प्रदेश

मुख्यमंत्री साय और उनकी धर्मपत्नी ने अस्तांचलगामी सूर्य को दिया अर्घ्य,दुलदुला छठ घाट से प्रदेश के सुख समृद्धि और खुशहाली की कामना।

 

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और उनकी धर्मपत्नी कौशल्या साय ने आज छठ महापर्व के अवसर पर दुलदुला छठ घाट में डूबते सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया और प्रदेश की सुख-समृद्धि व खुशहाली की कामना की।

 

मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को छठ पूजा की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आज बड़े ही सौभाग्य का दिन है कि मुझे अपने विधानसभा क्षेत्र में छठ पर्व में शामिल होने का अवसर मिला। यह पर्व लोक आस्था, पवित्रता और सामाजिक एकता का प्रतीक है।

 

मुख्यमंत्री साय ने इस अवसर पर दुलदुला क्षेत्रवासियों की मांग पर छठ घाट के सौंदर्यीकरण की घोषणा करते हुए कहा कि अगले छठ पर्व तक घाट का कायाकल्प कर दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि कुनकुरी छठ घाट के लिए लगभग 5 करोड़ 17 लाख रुपये की राशि से सौंदर्यीकरण कार्य कराया गया है, जिससे श्रद्धालु महिलाएं पूरे श्रद्धाभाव से पूजा-अर्चना कर रही हैं।

 

श्री साय ने कहा कि “क्षेत्र की जनता के आशीर्वाद से ही मैं विधायक, सांसद और मुख्यमंत्री बना हूं। उनकी समस्याओं को भलीभांति समझता हूं और समाधान के लिए निरंतर कार्य कर रहा हूं।”

 

इस अवसर पर जिला पंचायत उपाध्यक्ष शौर्य प्रताप सिंह जूदेव, जनपद पंचायत दुलदुला अध्यक्ष रामकुमार सिंह, आईजी दीपक कुमार झा, कलेक्टर रोहित व्यास, एसपी शशिमोहन सिंह, जनप्रतिनिधि, व्रती महिलाएं और ग्रामीणजन बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

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विशेष लेख : रानीदाह जलप्रपात- जशपुर की धरती पर प्रकृति का अनमोल उपहार।

 

छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले की हरी-भरी पहाड़ियों और घने साल के जंगलों के बीच स्थित रानीदाह जलप्रपात जशपुर की प्राकृतिक सुंदरता का एक अद्भुत प्रतीक है। यह झरना जशपुर नगर से लगभग 15 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है और स्थानीय लोगों के साथ-साथ बाहरी पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। ख़ूबसूरत सड़कों से होकर जब कोई इस स्थल तक पहुँचता है, तो सामने फैली हरियाली, चट्टानों से गिरता दूधिया जल और पक्षियों की आवाज़ें मिलकर एक अविस्मरणीय दृश्य प्रस्तुत करती हैं।

बरसात के मौसम में रानीदाह अपने पूरे वैभव पर होती है, जब पानी कई धाराओं में बँटकर ऊँची चट्टानों से नीचे गिरता है। गर्मी के मौसम में जल प्रवाह भले थोड़ा कम हो जाए, लेकिन आसपास की प्राकृतिक शांति और वातावरण का सौंदर्य हमेशा समान रूप से मनमोहक रहता है।

 

रानीदाह जलप्रपात केवल प्राकृतिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि अपनी लोककथाओं और रहस्यमयी कहानियों के कारण भी प्रसिद्ध है। कहा जाता है कि बहुत समय पहले ओडिशा की एक राजकुमारी रानी शिरोमणि जशपुर की इन पहाड़ियों में आ पहुँची थीं।

 जब उनके पिता और पाँच भाई उनका पीछा करते हुए यहाँ पहुँचे, तो रानी ने अपमान और जबरन विवाह से बचने के लिए इसी गहरी खाई में छलांग लगा दी और अपने प्राण त्याग दिए। उसी समय से यह झरना “रानीदाह” के नाम से जाना जाने लगा, जिसका अर्थ है “रानी का जलप्रपात।” झरने के पास स्थित कुछ चट्टानें “पाँच भैया” के नाम से जानी जाती हैं, जो रानी के भाइयों के प्रतीक माने जाते हैं। यह कथा आज भी स्थानीय लोगों के बीच पीढ़ी दर पीढ़ी सुनाई जाती है और इस स्थल को एक रहस्यमयी और भावनात्मक पहचान देती है।

 

प्रकृति प्रेमियों और सैर-सपाटे के शौकीनों के लिए रानीदाह जलप्रपात एक शांत, मनोरम और छायादार पिकनिक स्थल है। यहाँ आने वाले पर्यटक न केवल झरने की भव्यता का आनंद लेते हैं, बल्कि आसपास के गाँवों की लोकसंस्कृति, संगीत और आतिथ्य से भी प्रभावित होते हैं।

 रानीदाह जलप्रपात जशपुर की आत्मा का प्रतीक है — जहाँ प्रकृति की सुंदरता, इतिहास की गहराई और लोककथाओं का आकर्षण एक साथ जीवंत हो उठता है। यदि आप कभी जशपुर आएँ, तो इस दिव्य स्थल का भ्रमण अवश्य करें और प्रकृति के इस अनुपम उपहार का अनुभव स्वयं करें।

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जशपुर जिले को बड़ी सौगात, कांसाबेल–बगीचा मार्ग के निर्माण कार्य के 29 करोड़ 37 लाख रूपए की दी मंजूरी, क्षेत्र वासियों ने सीएम साय का जताया आभार.....।

 

 

 

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने जशपुर जिले को एक और बड़ी सौगात दी है। वर्ष 2025-26 के बजट में कांसाबेल–बगीचा मार्ग के सुदृढ़ीकरण एवं पुलिया निर्माण कार्य को प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई है। यह सड़क लगभग 39 किलोमीटर लंबी होगी,जिसके लिए 29 करोड़ 37 लाख रुपए की मंजूरी दी गई है।इस मार्ग के मजबूतीकरण के साथ आवश्यक पुलिया निर्माण भी शामिल है।इस सड़क निर्माण से कांसाबेल, बगीचा और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों को आवागमन की सुविधा में बड़ी राहत मिलेगी।खासकर यह मार्ग कांसाबेल विकासखंड के क्षेत्र वासियों को बगीचा तक आवागमन के लिए सुगम होगी,वहीं यह मार्ग जशपुर जिले को सरगुजा जिले को जोड़ने वाली प्रमुख मार्ग भी है।मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि –“प्रदेश के हर जिले में सड़क और आधारभूत संरचना का विस्तार हमारी प्राथमिकता है। ग्रामीण अंचलों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना प्रदेश सरकार का संकल्प है।इस स्वीकृति के साथ जशपुर जिले के सड़क नेटवर्क को नई मजबूती मिलने जा रही है, जिससे क्षेत्र के आर्थिक और सामाजिक विकास को भी नई गति मिलेगी।इस सड़क निर्माण की मंजूरी मिलने पर क्षेत्र वासियों में खुशी की लहर है।

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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सोहरई करमा महोत्सव में हुए शामिल ग्राम कण्डोरा में करमा अखरा निर्माण के लिए 50 लाख रुपए की घोषणा।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय आज जशपुर जिले में अखिल भारतीय रौतिया समाज विकास परिषद, प्रांतीय शाखा छत्तीसगढ़ द्वारा ग्राम कण्डोरा में आयोजित महासम्मेलन (सोहरई करमा महोत्सव 2025) में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने कुनकुरी में 20 लाख रुपए की लागत से निर्मित रौतिया समाज के सामुदायिक भवन का लोकार्पण किया तथा ग्राम पंचायत कण्डोरा में 50 लाख रुपए की लागत से बनने वाले रौतिया भवन निर्माण का भूमिपूजन किया।

 

मुख्यमंत्री श्री साय ने समाज की मांग पर ग्राम कण्डोरा में करमा अखरा निर्माण के लिए 50 लाख रुपए तथा रायपुर में रौतिया भवन पहुँच मार्ग के लिए 25 लाख रुपए प्रदान करने की घोषणा की। उन्होंने मंच पर रौतिया समाज के वीर शहीद बख्तर साय और मुण्डल सिंह के छायाचित्रों पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया। 

 

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने अपने संबोधन में कहा कि करमा महोत्सव हमारी प्राचीन और गौरवशाली परंपरा का प्रतीक है, जिसे सभी समाज मिलजुलकर मनाते हैं। यह पर्व हमें हमारी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने के साथ-साथ प्रकृति के प्रति आदर और सम्मान का भाव भी सिखाता है। उन्होंने कहा कि एकादशी करमा, दशहरा करमा जैसी परंपराएँ हमारी संस्कृति में गहराई से रची-बसी हैं। ये उत्सव समाज को एक सूत्र में बाँधने का कार्य करते हैं।

 

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की गारंटियों को तीव्र गति से लागू कर रही है। सरकार बनते ही पहली ही कैबिनेट बैठक में प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत 18 लाख आवासों की स्वीकृति प्रदान की गई। महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में महतारी वंदन योजना के माध्यम से महिलाओं को प्रतिमाह 1000 रुपए की सहायता दी जा रही है। तेंदूपत्ता संग्राहकों की आमदनी बढ़ाने के लिए सरकार ने प्रति मानक बोरा दर को 5500 रुपए कर दिया है।

 

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि विकसित भारत की तर्ज पर वर्ष 2047 तक विकसित छत्तीसगढ़ बनाने के लिए राज्य सरकार संकल्पबद्ध है। उन्होंने लोगों से वोकल फॉर लोकल अपनाने का आग्रह करते हुए कहा कि स्वदेशी वस्तुओं की खरीद से न केवल देश की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी, बल्कि स्थानीय कारीगरों और उद्यमियों को भी प्रोत्साहन मिलेगा।

 

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार नक्सल उन्मूलन की दिशा में तीव्रता से कार्य कर रही है। दो दिन पूर्व ही 210 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में वापसी की है। 

 

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि जिले में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के लिए मेडिकल कॉलेज, प्राकृतिक चिकित्सा एवं फिजियोथेरेपी केंद्र, शासकीय नर्सिंग कॉलेज तथा शासकीय फिजियोथेरेपी कॉलेज की स्थापना की जाएगी, जिससे स्थानीय युवाओं को शिक्षा और रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे।

 

मुख्यमंत्री श्री साय ने माध्यमिक विद्यालय खेल मैदान स्थित आमा बगीचा के करमा पूजन स्थल पर करम वृक्ष की डाली की पारंपरिक रीति से पूजा-अर्चना कर प्रदेश की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। इसके बाद उन्होंने करमा नर्तक दल के साथ गले में मांदर टाँगकर ताल मिलाते हुए करम वृक्ष की डाली के चारों ओर उत्साहपूर्वक नृत्य किया। इस अवसर पर उनकी धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या साय तथा परिवारजन भी उपस्थित थे।

 

सोहरई करमा महोत्सव: रौतिया समाज की सांस्कृतिक पहचान

 

सोहरई करमा महोत्सव मूलतः रौतिया समाज द्वारा गोवर्धन पर्व के उपलक्ष्य में मनाया जाने वाला पारंपरिक पर्व है। इस दिन नए फसल को पूरे विधि-विधान से पूजा-पाठ कर घर लाया जाता है। ग्राम कण्डोरा में आयोजित इस भव्य आयोजन में छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों के साथ-साथ झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल से आए कुल 52 मंडलों के नर्तक दलों ने सहभागिता की। विविध लोक संस्कृतियों और पारंपरिक नृत्यों की रंगारंग प्रस्तुतियों ने पूरे वातावरण को उल्लास और उत्सव की भावना से सराबोर कर दिया।

 

इस अवसर पर सांसद श्री राधेश्याम राठिया, अखिल भारतीय रौतिया समाज विकास परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री ओ. पी. साय, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री दामोदर सिंह, राष्ट्रीय महासचिव श्री आजाद सिंह, केंद्रीय संगठन मंत्री श्री भुनेश्वर केसर, केंद्रीय महिला सदस्य श्रीमती उमा देवी सहित समाज के अन्य पदाधिकारी एवं बड़ी संख्या में गणमान्यजन उपस्थित थे।

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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने दीपावली और गोवर्धन पूजा की दी हार्दिक शुभकामनाएं

 

 

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रदेशवासियों को दीपावली और गोवर्धन पूजा की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए कहा कि दीपावली का पर्व प्रकाश, सत्य और सद्भाव का प्रतीक है।

उन्होंने कहा कि दीपावली का यह पावन पर्व अंधकार पर प्रकाश, असत्य पर सत्य और नकारात्मकता पर सकारात्मकता की विजय का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि दीपों का यह उत्सव हमारे जीवन में नई ऊर्जा, नई चेतना और आशा का संचार करता है। मुख्यमंत्री ने सभी नागरिकों से अपील की है कि वे दीपावली को स्वदेशी भावना के साथ, पर्यावरण संरक्षण का ध्यान रखते हुए मनाएं और एक-दूसरे के सुख-दुख में सहभागी बनकर समाज में प्रेम और सौहार्द का संदेश फैलाएं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने गोवर्धन पूजा की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह पर्व प्रकृति, पशुधन और पर्यावरण के प्रति हमारी श्रद्धा और आभार का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि गोवर्धन पूजा हमें यह सिखाती है कि प्रकृति का संरक्षण ही समृद्धि का आधार है। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि दीपावली और गोवर्धन पूजा का यह पावन अवसर छत्तीसगढ़ राज्य में खुशहाली, समृद्धि और विकास की नई रोशनी लेकर आएगा तथा हर घर में आनंद, शांति और उजाला फैलाएगा।

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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या साय ने की स्थानीय उत्पादों की खरीदारी कर दिया वोकल फॉर लोकल का संदेश......।

 

दीपों के पर्व दीपावली के अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या साय ने स्थानीय बाजार पहुंचकर कुम्हारों द्वारा बनाए गए स्वदेशी दीयों और सजावटी सामग्रियों की खरीदारी की। उन्होंने मिट्टी के दीयों से अपना घर रोशन करने का संदेश दिया और कहा कि इस दीपावली हर घर में स्वदेशी दीप जलाएं।

उन्होंने कहा कि वोकल फॉर लोकल अभियान अब आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह हर भारतीय को प्रेरित करता है कि हम स्वदेशी वस्तुओं को अपनाएं और स्थानीय कारीगरों व उद्योगों को सशक्त बनाएं।

 

     श्रीमती साय ने कहा कि दीपावली खुशियों और उमंग का पर्व है। इस अवसर पर स्थानीय उत्पादकों और व्यापारियों की भागीदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था भी मजबूत होती है और रोजगार के अवसर में भी वृद्धि होती है। उन्होंने प्रदेशवासियों से अपील की कि वे इस दीपावली स्थानीय उत्पादों को प्राथमिकता दें और कुम्हारों, हस्तशिल्पियों व छोटे व्यापारियों की दीपावली को भी उजाला दें।

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के छत्तीसगढ़ प्रवास को लेकर तैयारियां शुरू 01 नवंबर को पांच कार्यक्रमों में होंगे शामिल।

 

 

 प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के छत्तीसगढ़ प्रवास को लेकर तैयारियां शुरू कर दी गई है। 01 नवंबर को प्रधानमंत्री श्री मोदी नया रायपुर अटल नगर में राज्योत्सव स्थल में छत्तीसगढ़ रजत महोत्सव का शुभारंभ करेंगे। इसके अलावा वे शहीद वीर नारायण सिंह संग्रहालय, छत्तीसगढ़ विधानसभा के नवनिर्मित भवन और प्रजापिता ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के ट्रेनिंग सेंटर एकेडमी फार ए पीसफुल वर्ल्ड “शांति शिखर” का शुभारंभ और सत्य सांई हॉस्पिटल में हृदय का ऑपरेशन कराने वाले बच्चों से चर्चा करेंगे। 

अपर मुख्य सचिव श्री मनोज पिंगुआ ने आज नवा रायपुर स्थित राज्योत्सव स्थल में प्रधानमंत्री के प्रवास को लेकर तैयारियों की समीक्षा की और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। श्री पिंगुआ ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी 31 अक्टूबर की रात्रि राजधानी रायपुर पहुंचेंगे और अगले दिन कार्यक्रमों में शामिल होंगे। इस दौरान नए विधानसभा भवन के लोकार्पण और राज्योत्सव के शुभारंभ अवसर पर सभाएं होंगी। इन आयोजनों के लिए सभी तैयारियां शुरू कर दी जाए। बैठक में कलेक्टर श्री गौरव सिंह ने प्रधानमंत्री के प्रवास को लेकर की जा रही तैयारियों की विस्तार से जानकारी दी।

बैठक में लोक निर्माण विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह, परिवहन विभाग के सचिव श्री एस. प्रकाश, तकनीकी शिक्षा एवं कौशल विकास विभाग के सचिव डॉ. एस. भारती दासन, कमिश्नर रायपुर श्री महादेव कावरे, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रायपुर डॉ. लाल उमेंद सिंह सहित जिला प्रशासन के विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।  

 

अपर मुख्य सचिव पिंगुआ ने कहा कि प्रधानमंत्री के प्रवास के मद्देनजर ट्रैफिक प्लान और पार्किंग की व्यवस्था कर ली जाए। इसी प्रकार राज्योत्सव मेला स्थल और अन्य कार्यक्रमों के स्थल पर पार्किंग, पेयजल, शौचालय की व्यवस्था की जाए।

उन्होंने कहा कि नया रायपुर के चौक-चौराहों को व्यवस्थित और सौंदर्यीकरण कर ली जाए। राज्योत्सव मेला स्थल में आने वाले लोगों की सुविधा के लिए को सेक्टरों में बांटकर कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई जाए। कार्यक्रम के दौरान सतत् रूप से बिजली की आपूर्ति सुनिश्चित की जाए तथा वैकल्पिक व्यवस्था भी रखी जाए। इसी प्रकार साउंड सिस्टम उच्च गुणवत्तायुक्त हो। साथ ही दूर संचार विभाग के अधिकारियों को संचार व्यवस्था दुरूस्त करने के निर्देश दिए।

 

 राज्योत्सव मेला स्थल पर मुख्य मंच के सामने तीन विशाल डोम बनाएं जा रहे हैं। जिनमें 60 एलईडी स्क्रीनिंग लगाए जाएंगे। मेला स्थल पर लोगों बैठने के लिए कुर्सियों की व्यवस्था की जा रही है। लोगों के प्रवेश के लिए दो द्वार होंगे। एक द्वार विभागीय प्रदर्शनी के लिए होगा।

विभागीय प्रदर्शनी में राज्य शासन के विभिन्न विभागों के साथ ही सार्वजनिक उपक्रमों की प्रदर्शनी लगाई जाएगी। मुख्य मंच के नजदीक ही डिजिटल प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी। मेला स्थल पर प्रधानमंत्री आवास का मॉडल भी बनाया जाएगा। बैठक में अधिकारियों ने बताया कि राज्योत्सव मेला स्थल के दोनों तरफ 20-20 हजार वाहनों के पार्किंग की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा अन्य शहरों से रायपुर पहुंचने वाले मार्गों पर भी पार्किंग, पेयजल आदि की व्यवस्था की जा रही है।

राज्योत्सव मेला स्थल पर 300 शौचालय बनाए जाएंगे। स्वास्थ्य विभाग द्वारा 20 बैड का हॉस्पिटल तथा आईसीयू बनाया जा रहा है। इसके अलावा 25 एम्बुलेंस और पर्याप्त संख्या में फायर ब्रिगेड वाहन की व्यवस्था की जा रही है।

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अपर कलेक्टर श्री प्रदीप कुमार साहू ने जनदर्शन में सुनी आम जनता की समस्याएं अधिकारियों को दिए निर्देश।

 

 अपर कलेक्टर प्रदीप कुमार साहू ने सोमवार को कलेक्ट्रेट कार्यालय में आयोजित जनदर्शन में आम नागरिकों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। उन्होंने प्राप्त सभी आवेदनों का गंभीरता से अवलोकन किया और संबंधित विभागों के अधिकारियों को इनका समयबद्ध एवं पारदर्शी निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

    अपर कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि प्रत्येक आवेदक को उनके आवेदन पर की गई कार्यवाही की जानकारी समय पर उपलब्ध कराई जाए। जनदर्शन के दौरान आज लगभग 32 आवेदन प्राप्त हुए। इनमें मुख्य रूप से राजस्व प्रकरण, साफ-सफाई, अधोसंरचना निर्माण, आजीविका संबंधी और विभिन्न शासकीय योजनाओं का लाभ दिलाने संबंधित आवेदन शामिल थे।

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मुख्यमंत्री ने कलेक्टर्स कॉन्फ्रेंस में दिखाई सख्ती धान खरीदी, स्वच्छता, शिक्षा और स्वास्थ्य पर सख्त निर्देश — कहा, जनहित के कार्यों में लापरवाही बर्दाश्त नहीं

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में मंत्रालय (महानदी भवन) में 9 घंटे चली कलेक्टर्स कॉन्फ्रेंस 2025 में शासन की योजनाओं, जनहित कार्यों और सुशासन पर मंथन हुआ। बैठक की शुरुआत समय से पहले करते हुए मुख्यमंत्री ने स्पष्ट संदेश दिया — “जनहित के कार्यों में लापरवाही किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि शासन की नीतियों का अंतिम उद्देश्य जनता तक योजनाओं का पारदर्शी लाभ पहुँचाना है। उन्होंने जिलों में परिणामोन्मुखी कार्यशैली अपनाने और केवल रिपोर्ट आधारित कार्य से बचने की नसीहत दी।

 

धान खरीदी पर सख्त चेतावनी

धान खरीदी 15 नवंबर से शुरू होगी, इसके लिए सभी तैयारियाँ समय पर पूर्ण करने के निर्देश दिए गए। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी अनियमितता पर सीधे कलेक्टर जिम्मेदार होंगे। उन्होंने सीमावर्ती जिलों में अवैध धान आवाजाही रोकने और निगरानी हेतु इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर के उपयोग के निर्देश दिए।

 

शिक्षा, स्वास्थ्य और जनकल्याण योजनाओं पर जोर

मुख्यमंत्री ने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर विशेष बल देते हुए 100 प्रतिशत प्रसव संस्थागत कराने, टीकाकरण की फील्ड वेरिफिकेशन और मैटरनल डेथ ऑडिट अनिवार्य करने के निर्देश दिए।

शिक्षा विभाग को ड्रॉपआउट शून्य करने, 100 प्रतिशत नामांकन सुनिश्चित करने और आधार आधारित APAR ID पंजीयन पूरा करने के निर्देश दिए गए।

 

मलेरिया मुक्त छत्तीसगढ़ का लक्ष्य

बस्तर संभाग में मलेरिया उन्मूलन को प्राथमिकता देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हॉटस्पॉट क्षेत्रों में विशेष अभियान चलाया जाए।

 

जनजातीय विकास और योजनाओं की गति पर बल

‘धरती आबा अभियान’ और ‘पीएम जनमन योजना’ के अंतर्गत 2026 तक सभी कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए गए। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनजातीय इलाकों में सभी विभाग समन्वय से कार्य करें, ताकि गाँव आत्मनिर्भर बन सकें।

 

स्वच्छता, पेयजल और आवास पर फोकस

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना-1.0 के शेष मकान 31 दिसंबर तक पूर्ण किए जाएँ और समय पर भुगतान सुनिश्चित हो। उन्होंने चेताया कि “केवल कागज़ी रिपोर्ट स्वीकार नहीं की जाएगी, फील्ड विज़िट अनिवार्य हैं।”

 

कौशल विकास और रोजगार पर नई दिशा

मुख्यमंत्री ने तकनीकी शिक्षा विभाग को युवाओं के लिए राज्य स्तरीय रोजगार मेला आयोजित करने और प्रत्येक जिले में स्किल गैप एनालिसिस कर प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित करने के निर्देश दिए।

 

ई-सेवाएं और जवाबदेही पर सख्ती

लोक सेवा गारंटी के अंतर्गत सभी सेवाओं का समय पर निस्तारण सुनिश्चित करने और सभी कार्यालयों में बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली शीघ्र लागू करने के निर्देश दिए गए।

 

अंत में मुख्यमंत्री ने कहा 

 “प्रशासनिक जिम्मेदारी केवल योजनाओं के निष्पादन तक सीमित नहीं, बल्कि संवेदनशीलता, संवाद और जवाबदेही का विषय भी है। सुशासन का अर्थ है — जनता का विश्वास।”

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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कलेक्टर्स कॉन्फ्रेंस में दिखाई सख्ती, जनहित योजनाओं में पारदर्शिता और सुशासन पर जोर

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में मंत्रालय (महानदी भवन) में रविवार को आयोजित कलेक्टर्स कॉन्फ्रेंस 2025 में सुशासन, पारदर्शिता और जनहित योजनाओं पर व्यापक चर्चा हुई। बैठक में मुख्य सचिव, सभी विभागीय सचिव, संभागायुक्त और कलेक्टर उपस्थित थे।

 

मुख्यमंत्री ने बैठक में स्पष्ट किया कि शासन की नीतियों और योजनाओं का अंतिम उद्देश्य जनता तक लाभ पहुँचाना है और किसी भी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को चेताया कि योजनाओं का क्रियान्वयन केवल रिपोर्टों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि वास्तविक परिणाम जनता तक दिखाई देने चाहिए।

 

धान खरीदी के संबंध में मुख्यमंत्री ने कहा कि यह कार्य 15 नवंबर से शुरू होगा और सभी तैयारियाँ समय पर पूरी की जाएँ। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर सीधे कलेक्टर जिम्मेदार होंगे और प्रत्येक केंद्र की निगरानी सुनिश्चित करनी होगी। अंतरराज्यीय सीमावर्ती जिलों में विशेष सतर्कता बरती जाएगी और विशेष पिछड़ी जनजातियों के किसानों के लिए पंजीयन और शिविरों के माध्यम से लाभ सुनिश्चित किया जाएगा।

 

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि एक भी पात्र किसान वंचित न रहे। उन्होंने निर्देश दिए कि बस्तर और सरगुजा संभाग में योजना की प्रगति की सतत समीक्षा की जाए। ऊर्जा विभाग के संबंध में उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना का लाभ अधिकतम लोगों तक पहुँचना चाहिए और ग्रामीण क्षेत्रों में बैंक फाइनेंस सुविधा सुनिश्चित की जाए।

 

स्वास्थ्य सेवाओं पर उन्होंने जोर दिया कि सभी अस्पतालों में 100 प्रतिशत प्रसव सुनिश्चित हों और टीकाकरण की वास्तविक स्थिति की फील्ड वेरिफिकेशन द्वारा पुष्टि की जाए। मैटरनल डेथ ऑडिट अनिवार्य किया जाएगा और एनआरसी सेंटरों का संचालन नियमित व प्रभावी होना चाहिए। वेलनेस सेंटरों को सक्रिय कर गैर-संचारी रोगों के खिलाफ जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए गए।

 

मुख्यमंत्री ने बस्तर संभाग में मलेरिया उन्मूलन पर विशेष जोर दिया और हॉटस्पॉट क्षेत्रों की पहचान कर अभियान चलाने का निर्देश दिया। उन्होंने प्रधानमंत्री वय वंदना योजना के अंतर्गत सभी पात्र वृद्धजनों के पंजीयन और कार्ड निर्माण कार्य को प्राथमिकता से पूरा करने कहा। शिक्षा विभाग के संदर्भ में उन्होंने ड्रॉपआउट शून्य करने और सकल नामांकन अनुपात को 100 प्रतिशत करने का लक्ष्य पूरा करने पर जोर दिया। शिक्षण सामग्री कक्षा में उपयोग हो और छात्रों की उपस्थिति नियमित मॉनिटर की जाए।

 

बीजापुर जिले में स्थानीय युवाओं की मदद से गोंडी भाषा में शिक्षण से बच्चों की उपस्थिति बढ़ने और ड्रॉपआउट घटने की सराहना करते हुए उन्होंने सभी जिलों को ऐसे नवाचार अपनाने की सलाह दी। उन्होंने निर्देश दिया कि 31 दिसंबर तक सभी विद्यार्थियों की आधार-बेस्ड APAR ID बनाकर रजिस्ट्रेशन पूरा किया जाए ताकि छात्रवृत्ति, गणवेश और किताबें वितरण में पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके। मुख्यमंत्री ने राज्य में “मुख्यमंत्री शिक्षा गुणवत्ता अभियान” चलाने की भी घोषणा की, जिसमें स्कूलों का सामाजिक अंकेक्षण कर ग्रेडिंग की जाएगी और परीक्षा परिणाम सुधार के लिए ठोस योजना बनाई जाएगी।

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मुख्यमंत्री से मिला फेडरेशन व संघ का संयुक्त प्रतिनिधिमंडल, संवाद कार्यालय में अभद्रता और तोड़फोड़ करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की मांग

 

 

छत्तीसगढ़ संवाद कार्यालय, नवा रायपुर में विभागीय अपर संचालक संजीव तिवारी के साथ हुई अभद्रता, झूमाझटकी, गाली-गलौज और कार्यालय में तोड़फोड़ की घटना के विरोध में आज छत्तीसगढ़ कर्मचारी-अधिकारी फेडरेशन और छत्तीसगढ़ जनसंपर्क अधिकारी संघ का संयुक्त प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से मिला।

 

प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि यह घटना केवल एक अधिकारी पर हमला नहीं, बल्कि शासन-प्रशासन की संस्थागत गरिमा और अनुशासन पर सीधा प्रहार है।

 

फेडरेशन के संयोजक कमल वर्मा ने कहा कि पत्रकारिता की आड़ में भयादोहन और ब्लैकमेलिंग की घटनाएँ लगातार बढ़ रही हैं, जो लोकतंत्र और वास्तविक पत्रकारिता दोनों के लिए गंभीर खतरा हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से राज्य में शासकीय सेवकों की सुरक्षा हेतु एक सशक्त कानून बनाने की मांग की, ताकि अधिकारी-कर्मचारी भयमुक्त होकर जनहित के कार्य कर सकें और दोषियों को कठोर दंड मिले।

 

उन्होंने यह भी अनुरोध किया कि सभी शासकीय कार्यालयों, विशेषकर इंद्रावती भवन में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी की जाए तथा प्रवेश द्वारों पर आधुनिक सुरक्षा जांच उपकरण लगाए जाएँ।

 

छत्तीसगढ़ राजपत्रित अधिकारी संघ के प्रवक्ता एवं जनसंपर्क अधिकारी संघ के अध्यक्ष बालमुकुंद तंबोली ने कहा कि किसी भी शासकीय कार्यालय में घुसकर हिंसक व्यवहार करना, गाली-गलौज करना और अधिकारी को घर जाकर धमकाना पूरी तरह अस्वीकार्य है। ऐसी घटनाएँ न केवल भय और असुरक्षा का वातावरण बनाती हैं, बल्कि शासन की कार्यकुशलता और मनोबल को भी प्रभावित करती हैं।

 

उन्होंने कहा कि जनसंपर्क विभाग सरकार और जनता के बीच विश्वास का सेतु है, जो शासन की नीतियों को जन-जन तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। अतः इस विभाग के अधिकारी पर हमला लोकतांत्रिक मूल्यों और शासन की गरिमा पर सीधा प्रहार है।

 

प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को यह भी बताया कि अभद्रता करने वाले तत्वों पर पूर्व में भी दंडात्मक कार्रवाई की गई है, किंतु वे पत्रकारिता की आड़ में पुनः अधिकारियों को धमका रहे हैं।

 

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि “दोषियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। राज्य सरकार इस प्रकार की घटनाओं को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करेगी।”

 

मुख्यमंत्री से भेंट करने वाले प्रतिनिधिमंडल में जनसंपर्क विभाग के अपर संचालक जे.एल. दरियो, उमेश मिश्रा, संयुक्त संचालक पवन गुप्ता, उपसंचालक घनश्याम केशरवानी सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

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आम जनता को मिले जीएसटी की घटी दरों का लाभ - वित्त मंत्री ओ. पी. चौधरी ने ली ‘जीएसटी बचत उत्सव’ की विशेष समीक्षा बैठक।

 

 नवा रायपुर में आयोजित ‘जीएसटी बचत उत्सव’ की विशेष समीक्षा बैठक में वित्त एवं वाणिज्यिक कर मंत्री ओ. पी. चौधरी ने राज्य के नागरिकों को जीएसटी की घटी दरों का त्वरित लाभ सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जीएसटी दरों में की गई कटौती का लाभ सीधे आम जनता तक पहुँचना चाहिए, ताकि हर परिवार को वास्तविक बचत और व्यापारियों को राहत मिल सके।

वित्त मंत्री चौधरी ने बैठक में राज्य के सभी बाजारों की स्थिति की विस्तृत समीक्षा करते हुए अधिकारियों से फीडबैक लिया। उन्होंने निर्देश दिया कि जीएसटी दरों में की गई कमी का लाभ उपभोक्ताओं तक पारदर्शी रूप से पहुँचे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में “जीएसटी 2.0” के अंतर्गत दरों में ऐतिहासिक कमी की गई है, जिसका उद्देश्य नागरिकों को राहत देना और व्यापार को सुगमता प्रदान करना है। यह राज्य सरकार की जिम्मेदारी है कि इस सुधार का लाभ समयबद्ध और ईमानदारीपूर्वक जनता तक पहुँचे।

गौरतलब है कि आम उपयोग की वस्तुओं की दरों में व्यापक कमी की गई है — लगभग 99 प्रतिशत वस्तुएँ अब 5 प्रतिशत जीएसटी स्लैब में लाई गई हैं। इस निर्णय से उपभोक्ताओं को प्रत्यक्ष रूप से बड़ी बचत हो रही है। उदाहरण के तौर पर, ट्रैक्टर जैसी कृषि मशीनरी पर 60,000 रुपये से 1,20,000 रुपये तक की बचत संभव हुई है। वहीं, कपड़ों और दैनिक उपयोग की वस्तुओं की कीमतों में भी उल्लेखनीय कमी आई है, जिससे आमजन का वार्षिक खर्च काफी घटेगा।

उल्लेखनीय है कि 22 सितंबर 2025 से लागू हुए जीएसटी 2.0 सुधारों का उद्देश्य आम भारतीय परिवारों को प्रत्यक्ष लाभ पहुँचाना है। इन सुधारों के तहत स्वास्थ्य क्षेत्र में महत्वपूर्ण राहत दी गई है। व्यक्तिगत जीवन और स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम अब जीएसटी मुक्त हैं, जिससे परिवारों को सालाना हजारों रुपये की बचत होगी. अधिकांश दवाइयों, मेडिकल उपकरणों और डायग्नोस्टिक किट पर जीएसटी दर 12% से 5% कर दी गई है, जबकि कई जीवनरक्षक दवाइयाँ पूरी तरह टैक्स मुक्त कर दी गई हैं। इन सुधारों से न केवल आम नागरिकों को स्वास्थ्य खर्च में राहत मिली है, बल्कि घरेलू बजट पर सकारात्मक असर भी पड़ा है।

वित्त मंत्री श्री चौधरी ने सभी जिलों के जीएसटी अधिकारियों से कहा की वे यह सुनिश्चित करें कि कोई भी वस्तु पुरानी दरों पर न बेची जाए। यदि कोई पुराना स्टॉक उपलब्ध हो, तो उस पर नई संशोधित दरें अंकित की जाएँ और वस्तुएँ केवल नई दरों पर ही बेची जाएँ, ताकि जीएसटी दरों में की गई कटौती का लाभ सीधे उपभोक्ताओं तक पहुँचे। उन्होंने यह भी कहा कि ‘जीएसटी बचत उत्सव’ की दैनिक रिपोर्टिंग सुनिश्चित की जाएगी और राज्य स्तर पर इसकी नियमित समीक्षा वे स्वयं करेंगे, ताकि “जीएसटी 2.0” सुधारों का लाभ प्रदेश के प्रत्येक नागरिक तक पहुँच सके।

यह बैठक वित्त एवं वाणिज्यिक कर मंत्री ओ. पी. चौधरी, वित्त सचिव मुकेश बंसल तथा आयुक्त, राज्य कर पुष्पेन्द्र मीणा की उपस्थिति में आयोजित की गई। बैठक में विभाग के सभी वरिष्ठ एवं क्षेत्रीय अधिकारी उपस्थित रहे।

 

 

 

 

 

 

 

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भारत के पैरा-एथलीट्स ने रचा नया इतिहास 2025 में जीते 22 पदक कठोर परिश्रम और अटूट संकल्प से गूँजा भारत का परचम मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने दी बधाई

नई दिल्ली में आयोजित वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप 2025 में भारत के पैरा-एथलीट्स ने अदम्य जज़्बे और अथक परिश्रम के बल पर विश्व पटल पर नया इतिहास रच दिया है। इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में भारतीय दल ने अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए 6 स्वर्ण, 9 रजत और 7 कांस्य सहित कुल 22 पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया है।

 

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने भारतीय पैरा-एथलीट्स के इस गौरवपूर्ण प्रदर्शन पर हार्दिक बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि पूरे राष्ट्र के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने कहा कि हमारे पैरा-एथलीट्स ने यह सिद्ध कर दिया है कि जब संकल्प अडिग हो और मेहनत निरंतर, तब कोई भी मंज़िल असंभव नहीं होती। यह प्रदर्शन न केवल खेल जगत के लिए प्रेरणादायक है, बल्कि देश के प्रत्येक नागरिक में नई ऊर्जा और आत्मविश्वास का संचार करता है।

 

मुख्यमंत्री श्री साय ने सभी विजेता खिलाड़ियों को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि उनकी यह सफलता “नए भारत की नई उड़ान” का सजीव उदाहरण है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सहित पूरे देश को अपने पैरा-एथलीट्स पर गर्व है, जिन्होंने दुनिया के सामने भारतीय जज़्बे की नई परिभाषा लिखी है।

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डबरी ने खोले समृद्धि के द्वार, दुलार सिंह का सपना हुआ साकार

 

जांजगीर-चांपा जिले की ग्राम पंचायत जाटा के बहेराडीह के दुलार सिंह खेत में एक डबरी बनाने से ही खेती और पशुपालन में होने वाली बढ़ौत्तरी का सजीव उदाहरण बन गए हैं। दुलार सिंह ने यह डबरी भी मनरेगा योजना के माध्यम से बनवाई है। ग्रामीण जीवन का आधार सदैव कृषि और पशुपालन रहा है, परंतु इन दोनों ही कार्यों की आत्मा जल है । यदि जल की व्यवस्था सुदृढ़ हो जाए तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था स्वयं सशक्त हो जाती है। इसी सोच को श्री दुलार सिंह ने साकार रूप दिया है।

 

       डबरी निर्माण होने से पूर्व श्री दुलार सिंह को अपने खेतों की सिंचाई हेतु जल की कमी रहती थी, जिससे सीमित फसल ही ले पाते थे। इसके अलावा बतख पालन, मछली पालन एवं धान की खेती की सिंचाई करने के लिए हमेशा पानी की कमी को महसूस करते आ रहे थे, ऐसे में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के माध्यम से ग्राम पंचायत जाटा में श्री दुलार सिंह के खेत पर डबरी निर्माण कार्य स्वीकृत किया गया।

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के अंतर्गत ग्राम जाटा के किसान श्री दुलार सिंह द्वारा अपनी निजी भूमि पर डबरी निर्माण कार्य कराया गया। इस कार्य के लिए 2.14 लाख की प्रशासकीय राशि स्वीकृत की गई इसका कार्य प्रारंभ हुआ और जून 2024 को पूर्ण हुआ। इसमें कुल 380 मानव दिवसों के सृजन से 37 श्रमिक परिवारों को 92,577 की मजदूरी प्राप्त हुई। इससे न केवल रोजगार सृजन हुआ बल्कि जल संरक्षण और कृषि उत्पादन में भी वृद्धि हुई। अब डबरी में वर्षा जल का संचयन होने से वर्षभर खेतों की सिंचाई सुचारू रूप से हो रही है। इसके साथ ही उन्होंने मत्स्य पालन एवं पशुपालन शुरू किया, जिससे अतिरिक्त आमदनी का स्रोत भी बना।

 

        श्री दुलार सिंह बताते हैं कि मनरेगा योजना के अंतर्गत डबरी निर्माण से अब मेरी खेती सिंचित हो रही है। इससे धान के साथ-साथ मेढ़ पर सब्ज़ियाँ भी उगा पा रहा हूँ। डबरी में रोहू एवं पंगास मछली 2 कि.ग्रा. मछली के बीज डाले गये है। आगामी माह में मछली 01 किलो होने के बाद इन्होने बाजार में बिक्री करेंगे, जिससे आमदनी प्राप्त होगी। श्री दुलार सिंह अपने निर्मित डबरी के मेंड़ पार पर हल्दी एवं तिल का फसल लगाया हुआ है, जिसे वह हल्दी एवं तिल को अपने घर के लिये उपयोग करेंगे। मत्स्य पालन और पशुपालन से घर की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

ग्राम पंचायत सरपंच एवं रोजगार सहायक ने बताया कि इस कार्य से गांव के अन्य किसानों को भी प्रेरणा मिली है। ग्रामीण अब अपनी भूमि पर जल संरक्षण संरचनाएँ बनवाने हेतु आगे आ रहे हैं। इस डबरी निर्माण कार्य ने न केवल श्री दुलार सिंह के जीवन में स्थायी आजीविका का आधार तैयार किया है, बल्कि यह मनरेगा के उद्देश्य रोजगार के साथ स्थायी संपत्ति निर्माण का एक उत्कृष्ट उदाहरण बन गया है।

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नौसेना के नए पोतों का नामकरण होगा छत्तीसगढ़ की नदियों के नाम पर, प्रदेश में सेना भर्ती रैली का प्रस्ताव

 छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज नई दिल्ली में केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से उनके निवास पर सौजन्य मुलाक़ात की। बैठक में बिलासपुर एयरपोर्ट के विस्तार, रक्षा क्षेत्र के विकास, पूरे प्रदेश में सेना भर्ती रैलियों के आयोजन एवं नौसैनिक पोतों के नामकरण जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर सार्थक चर्चा हुई। इस अवसर पर केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य राज्यमंत्री  तोखन साहू और मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह भी उपस्थित थे।

 

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बैठक के दौरान रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह को अवगत कराया कि बिलासपुर में रक्षा मंत्रालय की भूमि है। इस भूमि को उन्होंने बिलासपुर एयरपोर्ट के विस्तार के लिए उपलब्ध कराने का अनुरोध किया। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने यहां रक्षा क्षेत्र से संबंधित विकासात्मक कार्य भी आरंभ करने का आग्रह किया।

 

मुख्यमंत्री ने यह भी रेखांकित किया कि छत्तीसगढ़ में सेना में भर्ती होने के प्रति युवाओं में विशेष उत्साह है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के युवाओं में अनुशासन, शारीरिक क्षमता और देशभक्ति की भावना है। इस आधार पर उन्होंने रक्षा मंत्री से आग्रह किया कि पूरे प्रदेश में विशेष “सेना भर्ती रैलियों” का आयोजन किया जाए, जिससे युवाओं को अपने ही प्रदेश में देश सेवा का अवसर मिल सके।

 

बैठक में मुख्यमंत्री ने राज्य की सांस्कृतिक पहचान और गौरवशाली परंपराओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की नदियाँ — इंद्रावती, महानदी — केवल जलस्रोत नहीं, बल्कि प्रदेश की आत्मा हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि रक्षा मंत्रालय जब भी नए नौसैनिक पोतों या जहाजों को लॉन्च करे, तो उनमें से कुछ का नाम छत्तीसगढ़ की नदियों और क्षेत्रों के नाम पर रखा जाए, जैसे INS इंद्रावती, INS महानदी या INS बस्तर। यह न केवल प्रतीकात्मक रूप से सुंदर होगा, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गौरव प्रदान करेगा।

 

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस अवसर पर राज्य सरकार की नई औद्योगिक नीति के तहत रक्षा और इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण को प्रोत्साहन देने की योजना की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यह नीति प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के “आत्मनिर्भर भारत” के विज़न के अनुरूप है और इससे छत्तीसगढ़ में उच्च तकनीकी प्रशिक्षण, अनुसंधान और निजी निवेश के अवसर बढ़ेंगे।

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युवाओं के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं की राह आसान बना रहा है नव संकल्प शिक्षण संस्थान युवा कर रहे परीक्षाओं की तैयारी।

 

कलेक्टर रोहित व्यास के मार्गदर्शन में जिला प्रशासन द्वारा संचालित नव संकल्प शिक्षण संस्थान आर्थिक रूप से कमजोर युवाओं के लिए नई राह और नई उम्मीद लेकर आया है। यह संस्थान न केवल गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण उपलब्ध करा रहा है, बल्कि कई युवाओं ने यहां से तैयारी कर सरकारी नौकरियों में सफलता भी हासिल की है।

   संस्थान में प्रशिक्षण के साथ आवास एवं भोजन की निःशुल्क सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। वर्तमान में यहां सीजीपीएससी, एसएससी जनरल ड्यूटी और व्यापम की प्रतियोगी परीक्षाओं की कक्षाएं संचालित हो रही हैं। इनमें 60 छात्र-छात्राएं सीजीपीएससी, 50 एसएससी जनरल ड्यूटी और 90 व्यापम परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं।

   संस्थान में प्रतियोगी छात्रों की क्षमता बढ़ाने के लिए साप्ताहिक टेस्ट का आयोजन कर उन्हें लगातार आंका और सुधार किया जाता है। सीजीपीएससी परीक्षार्थियों के लिए मुख्य परीक्षा की तैयारी पर विशेष रूप से जोर दिया जा रहा है। इसके साथ ही यूपीएससी एवं पीएससी से चयनित जिला स्तरीय अधिकारी समय-समय पर यहां आकर मार्गदर्शन देते हैं, जिससे विद्यार्थियों को प्रेरणा और दिशा मिल सके।

   संस्थान में पुस्तकालय सह पठन कक्ष की भी व्यस्था किया जा रहा है, जिससे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी और बेहतर हो सके। इसके अलावा डबल लर्निंग क्लासेस संचालित किया जा रहा है, ताकि छात्र-छात्राएं अतिरिक्त अभ्यास कर सफलता की राह पर और मजबूती से आगे बढ़ सकें।

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