में पारदर्शिता और दक्षता भी बढ़ेगी। डिजिटल भुगतान से राजस्व संग्रहण में तेजी आएगी और नगरीय प्रशासन और अधिक सशक्त होगा।

कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष सालिक साय, नगर पालिका अध्यक्ष अरविंद कुमार भगत, नगर पालिका उपाध्यक्ष यश प्रताप सिंह जूदेव, कृष्णा राय, कलेक्टर रोहित व्यास, नगर पालिका अधिकारी योगेश्वर उपाध्याय, एचडीएफसी बैंक के रीजनल मैनेजर सराफत अली और शाखा प्रबंधक दीपक दास सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी मौजूद रहे।

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मुख्यमंत्री ने ‘डिजिटल डोर सुविधा’ का किया शुभारंभ, जशपुर में घर बैठे टैक्स भुगतान की सुविधा शुरू।

 

 

 

छत्तीसगढ़ में डिजिटल सेवाओं को बढ़ावा देते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने ‘डिजिटल डोर सुविधा’ का शुभारंभ किया। इस पहल के तहत अब जशपुर नगर पालिका क्षेत्र के नागरिक घर बैठे क्यूआर कोड स्कैन कर जल कर, संपत्ति कर और दुकान कर का भुगतान आसानी से कर सकेंगे।

यह सुविधा HDFC Bank के सहयोग से शुरू की गई है। इसके अंतर्गत नगर पालिका जशपुर के प्रत्येक घर के लिए अलग-अलग क्यूआर कोड तैयार किए गए हैं, जिन्हें घर-घर चस्पा किया जा रहा है। इस क्यूआर कोड में मकान मालिक का नाम, मकान नंबर, मोबाइल नंबर और बकाया कर की पूरी जानकारी उपलब्ध रहेगी।

नागरिक क्यूआर कोड स्कैन कर डी.डी.एन नंबर, मोबाइल नंबर या प्रॉपर्टी आईडी के माध्यम से अपनी देय राशि देख सकेंगे और यूटीआई, डेबिट कार्ड या नेट बैंकिंग के जरिए सुरक्षित भुगतान कर पाएंगे। भुगतान के तुरंत बाद डिजिटल रसीद भी प्राप्त होगी।

नगर पालिका जशपुर में लागू प्रॉपर्टी टैक्स इंफॉर्मेशन सिस्टम एक आधुनिक आईसीटी आधारित व्यवस्था है, जिसके माध्यम से लगभग 4600 हाउसहोल्ड—आवासीय, व्यावसायिक और औद्योगिक संपत्तियों को जोड़ा गया है। यह प्रणाली राजस्व संग्रहण को पारदर्शी, सरल और प्रभावी बनाएगी।

इस पहल से नागरिकों को समय और श्रम की बचत होगी, वहीं नगर पालिका के कार्यों में पारदर्शिता और दक्षता भी बढ़ेगी। डिजिटल भुगतान से राजस्व संग्रहण में तेजी आएगी और नगरीय प्रशासन और अधिक सशक्त होगा।

कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष सालिक साय, नगर पालिका अध्यक्ष अरविंद कुमार भगत, नगर पालिका उपाध्यक्ष यश प्रताप सिंह जूदेव, कृष्णा राय, कलेक्टर रोहित व्यास, नगर पालिका अधिकारी योगेश्वर उपाध्याय, एचडीएफसी बैंक के रीजनल मैनेजर सराफत अली और शाखा प्रबंधक दीपक दास सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी मौजूद रहे।

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जल संरक्षण का कोरिया मॉडल,प्रधानमंत्री मोदी ने की सराहना,जल संरक्षण को जनभागीदारी से सशक्त करना हमारा संकल्प- विष्णु देव साय

 

 

कोरिया जिले में जल संरक्षण को जन आंदोलन का स्वरूप देते हुए “कैच द रेन” तथा राज्य शासन के *मोर गाव मोर पानी महा अभियान अभियान* के अंतर्गत में “आवा पानी झोंकी” अभियान संचालित किया गया। इस पहल ने जल संरक्षण को केवल एक सरकारी योजना से आगे बढ़ाकर व्यापक जनभागीदारी पर आधारित आंदोलन बना दिया है।

इस अभिनव प्रयास को राष्ट्रीय स्तर पर विशेष पहचान तब मिली, जब माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने अपने लोकप्रिय कार्यक्रम “मन की बात” में कोरिया मॉडल की सराहना की और इसे जनभागीदारी आधारित जल संरक्षण का प्रेरक उदाहरण बताया।

इसके अतिरिक्त, केंद्रीय स्तर पर भी इस मॉडल को सराहना प्राप्त हुई है। केंद्रीय जलशक्ति मंत्री सी आर पाटिल द्वारा भी कोरिया मॉडल को अन्य राज्यों में लागू किए जाने योग्य पहल के रूप में उल्लेखित किया गया, जिससे इसकी उपयोगिता और विस्तार की संभावनाएँ स्पष्ट होती हैं।

पृष्ठभूमि

कोरिया जिले में लगभग 1370 मिमी वार्षिक वर्षा होने के बावजूद भू-आकृतिक परिस्थितियों के कारण जल का तीव्र बहाव होता था, जिससे भूजल पुनर्भरण सीमित था। 

कोरिया मॉडल: जन आंदोलन की अवधारणा

“जल संचय जन भागीदारी अभियान” के अंतर्गत लागू 5% मॉडल के तहत किसानों ने अपनी भूमि का 5% भाग छोटी सीढ़ीदार जल संरचनाओं के लिए समर्पित किया साथ ही सोखता गड्ढे और मनरेगा के अंतर्गत संरचनाएं बनाईं गईं।

सामुदायिक एवं वैज्ञानिक समन्वय

महिलाओं ने नीर नायिका, युवाओं ने जल दूत के रूप में भूमिका निभाई और ग्राम सभाओं के माध्यम से विकेंद्रीकृत योजना को सशक्त बनाया। इससे समुदाय स्वयं कार्यान्वयनकर्ता बना। 

2025 की उपलब्धियाँ (जल पुनर्भरण)

जिले में कुल लगभग 2.8 MCM (28 लाख घन मीटर) जल का भूजल में पुनर्भरण हुआ।यह जल मात्रा लगभग 230–235 (12000 m³/ तालाब ) बड़े तालाबों के बराबर और 1800 से अधिक ( 1500 m³/ डबरी ) डबरियों के बराबर है। ( गणनाएं मानक वैज्ञानिक मानकों एवं सावधानीपूर्वक किए गए आकलन पर आधारित हैं।)

भूजल स्तर में सुधार

CGWB की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2025 में कोरिया जिले के भूजल स्तर में 5.41 मीटर की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई, जो इस मॉडल की प्रभावशीलता को दर्शाती है। 

2026 में प्रगति

20,612 से अधिक जल संरक्षण कार्य पूर्ण/प्रगति पर हैं जिनके अंतर्गत 17,229 सामुदायिक कार्य तथा 3,383 मनरेगा आधारित संरचनाएँ शामिल हैं।

कलेक्टर का वक्तव्य

जिला कलेक्टर श्रीमती चंदन संजय त्रिपाठी ने कहा—

“कोरिया मॉडल की सफलता का मूल आधार जनभागीदारी है। जब समाज स्वयं जल संरक्षण का संकल्प लेता है, तो परिणाम स्थायी और व्यापक होते हैं। हमारा प्रयास है कि हर बूंद को संजोकर आने वाली पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।”

कोरिया मॉडल यह प्रमाणित करता है कि जब जनभागीदारी, वैज्ञानिक योजना, शासन और प्रशासनिक नेतृत्व एक साथ कार्य करते हैं, तो जल संरक्षण को एक स्थायी जन आंदोलन में परिवर्तित किया जा सकता है— और यही मॉडल अब राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनाए जाने की दिशा में अग्रसर है।

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अफवाहों से बचें, पेट्रोल-डीजल व गैस की कोई कमी नहीं : कलेक्टर रोहित व्यास,दिक्कत हो तो इन नंबरों पर करें कॉल।

 

कलेक्टर रोहित व्यास ने जिलेवासियों से अपील करते हुए कहा है कि जशपुर जिले में पेट्रोल, डीजल, घरेलू गैस सिलेंडर एवं उर्वरक की किसी भी प्रकार की कोई कमी नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आम नागरिक किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें और न ही उन्हें फैलाएं।

कलेक्टर ने शनिवार को कलेक्ट्रेट में समीक्षा बैठक लेकर जिला स्तरीय कंट्रोल रूम स्थापित करने के निर्देश दिए थे। खाद्य विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार जिले में सभी पेट्रोल पंपों पर नियमित रूप से सप्लाई हो रही है और घरेलू गैस की बुकिंग भी शासन द्वारा निर्धारित समयावधि में जारी है। साथ ही गैस का भंडारण भी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है।

उन्होंने कहा कि आपूर्ति को लेकर किसी भी प्रकार की भ्रामक सूचना पर ध्यान न दें, जिले में आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता पूरी तरह सामान्य है।

आम उपभोक्ताओं को यदि पेट्रोल, डीजल या घरेलू गैस की प्राप्ति में किसी प्रकार की समस्या आती है, तो वे राज्य स्तर पर खाद्य विभाग के कॉल सेंटर नंबर 1800-233-3663 अथवा 1967 पर संपर्क कर सकते हैं। इसके अलावा राज्य स्तरीय कंट्रोल रूम नंबर 0771-2511975 भी जारी किया गया है।

जिला स्तर पर भी कलेक्टर कार्यालय की खाद्य शाखा में कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है, जिसका संपर्क नंबर 9244011192 है।

प्रशासन ने आम जनता से अपील की है कि वे किसी भी अफवाह से बचें और आवश्यक होने पर ही संबंधित सेवाओं का उपयोग करें।

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मुख्यमंत्री कन्या विवाह में 240 नव दम्पतियों को मुख्यमंत्री देंगे अपना आशीर्वाद,जशपुर के रणजीता स्टेडियम में भव्य आयोजन।

 

 

 

 

 महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना अन्तर्गत 28 मार्च को जिले के 240 जोड़ो का विवाह रणजीता स्टेडियम जशपुर में आयोजित किया जा रहा है। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय नव दम्पतियों को अपना आशीर्वाद देंगे।

विवाह से पूर्व कन्याओं को मेंहदी एवं हल्दी और संगीत कार्यक्रम आयोजित किया गया इसके साथ ही बेटियों का मयाली नेचर कैंप में प्री वेडिंग सूटिंग का आयोजन किया गया है।

मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत प्रति जोड़ा को 50 हजार की राशि का प्रावधान इसमें 35 हजार का चेक दिया जाता है और 7 हजार की वैवाहिक सामग्री इसके साथ ही 8 हजार का वैवाहिक आयोजन में खर्च किया जाता है।

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मुख्यमंत्री निवास बगिया में श्री रामनवमी महायज्ञ का भव्य शुभारंभ, कलश यात्रा में उमड़ा जनसैलाब.......।

 

 

 चैत्र रामनवमी के पावन अवसर पर मुख्यमंत्री निवास बगिया में आयोजित चार दिवसीय श्री रामनवमी महायज्ञ का आज बुधवार को भव्य कलश यात्रा के साथ शुभारंभ हुआ। पूरे क्षेत्र में श्रद्धा, भक्ति और उल्लास का अद्भुत संगम देखने को मिला, जहां हजारों की संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।

कलश यात्रा मुख्यमंत्री निवास बगिया से प्रारंभ होकर नदी तट तक निकली तथा पुनः यज्ञ स्थल तक पहुंची, जिसमें महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में सिर पर कलश धारण कर शामिल हुईं। भजन-कीर्तन और जय श्रीराम के उद्घोष से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।इस अवसर पर मुख्यमंत्री की धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या साय विशेष रूप से उपस्थित रहीं। वहीं, कार्यक्रम में प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के भी शामिल होने की जानकारी दी गई है।आयोजन को लेकर बगिया सहित आसपास के क्षेत्रों में भारी उत्साह देखा जा रहा है।इस धार्मिक कार्यक्रम का मुख्यमंत्री के भाई जयप्रकाश साय सह पत्नी द्वारा विधि विधान से पूजा अर्चना की जा रही है।कार्यक्रम के तहत आज मूर्ति स्थापना के साथ पूजा, हवन, आरती, लीला एवं भजन-कीर्तन का आयोजन किया गया। आगामी दिनों में धार्मिक अनुष्ठानों की श्रृंखला जारी रहेगी—26 मार्च: पूजन, हवन, आरती, प्रवचन एवं भजन-कीर्तन,27 मार्च: विशेष पूजन, नवकन्या पूजन, पूर्णाहुति एवं रात्रि में भव्य लीला,28 मार्च: सहस्त्रधारा स्नान, आशीर्वाद, मूर्ति विसर्जन एवं प्रसाद वितरण के साथ समापन होगा।

यह भव्य आयोजन ग्राम बगिया के यज्ञ स्थल पर किया जा रहा है, जिसमें छत्तीसगढ़ के साथ-साथ ओडिशा, झारखंड और मध्यप्रदेश से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।पूरे कार्यक्रम का संचालन धर्म संस्थापक परम पूज्य स्वामी धनपति पण्डा जी महाराज (गुरुधाम मुंडियापानी, लैलूंगा, रायगढ़) के आशीर्वाद में किया जा रहा है।श्रीमती कौशल्या साय ने जानकारी देते हुए बताया कि चैत्र नवरात्रि में यह महायज्ञ वर्ष 1993 से निरंतर आयोजित किया जा रहा है, जो क्षेत्र की आस्था और परंपरा का प्रतीक बन चुका है।चार दिनों तक चलने वाले इस धार्मिक आयोजन में भक्ति संगीत, कथा-प्रवचन और विविध धार्मिक अनुष्ठानों से बगिया पूरी तरह भक्तिमय वातावरण में सराबोर रहेगा।

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अंत्योदय का संकल्प: 5 लाख भूमिहीन परिवारों को 500 करोड़ की सौगात देंगे सीएम विष्णुदेव साय,25 मार्च को होगा भव्य कार्यक्रम।

 

 

छत्तीसगढ़ सरकार भूमिहीन कृषि मजदूरों के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय 25 मार्च 2026 को बलौदाबाजार में आयोजित भव्य कार्यक्रम में करीब 5 लाख भूमिहीन परिवारों को लगभग 500 करोड़ रुपये की राशि अंतरित करेंगे।

यह सहायता ‘दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना’ के अंतर्गत दी जाएगी, जिसके तहत इस वर्ष 4,95,965 हितग्राहियों को प्रति व्यक्ति 10,000 रुपये सीधे उनके बैंक खातों में भेजे जाएंगे। इसके लिए सरकार ने 495 करोड़ 96 लाख 50 हजार रुपये का प्रावधान किया है।

इस योजना का लाभ 22,028 बैगा और गुनिया परिवारों को भी मिलेगा, जो राज्य की पारंपरिक और सांस्कृतिक विरासत के महत्वपूर्ण संरक्षक माने जाते हैं।

गौरतलब है कि वर्ष 2025 में भी इस योजना के तहत 5,62,112 हितग्राहियों को 562 करोड़ 11 लाख 20 हजार रुपये वितरित किए गए थे, जो सरकार की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

सरकार का उद्देश्य भूमिहीन मजदूर परिवारों को सालाना आर्थिक सहायता देकर उनकी बुनियादी जरूरतों—जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य और दैनिक खर्च—को पूरा करने में मदद करना है। पहले दी जाने वाली 7,000 रुपये की राशि को बढ़ाकर अब 10,000 रुपये प्रति वर्ष कर दिया गया है।

यह योजना न केवल आर्थिक सहयोग का माध्यम है, बल्कि ‘अंत्योदय’ के संकल्प को साकार करते हुए समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाने का प्रयास भी है।

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तिलहन उत्पादन बढ़ाने पर जोर, मुख्यमंत्री साय ने किसान मेले का किया शुभारंभ।

 

 

 

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सरगुजा जिले के अंबिकापुर स्थित राजमोहिनी देवी कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केन्द्र में दो दिवसीय राज्य स्तरीय तिलहन किसान मेले का शुभारंभ किया। इस दौरान उन्होंने विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टॉलों का अवलोकन कर किसानों को दी जा रही आधुनिक कृषि तकनीकों और तिलहन उत्पादन बढ़ाने के प्रयासों की सराहना की।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने विश्व वानिकी दिवस के अवसर पर “एक पेड़ मां के नाम” अभियान के तहत साल का पौधा रोपित किया और पर्यावरण संरक्षण के लिए अधिक से अधिक पौधारोपण करने की अपील की।

अपने संबोधन में मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ कृषि प्रधान राज्य है, जहां लगभग 80 प्रतिशत आबादी कृषि पर निर्भर है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार किसानों से 21 क्विंटल प्रति एकड़ की दर से 3100 रुपए में धान खरीदी कर रही है और अंतर की राशि का भुगतान एकमुश्त किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों से किए हर वादे को पूरा कर रही है।

मुख्यमंत्री ने तिलहन उत्पादन बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि देश वर्तमान में अपनी जरूरत का केवल 57 प्रतिशत तिलहन ही उत्पादन कर पा रहा है, जबकि 43 प्रतिशत आयात करना पड़ता है। इस कमी को दूर करने के लिए राज्य में तिलहन विकास परियोजनाएं संचालित की जा रही हैं। उन्होंने किसानों से वैज्ञानिकों के सुझाव अपनाकर उत्पादन बढ़ाने की अपील की। साथ ही तिलहन फसलों के लिए प्रति एकड़ 11 हजार रुपए प्रोत्साहन राशि देने की जानकारी भी दी।

उन्होंने किसानों को आय बढ़ाने के लिए पशुपालन, दुग्ध उत्पादन और मत्स्य पालन जैसे सहायक व्यवसाय अपनाने की सलाह दी। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि जीएसटी में सुधार के बाद कृषि यंत्रों की कीमतों में कमी आई है, जिससे किसानों को लाभ मिल रहा है।

इस अवसर पर कृषि मंत्री राम विचार नेताम ने नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत के आह्वान का उल्लेख करते हुए दलहन एवं तिलहन उत्पादन बढ़ाने पर जोर दिया।

कार्यक्रम में इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल ने बताया कि राज्य में किसानों को उन्नत बीज उपलब्ध कराए जा रहे हैं तथा कृषि महाविद्यालयों और कृषि विज्ञान केंद्रों के माध्यम से हर वर्ष हजारों किसानों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

कार्यक्रम में जनप्रतिनिधि, अधिकारी एवं बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।

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ग्रामीण विकास की नई दिशा: ‘VB-G-RAM-G’ से बदलेगा भारत का भविष्य गणेश शंकर मिश्रा।

 

 

भारत सरकार के पत्र सूचना कार्यालय (PIB), रायपुर द्वारा कवर्धा में ‘विबी-जी-राम-जी (VB-G-RAM-G): ग्रामीण भारत का परिवर्तनकारी बदलाव’ विषय पर एक दिवसीय ‘वार्तालाप’ (मीडिया कार्यशाला) का आयोजन किया गया।कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में गणेश शंकर मिश्रा (उपाध्यक्ष, छत्तीसगढ़ राज्य नीति आयोग) तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में गोपाल वर्मा (कलेक्टर, कबीरधाम) उपस्थित रहे।

मुख्य अतिथि श्री मिश्रा ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि ‘VB-G-RAM-G’ केवल रोजगार देने की योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत के संपूर्ण आजीविका तंत्र को मजबूत करने वाली एक परिवर्तनकारी पहल है। उन्होंने बताया कि योजना में 60 दिनों का विशेष ‘ब्लॉक’ रखा गया है, ताकि कृषि कार्यों विशेषकर फसल कटाई के दौरान किसानों की आजीविका प्रभावित न हो।

उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि भारत की लगभग 73% आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करती है, ऐसे में यह योजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने में अहम भूमिका निभाएगी। श्री मिश्रा ने इसे विकसित भारत 2047 के विजन को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया और नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना की।

कार्यक्रम के दौरान कलेक्टर गोपाल वर्मा ने योजना के क्रियान्वयन की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि इस योजना के तहत ग्रामीण परिवारों को 125 दिनों का गारंटीकृत रोजगार प्रदान किया जाएगा, जिससे उनकी आय और जीवन स्तर में सुधार होगा।

यह कार्यशाला मीडिया प्रतिनिधियों के लिए योजना की समझ बढ़ाने और उसके प्रभावी प्रचार-प्रसार के उद्देश्य से आयोजित की गई थी, ताकि अधिक से अधिक ग्रामीण परिवार इसका लाभ उठा सकें।

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