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बस्तर में मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना में 17 जोड़े बंधे परिणय सूत्र में विधायक किरण सिंह देव ने नव विवाहितों को दिया आशीर्वाद
मुख्यमंत्री कन्या विवाह' राज्य सरकार द्वारा चलाई जाने वाली एक कल्याणकारी योजना है, जिसका मुख्य उद्देश्य गरीब, निराश्रित, और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बेटियों की शादी के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करना है। यह योजना मुख्य रूप से सामूहिक विवाह के माध्यम से सम्पन्न होती है, जिससे गरीब परिवारों पर विवाह का भारी आर्थिक बोझ कम हो सके और फिजूलखर्ची पर रोक लगे।
जगदलपुर स्थित पंडित श्यामा प्रसाद मुखर्जी सभागार (टाउन हॉल) में सोमवार को मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत एक भव्य और गरिमामय सामूहिक विवाह समारोह का आयोजन किया गया। इस पावन अवसर पर मंत्रोच्चार और शहनाई की गूंज के बीच कुल 17 जोड़े सदा-सदा के लिए एक-दूसरे के साथ दाम्पत्य सूत्र में बंध गए। समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित जगदलपुर विधायक श्री किरण सिंह देव ने नवविवाहित जोड़ों के ऊपर अक्षत और पुष्प वर्षा कर उन्हें सुखी और समृद्ध दांपत्य जीवन का आशीर्वाद दिया।
*दो पुनर्वासित जोड़ों ने भी गृहस्थ जीवन को अपनाया*
इस विवाह समारोह की सबसे अनूठी और गौरवशाली विशेषता यह रही कि इसमें पुनर्वासित 2 विशेष जोड़े भी शामिल हुए। नारायणपुर जिले में आत्मसमर्पण करने वाले इन पूर्व नक्सली दंपत्तियों में पिलसाय सलाम संग सिरबत्ती और पतिराम संग मनाय कश्यप शामिल हैं, जिन्होंने गृहस्थ जीवन अपनाकर समाज की मुख्यधारा में आगे बढ़ने का संकल्प लिया। विधायक श्री किरण सिंह देव ने इन जोड़ों की सराहना करते हुए कहा कि राज्य सरकार की पुनर्वास नीति के तहत ऐसे कदमों से बस्तर में शांति और खुशहाली के एक नए युग की शुरुआत हो रही है।
*बेटियों का सम्मानपूर्ण विवाह समाज का सबसे पुनीत कार्य*
विवाह समारोह को संबोधित करते हुए जगदलपुर विधायक श्री किरण सिंह देव ने मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना की महत्ता पर प्रकाश डाला और कहा कि बेटियो का विवाह सबसे महत्वपूर्ण कार्य होता है। हमारी संवेदनशील सरकार के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय एवं महिला बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी रजवाड़े जी के नेतृत्व में पूरे प्रदेश में सामूहिक कन्या विवाह योजना के तहत विवाह हो रहा है। इस योजना के माध्यम से गरीब और जरूरतमंद परिवारों की बेटियों का सम्मानपूर्ण विवाह कराना समाज का सबसे पुनीत कार्य है, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को बड़ी राहत मिलती है।
*आर्थिक बोझ कम कर समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंच रहा लाभ*
विधायक श्री देव ने कहा कि आज विवाह के बंधन में बंधे सभी 17 जोड़े एक सशक्त समाज और समृद्ध राष्ट्र के निर्माण में अपनी सहभागिता देंगे। इसके साथ ही यह योजना गरीब बेटियों के विवाह में होने वाले आर्थिक बोझ को कम कर समाज के अंतिम व्यक्ति तक लाभ पहुंचा रही है। उन्होंने कहा कि विगत दिनों प्रदेश के विधायक बेमेतरा ने मुख्यमंत्री सामूहिक कन्या विवाह योजना में विवाह कर सभी को इस योजना का लाभ लेने के लिए प्रेरणा दी।
इस कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष श्री रूपसिंह मंडावी, नगर निगम सभापति श्री खेमसिंह देवांगन, जनपद अध्यक्ष श्री पदलाम नाग, उपाध्यक्ष श्री पुरुषोत्तम कश्यप, पुलिस अधीक्षक श्री शलभ सिन्हा सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि, नवविवाहित जोड़ों के परिजन तथा बड़ी संख्या में प्रबुद्ध नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने वर-वधू को उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।
सीएम साय के प्रयासों से जशपुर को मिली ऐतिहासिक सौगात।
जशपुर जिले के विकास इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया है। भारत सरकार के रेल मंत्रालय द्वारा धरमजयगढ़–पत्थलगांव–लोहरदगा नई रेल लाइन परियोजना को विशेष रेल परियोजना के रूप में अधिसूचित कर दिया गया है। इसके साथ ही पहली बार जशपुर जिले को रेल नेटवर्क से जोड़ने का मार्ग प्रशस्त हो गया है।
करीब 291.881 किलोमीटर लंबी यह रेल लाइन रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ से प्रारंभ होकर जशपुर जिले के पत्थलगांव होते हुए झारखंड के लोहरदगा तक विकसित की जाएगी। अधिसूचना जारी होने के साथ ही यह परियोजना प्रभावशील हो गई है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के विशेष प्रयासों और प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देशभर में विकसित की जा रही आधुनिक आधारभूत संरचना के तहत लंबे समय से क्षेत्रवासियों की बहुप्रतीक्षित मांग को बड़ी सफलता मिली है। दशकों से रेल सुविधा की प्रतीक्षा कर रहे जशपुरवासियों के लिए यह उपलब्धि किसी ऐतिहासिक सौगात से कम नहीं है।
नई रेल लाइन से जिले की कनेक्टिविटी में व्यापक सुधार होगा। किसानों, व्यापारियों, विद्यार्थियों और रोजगार की तलाश में बाहर जाने वाले युवाओं को आवागमन की बेहतर सुविधा मिलेगी। वहीं कृषि एवं उद्यानिकी उत्पादों को राष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने में भी आसानी होगी, जिससे किसानों की आय बढ़ने की संभावना है।
परियोजना से पर्यटन गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी। जशपुर के प्राकृतिक एवं धार्मिक पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान होने से स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। साथ ही शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं तक लोगों की पहुंच भी पहले की अपेक्षा अधिक सुगम हो सकेगी।
परियोजना की अधिसूचना जारी होने के बाद जशपुर सहित पूरे क्षेत्र में खुशी का माहौल है। लोगों का मानना है कि यह रेल लाइन क्षेत्र के समग्र सामाजिक और आर्थिक विकास की मजबूत आधारशिला साबित होगी।
प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने जशपुर को दी बड़ी सौगात, वशिष्ठ कम्युनिटी हॉल का 80 लाख रुपए की लागत से होगा जीर्णोद्धार.....।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की घोषणा पर अमल करते हुए जशपुर नगरवासियों को एक बड़ी सौगात मिली है। छत्तीसगढ़ शासन द्वारा नगर पालिका परिषद जशपुरनगर के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2026-27 में अधोसंरचना मद से 80 लाख रुपये की तकनीकी स्वीकृति प्रदान की गई है।इस स्वीकृति के तहत वशिष्ठ कम्युनिटी हॉल, जशपुरनगर के जीर्णोद्धार कार्य के लिए 80 लाख रुपये की राशि मंजूर की गई है। लंबे समय से हॉल के उन्नयन की मांग की जा रही थी, जिसे मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने गंभीरता से लेते हुए अपनी घोषणा के अनुरूप स्वीकृति दी है।
इस कार्य के पूर्ण होने से सामाजिक, सांस्कृतिक एवं सामुदायिक कार्यक्रमों के आयोजन के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी तथा नगरवासियों को आधुनिक और सुसज्जित कम्युनिटी हॉल का लाभ मिलेगा।
सुशासन तिहार 2026 के तहत बालोद और मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिलों की विस्तृत समीक्षा
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में सुशासन तिहार 2026 के अंतर्गत बालोद तथा मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिलों में संचालित विकास कार्यों और जनकल्याणकारी योजनाओं की व्यापक समीक्षा की। समीक्षा बैठक में कलेक्टरों, पुलिस अधीक्षकों तथा वरिष्ठ अधिकारियों के साथ राजस्व प्रकरणों, ग्रामीण एवं शहरी विकास, कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, कानून-व्यवस्था तथा विभिन्न विभागीय योजनाओं की प्रगति का विस्तृत आकलन किया गया।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि सुशासन तिहार केवल एक प्रशासनिक अभियान नहीं, बल्कि शासन और जनता के बीच विश्वास को मजबूत करने का माध्यम है। उन्होंने बताया कि इस अभियान के अंतर्गत उन्होंने जनसमस्या निवारण शिविरों और चौपालों के माध्यम से सीधे लोगों से संवाद किया, उनकी समस्याओं को सुना और योजनाओं के क्रियान्वयन की वास्तविक स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने कहा कि भीषण गर्मी के बावजूद प्रशासनिक अमले ने आमजन की समस्याओं के समाधान के लिए समर्पित भाव से कार्य किया है और इस प्रतिबद्धता को आगे भी बनाए रखना होगा।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सुशासन का वास्तविक उद्देश्य नागरिकों की समस्याओं का समयबद्ध, पारदर्शी और संवेदनशील समाधान सुनिश्चित करना है। उन्होंने अधिकारियों को सकारात्मक सोच, जवाबदेही और जनसेवा की भावना के साथ कार्य करने के निर्देश देते हुए कहा कि शासन की किसी भी योजना का पात्र हितग्राही लाभ से वंचित नहीं रहना चाहिए।
*राजस्व प्रकरणों के त्वरित निराकरण और स्वामित्व योजना पर जोर*
मुख्यमंत्री श्री साय ने दोनों जिलों में लंबित राजस्व प्रकरणों की समीक्षा करते हुए नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन तथा नक्शा सुधार से संबंधित मामलों के शीघ्र निराकरण के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि पुराने लंबित मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाया जाए, ताकि नागरिकों को अनावश्यक परेशानियों का सामना न करना पड़े। मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री स्वामित्व योजना तथा राजस्व अभिलेखों के अद्यतन कार्यों में तेजी लाने के भी निर्देश दिए।
*प्रधानमंत्री आवास और पीएम सूर्यघर योजना को मिशन मोड में आगे बढ़ाने के निर्देश*
प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण एवं शहरी) की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्षा ऋतु प्रारंभ होने से पहले अधिकतम स्वीकृत आवासों का निर्माण पूर्ण किया जाए, ताकि हितग्राहियों को शीघ्र लाभ मिल सके। उन्होंने कहा कि आवास निर्माण कार्यों को गति देने के लिए अधिक से अधिक कारीगरों को मेसन प्रशिक्षण प्रदान किया जाए, जिससे भविष्य की आवश्यकताओं की पूर्ति भी सुनिश्चित हो सके।
प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2027 तक प्रदेश में पांच लाख सौर संयंत्र स्थापित करने का लक्ष्य प्राप्त करना है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाकर अधिक से अधिक परिवारों को इस योजना से जोड़ा जाए तथा योजना से मिलने वाले आर्थिक और ऊर्जा संबंधी लाभों की जानकारी लोगों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाई जाए।
*किसानों को खाद-बीज की कमी न हो, नैनो उर्वरकों के उपयोग को बढ़ावा दें*
मुख्यमंत्री श्री साय ने खरीफ सीजन की तैयारियों की समीक्षा करते हुए कहा कि किसानों को खाद एवं बीज की उपलब्धता में किसी प्रकार की कमी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि नैनो यूरिया और नैनो डीएपी के उपयोग के संबंध में किसानों को जागरूक किया जाए तथा इसके लाभों की जानकारी गांव-गांव तक पहुंचाई जाए।
मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के सभी पात्र किसानों को योजना से लाभान्वित करने और एग्रीस्टैक पंजीयन कार्य को प्राथमिकता के आधार पर पूर्ण करने के निर्देश दिए। धान उपार्जन और धान उठाव की समीक्षा करते हुए उन्होंने समयबद्ध उठाव सुनिश्चित करने तथा स्थानीय स्तर पर राइस मिलों की स्थापना के लिए उद्योग विभाग के साथ समन्वय स्थापित कर आवश्यक पहल करने को कहा।
*महिला सशक्तिकरण, आजीविका और कुपोषण उन्मूलन पर विशेष फोकस*
बिहान योजना की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने महिला स्व-सहायता समूहों की आर्थिक गतिविधियों को और अधिक सशक्त बनाने पर बल दिया। उन्होंने रेडी-टू-ईट खाद्य सामग्री निर्माण में महिला समूहों की भागीदारी बढ़ाने तथा दोनों जिलों में इस कार्य को प्रारंभ करने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने आंगनबाड़ी केन्द्रों की स्थिति, कुपोषित बच्चों की संख्या और सुपोषण अभियान की प्रगति की समीक्षा करते हुए कुपोषण उन्मूलन के लिए संचालित योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन तथा सतत निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
समीक्षा के दौरान जानकारी दी गई कि मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले में 20 हजार 245 तथा बालोद जिले में 36 हजार 312 लखपति दीदी तैयार हो चुकी हैं। इसके अलावा औराटोला को लखपति ग्राम के रूप में विकसित किया गया है, जो महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण आजीविका संवर्धन का प्रेरक उदाहरण बनकर उभरा है।
*स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर बरसात पूर्व तैयारी सुनिश्चित करने के निर्देश*
मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य विभाग को निर्देशित किया कि वर्षा ऋतु के दौरान संभावित मौसमी बीमारियों की रोकथाम के लिए अग्रिम तैयारी सुनिश्चित की जाए। उन्होंने प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों और जिला अस्पतालों में आवश्यक दवाओं की उपलब्धता बनाए रखने पर विशेष जोर दिया।
उन्होंने टीबी मुक्त पंचायत अभियान, संस्थागत प्रसव तथा विभिन्न जनस्वास्थ्य कार्यक्रमों की भी समीक्षा की। बालोद जिले में डॉग बाइट की बढ़ती घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री ने आवश्यक रोकथाम, जागरूकता और उपचार संबंधी व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
*पेयजल, सड़क और डिजिटल सेवाओं की प्रगति की समीक्षा*
जल जीवन मिशन के अंतर्गत पेयजल आपूर्ति की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने गर्मी और आगामी वर्षा ऋतु के दौरान निर्बाध पेयजल उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की समीक्षा के दौरान अधिकारियों ने बताया कि मोहला-मानपुर क्षेत्र में स्वीकृत 60 किलोमीटर सड़क निर्माण में से 50 किलोमीटर कार्य पूर्ण किया जा चुका है तथा शेष 10 किलोमीटर सड़क का निर्माण कार्य शीघ्र पूरा कर लिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने ऐसे मार्गों की भी समीक्षा की जो वर्षा ऋतु में आवागमन के लिए कठिन हो जाते हैं और उन्हें बारिश से पहले दुरुस्त करने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ई-ऑफिस, ई-डिस्ट्रिक्ट और अटल डिजिटल सेवा केन्द्रों के माध्यम से नागरिक सेवाओं को अधिक सरल और प्रभावी बनाया गया है। उन्होंने बताया कि आने वाले समय में सेवा सेतु पोर्टल में और अधिक सेवाओं को जोड़ा जाएगा, जिससे ऑनलाइन सेवाओं का दायरा बढ़ेगा और नागरिकों को घर बैठे सुविधाओं का लाभ मिलेगा। उन्होंने अधिकारियों को इसके प्रभावी क्रियान्वयन और सतत निगरानी के निर्देश दिए।
*शिक्षा की गुणवत्ता, कानून-व्यवस्था और सड़क सुरक्षा पर विशेष बल*
मुख्यमंत्री ने पीएम श्री स्कूलों तथा शिक्षा की गुणवत्ता से जुड़े प्रयासों की समीक्षा करते हुए विद्यार्थियों के सीखने के स्तर में सुधार के लिए सतत निगरानी, नवाचार आधारित शिक्षण और परिणामोन्मुखी कार्यप्रणाली अपनाने पर बल दिया।
पुलिस विभाग की समीक्षा के दौरान नए तीन आपराधिक कानूनों के क्रियान्वयन, कानून-व्यवस्था की स्थिति तथा सड़क सुरक्षा संबंधी उपायों की जानकारी ली गई। समीक्षा में बताया गया कि बालोद जिले में सड़क दुर्घटनाओं और उनसे होने वाली मृत्यु दर में कमी दर्ज की गई है।
मुख्यमंत्री ने सड़क सुरक्षा के प्रति व्यापक जनजागरूकता अभियान जारी रखने के निर्देश देते हुए कहा कि हेलमेट पहनने तथा अन्य सुरक्षा मानकों का पालन करने के लिए लोगों को प्रेरित किया जाए।
बैठक में तेंदूपत्ता संग्रहण, खनिज राजस्व प्राप्ति, डीजल, पेट्रोल एवं एलपीजी की उपलब्धता सहित विभिन्न विषयों पर भी चर्चा की गई। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि शासन की सभी जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना प्रशासन की सर्वोच्च जिम्मेदारी है और इसी भावना के साथ सभी अधिकारियों को कार्य करना होगा।
बैठक में मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव श्री राहुल भगत, मुख्यमंत्री के विशेष सचिव श्री रजत बंसल, मुख्यमंत्री के संयुक्त सचिव श्री प्रभात मलिक, दुर्ग संभाग के कमिश्नर श्री एस.एन. राठौर, दुर्ग एवं राजनांदगांव रेंज के आईजी, बालोद तथा मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले के कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक सहित वरिष्ठ अधिकारी वर्चुअल माध्यम से उपस्थित थे।
जंगल के बीच क्रिकेट का मैदान और उप मुख्यमंत्री अरुण साव के हाथ में बैट बदलते बस्तर की खुशनुमा तस्वीर
सुकमा के जंगलों के बीच मैदान में युवाओं को क्रिकेट खेलते देख उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव खुद को रोक न सके। उन्होंने गाड़ी रुकवाई, खिलाड़ियों के बीच मैदान में पहुंचे और क्रीज पर जाकर बैट थाम लिया। टूर्नामेंट खेल रहे कुशल गेंदबाजों की गेंदों पर कुछ करारे शॉट भी लगाए। यह बदलते बस्तर की खुशनुमा तस्वीर है।
किरंदुल से सुकमा के रास्ते का यह मुनगा गांव था जहां श्री साव ने मैदान में बल्ला भांजा। सुकमा जिले के ग्राम पंचायत कोर्रा का आश्रित गांव है यह। मैदान पर खेलने के लिए जुटे युवाओं से पता चला कि यहां 7 जून से क्रिकेट टूर्नामेंट चल रहा है जिसमें आसपास के गांवों की 16 टीमों ने भाग लिया है। मैदान के एक छोर पर खिलाड़ियों का झुंड तो दूसरे छोर पर दर्शकों का झुंड था।
उप मुख्यमंत्री श्री साव ने कुछ गेंदे खेलने के बाद पिच पर ही खिलाड़ियों से अपने सहज-सरल अंदाज में बातचीत शुरू की, जिससे इस टूर्नामेंट की जानकारी मिली। उन्होंने खिलाड़ियों के मांगे बिना ही सभी 16 टीमों को क्रिकेट किट देने का वादा किया, जिससे वे पूरे साजो-सामान के साथ अपने खेल का आनंद ले सकें। श्री साव से चर्चा के बीच खिलाड़ियों ने खेल मैदान की कमी की बात रखी, जिस पर उन्होंने कलेक्टर को निर्देशित कर समुचित व्यवस्था का आश्वासन दिया।
उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव इन दिनों चार दिनों के बस्तर प्रवास पर हैं। वे रोज दिनभर निर्माण कार्यों और विकास योजनाओं का निरीक्षण कर रहे हैं। साथ ही अधिकारियों की बैठक लेकर इनकी प्रगति की समीक्षा भी कर रहे हैं। बस्तर संभाग के प्रगतिरत काम जल्दी कैसे पूरे हों... अप्रारंभ कार्यों को तत्काल शुरू कर कैसे तेजी से अंजाम तक पहुंचाएं, इन पर बैठकों में मंथन भी कर रहे हैं।
उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव का बस्तर में निर्माण कार्यों का निरीक्षण जारी।
उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने अपने बस्तर प्रवास के चौथे दिन आज सुकमा में मिशन अमृत 2.0 के अंतर्गत शहर में पेयजल आपूर्ति की व्यवस्था को मजबूत करने बनाए जा रहे वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के कार्यों का निरीक्षण किया। उन्होंने योजना के तहत शबरी नदी पर निर्माणाधीन इंटेक-वेल के कार्यों को भी देखा। उन्होंने पानी टंकी और पाइपलाइन विस्तार के कार्यों को भी तेजी से पूर्ण करते हुए जनवरी-2027 से मिशन अमृत की इस योजना से सुकमा में जल की आपूर्ति प्रारंभ करने के निर्देश दिए।
केंद्र सरकार की मिशन अमृत 2.0 के तहत नगर पालिका द्वारा 86 करोड़ की लागत से सुकमा शहर की पेयजल व्यवस्था का सुदृढ़ीकरण किया जा रहा है। इसका 54 प्रतिशत काम पूरा कर लिया गया है। उप मुख्यमंत्री श्री साव ने नगरीय प्रशासन विभाग के अधिकारियों से कहा कि सुकमा की आगामी 25 वर्षों की जरूरत को ध्यान में रखकर इसका निर्माण किया जा रहा है। निर्माण और निर्माण सामग्री की गुणवत्ता से किसी प्रकार का समझौता नहीं करना है। काम में तेजी बरकरार रखते हुए नियत समय में इसे पूर्ण करना है।
उप मुख्यमंत्री श्री साव ने लोक निर्माण विभाग द्वारा सुकमा के कुम्हाररास में 11 करोड़ 62 लाख रुपए की लागत से बनाए जा रहे स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स का भी निरीक्षण किया। उन्होंने कार्यों में तेजी लाते हुए अधिकारियों और निर्माण एजेंसी से दिसम्बर तक इसे पूर्ण करने को कहा।
करीब 10 एकड़ में बन रहे स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में फुटबॉल मैदान, एथलेटिक्स ट्रैक, इंडोर बैडमिंटन कोर्ट, प्रशासनिक भवन, बॉक्स-क्रिकेट, स्वीमिंग-पूल जैसी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। इसके निर्माण से सुकमा की खेल प्रतिभाओं को अपने कौशल को निखारने एक सर्वसुविधायुक्त अधोसंरचना और सुविधाएं मिलेंगी। अब तक इसका 50 प्रतिशत काम पूरा हो गया है। तीनों कार्यों के निरीक्षण के दौरान कलेक्टर श्री अमित कुमार भी उप मुख्यमंत्री के साथ थे।
राज्यपाल श्री रमेन डेका ने रेत के वैज्ञानिक एवं व्यवस्थित खनन पर दिया जोर।
राज्यपाल श्री रमेन डेका ने छत्तीसगढ़ की नदियों और बड़े नालों में रेत खनन की गतिविधियों को वैज्ञानिक, संतुलित और व्यवस्थित ढंग से संचालित किए जाने की आवश्यकता पर बल दिया है। उन्होंने कहा कि रेत राज्य के विकास और आधारभूत संरचना निर्माण के लिए महत्वपूर्ण संसाधन है, इसलिए इसके उपयोग और संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है, क्योंकि इनके अनियंत्रित दोहन से पर्यावरण और जल संसाधनों पर गंभीर दुष्प्रभाव पड़ने की संभावना बनी रहती है।
लोक भवन में आज राज्यपाल ने खनिज विभाग के सचिव पी. दयानंद से इस विषय पर चर्चा की और आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि रेत खनन निर्धारित नियमों एवं वैज्ञानिक मानकों के अनुरूप किया जाना चाहिए, ताकि पर्यावरण संरक्षण और विकास दोनों उद्देश्यों को समान रूप से साधा जा सके। राज्यपाल ने राज्य में चल रहे ड्रोन आधारित निगरानी और खनिज 2.0 पोर्टल के माध्यम से मॉनिटरिंग की जानकारी लेते हुए इसकी सराहना की।
राज्यपाल ने कहा कि नदियों और बड़े नालों की प्राकृतिक संरचना तथा जलधारण क्षमता को सुरक्षित रखना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि अनियोजित खनन गतिविधियों से नदी तटों, भू-जल स्तर और स्थानीय पारिस्थितिकी पर प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए खनन कार्यों की नियमित निगरानी और अवैध खनन पर प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि नदियों एवं जलस्रोतों की क्षमता बढ़ाने तथा भू-जल संरक्षण के लिए दीर्घकालिक और समन्वित प्रयास किए जाने की आवश्यकता है।
राज्यपाल ने निर्देश दिए कि रेत खनन से संबंधित क्षेत्रों का वैज्ञानिक अध्ययन कराया जाए। उन्होंने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) जैसे विशेषज्ञ संस्थानों से सर्वे और तकनीकी अध्ययन कराया जा सकता है, ताकि खनन गतिविधियों के प्रभावों का आकलन कर बेहतर प्रबंधन की दिशा में कदम उठाए जा सकें।
राज्यपाल डेका ने कहा कि रेत जैसे खनिज संसाधनों का उपयोग राज्य के विकास के लिए आवश्यक है, लेकिन इसके साथ प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को भी प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
आजादी के 78 साल बाद रोशन होंगे दूरस्थ मजराटोले, सुशासन तिहार में जिले को मिली बड़ी सौगात।
'सुशासन तिहार-2026' के अवसर पर खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि सामने आई है। जिला प्रशासन और विद्युत विभाग के समन्वित प्रयासों से जिले के 10 दूरस्थ एवं अब तक विद्युत सुविधा से वंचित मजराटोलों के विद्युतीकरण के लिए प्रशासनिक स्वीकृति प्राप्त हो गई है। निविदा प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद इन क्षेत्रों में इसी सत्र के दौरान तेजी से विद्युतीकरण कार्य प्रारंभ कर पूर्ण किया जाएगा।
आजादी के 78 वर्षों बाद जिले के ऐसे दूरस्थ वनांचल एवं ग्रामीण क्षेत्रों में पहली बार बिजली पहुंचने का मार्ग प्रशस्त हुआ है, जहां अब तक अंधेरा ही ग्रामीणों की नियति बना हुआ था। मुख्यमंत्री मजराटोला विद्युतीकरण योजना के तहत निजामडीह, तुम्दादाह, बलरामपुर, कोहकझोरी, संजारी-टाटीघाट, झिलमिली एवं गाताभर्री, घाघरा, लमरा, रिहाडबरा तथा टिनगीपुर जैसे गांवों के मजराटोलों में विद्युत नेटवर्क का विस्तार किया जाएगा।
*ग्रामीण विकास की नई रोशनी, शिक्षा-स्वास्थ्य और आजीविका को मिलेगा बल*
विद्युतीकरण से न केवल घरों में रोशनी पहुंचेगी, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, कृषि और आजीविका के क्षेत्र में भी सकारात्मक बदलाव आएगा। बिजली उपलब्ध होने से बच्चों की पढ़ाई, किसानों की सुविधाएं, छोटे व्यवसाय और शासकीय सेवाओं की पहुंच में उल्लेखनीय सुधार होगा। लंबे समय से बिजली की मांग कर रहे ग्रामीणों के लिए यह निर्णय किसी सपने के साकार होने से कम नहीं है।
*कलेक्टर और विद्युत विभाग के प्रयासों से मिली सफलता*
इस महत्वपूर्ण उपलब्धि के पीछे कलेक्टर श्री इंद्रजीत चन्द्रवाल तथा विद्युत वितरण कंपनी के प्रबंध निदेशक श्री भीम सिंह का विशेष मार्गदर्शन और सतत प्रयास रहा है। उनके नेतृत्व में विभागीय प्रक्रियाओं को गति मिली और वर्षों से लंबित विद्युतीकरण प्रस्तावों को स्वीकृति दिलाने में सफलता प्राप्त हुई।
सुशासन तिहार के दौरान मिली यह सौगात जिले के दूरस्थ ग्रामीण अंचलों के विकास में मील का पत्थर साबित होगी। आने वाले समय में इन मजराटोलों में जगमगाती रोशनी के साथ विकास की नई किरण भी पहुंचेगी, जिससे ग्रामीणों के जीवन में व्यापक बदलाव देखने को मिलेगा।
जशपुर इचकेला में आयोजित वुमेन टी-20 क्रिकेट चैंपियनशिप 2026 का सफल समापन रांची की जीडी गोयंका अकादमी बनी विजेता, महारानी क्रिकेट क्लब जशपुर उपविजेता
जिले के ग्राम इचकेला में 28 मई से 1 जून 2026 तक आयोजित वुमेन टी-20 क्रिकेट चैंपियनशिप 2026 का रोमांचक समापन हुआ। महिला क्रिकेट को प्रोत्साहित करने और उभरती प्रतिभाओं को मंच प्रदान करने के उद्देश्य से आयोजित इस प्रतियोगिता में कुल पांच टीमों ने भाग लिया।
फाइनल मुकाबले में जीडी गोयंका अकादमी रांची ने शानदार प्रदर्शन करते हुए महारानी क्रिकेट क्लब जशपुर को पराजित कर चैंपियनशिप का खिताब अपने नाम किया। विजेता टीम को प्रथम पुरस्कार के रूप में 31 हजार रुपये की नगद राशि प्रदान की गई। वहीं उपविजेता महारानी क्रिकेट क्लब जशपुर को 15 हजार रुपये तथा तीसरे स्थान पर रही रायगढ़ जिंदल क्रिकेट अकादमी (जेसीए) को 11 हजार रुपये की पुरस्कार राशि दी गई। फाइनल मुकाबले में प्रिया को उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ चुना गया।
पूरे टूर्नामेंट में कई खिलाड़ियों ने अपनी प्रतिभा से दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। पहले राउंड में जीडी गोयंका अकादमी रांची के खिलाफ मुकाबले में महारानी क्रिकेट क्लब जशपुर की खिलाड़ी आकांक्षा रानी ने शानदार बल्लेबाजी का प्रदर्शन करते हुए 41 गेंदों में 88 रन की विस्फोटक पारी खेली। इसके अलावा स्टार-11 जशपुर के विरुद्ध भी उन्होंने मात्र 32 गेंदों में 88 रन बनाकर अपनी बल्लेबाजी क्षमता का परिचय दिया। पूरे टूर्नामेंट में आकांक्षा रानी ने 10 छक्के और 27 चौके लगाए। वहीं मात्र 11 वर्षीय आस्था रानी ने अपनी गेंदबाजी से सभी को प्रभावित किया।
उन्होंने एक मुकाबले में लगातार चार गेंदों पर चार विकेट लेकर शानदार उपलब्धि हासिल की। उस मैच में उन्होंने कुल सात विकेट अपने नाम किए और अपनी प्रतिभा का बेहतरीन प्रदर्शन किया। प्रतियोगिता में जीडी गोयंका अकादमी रांची, अंबिकापुर क्रिकेट टीम, रायगढ़ जिंदल क्रिकेट अकादमी, महारानी क्रिकेट क्लब जशपुर तथा स्टार-11 जशपुर की टीमों ने हिस्सा लिया। प्रतियोगिता के दौरान बड़ी संख्या में उपस्थित दर्शकों ने रोमांचक मुकाबलों का आनंद लिया तथा आयोजन को महिला क्रिकेट और ग्रामीण क्षेत्र की प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने की सराहनीय पहल बताया।
विकास, विश्वास और सुशासन का सेतु बना कोण्डापल्ली का बेली ब्रिज मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने किया निरीक्षण, कहा - दूरस्थ क्षेत्रों तक विकास पहुंचाना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता।
जहां कभी दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियां विकास की राह में चुनौती बनती थीं, वहां आज आधुनिक अधोसंरचना नए अवसरों के द्वार खोल रही है।
प्रदेशव्यापी सुशासन तिहार के अंतर्गत मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज बीजापुर जिले के सुदूर वनांचल क्षेत्र स्थित ग्राम कोण्डापल्ली पहुंचकर बीजापुर-पूवर्ती मार्ग पर निर्मित बेली ब्रिज का निरीक्षण किया। उन्होंने पुल की निर्माण तकनीक, उपयोगिता और क्षेत्र के विकास में उसकी भूमिका की जानकारी लेते हुए इसे बदलते बस्तर की नई तस्वीर का प्रतीक बताया।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सड़क, पुल और अन्य आधारभूत सुविधाएं केवल निर्माण कार्य नहीं हैं, बल्कि वे दूरस्थ क्षेत्रों को शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और विकास की मुख्यधारा से जोड़ने वाले मजबूत माध्यम हैं। राज्य सरकार का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि विकास की पहुंच समाज के अंतिम व्यक्ति तक हो।
*कम समय, कम लागत और अधिक मजबूती की तकनीक*
भारतीय सीमा सड़क संगठन (BRO) द्वारा निर्मित यह बेली ब्रिज बीजापुर-पूवर्ती सड़क परियोजना का महत्वपूर्ण हिस्सा है। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि बेली ब्रिज पारंपरिक पुलों की तुलना में अधिक किफायती, मजबूत और टिकाऊ होते हैं। इनका निर्माण सामान्य पुलों की अपेक्षा लगभग पांच गुना कम लागत में किया जा सकता है तथा इन्हें मात्र एक माह के भीतर तैयार किया जा सकता है। दुर्गम और संवेदनशील क्षेत्रों में त्वरित कनेक्टिविटी स्थापित करने के लिए यह तकनीक अत्यंत प्रभावी सिद्ध हो रही है।
*बीजापुर में 21 बेली ब्रिज बने विकास के वाहक*
उल्लेखनीय है कि बीजापुर जिले में अब तक 21 बेली ब्रिजों का निर्माण किया जा चुका है। इन पुलों के निर्माण से दूरस्थ गांवों तक आवागमन सुगम हुआ है तथा लोगों को आवागमन, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा और आवश्यक सुविधाओं तक पहुंच में बड़ी राहत मिली है। इन संरचनाओं ने क्षेत्र में विकास और जनसेवाओं के विस्तार को नई गति प्रदान की है।
मुख्यमंत्री ने श्रमिकों की मेहनत और समर्पण की सराहना करते हुए कहा कि राज्य के श्रमिक और युवा ही विकास यात्रा के वास्तविक निर्माणकर्ता हैं। उन्होंने श्रमिकों का उत्साहवर्धन करते हुए उनके अनुभव भी साझा किए।
*बदलते बस्तर की नई पहचान*
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि बस्तर में अधोसंरचना विकास के माध्यम से नई संभावनाओं का निर्माण हो रहा है। कोण्डापल्ली का यह बेली ब्रिज केवल एक पुल नहीं, बल्कि विकास, विश्वास और सुशासन का सशक्त प्रतीक है। यह उस नए बस्तर की पहचान है, जहां विकास अब दूरस्थ गांवों और दुर्गम अंचलों तक मजबूती से पहुंच रहा है तथा लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रहा है।
वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने जन्मदिवस पर किया सुंदरकांड पाठ, प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि की कामना।
वित्त मंत्री श्री ओपी चौधरी अपने जन्मदिवस के अवसर पर रायगढ़ के महापल्ली में आयोजित रामचरितमानस सुंदरकांड पाठ में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने विधि-विधान से हनुमान जी की पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की खुशहाली, सुख-शांति और समृद्धि की कामना की। वित्त मंत्री श्री चौधरी ने कहा कि जन्मदिवस के इस विशेष अवसर पर प्रभु श्रीराम एवं संकटमोचन हनुमान जी का आशीर्वाद प्राप्त करना उनके लिए सौभाग्य की बात है। उन्होंने प्रदेश के विकास, जनकल्याण और सभी नागरिकों के सुखमय जीवन की प्रार्थना की।
श्री चौधरी ने जन्मदिवस पर उन्हें शुभकामनाएं देने वाले सभी नागरिकों, समर्थकों, शुभचिंतकों एवं क्षेत्रवासियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आप सभी का स्नेह, प्रेम और आशीर्वाद उन्हें जनसेवा के लिए निरंतर प्रेरित करता है। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु, जनप्रतिनिधि एवं स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।
जन्मदिवस पर मौसमी फलों और लड्डू से तौले गए वित्त मंत्री श्री ओपी चौधरी।
वित्त मंत्री श्री ओपी चौधरी के जन्मदिवस के अवसर पर रायगढ़ में क्षेत्रवासियों ने अनूठे अंदाज में उनका सम्मान किया। इस दौरान उन्हें मौसमी फलों एवं लड्डुओं से तौलकर शुभकामनाएं दी गईं। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में नागरिक, समर्थक और शुभचिंतक उपस्थित रहे।
इस अवसर पर वित्त मंत्री श्री ओपी चौधरी ने भावुक होते हुए कहा कि रायगढ़ क्षेत्रवासियों द्वारा उन्हें जन्मदिवस पर विभिन्न फलों एवं मिठाइयों से तौलना उनके जीवन के सबसे अनमोल क्षणों में से एक है। उन्होंने कहा कि यह सम्मान क्षेत्रवासियों के स्नेह, प्रेम और उन पर किए गए अटूट विश्वास का प्रतीक है।
श्री चौधरी ने सभी नागरिकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि जनता का यह अपनापन और आशीर्वाद उन्हें जनसेवा के प्रति और अधिक समर्पण के साथ कार्य करने की प्रेरणा देता है। उन्होंने सभी शुभचिंतकों, कार्यकर्ताओं और क्षेत्रवासियों को जन्मदिवस पर मिली शुभकामनाओं और स्नेह के लिए धन्यवाद दिया।कार्यक्रम का माहौल उत्साह और उल्लास से भरा रहा तथा उपस्थित लोगों ने वित्त मंत्री के स्वस्थ, दीर्घायु और सफल जीवन की कामना की।
रोशनी लौटाने की मुहिम में छत्तीसगढ़ आगे: 1.63 लाख से अधिक मोतियाबिंद ऑपरेशन से हजारों चेहरों पर लौटी मुस्कान।
छत्तीसगढ़ में आंखों की रोशनी बचाने और मोतियाबिंद से दृष्टिहिनता मुक्त समाज की दिशा में स्वास्थ्य विभाग की पहल लगातार प्रभावी साबित हो रही है। राष्ट्रीय दृष्टिहीनता एवं अल्प दृष्टि नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत राज्य ने वर्ष 2025-26 में निर्धारित लक्ष्य की तुलना में उल्लेखनीय उपलब्धि दर्ज करते हुए 1 लाख 63 हजार 641 से अधिक मोतियाबिंद ऑपरेशन पूरे किए गए हैं। यह कुल निर्धारित लक्ष्य का लगभग 91 प्रतिशत है, जिसने प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण और सुलभ नेत्र चिकित्सा सेवाओं की मजबूत तस्वीर प्रस्तुत की है।
स्वास्थ्य विभाग द्वारा Vision 20-20 की अवधारणा के अनुरूप शासकीय संस्थानों, गैर-शासकीय संगठनों (NGO) और निजी अस्पतालों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया गया है। इसका परिणाम यह है कि दूरस्थ क्षेत्रों तक भी नेत्र उपचार सेवाएं पहुँच रही हैं और आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को निःशुल्क उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है। शासन द्वारा अनुबंधित संस्थाओं को नियमानुसार भुगतान सुनिश्चित किए जाने से सेवाओं की निरंतरता और प्रभावशीलता भी बनी हुई है। राज्य में कुल उपलब्धि में शासकीय एवं NGO अस्पतालों की भागीदारी 51 प्रतिशत रही, जबकि निजी क्षेत्र ने 49 प्रतिशत योगदान देकर इस स्वास्थ्य अभियान को गति दी। विभागीय अधिकारियों के अनुसार यह साझेदारी मॉडल न केवल उपचार की पहुँच बढ़ा रहा है, बल्कि समयबद्ध और व्यवस्थित नेत्र चिकित्सा प्रबंधन का भी उदाहरण बन रहा है।
कोविड काल में नेत्र ऑपरेशन प्रभावित होने के कारण मोतियाबिंद के लंबित मामलों में वृद्धि हुई थी, लेकिन अब स्वास्थ्य विभाग ने विशेष अभियान चलाकर स्थिति को तेजी से सुधारा है। भारत सरकार की राष्ट्रीय नेत्र ज्योति योजना के तहत घर-घर सर्वे कर चिन्हित मरीजों का उपचार सुनिश्चित किया जा रहा है, जिससे जिलों को कैटरेक्ट ब्लाइंडनेस बैकलॉग फ्री स्टेटस (CBBFS) दिलाने की दिशा में ठोस प्रगति हो रही है।
प्रदेश के 15 जिले अब तक यह स्टेटस प्राप्त कर चुके हैं, जबकि अन्य जिलों में भी अभियान तेज गति से जारी है। रायपुर स्थित माना का 150 बिस्तरीय नेत्र चिकित्सालय राज्य स्तरीय रेफरल सेंटर के रूप में कार्य करते हुए दूर-दराज के मरीजों को विशेषज्ञ उपचार उपलब्ध करा रहा है। वहीं, बड़े शहरों में स्थित NGO बेस अस्पतालों के माध्यम से विभिन्न जिलों के मरीजों का प्रोटोकॉल आधारित सुरक्षित ऑपरेशन सुनिश्चित किया जा रहा है। समय पर जांच, पहचान और निःशुल्क उपचार की यह व्यवस्था हजारों लोगों के जीवन में नई रोशनी लेकर आई है और छत्तीसगढ़ को नेत्र स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक मजबूत मॉडल के रूप में स्थापित कर रही है।
जन्मदिवस के अवसर पर वित्त मंत्री श्री ओपी चौधरी ने की गौ-सेवा, संरक्षण के प्रयासों को सराहा।
जन्मदिवस के विशेष अवसर पर छत्तीसगढ़ के वित्त मंत्री श्री ओपी चौधरी ने रायगढ़ स्थित ऐतिहासिक सेठ किरोड़ीमल गौशाला पहुंचकर गौ-माता की सेवा की और उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। इस दौरान उन्होंने गौशाला परिसर का भ्रमण कर वहां संचालित विभिन्न गतिविधियों का बारीकी से अवलोकन किया और गौ-संरक्षण एवं संवर्धन के लिए किए जा रहे कार्यों की भूरि-भूरि सराहना की।
*गौ-सेवा सनातन परंपरा का अमूल्य प्रतीक*
वित्त मंत्री श्री चौधरी ने उपस्थित जनों को संबोधित करते हुए कहा कि गौ-माता की सेवा भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा का अमूल्य प्रतीक है। अपने जन्मदिवस के अवसर पर गौ-माता की सेवा करने का सौभाग्य प्राप्त होना मेरे लिए अत्यंत सुखद, संतोषजनक और प्रेरणादायी अनुभव है। उन्होंने आगे जोड़ते हुए कहा कि गौ-संरक्षण और संवर्धन के लिए इस गौशाला द्वारा किया जा रहा कार्य पूरे समाज के लिए अनुकरणीय है। गौवंश की सुरक्षा और उनकी उचित देखभाल करना हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के साथ-साथ हमारी सामाजिक जिम्मेदारी का भी एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
*सेवाभावी कार्यकर्ताओं का जताया आभार*
श्री चौधरी ने निस्वार्थ भाव से जुटे गौशाला के संचालकों और सेवाभावी कार्यकर्ताओं की मुक्तकंठ से प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि इन कार्यकर्ताओं के समर्पण, कड़ी मेहनत और अटूट प्रयासों के कारण ही क्षेत्र में गौ-संरक्षण की दिशा में उल्लेखनीय और सकारात्मक कार्य हो रहे हैं। कार्यक्रम के समापन पर वित्त मंत्री ने प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और कल्याण की कामना करते हुए सभी के प्रति अपना आभार व्यक्त किया। इस गरिमामय अवसर पर गौशाला प्रबंधन समिति के सदस्य, स्थानीय जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु व गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
सुशासन तिहार में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय पहुंचे बीजापुर के सुदूर गांव कोण्डापल्ली : चौपाल में सुनीं ग्रामीणों की समस्याएं।
प्रदेशव्यापी सुशासन तिहार के अंतर्गत मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय आज बीजापुर जिले के सुदूर वनांचल क्षेत्र स्थित ग्राम कोण्डापल्ली पहुंचे। मुख्यमंत्री ने यहां आयोजित जनचौपाल में ग्रामीणों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं, योजनाओं के क्रियान्वयन की जमीनी स्थिति जानी तथा शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों से मुलाकात कर उनके जीवन में आए सकारात्मक बदलावों की जानकारी ली।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सुशासन तिहार केवल एक प्रशासनिक अभियान नहीं, बल्कि सरकार और जनता के बीच विश्वास को और मजबूत करने का माध्यम है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि शासन की योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और किसी भी जरूरतमंद को अपने अधिकारों एवं सुविधाओं के लिए भटकना न पड़े। इसी भावना के साथ सरकार स्वयं गांव-गांव पहुंचकर लोगों की समस्याएं सुन रही है और उनके समाधान का प्रयास कर रही है।
जनचौपाल के दौरान मुख्यमंत्री ने विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टॉलों का अवलोकन किया तथा हितग्राहियों को वनाधिकार मान्यता पत्र, जाति एवं निवास प्रमाण पत्र, प्रधानमंत्री आवास योजना, श्रम कार्ड, किसान हितग्राही योजनाओं सहित विभिन्न योजनाओं के तहत लाभ वितरित किए। उन्होंने लाभार्थियों से चर्चा कर योजनाओं के प्रभाव और उनके अनुभवों की जानकारी भी प्राप्त की।
मुख्यमंत्री श्री साय ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि ग्रामीण क्षेत्रों से प्राप्त आवेदनों एवं शिकायतों का प्राथमिकता के आधार पर समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि किसी भी योजना की वास्तविक सफलता तब मानी जाएगी जब उसका लाभ पात्र व्यक्ति तक सही समय पर पहुंचे और आमजन को शासन की संवेदनशीलता का अनुभव हो।
मुख्यमंत्री ने ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि उनकी समस्याओं के समाधान के लिए सरकार पूरी प्रतिबद्धता और संवेदनशीलता के साथ कार्य कर रही है तथा क्षेत्र के विकास में कोई कमी नहीं आने दी जाएगी।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि बस्तर सहित प्रदेश के दूरस्थ और वनांचल क्षेत्रों में विकास की नई धारा पहुंचाना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। सुशासन तिहार के माध्यम से शासन लोगों के द्वार तक पहुंच रहा है, जिससे न केवल समस्याओं का त्वरित निराकरण हो रहा है, बल्कि शासन के प्रति आमजन का विश्वास भी लगातार मजबूत हो रहा है।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के विशेष सचिव श्री रजत बंसल सहित अन्य गणमान्यजन उपस्थित थे।
पत्रकारिता ने राष्ट्र निर्माण और सामाजिक परिवर्तन में निभाई ऐतिहासिक भूमिका : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

जशपुर जंक्शन,31 मई
पत्रकार लोकतंत्र के सच्चे सेनानी हैं, जो कठिन परिस्थितियों में भी निरंतर परिश्रम करते हुए सूचनाओं को जन-जन तक पहुंचाते हैं और समाज को सही दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। मीडिया की सकारात्मक आलोचना केवल व्यक्ति को ही नहीं, बल्कि प्रशासन और सरकार को भी आत्ममंथन और बेहतर कार्य की दिशा प्रदान करती है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज राजधानी रायपुर के वीआईपी रोड स्थित राम मंदिर परिसर के सुंदर सदन में आयोजित पत्रकारिता गौरव मार्तंड उत्सव को संबोधित करते हुए यह बात कही। यह आयोजन हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित किया गया।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि माता कौशल्या की धरती और भगवान श्रीराम के ननिहाल छत्तीसगढ़ में पत्रकारिता की गौरवशाली परंपरा पर आधारित ऐसा अद्भुत आयोजन निश्चित रूप से अभिनंदनीय है। उन्होंने आयोजन के लिए रायपुर प्रेस क्लब को बधाई देते हुए कहा कि रायपुर प्रेस क्लब देश के पुराने और प्रतिष्ठित प्रेस क्लबों में से एक है, जिसका इतिहास समृद्ध और प्रेरणादायी रहा है। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता और पत्रकारों के सम्मान में आयोजित ऐसे कार्यक्रम प्रेस क्लब की प्रतिबद्धता और संवेदनशीलता का सशक्त प्रमाण हैं।
मुख्यमंत्री श्री साय ने रायपुर की पत्रकारिता परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि इस शहर ने पत्रकारिता जगत को अनेक शिखर पुरुष दिए हैं। उन्होंने मधुकर खेर, मायाराम सुरजन, ललित सुरजन, रमेश नैय्यर और बबन प्रसाद मिश्र सहित अनेक प्रतिष्ठित संपादकों और पत्रकारों का स्मरण करते हुए कहा कि इन विभूतियों ने पत्रकारिता की सशक्त और वैचारिक परंपरा को समृद्ध किया है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि मीडिया लोकतंत्र की आधारशिला है और देश के स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर सामाजिक कुरीतियों के उन्मूलन तक पत्रकारिता ने हमेशा परिवर्तनकारी भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि 30 मई 1826 को कोलकाता से श्री जुगल किशोर शुक्ल द्वारा प्रकाशित देश के प्रथम हिंदी समाचार पत्र उदंत मार्तंड ने भारतीय पत्रकारिता की मजबूत नींव रखी। हिंदी पत्रकारिता के दो सौ वर्षों की यह गौरवशाली यात्रा देशवासियों के लिए गर्व का विषय है।
मुख्यमंत्री ने भारतीय सनातन परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि देवर्षि नारद को आदि पत्रकार माना जाता है और इसी कारण पत्रकार बंधु नारद जयंती को सम्मानपूर्वक मनाते हैं। उन्होंने कहा कि यह अत्यंत रोचक और प्रेरक तथ्य है कि उदंत मार्तंड का प्रकाशन भी नारद जयंती के दिन आरंभ हुआ, जो इस बात का प्रतीक है कि भारतीय पत्रकारिता की जड़ें हमारी सांस्कृतिक चेतना और सनातन मूल्यों से गहराई से जुड़ी रही हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय पत्रकारिता ने राष्ट्रवादी चेतना को स्वर देने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि महात्मा गांधी, लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक, माधवराव सप्रे और सुभाषचंद्र बोस सहित अनेक स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने पत्रकारिता को सामाजिक जागरण और राष्ट्रीय चेतना के माध्यम के रूप में उपयोग किया। उन्होंने कहा कि जब भी भारतीय पत्रकारिता का गौरवशाली इतिहास लिखा जाएगा, तब छत्तीसगढ़ का नाम स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज होगा।
उन्होंने मां भारती के सपूत माधवराव सप्रे का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने छत्तीसगढ़ से छत्तीसगढ़ मित्र का संपादन कर स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान लोगों को जागृत और संगठित करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि पत्रकारिता की चर्चा जब भी होगी, तब भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी का स्मरण स्वाभाविक रूप से होगा। उन्होंने कहा कि अटल जी ने अपनी पत्रकारिता के माध्यम से राष्ट्रवाद और राष्ट्रीय चेतना की जो अलख जगाई, उसने स्वतंत्र भारत में लाखों लोगों को प्रेरित किया। स्वदेश और राष्ट्रधर्म जैसे प्रकाशनों ने राष्ट्र चेतना और राष्ट्रीय अस्मिता को जन-जन तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राज्य सरकार ने मोदी की गारंटियों को धरातल पर उतारने का कार्य किया है और प्रदेश की अनेक जनकल्याणकारी योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने में मीडिया की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। उन्होंने विशेष रूप से नक्सलवाद उन्मूलन का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के नेतृत्व, सुरक्षा बलों के अदम्य साहस तथा जनसहभागिता के साथ-साथ पत्रकारों की महत्वपूर्ण भूमिका के कारण प्रदेश में शांति और विकास का वातावरण मजबूत हुआ है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हिंसा और भटकाव के रास्ते पर जाने वाले लोगों को शांति, विकास और मुख्यधारा की ओर प्रेरित करने में पत्रकारों ने बड़ी भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि आज जब मीडिया बस्तर में हो रहे सकारात्मक बदलाव, विकास, पर्यटन, प्राकृतिक सौंदर्य और बढ़ती संभावनाओं की खबरें सामने लाता है, तब देश और दुनिया में छत्तीसगढ़ की नई पहचान बनती है। जो बस्तर कभी बंदूक और हिंसा की खबरों से पहचाना जाता था, आज वही बस्तर पर्यटन, प्रकृति और विकास की नई संभावनाओं का केंद्र बनकर उभर रहा है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री श्री ओपी चौधरी ने कहा कि हिंदी पत्रकारिता की 200 वर्षों की यात्रा अत्यंत गौरवशाली रही है। उन्होंने कहा कि 1826 में जब उदंत मार्तंड की शुरुआत हुई, तब देश अंग्रेजी शासन के कठिन दौर से गुजर रहा था। ऐसे समय में पत्रकारिता ने अंधकार को सामने लाने के साथ समाज को उजाले की दिशा दिखाने का कार्य किया। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता का मूल धर्म समाज और राष्ट्र को सही दिशा प्रदान करना है।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता वरिष्ठ पत्रकार एवं इंडिया हैबिटेट सेंटर के डायरेक्टर डॉ. के.जी. सुरेश ने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर स्वतंत्र भारत तक पत्रकारिता ने राष्ट्रधर्म और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखा है। उन्होंने कहा कि हिंदी पत्रकारिता ने समय के साथ बदलती तकनीकों के अनुरूप स्वयं को विकसित किया है, किंतु सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव और नागरिक पत्रकारिता की अवधारणा ने कई नई चुनौतियां भी उत्पन्न की हैं। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता को शोधपरक, तथ्यात्मक और साक्ष्य आधारित बनाए रखना समय की आवश्यकता है, ताकि पत्रकारिता की विश्वसनीयता और सामाजिक भूमिका और मजबूत हो सके।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने पत्रकारिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले विशिष्टजनों को लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड प्रदान कर सम्मानित किया। उन्होंने हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में प्रकाशित नवप्रदेश के विशेष अंक, रायपुर प्रेस क्लब की पत्रकार डायरेक्टरी तथा श्री दिनेश यदु की पुस्तक 'मैं अगहन हूं' का विमोचन भी किया।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार श्री पंकज झा, मुख्यमंत्री के सलाहकार श्री कृष्णा दास, विधायक श्री पुरंदर मिश्रा, छत्तीसगढ़ राज्य नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष श्री संजय श्रीवास्तव, सीएसआईडीसी के अध्यक्ष श्री राजीव अग्रवाल, राज्य बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष श्रीमती वर्णिका शर्मा, राम मंदिर ट्रस्ट के उपाध्यक्ष श्री सुनील रामदास, रायपुर प्रेस क्लब के अध्यक्ष श्री मोहन तिवारी, प्रेस क्लब के पदाधिकारीगण, गणमान्य नागरिक एवं बड़ी संख्या में आमजन उपस्थित थे।
