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शहीदे आजम सरदार भगत सिंह के जन्म दिवस विशेष कार्यक्रम

शहीद-ए-आज़म भगत सिंह: एक आदर्श क्रांतिकारी भगत सिंह, भारत के स्वतंत्रता संग्राम के महानायक, एक ऐसा नाम है जो साहस, त्याग और देशभक्ति का प्रतीक बन गया है। 28 सितंबर 1907 को पंजाब के बंगा गाँव में जन्मे भगत सिंह ने बहुत छोटी उम्र में अंग्रेजों की गुलामी के खिलाफ लड़ने का संकल्प लिया। वे न केवल एक योद्धा थे बल्कि एक विचारक भी थे, जिन्होंने अपने समय के राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर गहराई से चिंतन किया। उनका जीवन संघर्ष और समर्पण का अद्वितीय उदाहरण है। 23 साल की अल्पायु में देश के लिए हंसते-हंसते फांसी के फंदे को चूमने वाले भगत सिंह ने यह सिद्ध कर दिया कि आजादी की लड़ाई केवल हथियारों से नहीं, बल्कि विचारों और आत्मबलिदान से भी लड़ी जा सकती है। भगत सिंह का विश्वास था कि स्वतंत्रता केवल बाहरी शत्रु से मुक्त होना नहीं है, बल्कि समाज में फैली असमानता, जातिवाद, और गरीबी से भी मुक्ति होनी चाहिए। उनका मानना था कि एक न्यायपूर्ण और समतावादी समाज ही सच्ची स्वतंत्रता का आधार हो सकता है। उनका प्रसिद्ध नारा, "इंकलाब जिंदाबाद" आज भी हर भारतीय के दिल में गूंजता है। भगत सिंह का साहस और उनका विचारधारा प्रेरणा देती है कि हम अपने समाज को बेहतर बनाने के लिए हमेशा तत्पर रहें। इस महान क्रांतिकारी के जन्मदिवस पर हम सभी को उनके आदर्शों को आत्मसात करके एक सशक्त और समतावादी भारत की दिशा में कदम बढ़ाने चाहिए। भगत सिंह को कोटि-कोटि नमन!
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सावधान : सड़कों के किनारे गाड़ी पार्क करने पर देना होगा शुल्क, जानिए क्या है नई पार्किंग पॉलिसी

अब सड़कों के किनारे गाड़ी पार्क करने पर शुल्क देना अनिवार्य होगा। उत्तर प्रदेश नगर विकास विभाग ने इस नई पार्किंग नीति की तैयारी पूरी कर ली है, जिसका उद्देश्य सड़क पर गाड़ी पार्किंग की व्यवस्था को नियंत्रित करना और अवैध पार्किंग को रोकना है। यह नीति खासतौर पर रात के समय पार्किंग पर ध्यान केंद्रित करेगी। नई पार्किंग शुल्क संरचना नई नीति के तहत, यदि कोई व्यक्ति नगर निगम के अधिकार क्षेत्र में आने वाले सार्वजनिक स्थानों पर रात में अपनी गाड़ी पार्क करता है, तो उसे निम्नलिखित शुल्क चुकाने होंगे: - प्रति रात: 100 रुपये - एक हफ्ते के लिए: 300 रुपये - एक महीने के लिए: 1000 रुपये - एक साल के लिए: 10,000 रुपये यदि कोई बिना परमिट के गाड़ी पार्क करता है, तो उससे तीन गुना शुल्क वसूल किया जाएगा। उदाहरण के लिए, अगर कोई बिना अनुमति गाड़ी पार्क करता है, तो उसे प्रति रात 300 रुपये चुकाने होंगे। यह कदम अवैध पार्किंग पर रोक लगाने के लिए उठाया जा रहा है। इस प्रस्ताव के संबंध में नगर विकास विभाग ने संबंधित पक्षों से सुझाव और आपत्तियों को आमंत्रित किया है। यह प्रक्रिया सुनिश्चित करेगी कि नीति को व्यापक समर्थन मिले और सभी संबंधित हितधारकों की चिंताओं का समाधान किया जा सके। जैसे ही कैबिनेट से मंजूरी मिलेगी, नगर निगम में नई पार्किंग नीति लागू कर दी जाएगी। अवैध पार्किंग की समस्या राज्य में पार्किंग की कोई स्पष्ट नीति ना होने के कारण अवैध पार्किंग की समस्या बढ़ रही थी। अव्यवस्थित पार्किंग के चलते शहरों में यातायात की समस्याएं उत्पन्न हो रही थीं। सीएम योगी आदित्यनाथ ने पिछले दिनों नगर विकास विभाग को निर्देश दिया था कि एक सुनियोजित पार्किंग नीति लाए, जिससे कि इस समस्या का समाधान किया जा सके। नगर निगम द्वारा विकसित पार्किंग को निजी हाथों में देने का भी विचार किया जा रहा है। बड़े शहरों में पार्किंग ठेकों में बड़ी कंपनियों को भी टेंडर डालने की अनुमति दी जाएगी। इससे पार्किंग की बेहतर व्यवस्था हो सकेगी और नागरिकों को सुविधाएं प्राप्त होंगी। विभिन्न स्थानों पर शुल्क वसूली नई नीति के तहत, नगर निगम से अनुमति लेने के बाद ठेकेदार रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, कॉलेज, ऑफिस, हॉस्टल, और अन्य व्यावसायिक भवनों के पास निर्मित पार्किंग स्थानों से शुल्क वसूल कर सकेंगे। यह नीति विशेष रूप से भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में पार्किंग की सुविधा को बढ़ाने के लिए बनाई गई है। मल्टी लेवल कार पार्किंग नई नीति के अंतर्गत मल्टी लेवल कार पार्किंग की सुविधा भी विकसित की जाएगी। इससे पार्किंग की समस्या को हल करने में मदद मिलेगी, क्योंकि अधिक वाहन एक ही स्थान पर पार्क किए जा सकेंगे। यह सुविधा शहरी क्षेत्र में वाहनों की संख्या को देखते हुए आवश्यक है। आबादी के आधार पर शुल्क नई पार्किंग नीति में आबादी के आधार पर शुल्क की संरचना भी तय की गई है: 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में - दो पहिया वाहन: 855 रुपये (मासिक पास) - चार पहिया वाहन: 1800 रुपये (मासिक पास) - 2 घंटे के लिए: दो पहिया 15 रुपये, चार पहिया 30 रुपये - 1 घंटे के लिए: दो पहिया 7 रुपये, चार पहिया 15 रुपये 10 लाख से कम आबादी वाले शहरों में - दो पहिया वाहन: 600 रुपये (मासिक पास) - चार पहिया वाहन: 1200 रुपये (मासिक पास) - 2 घंटे के लिए: दो पहिया 10 रुपये, चार पहिया 20 रुपये - 1 घंटे के लिए: दो पहिया 5 रुपये, चार पहिया 10 रुपये Night parking रात की पार्किंग के लिए समयावधि 11 बजे से सुबह 6 बजे तक होगी। इस समय के दौरान पार्किंग के लिए अलग रेट निर्धारित किया जाएगा, जो सामान्य दिन के रेट से भिन्न होगा।
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स्कूल किताबों का एक और जखीरा बरामद

*पाठ्य पुस्तक घोटाला ब्रेकिंग न्यूज़* सरकारी स्कूल की पाठ्य पुस्तकों को बच्चों में ना बांटकर कबाड़ में मिलने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है | कुछ दिन पहले हमने एक किताब गलाने वाली फैक्ट्री में किताबों का पहाड़ देखा था ,, किताबों को रद्दी बना दिया गया, उन्ही किताबों को रद्दी के भाव में स्कूल शिक्षा विभाग ने बेच दिया था ,, आज सुचना मिलने पर हमने अभनपुर विकास खंड के स्वामी आत्मानंद इंग्लिश मीडियम स्कूल में पहुंचे तो हमने देखा की यहां बच्चों को किताबें बांटने के बजाय उसे गोदाम में रखकर खराब किया जा रहा है और बाद में इन्ही किताबों को रद्दी में कौड़ियों के दाम पर बेच दिया जाएगा , बच्चो के भविष्य को सावरने वाली इन किताबों को कैसे रद्दी बनाया जाता है
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एक साल 9 महीने से जेल में बंद सौम्या चौरसिया को मिली जमानत

छत्तीसगढ़ की अधिकारी और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की करीबी अधिकारी सौम्या चौरसिया को सुप्रीम कोर्ट ने शर्तों के साथ जमानत दी। दिसंबर 2022 में ED ने गिरफ़्तार किया था। जमानत पर आने के बाद भी सौम्या चौरसिया निलंबित रहेंगी। बता दें कि छत्तीसगढ़ में कोयला घोटाले और मनी लांड्रिंग मामले को लेकर कांग्रेस सरकार के दौरान मुख्यमंत्री की उपसचिव रही सौम्या चौरसिया को गिरफ्तार किया गया था। कोयल मामले को लेकर ईडी ने सौम्या चौरसिया को 2 दिसंबर 2022 में गिरफ्तार करने के बाद पूछताछ की थी। इस पूछताछ के बाद से सौम्या चौरसिया सेंट्रल जेल रायपुर में बंद है। Supreme Court ईडी के मुताबिक छत्तीसगढ़ में हुए कोयले घोटाले में सौम्या चौरसिया की महत्वपूर्ण भूमिका बताई गई है। मामले में किगपिन सूर्यकांत तिवारी के ऊपर सौम्या चौरसिया का प्रशासनिक सपोर्ट बताया गया है। लाइव लॉ की एक रिपोर्ट के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस उज्जल भुइयां की खंडपीठ में मंगलवार को सौम्या की जमानत याचिका पर सुनवाई हुई।छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के 28 अगस्त, 2024 के आदेश को चौरसिया की चुनौती से निपट रही थी, जिसके तहत उनकी तीसरी जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी। इस पर 13 सितंबर को नोटिस जारी किया गया था। एक साल 9 महीने से जेल में बंद थी सौम्या चौरसिया की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट सिद्धार्थ दवे ने आग्रह किया कि उनकी मुवक्किल ने लगभग 1 साल और 9 महीने हिरासत में बिताए हैं, एक बार भी रिहा नहीं किया गया है, और मुकदमा शुरू भी नहीं हुआ है। इसके अलावा, 3 सह-आरोपियों को अंतरिम जमानत पर रिहा कर दिया गया है (जिसके आदेशों की पुष्टि की गई है)। मनीष सिसोदिया के मामले में अदालत के हालिया फैसले पर भरोसा किया गया था । अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने विरोध किया इसके विपरीत, अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने ईडी के लिए उपस्थिति दर्ज करते हुए प्रस्तुत किया कि चौरसिया, जो एक सिविल सेवक (और इस प्रकार जनता के ट्रस्टी) थे, अंतरिम जमानत दिए गए 3 व्यक्तियों के मुकाबले एक अलग पायदान पर खड़े हैं। उसकी भूमिका पर जोर देते हुए, एएसजी ने चौरसिया की तुलना मुख्य आरोपी सूर्यकांत तिवारी से की और आरोप लगाया कि उसे बहुत पैसा मिला। यह दावा करते हुए कि मामले में विस्तृत सुनवाई की आवश्यकता है, एएसजी ने जवाब दाखिल करने के लिए समय देने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा, ”कोयला खदानों से कोयला वितरण आदेश के आधार पर भेजा जा रहा था। और उसके बाद, परिवहन परमिट जारी किया जाना था। यह ऑनलाइन किया जा रहा था। आरोपी की निशानदेही पर साजिश रची गई, इस ऑनलाइन को ऑफलाइन में बदल दिया गया। जैसे ही वास्तविक सुपुर्दगी आदेश दिया गया, ट्रांसपोर्टरों को तब तक परिवहन परमिट नहीं दिया गया जब तक कि वे 25 रुपए प्रति टन कोयले और 100 रुपए प्रति टन लोहे के पैलेट्स का भुगतान नहीं करते। इस अवैध कर से लगभग 400 करोड़ रुपये की भारी राशि एकत्र की गई। वह (चौरसिया) मुख्यमंत्री कार्यालय में एक अधिकारी थीं.’ उन्होंने दलील दी कि जब नौकरशाह इस तरह की गतिविधियों में शामिल हों तो गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए. शुरू में वकीलों को सुनने के बाद जस्टिस कांत ने कहा कि एएसजी को जवाब दाखिल करने में समय लग सकता है लेकिन पीठ इस बीच चौरसिया को अंतरिम जमानत देने को इच्छुक थी। हालांकि, एएसजी ने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा, ‘यह मामला खत्म हो जाएगा… मेरे सामने अभी तक ऐसा कोई मामला नहीं आया है जहां अंतरिम जमानत की पुष्टि नहीं हुई हो। एएसजी की आपत्तियों और समय के लिए अनुरोध को ध्यान में रखते हुए, पीठ ने मामले को कल तक के लिए स्थगित कर दिया। मामले को फिर से सूचीबद्ध करते हुए, न्यायमूर्ति कांत ने एएसजी पर जोर दिया कि अगर चौरसिया अंततः जमानत की राहत (विस्तृत सुनवाई के बाद) के हकदार पाए जाते हैं, तो वह अनावश्यक रूप से प्रक्रियात्मक देरी का शिकार होंगे। बुधवार को सुनवाई के बाद कोर्ट ने चौरसिया को सशर्त जमानत दे दी। cg24news.in
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अरविंद केजरीवाल ने मोहन भागवत से किए पांच सवाल : मांगा जवाब

*आम आदमी पार्टी के मुखिया दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत से पांच सवालों का जवाब मांगा, क्या है वह सवाल ?* जेल से छूटने के बाद, मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद अरविंद केजरीवाल ने आज जंतर मंतर से जनता की अदालत में मंच से आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत से पांच सवाल किए आम आदमी पार्टी के संयोजक पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत से पूछा कि 1. जिस तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी तेज भर में लालच देकर ईडीसीबीआई के माध्यम से विपक्ष पर दबाव बना रहे हैं क्या आप नहीं मानते यह भारतीय जनतंत्र के लिए घातक है | 2. देशभर में सबसे भ्रष्टाचारी नेताओं को मोदी जी ने अपनी पार्टी में शामिल कर लिया जिन्हें उन्होंने स्वयं भ्रष्टाचारी कहा था ऐसे सैकड़ो लोगों को वह अपनी पार्टी में शामिल कर महत्वपूर्ण पदों पर सुशोभित कर रहे हैं मोहन भागवत जी क्या आप इस बाबत कुछ कहेंगे 3. बीजेपी आरएसएस की कोख से पैदा हुई है कहा जाता है कि यह देखना रस की जिम्मेदारी है कि बीजेपी भ्रष्ट न हो मोहन भागवत जी क्या आपने मोदी जी को गलत हरकतें करने से रोका ? 4. बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा जी ने कहा कि बीजेपी को रस की जरूरत नहीं है तो मेरा यह सवाल है कि बेटा इतना बड़ा हो गया है की मां को आंखें दिखाने लग गया जिसे रस नेपाली पुष्कर पीएम बनाया वही आंखें दिखा रहा है मोहन भागवत जी इस पर आप क्या कहेंगे ? 5. भारतीय जनता पार्टी ने नियम बनाया था कि 75 साल की उम्र के बाद रिक्वायरमेंट होगा आडवाणी मुरली मनोहर जोशी शांता कुमार जैसे अनेक नेताओं को इस नियम के तहत साइट कर दिया गया अब कहा जाता है कि यह नियम मोदी जी पर लागू नहीं होगा क्यों मोहन भागवत जी बताएंगे ? आम आदमी पार्टी के संयोजक दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के जंतर मंतर से किए गए इन सवालों का जवाब आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की तरफ से कब आता है और क्या आता है इसका इंतजार देश की सभी नेताओं एवं नागरिकों को रहेगा
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नेशनल लोक अदालत में लाखों लोगों को मिला त्वरित न्याय

लाखो लोगों को मिला त्वरित न्याय

वर्ष के तृतीय नेशनल लोक अदालत का आयोजन

वर्ष के तृतीय नेशनल लोक अदालत का आयोजन जिला न्यायालय रायपुर में लाखो लोगों को मिला त्वरित न्याय। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) नई दिल्ली के निर्देशानुसार वर्ष 2024 में आयोजित होने वाले नेशनल लोक अदालत के अनुकम में माननीय न्यायमूर्ति श्री रमेश सिन्हा मुख्य न्यायाधीश छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय एवं मुख्य संरक्षक छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण बिलासपुर के मार्गदर्शन एवं माननीय श्री न्यायमूर्ति गौतम भादुड़ी न्यायाधीश, छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय एवं कार्यपालक अध्यक्ष छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण बिलासपुर के निर्देशानुसार दिनांक 21/09/2024 को छत्तीसगढ़ राज्य में तालुका स्तर से लेकर उच्च न्यायालय स्तर तक सभी न्यायालयों में नेशनल लोक अदालत का आयोजन किया जाकर राजीनामा योग्य प्रकरणों में पक्षकारों की आपसी सुलह समझौता से निराकृत किये गये हैं। उक्त लोक अदालत में प्रकरणों के पक्षकारों की भौतिक तथा वर्चुअल दोनों ही माध्यमों से उनकी उपस्थिति में निराकृत किये गये।

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण रायपुर के अध्यक्ष / प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री अब्दुल जाहिद कुरैशी, प्रधान न्यायाधीश कुटुम्ब न्यायालय श्रीमान हेमंत सराफ, जिला एवं सत्र न्यायाधीशगण व अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष श्री हितेन्द्र तिवारी, द्वारा जिला रायपुर में नेशनल लोक अदालत का शुभारंभ दीप प्रज्जवलित कर किया गया। जिसमें समस्त न्यायाधीशगण, पक्षकारगण, अधिवक्तागण, बैंक के अधिकारीगण, राजस्व अधिकारी, नगर निगम के अधिकारी, न्यायालयीन कर्मचारीगण, पैरालिगल वालिंटियर, विधि एवं स्कूल के छात्र छात्रायें भी उपस्थित रहे। इस बार की नेशनल लोक अदालत भी हाईब्रिड तरीके से आयोजित की गयी, जिसमें पक्षकार भौतिक उपस्थिति के साथ-साथ वर्चुअल या ऑनलाईन के माध्यम से भी राजीनामा किया गया। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश अब्दुल जाहिद कुरैशी ने कहा कि, नालसा एवं सालसा के माध्यम से पुरे देश भर में इस वर्ष का तृतीय नेशनल लोक अदालत का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें हम सभी के बहुत महत्वपूर्ण सहभागिता है और हम सभी के संयुक्त प्रयासो से ही नेशनल लोक अदालत के माध्यम से जनता तक सरल वः सहज तरीके से न्याय पहुंचेगा। इस लोक अदालत में सभी प्रकार के प्रकरण, पारिवारिक प्रकरण दाण्डिक प्रकरण, सिविल वाद एवं राजस्व प्रकरणों के निराकरण के साथ ही पेंशन लोक अदालत के माध्यम से पेंशन प्रकरण तथा मोहल्ला लोक अदालत के माध्यम से जनोपयोगी सेवाओं के प्रकरणों के निराकरण किया जायेगा साथ ही साथ प्री-लिटिगेशन प्रकरणो (जो अदालत तक पहुँचने के पूर्व) का भी निराकरण किया जायेगा। उन्होने बताया कि, नेशनल लोक अदालत का प्रचार-प्रसार ट्रैफिक लाउडिस्पीकर के माध्यम से तथा रेल्वे स्टेशन में रेल्वे अलाउंसमेंट सिस्टम के माध्यम से एवं पैरालीगल वालिटिंयर के माध्यम से तथा ग्रामिण क्षेत्रों में कोटवारो के द्वारा मुनादी कराकर नेशनल लोक अदालत का प्रचार-प्रसार कराया गया । लोक अदालत में जिनका भी राजीनामा योग्य प्रकरण लम्बित है उनकों प्रोत्साहित किया गया। जिन पक्षकारों को किसी भी प्रकार की शंका हो उनको परामर्श हेतु जिला विधिक सेवा प्राधिकरण रायपुर द्वारा तालुका विधिक सेवा समिति, गरियाबंद, देवभोग, राजीम, तिल्दा से सम्पर्क कर अपने प्रकरणों के संबंध में जानकारी लेने हेतु प्रोत्साहित किया गया । श्री रमेश कुमार चौहान, सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण रायपुर द्वारा व्यक्त किया गया कि, प्रदेश में पुनः एक बार दिव्यांग जनों के लिये नालसा, सालसा तथा केन्द्र सरकार की योजनाओं की सफलता हेतु माननीय प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश महोदय रायपुर द्वारा एक अभूतपूर्व पहल करते हुए समाज कल्याण विभाग रायपुर के सहयोग से दिव्यांग एवं वरिष्ठ जन हितग्राहियों को व्हील चेयर एवं श्रवण यंत्र का वितरण, शिक्षा विभाग के सहयोग से छात्राओं को सायकिल, पाठ्यपुस्तकों तथा गणवेश, का वितरण इसी प्रकार श्रम विभाग के सहयोग से नालसा की (असंगठित क्षेत्र के कामगारों को निःशुल्क विधिक सहायता योजना 2015) के अंतर्गत हितग्राहियों को चेक वितरण एवं वन विभाग के सहयोग से पर्यावरण जागरूकता संदेश देते हुए पक्षकारों एवं आमजनों को निःशुल्क पौधा वितरण किया गया। जिला महिला एवं बाल विकास विभाग के माध्यम से रेडी टू ईट प्रदर्शनी किया गया। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण रायपुर एवं गुरुद्वारा धन धन बाबा साहिब जी तेलीबांधा रायपुर के संयुक्त तत्वाधान में सैकड़ो किलोमीटर से आये पक्षकारो को न्याय के साथ साथ निःशुल्क भोजन प्राप्त हुआ जिससे उनके चेहरों पर संतोष दिखा दी, न्याय पालिका के माध्यम से उन्हे हर प्रकार का सहयोग प्राप्त हो रहा है। छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण बिलासपुर द्वारा दिये गये नये संकल्प मोहल्ला लोक अदालत में पहुँचे न्यायाधीश / सभापति जनोपयोगी लोक अदालत माननीय श्री ऋषी कुमार बर्मन पर पक्षकारो ने की फूलों के हार से उनका स्वागत किया । उक्त छ०ग० राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण बिलासपुर द्वारा दिये गये नये संकल्प मोहल्ला लोक अदालत में पहुँचे न्यायाधीश / सभापति जनोपयोगी लोक अदालत माननीय श्री ऋषी कुमार बर्मन के द्वारा त्वरित निर्णय करते हुए राहत पहुँचायी गयी। उक्त लोक अदालत का आयोजन न्याय तुहर द्वार योजना के तहत किया गया। मोहल्ला लोक अदालत के पीठासीन अधिकारी माननीय श्री ऋषी कुमार बर्मन सभापति/अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश स्थायी लोक अदालत द्वारा घटना स्थल पर जाकर ही जनोपयोगी सेवाओं से संबंधित मामलों का निराकरण किया मोहल्ले वासियों द्वारा उनका स्वांगत किया गया। उनके द्वारा 192 प्रकरण घटना स्थल पर जाकर न्यायाधीश द्वारा निराकृत किया गया स्थलो का नाम - जोन क्रमांक 01 (वीर शिवाजी वार्ड), जोन क्रमांक 04 (सुभाष स्टेडियम), जोन क्रमांक 10 (श्याम नगर) के स्थलो पर जाकर प्रकरणों का निराकरण किया गया। आज तृतीय नेशन लोक अदालत में निम्नानुसार प्रकरण का निराकरण किया गया। राजस्व न्यायालय-103178 प्रकरण कुटुम्ब न्यायालय- 131 छ०ग० राज्य परिवहन अधिकरण - 04 प्रकरण न्यायालय में लम्बित लगभग-9569 प्रकरण । प्री-लिटिगेशन एवं नगर निगम से मामले 68587 प्रकरण का निराकरण जनोउपयोगी सेवाओं से संबंधित प्रकरण 651 प्रकरण नेशनल लोक अदालत के माध्यम से पक्षकारों को मिली कुल राशि 29,57,92819 मोहल्ला लोक अदालत 628 प्रकरण का निराकरण हुआ। (सफल कहानी) :- 10 वर्षों से अधिक लम्बित प्रकरण धारा 125 दं.प.सं. के मामले का किया गया निराकरण (माननीय हेमंत सराफ, प्रधान न्यायाधीश कुटुम्ब न्यायालय रायपुर )। आवेदिका के द्वारा अपने पति के विरूद्ध धारा 125 दं.प्र.सं. भरण-पोषण राशि दिलाये जाने बाबत् प्रकरण दिनांक 22.09.2008 को प्रस्तुत किया गया था, जिसमें न्यायालय द्वारा दिनांक 10.12.2008 को प्रतिमाह 5,000/- भरण पोषण राशि आवेदिका को दिलाये जाने का आदेश पारित किया गया था। उक्त आदेश के परिपालन में आवेदिका ने वसूली हेतु धारा 125 (3) दं.प्र.सं. का प्रकरण दिनांक 05.01.2015 को पेश किया गया किन्तु आदेश पारित करने के पश्चात भी अनावेदक के द्वारा भरण पोषण प्रदान नही की जा रही थी, जिस कारण आवेदिका को गंभीर आर्थिक कठिनाईयों का सामना करना पड़ रहा था। लेकिन अनावेदक द्वारा राशि अदा नही कर रहा था। न्यायालय के द्वारा दोनों पक्ष को समझाईश दी गई तथा उनके बीच सुलह का अथाह प्रयास किया गया, उसके पश्चात उभयपक्ष के द्वारा आपस में राजीनामा कर लिया गया । माननीय न्यायालय के समझाईश पर पति पत्नि हुए एक :- (माननीय हेमंत सराफ प्रधान न्यायाधीश कुटुम्ब न्यायालय रायपुर ) आवेदिका के द्वारा अनावेदिका अपने पति के विरूद्ध भरण-पोषण का प्रकरण इस आधार पर प्रस्तुत किया गया था कि, उसका पति नशा का आदि है और उसके साथ मारपीट व लड़ाई-झगड़ा कर घर से निकाल दिया है। उक्त प्रकरण में माननीय न्यायालय द्वारा लगातार समझाईश दी जाती रही कि साथ में रहकर अपने दाम्पत्य जीवन को संवारे तथा उनके बीच-सुलह का अथाह प्रयास किया गया। अंततः पति-पत्नी अपने वाद-विवाद को भूलकर आपस में राजीनामा कर प्रकरण को वापस लेकर सुखद जीवन जीने के लिये एक साथ चले गये। सिविल वाद के प्रकरण में लोक अदालत के लाभ की जानकारी देकर पक्षकारों के आपसी सहमति से किया गया प्रकरण का निराकरण:- (माननीय कु० भारती कुलदीप, न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी रायपुर ) सिविल वाद प्रकरण में त्वरित निराकरण हेतु माननीय न्यायालय द्वारा पक्षकरों को लोक अदालत के लाभ से अगवत कराया गया एवं आपसी मनमुटाव को दूर कर आपस में राजीनामा करने की सलाह दी गई। पक्षकार राजीनामा हेतु तैयार हुए एवं आपसी राजीनामा करते हुए प्रकरण का निराकरण किया गया । cg24news.in

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राहुल गांधी के खिलाफ छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में जुर्म दर्ज

*लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर रायपुर छत्तीसगढ़ में जुर्म दर्ज* विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा पिछले दिनों अमेरिका प्रवास के दौरान सिख समाज के बारे में दिए गए बयान के खिलाफ छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के थाना सिविल लाइन में जुर्म दर्ज किया गया है भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता अमरजीत छाबड़ा ने किसकी शिकायत थाना सिविल लाइन में की उनकी शिकायत पर पुलिस ने जुर्म दर्ज कर मामले पर जांच में लिया है | अब देखने वाली बात यह है की राजधानी रायपुर के सिविल लाइन थाना पुलिस द्वारा राहुल गांधी के खिलाफ किस तरह की कार्रवाई की जाती है थाना में उपस्थित होने नोटिस दिया जाएगा या फिर छत्तीसगढ़ पुलिस दिल्ली जाकर गिरफ्तार करेगी !
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कांग्रेस ने 21 सितंबर को छत्तीसगढ़ बंद का किया आह्वान

21 सितंबर को कांग्रेस ने छत्तीसगढ़ बंद का आह्वान किया
  • कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं का प्रतिनिधिमंडल लोहारीडीह गया

रायपुर/19 सितंबर 2024। प्रदेश में बिगड़ती कानून व्यवस्था और कवर्धा की घटना को लेकर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने शनिवार 21 सितंबर को छत्तीसगढ़ बंद का आह्वान किया है।
कांग्रेस के नेताओं का प्रतिनिधिमंडल पीसीसी अध्यक्ष दीपक बैज, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के साथ कवर्धा के लोहारीडीह गया था। प्रतिनिधिमंडल में पूर्व अध्यक्ष धनेन्द्र साहू, पूर्व मंत्री डॉ. शिवकुमार डहरिया, पूर्व विधायक विकास उपाध्याय सहित वरिष्ठ नेता शामिल थे।
कांग्रेस के नेतागण पुलिस अभिरक्षा में मृत प्रशांत साहू की अंत्येष्टि में शामिल हुये तथा परिजनों से भी मिले। परिजनों ने पुलिस के मारपीट के कारण प्रशांत की मौत होने का आरोप लगाया।
लोहारीडीह घटना स्थल से लौटने के बाद प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल प्रेस कांफ्रेंस में सरकार पर लगाए कई गंभीर आरोप
गृह मंत्री के जिले में घटना होने के चलते गृह मंत्री को बर्खास्त करने मुख्यमंत्री से की मांग
पूरे प्रदेश में कानून व्यवस्था चरमराई है,
आम आदमी और सरकार में बैठे हुये लोगों के लिये अलग कानून है।
लगातार हो रही अपराधिक घटनाओं को पुलिस रोक नहीं पा रही है।
घटना की जांच हाईकोर्ट की सीटिंग जज ने करने की मांग
कचरू साहू का दोबारा पोस्टमार्टम करने की मांग प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने की
रेंगाखार थाने की सीसीटीवी फुटेज निकलवाने की मांग
सरकार और पुलिस चाहती तो घर जलाने की घटना को रोक सकती थी, पूरे प्रदेश में भय का माहौल है।
कवर्धा के पूरे घटनाक्रम की हाईकोर्ट के सिटिंग जज से जांच कराया जाय।


प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि प्रदेश में महिलाएं, बच्चे, युवा सुरक्षित नहीं है, कानून व्यवस्था बदहाल है। मुख्यमंत्री, गृह मंत्री को तत्काल बर्खास्त किया जाए, कांग्रेस आगामी शनिवार 21 सितंबर को प्रदेश बंद का आह्वान किया, लोहारीडीह की घटना को दबाने का प्रयास किया था, कांग्रेस की सजगता से मामले को नहीं दबा पाए।

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने लगाए गंभीर आरोप। उन्होंने मांग किया कि डॉक्टर की टीम बनाकर फिर से शिवकुमार की पीएम किया जाए। थाने का सीसीटीवी जब्त किया जाए, बंद कैदियों की पिटाई की गई है इसलिए मिलने नहीं दिया जा रहा है। एसपी को बर्खास्त किया जाए।
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भाजपा नेता के हत्या के आरोपी की कवर्धा जेल में मौत

ब्रेकिंग न्यूज़ भाजपा नेता के हत्या के आरोपी की कवर्धा जेल में मौत कवर्धा जेल में बंदी की मौत, लोहारीडिह आगजनी मामले में था मृतक आरोपी - लोहारीडिह आगजनी मामले में जिला जेल में बंद विचाराधीन बंदी प्रशांत साहू की आज सुबह लगभग 10 बजकर 15 मिनट संदिग्ध मौत हो गई है पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए मर्चुरी में रखा है परिजनों को घटना की सूचना दे दि गई है और परिजनों के आने के बाद पोस्टमार्टम किया जाएगा.हत्या के आरोप में जेल दाखिल था आरोपी बताया जा रहा कि मृतक प्रशांत साहू और उसके बड़े भाई को कबीरधाम पुलिस ने रविवार को हुए लोहारीडिह उप सरपंच के मकान को आग लगाने और पूर्व सरपंच को जलाकर हत्या करने के आरोप में गिरफ्तार किया था. कवर्धा आगजनी केस में पुलिस ने कुल 160 लोगों पर एफआईआर दर्ज किया है पुलिस ने 60 लोगों को अबतक इस केस में गिरफ्तार किया था इन्ही लोगो के साथ मृतक आरोपी को भी जेल दाखिल किया गया था और बुधवार सुबह प्रशांत साहू की मौत हो गई. आपको बता दें कि सी जी 24 से बात करते हुए जेलर RK बंजारे ने बताया कि प्रशांत की तबीयत बिगड़ी तो उसे जिला अस्पताल भेजा गया था. इलाज के बाद वापस जेल दाखिल किया गया. वहीं बुधवार सुबह भी मृतक की तबीयत बिगड़ी तो अस्पताल लाया जा रहा था.लेकिन उसने अस्पताल लाने के दौरान दम तोड़ दिया

.मृतक के शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल में रखा गया है. परिजनों के आने के बाद पोस्टमार्टम किया जाएगा. संदिग्ध परिस्थितियों में हुई आरोपी प्रशांत की मौत क्योंकि यदि आरोपी की तबियत खराब थी तो कैसे डॉक्टरों ने उसे अस्पताल से छुट्टी दे कर वापस जेल दाखिल करवा दिया और अचानक कैसे जेल के अंदर आरोपी की मौत हुई मामले की उच्च स्तरीय जांच होना आवश्यक है।

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केजरीवाल को चाहिए कि ईडी, सीबीआई और एल.जी. से पूछ लें कि किसे मुख्यमंत्री बनाए ? अन्यथा ---

केजरीवाल को चाहिए कि ईडी, सीबीआई और एल.जी. से पूछ लें कि किसे मुख्यमंत्री बनाए ? दिल्ली के नए बनने वाले मुख्यमंत्री पर भ्रष्टाचार या घोटाले का कोई आरोप नहीं लगाएंगे ? दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल दिल्ली का नया सीएम घोषित करने से पहले केंद्र की एजेंसी ईडी, सीबीआई और दिल्ली के पावरफुल एलजी को पत्र लिखकर उनसे पूछ लेना चाहिए कि दिल्ली के किस विधायक को दिल्ली का नया मुख्यमंत्री बनाएं, कहीं ऐसा ना हो की जिसे भी अरविंद केजरीवाल दिल्ली का अगला मुख्यमंत्री घोषित करें उपरोक्त तीनों एजेंसियां उसे भी भ्रष्टाचारी और घोटालेबाज कह कर कार्यवाही ना कर दें ?
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जनता के सेवक के रूप में अपने कर्तव्यों का करें निर्वहन : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

*अधिकारी स्वयं को जनता का सेवक मानते हुए पूरे समर्पण, मेहनत और ईमानदारी से अपने कर्तव्यों का करें निर्वहन: मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय* *कलेक्टर एसपी कान्फ्रेंस में दिए गए निर्देशों का हो प्रभावी ढंग से पालन* *कलेक्टर एसपी कॉन्फ्रेंस से बदली हुई कार्यप्रणाली का तत्काल दिखना चाहिए जिलों में असर* *आत्म समर्पित माओवादियों के पुनर्वास के लिए व्यापक नीति जल्द* *स्थानीय समस्याओं का निराकरण जिला स्तर पर ही सुनिश्चित हो* *रायपुर में मुख्यमंत्री जनदर्शन माह में केवल एक बार होगा आयोजित* *महिलाओं के विरूद्ध अपराधों में अपराधी को सजा दिलाने त्वरित हो कार्यवाही* *जनता के सेवक के रूप में कर्तव्यों का करें निर्वहन* रायपुर, 13 सितम्बर 2024/मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कलेक्टरों और पुलिस अधीक्षकों से कहा है कि कलेक्टर एसपी कॉन्फ्रेंस में दिए गए निर्देशों का रिजल्ट कल से ही मैदानी स्तर पर दिखना शुरू हो जाए। उन्होंने कहा कि जिले स्तर की समस्याओं का निराकरण जिला स्तर पर ही किया जाए, इसके लिए सुविधा अनुसार जिले में नियमित जनदर्शन आयोजित किए जाएं। उन्होंने कलेक्टर और एसपी को सम्बोधित करते हुए कहा कि कलेक्टर एसपी कॉन्फ्रेंस में दिए गए निर्देशों का आज से ही त्वरित एवं प्रभावी परिपालन सुनिश्चित करते हुए अपनी कार्यप्रणाली को बेहतर करें, जिसका असर तत्काल जिलों में दिखना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्थानीय एवं जिले स्तर पर निराकृत हो सकने वाले मामले स्थानीय एवं जिले स्तर पर ही निराकृत हो, यह सभी कलेक्टर प्रति सप्ताह जनदर्शन लेकर सुनिश्चित करें। यदि स्थानीय स्तर पर निराकृत होने वाले प्रकरण राज्य स्तर पर आयोजित होने वाले मुख्यमंत्री जनदर्शन में आएंगे, तो वह संबंधित जिले में प्रशासनिक अमले की प्रभावशीलता पर प्रश्नचिन्ह लगने की दृष्टि से देखा जाएगा । उन्होंने कहा कि राज्य स्तर की समस्याओं का समाधान प्रदेश स्तर पर किया जाएगा। रायपुर में अब मुख्यमंत्री जनदर्शन माह में केवल एक बार आयोजित किया जाएगा, जिसमें महत्वपूर्ण और राज्य स्तरीय मामले ही आने चाहिए। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि आत्म समर्पित माओवादियों के पुनर्वास के लिए व्यापक नीति जल्द लायी जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार मोदी जी की गारंटी और सुशासन की गारंटी की सरकार है। अधिकारी स्वयं को जनता का सेवक मानते हुए पूरे समर्पण, मेहनत और ईमानदारी से अपने कर्तव्यों का निर्वहन करें। शासन की नीतियों और योजनाओं का लाभ अंतिम पंक्ति के व्यक्ति को भी पारदर्शिता के साथ मिले। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज सरकार को 9 माह पूरे हो रहे हैं। इस खास मौके पर आप सभी से चर्चा का यह अनुभव शानदार रहा। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिला और पुलिस प्रशासन सरकार की आंख और कान के समान है। जिला प्रशासन के कार्याें से शासन की इमेज बनती है। उन्होंने कहा कि पुलिस के हाथ लोहे के और दिल मोम का होना चाहिये। अपराधियों और असामाजिक तत्वों में पुलिस का भय हो तथा समाज के कमजोर वर्गाें, महिलाओं, और बच्चों में सुरक्षा का भाव जगे। जिला और पुलिस प्रशासन के प्रमुखों में इन वर्गाें के प्रति गार्जियनशिप की भावना होनी चाहिए। जिले में कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक दोनों आपस में समन्वय स्थापित करते हुए संयुक्त रूप से दौरा करें। श्री साय ने कहा कि पुलिस विभाग की रीढ़ अनुशासन है। ऐसे में आवश्यक है कि आपराधिक गतिविधियों में लिप्त पुलिस के कर्मचारियों पर कठोर कार्यवाही की जाए। मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि महिलाओं से संबंधित गंभीर अपराधों में आरोपी की तत्काल गिरफ्तारी हो और विशेष अभियोजक नियुक्त कर समयबध्द ट्रायल पूर्ण करवाकर दोष सिद्ध होने पर सजा दिलाना सुनिश्चित किया जाए। सैद्धांतिक रूप से इन प्रकरणों के आरोपियों को तीन माह की समय-सीमा में समस्त वैधानिक कार्यवाही पूर्ण कर न्यायालय द्वारा प्रकरण में सजा दिलाने के लिए कार्य योजना तैयार की जाए। अवैध शराब, सट्टा, मादक पदार्थ, जुआ के विरूद्ध जीरो टालरेंस के साथ काम किया जाए। ऐसी शिकायतें मिलने पर इसके लिये पुलिस अधीक्षक जिम्मेदार माने जायेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि सायबर क्राईम को रोकने के लिए प्रभावी कार्यवाही की जाए। लोगों को जागरूक किया जाए। साथ ही यह भी आवश्यक है कि इन अपराधों पर नियंत्रण के लिये पुलिस सक्षम हो। राज्य सरकार द्वारा इसके लिए आवश्यक संसाधन और प्रशिक्षण की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं में मौतों को रोकने के लिए दुर्घटना जन्य स्थानों की पहचान की जाए। लोगों को यातायात नियमों के प्रति जागरूक करें। प्रतिबंधात्मक कार्यवाही विशेषकर जिला बदर के प्रकरणों में कलेक्टर समय-सीमा में आदेश प्रसारित करें। आदेश केवल कागज पर ही न रहें, उसका पालन सुनिश्चित हो। वाहनों को राजसात करने व चिटफण्ड के प्रकरणों में भी आवश्यक ध्यान देने की आवश्यकता है। मुख्यमंत्री ने नक्सल मोर्चे पर मिली सफलता का उल्लेख करते हुए कहा कि आप सभी की बहादुरी, कौशल और पैरा मिलेट्री फोर्सेस के साथ समन्वय से प्रदेश में नक्सलियों के पांव उखड़ रहे है। यह जरूरी है कि इन सुदूर इलाकों में विकास का उजाला भी पहुंचेे। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में ‘‘नियाद नेल्लानार योजना‘‘ का प्रभावी कियान्वयन जरूरी है। नई सरकार के गठन के बाद माओवादी समस्या के समूल उन्मूलन के लिए ज्वाईन्ट एक्शन प्लान पर अमल किया जा रहा है, जिसका यह परिणाम है कि विगत् 09 माह में सुरक्षा बलों द्वारा 108 मुठभेड़ों में 159 माओवादियों के शव और बड़ी मात्रा हथियार विस्फोटक सामग्री बरामद की गई है। विगत 9 माह में 34 फारवर्ड सुरक्षा कैम्पों की स्थापना की गई है। जिससे माओवादी गतिविधियों में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। छत्तीसगढ़ को 04 नवीन सीआरपीएफ बटालियनें आबंटित की गई है। सुदूर क्षेत्रों में विकास कार्याें के तहत 44 मार्ग और 10 पुलों का निर्माण किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा पीड़ित एवं आत्म समर्पित माओवादियों के पुनर्वास के लिए व्यापक नीति जल्द लाई जाएगी। माओवादी प्रभावित क्षेत्रों में आमजनों का विश्वास अर्जित करने और माओवादियों के उन्मूलन के लिए आक्रामक कार्यवाही की रणनीति जारी रहेगी। जनता और शासन प्रशासन के बीच निरंतर संवाद जनता के बीच विश्वास पैदा करता है। नियमित पुलिसिंग, लोगों की समस्याओं का त्वरित निराकरण, पुलिस की पारदर्शी कार्य प्रणाली सुशासन की स्थापना की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। जन सेवा हम सबका उद्देश्य है। छत्तीसगढ़ में खुशहाली हो, शांति और सुरक्षा हो, इसकी जिम्मेदारी हम सब पर है। कलेक्टर-एसपी कॉन्फ्रेंस में मुख्य सचिव श्री अमिताभ जैन, अपर मुख्य सचिव गृह श्री मनोज कुमार पिंगुआ, पुलिस महानिदेशक श्री अशोक जुनेजा, मुख्यमंत्री के सचिव सर्वश्री राहुल भगत, श्री पी. दयानंद, श्री बसव राजु एस., सभी संभागायुक्त, पुलिस महानिरीक्षक, कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
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सरायपाली की पंजीयक पुष्पलता बेग को रिश्वत लेते हुए ACB के अधिकारियों ने किया गिरफ्तार

छत्तीसगढ़ के सरायपाली की पंजीयक पुष्पलता बेग को रिश्वत लेते हुए ACB के अधिकारियों ने किया गिरफ्तार

भ्रष्टाचार पर ACB की सख्त नजर

छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के सरायपाली में एक बड़ी घटना सामने आई है, जहां पंजीयक पुष्पलता बेग को एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) के अधिकारियों ने रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई भ्रष्टाचार के खिलाफ ACB द्वारा चलाए जा रहे अभियान के तहत की गई।

घटना का विवरण:

रिपोर्ट्स के अनुसार, पुष्पलता बेग पर आरोप था कि वह सरायपाली में भूमि पंजीकरण संबंधी कार्यों के लिए रिश्वत की मांग कर रही थीं। शिकायतकर्ता ने ACB को इसकी सूचना दी, जिसके बाद ACB अधिकारियों ने जाल बिछाकर पंजीयक को रंगे हाथ रिश्वत लेते हुए पकड़ा। पुष्पलता बेग एक निश्चित राशि की रिश्वत मांग रही थीं, जिसे ACB अधिकारियों ने पहले से तय योजना के तहत प्रमाणित किया और पुष्पलता को गिरफ्तार कर लिया।

ACB की कार्रवाई:

ACB की टीम ने योजना के अनुसार शिकायतकर्ता को रिश्वत की राशि देने के लिए भेजा। जैसे ही पुष्पलता बेग ने रिश्वत ली, वैसे ही ACB की टीम ने उन्हें मौके पर गिरफ्तार कर लिया। उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है और उन्हें पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है।

NOTE 

आवेदक ने अग्रिम जमानत के लिए यह आवेदन प्रस्तुत किया है, क्योंकि उसे पुलिस स्टेशन एंटी करप्शन ब्यूरो, रायपुर सी.जी. में धारा 13(1) बी और 13(2) भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत दंडनीय अपराधों के लिए पंजीकृत अपराध संख्या 04/2018 के संबंध में अपनी गिरफ्तारी की आशंका है।

पुष्पलता बेग का पद और कद:

पुष्पलता बेग सरायपाली में पंजीयक के पद पर तैनात थीं, और उनका काम भूमि संबंधित पंजीकरण कार्यों को निपटाना था। यह भी बताया जा रहा है कि उनके खिलाफ पहले भी भ्रष्टाचार की शिकायतें मिली थीं, लेकिन यह पहली बार है जब उन्हें रंगे हाथों पकड़ा गया है।

आगे की कार्रवाई:

ACB अब इस मामले में विस्तृत जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि पुष्पलता बेग के खिलाफ और भी कई आरोप हो सकते हैं, जिन्हें जांच के दौरान सामने लाया जाएगा। ACB यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि उनके साथ कोई अन्य सरकारी कर्मचारी इस भ्रष्टाचार में शामिल तो नहीं था।

भ्रष्टाचार पर ACB की सख्त नजर:

छत्तीसगढ़ में ACB लगातार भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर रही है। पिछले कुछ महीनों में कई सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों को रिश्वत लेते हुए पकड़ा गया है। ACB का कहना है कि यह अभियान आगे भी जारी रहेगा, और किसी भी सरकारी अधिकारी को कानून का उल्लंघन करने पर बख्शा नहीं जाएगा।

यह घटना भ्रष्टाचार के खिलाफ एक मजबूत संदेश है और यह दर्शाती है कि सरकार और ACB भ्रष्टाचार के मामलों में जीरो टॉलरेंस की नीति अपना रही है।

 

 MCRCA No. 1052 of 2019 &
                                                    MCRCA No. 1155 of 2019


                                                                  NAFR

      HIGH COURT OF CHHATTISGARH, BILASPUR

                   MCRCA No. 1052 of 2019

 Smt. Lily Pushplata Beck W/o Late Shri I. Beck Aged About 46
  Years Posted As Sub-Registrar, Office Of District Registrar, Durg,
  Presently Posted As Sub-Registrar Office Of District Registrar
  Rajnandgaon, District Rajnandgaon, R/o Vijeta Complex, New
  Rajendra Nagar, Raipur, District Raipur Chhattisgarh.

                                                          ---- Applicant

                             Versus

 State Of Chhattisgarh Through Anti Curruption Bureau Raipur
  Chhattisgarh.

                                              ---- Respondent

Applicant in MCrCA No.1052/2019 - Smt. Lily Pushplata Beck was working as the Sub-Registrar whereas applicants in MCrCA No.1155/2019 - Devendra Sonwane and Himanshu Yadav are the purchasers of the subject property which was allegedly purchased by them by paying deficit stamp duty. It is alleged that the applicants have caused financial loss to the State Government to the tune of ₹ 6,78,500/- and thus committed offence under the provisions of the Prevention of Corruption Act, 1988.

उल्लेखनीय है कि 2012-13 में राजिम में नियुक्ति के समय भी उप पंजीयक रहते हुए श्रीमती पुष्प लता बैक पर रिश्वत लेने का स्टिंग प्रमाण होने पर सस्पेंड किया जा चुका है |
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रिश्वत लेते सरायपाली उप पंजीयक लिली बेग गिरफ्तार

सरायपाली में आज ACB की टीम ने उपपंजीयक कार्यालय में छापा मारा जहां उपपंजीयक लीली पुष्पलता बेग को 26 हजार रूपए की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया जिसके बाद ACB की टीम ने महिला उपपंजीयक को गिरफ्तार कर अपने साथ पूछताछ के लिए लेकर रवाना हुई ज्ञात हो कि लंबे समय से उक्त अधिकारी के खिलाफ घुसखोरी की लगातारशिकायतें मिल रही थी जिसके खिलाफ कुछ राजनीति पार्टी के कार्यकर्ताओं द्वारा ऑफिस के बाहर आंदोलन भी किए गए थे | आपको बता दें कि सरयपाली क्षेत्र के बड़े पंधी निवासी आवेदक भूपेंद्र पटेल को उपपंजीयक द्वारा कुछ दिन पूर्व जमीन रजिस्ट्री के एवज में 26 हजार रूपए की घूस मांगी गई थी जिसके बाद आवेदक ने ACB मुख्यालय में जाकर उक्त मामले की शिकायत की थी जिसके बाद आज घुशखोरी की सूचना के बाद ACB की टीम घेराबंदी कर उपपंजीयक कार्यालय में दबिश दी जिसके बाद उपपंजीयक लीली पुष्पलता बेग को पैसा लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया और पूछताछ के लिए अपने साथ लेकर रवाना हुई |
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कंगना रनौत की फिल्म इमरजेंसी 6 सितंबर को नहीं हुई प्रदर्शित

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट एवं मुंबई हाई कोर्ट के आदेश के मुताबिक फिल्म सेंसर बोर्ड ने कंगना रनौत की फिल्म इमरजेंसी को प्रदर्शन का सर्टिफिकेट जारी नहीं किया | उल्लेखनीय है कि फिल्म में सिखों की भावनाओं को भड़काने, हिंदू और सिखों के बीच आपसी वैमनस्य बढ़ाने और सिख समाज को आतंकवादी, अलगाववादी बताने के विरोध में देश में सिख समाज ने इस फिल्म के खिलाफ विरोध प्रकट करते हुए प्रदर्शन किया था साथ ही न्यायालयों में याचिका दायर कर इमरजेंसी फिल्म के प्रदर्शन पर रोक लगाने की मांग की थी, जिस पर सुनवाई करते हुए जबलपुर हाईकोर्ट एवं मुंबई हाई कोर्ट ने फिल्म सेंसर बोर्ड से इस बारे में जानकारी मांगी थी, फिल्म सेंसर बोर्ड द्वारा माननीय न्यायालय को सूचित किया गया था कि उनके द्वारा अभी तक कंगना रनौत निर्मित फिल्म इमरजेंसी को प्रदर्शन का सर्टिफिकेट जारी नहीं किया है जिस पर जबलपुर एवं मुंबई हाई कोर्ट के माननीय न्यायाधीशों ने सेंसर बोर्ड को आदेशित किया था की फिल्म का सर्टिफिकेट जारी करने से पहले सिख समाज के प्रतिनिधिमंडल से राय लिए बिना इस फिल्म के प्रदर्शन का सर्टिफिकेट जारी न करें | उल्लेखनीय है कि फिल्म अभिनेत्री कंगना रनौत द्वारा निर्मित फिल्म इमरजेंसी में सिख समाज के बारे में दी गई गलत जानकारी, घटनाओं, सिख समाज को आतंकवादी बताना और पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के सीन के साथ-साथ फिल्म अभिनेत्री एवं सांसद कंगना रनौत के बयानों पर आपत्ति करते हुए शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी सहित देश के अनेक राज्यों की सिख संस्थाओं ने अपना विरोध प्रकट करते हुए सेंसर बोर्ड को पत्र लिखकर फिल्म इमरजेंसी की रिलीज पर रोक लगाने की मांग की थी | cg24news.in
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कंगना रनौत की फिल्म इमरजेंसी 6 सितंबर को नहीं होगी रिलीज : जबलपुर हाई कोर्ट का फैसला

 कंगना की फिल्म इमरजेंसी पर जबलपुर हाईकोर्ट की रोक

 
6 सितंबर को रिलीज नहीं होगी, जज बोले हम ट्रेलर रोकने के लिए भी तैयार
 
 
जबलपुर : न्यायालय सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार एक्ट्रेस और भाजपा सांसद कंगना रनौत की फिल्म इमरजेंसी 6 सितंबर को थिएटर में रिलीज नहीं होगी। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने सेंसर बोर्ड को आदेश दिया है कि फिल्म के सर्टिफिकेट जारी करने से पहले अगर सिख समुदाय के प्रतिनिधि फिल्म पर अपनी राय देना चाहते हैं, तो उनकी बात सुनी जाए। इसके साथ ही याचिकाकर्ता ने फिल्म के ट्रेलर पर रोक लगाने की मांग की है। जिस पर हाईकोर्ट ने कहा कि आप एक नया आवेदन दें। हम
 
फिल्म इमरजेंसी का ट्रेलर रोकने के लिए तैयार हैं। ऐसे में अगर ट्रेलर पर रोक लगती है, तो सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से इमरजेंसी का ट्रेलर हटाया जाएगा। 
फिल्म को लेकर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में जबलपुर सिख संगत और श्री गुरु सिंह सभा इंदौर की तरफ से याचिका दायर कर
फिल्म पर बैन लगाने की मांग की गई थी, जिस पर सोमवार और फिर मंगलवार को सुनवाई हुई।
 
सेंसर बोर्ड ने कहा-अभी सर्टिफिकेट जारी नहीं हुआ मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के एक्टिंग चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की
डिवीजन बेंच ने लंच के बाद सुनवाई की।
 
हाईकोर्ट में दायर जनहित याचिका पर सेंसर बोर्ड की तरफ से डिप्टी सॉलिसिटर जनरल ने जवाब पेश किया। उन्होंने बताया कि फिल्म को अभी सिर्फ ऑनलाइन सर्टिफिकेट सीरियल नंबर जारी हुआ है। सेंसर बोर्ड ने हाईकोर्ट को यह भी बताया कि इमरजेंसी फिल्म को अभी सर्टिफिकेट जारी नहीं हुआ है। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सेंसर बोर्ड को यह भी निर्देश दिए हैं कि याचिकाकर्ता के आवेदन पर कार्रवाई करें। 
 
लिहाजा मंगलवार को जबलपुर सिख संगत और श्री गुरु सिंह सभा इंदौर की जनहित याचिका का हाईकोर्ट ने निराकरण कर दिया है। हालांकि हाईकोर्ट का पूरा फैसला आना अभी बाकी है।
 
याचिकाकर्ता ने कहा ट्रेलर भी रोका जाना चाहिए- याचिकाकर्ता ने
 
सुनवाई के दौरान कहा कि फिल्म के सर्टिफिकेशन में शिरोमणि गुरुद्वारा कमेटी के एक सदस्य को भी शामिल किया जाए। उनके देखने के बाद ही फिल्म को सर्टिफिकेट दिया जाए। फिल्म का ट्रेलर भी आपत्तिजनक है, उसे भी रोका जाना चाहिए। इस मामले में चीफ जस्टिस की डिवीजन बेंच ने कहा कि याचिकाकर्ता नए सिरे से ट्रेलर रोकने के लिए आवेदन लगा सकते हैं, जिस पर सेंसर बोर्ड कार्रवाई करेगा। याचिकाकर्ता के वकील एनएस रूपराह ने बताया कि जी टेलीफिल्म की और से स्टेटमेंट दिया गया था कि फिल्म का सर्टिफिकेट मिल चुका है। जबकि केंद्र सरकार और फिल्म सेंसर बोर्ड का कहना था कि हमने कोई प्रमाण पत्र नहीं दिया है। सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया है कि अभी तक फिल्म इमरजेंसी को सर्टिफिकेट नहीं मिला है। अब 6 सितंबर को यह फिल्म रिलीज नहीं होगी। उन्होंने बताया कि जब सरकार ने यह कह दिया है कि फिल्म को सर्टिफिकेट नहीं दिया गया, तो फिर रिलीज का सवाल ही नहीं उठता। 
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कंगना रनौत की फिल्म इमरजेंसी : सिख समाज की छत्तीसगढ़ के सिनेमा हॉल, थिएटर संचालकों को चेतावनी

कंगना रनौत की फिल्म इमरजेंसी

 सिख समाज की छत्तीसगढ़ के सिनेमा हॉल थिएटर संचालकों को चेतावनी 

 
 *कंगना रनौत एवं उनकी फिल्म एमरजेंसी के विरोध में छत्तीसगढ़ में सिख समाज ने कड़ा रुख अख्तियार किया है रविवार को हुई सिक्ख समाज की बैठक जिसमे सभी गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटियों के प्रधान सहित सिक्ख संस्थाओं के प्रतिनिधि मौजूद थे उनकी सहमति के बाद आज सिख मिशन छत्तीसगढ़ के प्रमुख गुरमीत सिंह सैनी ने प्रदेश के सभी सिनेमा हॉल थिएटर मॉल में चल रहे आईनॉक्स के संचालकों को पत्र लिखकर अपील की है कि सिख धर्म विरोधी और सिख समाज विरोधी फिल्म इमरजेंसी को अपने  सिनेमा हॉल, थिएटर, मॉल के आइनॉक्स मैं प्रदर्शित ना करें |
सिख मिशन छत्तीसगढ़ द्वारा जारी पत्र में स्पष्ट किया गया है कि यदि प्रदेश के किसी भी सिनेमा हॉल थिएटर आईनॉक्स मॉल के सिनेमा हॉल में यदि कंगना रनौत की फिल्म इमरजेंसी को प्रदर्शित किया तो समाज के उग्र आंदोलन का सामना होने करना पड़ेगा साथ ही उन पर विभिन्न धाराओं के तहत जुर्म दर्ज करवाने की कार्यवाही भी समाज करेगा |
 
 
फिल्म अभिनेत्री कंगना रनौत द्वारा निर्मित फिल्म इमरजेंसी में सिख समाज के बारे में दी गई गलत जानकारियों, घटनाओं, सिख समाज को आतंकवादी बताया जाना और पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के सीन के साथ-साथ फिल्म अभिनेत्री एवम सांसद कंगना रनौत के बयानों पर आपत्ति करते हुए छत्तीसगढ़ सिख समाज आंदोलन करने पूरी तरह तैयार है | इस संबंध में सिख समाज द्वारा राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर समाज की भावनाओं और अपनी बातों से अवगत कराने, ज्ञापन सौंपने अतिशीघ्र मिलने का समय मांगा है |
 
उल्लेखनीय है कि कंगना रनौत के बयानों और उसकी फिल्म में सिख समाज के बारे में दिखाए जाने वाली घटनाओं से नाराज पूरे देश में सिख समाज द्वारा विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है |
सिखों की सबसे बड़ी संस्था शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी द्वारा भी इस बाबत फिल्म सेंसर बोर्ड को पत्र लिखा गया है साथ ही कोर्ट में याचिका भी दायर की गई है |
 
 
 

 

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