देश विदेश
देश को मिली 5 नई वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन, PM मोदी ने रानी कमलापति रेलवे स्टेशन से दिखाई हरी झंडी
एक दिन में पांच (वंदे भारत) ट्रेनों का उद्घाटन
नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को भोपाल स्थित रानी कमलापति रेलवे स्टेशन से पांच वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनों को हरी झंडी दिखाई. इसके साथ ही गोवा और झारखंड को वंदे भारत ट्रेनों की पहली जोड़ी मिलने के साथ, भारत भर के सभी राज्य जो रेल-विद्युतीकृत हैं, अब इन सेमी-हाई स्पीड ट्रेनों से जुड़ गए हैं.
मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा यह पहली बार है कि एक दिन में पांच (वंदे भारत) ट्रेनों का उद्घाटन किया जा रहा है. इन ट्रेनों के साथ, रेल-विद्युतीकृत सभी राज्यों में कम से कम एक जोड़ी वंदे भारत है.’ जबकि शेष भारत वंदे भारत ट्रेन से जुड़ा हुआ है, असम को छोड़कर, उत्तर पूर्व भारत को अभी तक ये ट्रेनें नहीं मिली हैं, जहां वंदे भारत की एक जोड़ी चालू है.
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मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि की कामना की
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रायपुर : मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने गायत्री नगर स्थित जगन्नाथ मंदिर में रथयात्रा के शुभारंभ के अवसर पर की पूजा-अर्चना
आयुष्मान कार्ड पजीयन के लिए 3 दिवसीय महाअभियान
रायपुर 15 जून 2023/ रायपुर जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में 19 जून से 31 जून तक आयुष्मान कार्ड पजीयन के लिए 3 दिवसीय महाअभियान चलाया जाएगा। इस दौरान छूटे हुए पात्र राशनकार्ड हितग्राहियों का आयुष्मान कार्ड का पंजीयन किया जाएगा।
इस संबंध में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री अविनाश मिश्रा ने बताया कि सभी जनपद मे ग्राम वार, पंचायत वार शिविर लगा कर और घर-घर जाकर छुटे पात्र राशनकार्ड धारी हितग्राही का आयुष्मान कार्ड का पंजीयन किया जाएगा। इस संबंध में श्री मिश्रा ने सभी जनपद सीईओ को कार्ययोजना बनाने का निर्देश दिए हैं। साथ ही आयुष्मान पंजीयन हेतु ग्राम पंचायत सचिव, रोजगार सहायक, स्वास्थ्य कार्यकर्ता, मितानिन च्वाईस सेन्टर इत्यादि की ड्युटी लगाये जाने हेतु कहा गया हैं। उल्लेखनीय है कि जिला रायपुर में 20 लाख 92 हजार कुल राशनकार्डधारी सदस्यों के विरूद्ध 14 लाख 40 हजार सदस्यों का आयुष्मान कार्ड बनाया जा चुका है, एवं अभी भी ग्रामीण क्षेत्रों में 2 लाख 75 हजार एवं शहरी क्षेत्रों में 3 लाख 76 हजार सदस्य आयुष्मान कार्ड बनाने से छुटे हुए है।
जिला पंचायत द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार च्वॉइस सेंटर संचालकों द्वारा वर्तमान में जिला रायपुर अंतर्गत छूटे समस्त पात्र हितग्राहियों का आयुष्मान कार्ड पंजीयन शिविर लगाकर निःशुल्क आयुष्मान कार्ड पंजीयन किया जा रहा हैं।
आयुष्मान कार्ड बनाने के लिए राशन कार्ड एवं आधार कार्ड लेकर आना आवश्यक है। परिवार के समस्त सदस्यों का अलग-अलग आयुष्मान भारत कार्ड बनाया जावेगा अतः परिवार के समस्त सदस्यों के साथ अपने क्षेत्र के ग्राम पंचायत भवन, नजदीकी च्वॉईस सेंटर एवं समस्त शासकीय अस्पताल में जाकर आयुष्मान भारत कार्ड बनवा सकते हैं। साथ ही ऐसे हितग्राही जिनका आधार कार्ड अपडेट नहीं हुआ हैं, उनके परिजनों से अनुरोध किया गया हैं, कि आधार कार्ड अपडेट करवाने हेतु वर्तमान मोबाईल नम्बर, अंगूठे का निशान एवं वर्तमान फोटो इत्यादि के द्वारा नजदीकी च्वॉइस सेंटर में जाकर तुरंत आधार कार्ड अपडेट कराएं जिससे भविष्य में आयुष्मान कार्ड
का पंजीयन किया जा सके। आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना अंतर्गत पात्र बी०पी०एल० परिवारों को रू. 5 लाख एवं शेष परिवार अर्थात् ए०पी०एल० परिवारों को डॉ० खूबचंद बघेल स्वास्थ्य सहायता योजना अंतर्गत 50 हजार रूपये तक का लाभ योजना के दिशा-निर्देशानुसार योजनांतर्गत पंजीकृत किसी भी शासकीय एवं निजी चिकित्सालय में आयुष्मान कार्ड द्वारा निःशुल्क ईलाज का लाभ प्राप्त कर सकते हैं।
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पब्लिक स्पीकिंग पर कार्यशाला - छत्तीसगढ़ सिक्ख ऑफिसर्स वेलफेयर एसोसियेशन का आयोजन
छत्तीसगढ़ सिक्ख ऑफिसर्स वेलफेयर एसोसियेशन की पब्लिक स्पीकिंग पर कार्यशाला
अच्छा वक्ता बनने लगातार अध्ययन और अभ्यास करें - आर्थर शैरी
जब आप दिल से बोलते हैं तो वह बातें लोगों तक पहुंचती है
रायपुर,11 जून 2023/ कौन सी बात पहले कहना और कौन सी बात बाद में कहना है यही पब्लिक स्पीकिंग है। किन्तु बिना तैयारी के बोलना आसान नहीं है। जब आप दिल से बोलते हैं तो वह बातें लोगों तक पहुंचती है और जब दिल से बोलते हैं तब आप सीखतें भी हैं यह बातें नई दिल्ली से आए देश के जाने माने मॉस्टर स्पीकर आर्थर शैरी आज एक कार्यशाला में कही।

छत्तीसगढ़ सिक्ख ऑफिसर्स वेलफेयर एसोसियेशन के संयोजक जे.ए. बॉम्बरा ने बताया कि दिल्ली के आर्थर शैरी ने आज होटल एम्ब्रोशिया में एसोसियेशन व्दारा आयोजित पर्सनेलिटी एंड कम्युनिकेशन स्किल डेव्हलेपमेंट वर्कशाप में रायपुर-दुर्ग-भिलाई से विशेष रुप से आमंत्रित छात्रों को भाषण देने की कला अर्थात पब्लिक स्पीकिंग की बारीकियों का प्रशिक्षण दिया। आर्थर शैरी ने छात्र - छात्राओं को बताया कि भाषण कला के शोध में यह पाया गया है कि कि जब भी हम कही खड़े हो कर भाषण देते हैं तो उसमें 57 प्रतिशत हमारी बॉडी लैंग्वेज काम करती है, 38 प्रतिशत हमारी आवाज का महत्व होता है और बोले जाने वाली सामग्री का महत्व सिर्फ 7 प्रतिशत होता है।
प्रधानमंत्री पुरस्कार से सम्मानित आर्थर शैरी ने कार्यशाला में कहा की हमें अपनी बात प्रभावशाली ढंग से कहने के लिए उसे छोटे- छोटे प्रसंगों या छोटी कहानियों के रुप में कहना चाहिए। यह कहा जाता है कि रोम एक दिन में नही बना था किन्तु मैं कहता हूं कि रोम हर दिन बन रहा है। लगातार भाषण देने के अभ्यास से हम और बेहतर होते जाते हैं। अच्छा वक्ता बनने के लिए लगातार अध्ययन और अभ्यास करते रहना चाहिए। हमें अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए लगातार कोशिश करते रहना चाहिए कभी भी हार नहीं मानना चाहिए।
पहली बार छत्तीसगढ़ आए आर्थर शैरी नेशनल स्पीकिंग कोच, मेन्टर, ग्लोबल प्रोफेशनल स्पीकर, जोश टॉक स्पीकर, टेडएक्स स्पीकर तथा कारपोर्ट ट्रेनर है। उन्होंने कहा कि जिन्दगी हमें हमेशा सीखाती है। यदि हम सीखना बंद करते हैं तो हमारा जीना भी रुक सा जाता है। हमें अपने जीवन में हमेशा ही सीखते रहना चाहिए। अपनी रुचि के विषय के कौशल को विकसित करते रहना चाहिए। उन्होंने आवाज को बेहतर करने के लिए सांस लेने की तरीके तथा जुबान, चेहरे और आंखों के व्यायाम के बारे में जानकारी दी। इस कार्यशाला में लगभग 50 छात्र-छात्राओं ने भाग लिया जिन्हें प्रमाणपत्र भी दिए गए।
एसोसियेशन के एजुकेशन कमेटी के चेयरमेन प्रोफेसर बी.एस. छाबड़ा ने इस अवसर पर कहा कि छात्र-छात्राओं के व्यक्तित्व विकास के लिए यह आयोजन किया गया। कार्यशाला में संयोजक जी.एस. बॉम्बरा ने कहा कि यह एक विशेष प्रशिक्षण है जिसका ज्ञान सिर्फ महानगरों में ही मिलता है। हमारी प्रयासों के फलस्वरुप अन्तर्राष्ट्रीय मास्टर स्पीकर रायपुर आए हैं। इस अवसर पर एसोसियेशन के सचिव सरदार डी.एस. जब्बल ने उपस्थितजनों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में कोलंबिया इंस्टीटूयूट डायरेक्टर सरदार एम.एस.हूरा, भिलाई सिक्ख यूथ फोरम के महासचिव सरदार जसवांत सिंह खालसा, छत्तीसगढ़ सिक्ख ऑफिसर्स वेलफेयर एसोसियेशन के ए.एस. प्लाहा, जे.एस. जब्बल, जगदीश सिंह, आर.एस. आजमानी, सी.एस. बाजवा, एम.एस. सलूजा, लखिन्दर सिंह चावला, के.एस. झांस, जी.एस. राजपाल, टी.एस. जब्बल,विक्रमजीत सिंह,कुलदीप सिंह छाबड़ा, अमोलक सिंह, सुखबीर सिंह सिंघोत्रा, भूपिन्दर सिंह, तेजपाल सिंह हंसपाल, श्रीमती रविन्दर कौर बॉम्बरा, श्रीमती पिंकी जब्बल और श्रीमती छाबड़ा श्रीमती देविन्दर कौर उपस्थित थी.
इंटरनेशल स्पीकिंग कोच आर्थर शैरी की सिक्ख छात्र छात्राओं के लिए प्रशिक्षण कार्यशाला
केदारनाथ में पिघलकर बहने लगीं बर्फीली चोटियां, चारों तरफ फैला सफेद गुबार, अटकीं भक्तों की सांसें
उत्तराखंड में स्थित में केदारनाथ धाम के मंदिर के पीछे बर्फीली चोटियों पर हिमस्खलन होने से श्रद्धालुओं की सांसें अटक गईं। हालांकि गनीमत रही कि इस दौरान किसी को कोई नुकसान नहीं हुआ। सोशल मीडिया पर इसका वीडिया सामने आया है। एवलांच केदारनाथ धाम से लगभग तीन-चार किलोमीटर दूर था। पिछले यात्रा सीजन में बर्फीली पहाड़ियों पर तीन बार हिमस्खलन हुआ था। इस साल अप्रैल में एवलांच की घटना सामने आई थी। एवलांच आने से एकदम बर्फ का सफेद गुबार-सा फैल गया। बता दें कि केदारनाथ धाम में यात्रा की शुरुआत से मौसम खराब रहा है। धाम में लगातार बर्फबारी और निचले क्षेत्रों में बारिश जारी है। मई महीने में पैदल यात्रा मार्ग पर जगह-जगह ग्लेशियर भी टूटे और यात्रा भी प्रभावित रही। अप्रैल के बाद अब जून में एवलांच आया है। केदारनाथ धाम से तीन-चार किमी दूर स्थित बर्फीली पहाड़ियों पर एवलांच 8 जून गुरुवार सुबह हुआ। चोटियों से बर्फ पिघलकर बहने लगी। वहीं केदारनाथ धाम में बार-बार एवलांच आने पर पर्यावरण विशेषज्ञों ने चिंता जताई है. पर्यावरण विशेषज्ञ देवराघवेन्द्र बद्री ने कहा कि केदारनाथ धाम आस्था का केंद्र है। उन्होंने आरोप लगाया कि हेली कंपनियां एनजीटी के मानकों का पालन नहीं कर रही हैं।
दिमागी रूप से बीमार कर सकती है ज्यादा मोबाइल इस्तेमाल करने की आदत, जानें कैसे करें कंट्रोल
गुजरात के मोरवी फुल हत्याकांड के बाद भागलपुर गंगा नदी पुल का भ्रष्टाचार का मामला
सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति प्रशांत मिश्रा : रिकॉर्ड तो बनते ही है तोड़ने के लिए और मैं चाहता हूं कि अधिवक्ता मेरे रिकॉर्ड को तोड़कर जल्दी-जल्दी इस मुकाम तक पहुंचे
जगन्नाथ रथयात्रा में शामिल होने से और रथ खींचने से मिलता है 100 यज्ञ के समान पुण्य फल
उड़ीसा के पुरी में स्थित जगन्नाथ मंदिर भारत के चार पवित्र धामों में से एक है। हर साल आषाढ़ माह में यहां भव्य रथ यात्रा का आयोजन किया जाता है। जगन्नाथ मंदिर में भगवान जगन्नाथ विराजमान हैं, जो कि विष्णु जी के अवतार श्रीकृष्ण का ही रूप माने जाते हैं। जगन्नाथ का अर्थ होता है जगत के नाथ। रथ यात्रा की शुरुआत हर साल आषाढ़ माह में शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि से होती है। वहीं शुक्ल पक्ष के 11वें दिन जगन्नाथ जी की वापसी के साथ इस यात्रा का समापन होता है। हर साल इस रथ यात्रा में भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिलती है। देश-विदेश से लोग इस यात्रा में शामिल होने के लिए आते हैं। लोगों का मानना है कि जगन्नाथ रथ यात्रा में शामिल होने से जीवन से सभी कष्ट समाप्त हो जाते हैं और जीवन में खुशियां आती हैं। ऐसे में चलिए जानते हैं कि इस साल जगन्नाथ रथ यात्रा की शुरुआत कब से हो रही है और इसका महत्व क्या है...
कब निकलेगी जगन्नाथ जी की रथ यात्रा
इस साल आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि की शुरुआत 19 जून सुबह 11 बजकर 25 मिनट पर हो रही है। इस तिथि का समापन 20 जून को दोपहर 01 बजकर 07 मिनट पर होगा। ऐसे में उदया तिथि को देखते हुए जगन्नाथ जी की रथ यात्रा 20 जून 2023, मंगलवार के दिन निकाली जाएगी। इसके बाद आषाढ़ शुक्ल पक्ष की दशमी तिथी को तीनों वापस अपने स्थान पर लाया जाएगा।
क्यों होता है जगन्नाथ रथ यात्रा का आयोजन?
हर साल आषाढ़ माह में शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को भगवान जगन्नाथ (भगवान श्रीकृष्ण) बड़े भाई बलराम और छोटी बहन सुभद्रा के साथ अपनी मौसी (गुंडीचा) के घर जाते हैं। इस दिन इन्हें तीन अलग-अलग रथों पर सवार होकर किया जाता है। इसके बाद तीनों को रथ यात्रा के जरिए उनकी मौसी के घर यानी गुंडीचा मंदिर में ले जाया जाता है।
जगन्नाथ रथ यात्रा का महत्व
विश्व प्रसिद्ध जगन्नाथ रथयात्रा का बहुत ही अधिक महत्व है। जगन्नाथ पुरी धाम को मुक्ति का द्वार कहा जाता है। हर साल इस रथ यात्रा में देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु शामिल होने के लिए आते हैं। कहा जाता है कि इस रथ यात्रा में शामिल होने से व्यक्ति के जीवन में खुशियां आती हैं।
मान्यता है कि जो लोग इस रथ यात्रा में शामिल होकर जगन्नाथ जी के रथ को खींचते है, उन्हें 100 यज्ञों के बराबर फल प्राप्त होता है। इस यात्रा में शामिल होने वालों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। पुराणों में वर्णन है कि आषाढ़ मास में पुरी तीर्थ में स्नान करने से सभी तीर्थों के दर्शन का पुण्य फल प्राप्त होता है और भक्त को शिवलोक की प्राप्ति होती है।
गुरु ग्रंथ साहिब की 10 बड़ी बातें दिखाती है सफलता का सही रास्ता
गुरु ग्रंथ साहिब सिख समुदाय का एक धार्मिक ग्रंथ है. इसे केवल धार्मिक ग्रंथ ही नहीं, सिख धर्म का अंतिम और जीवित गुरु भी माना जाता है. सिखों के दसवें गुरु गोविंद सिंह जी ने अपने मृत्यु से पहले ये घोषणा की थी कि अब गुरु ग्रंथ साहिब ही जीवनभर सिखों का मार्गदर्शन करेंगे. इस ग्रंथ को 'आदिग्रंथ' के नाम से भी जाना जाता है. इसमें सिख धर्म के गुरुओं की कही बातें लिखी हैं जिसे गुरबानी यानी गुरु की वाणी कहा जाता है. आइए जानते हैं गुरु ग्रंथ साहिब की वह 10 बड़ी बातें जो आज भी लोगों के लिए प्रेरणादायक है, इसमें मौजूद गुरुवाणी के प्रमुख संदेश मनुष्य को सही सफल जीवन के मार्ग का रास्ता दिखाते हैं.
क्या है गुरु ग्रंथ साहिब ?
गुरु ग्रंथ साहिब में सूक्तियों, दोहों, शब्दों और दूसरे लेखों का एक संग्रह है. इनमें सिख गुरुओं की रचनाओं के अलावा मुसलमान विद्वानों की लिखी पंक्तियां और कबीर, रविदास और बाबा फ़रीद की वाणी भी शामिल हैं. इसका संपादन सिख धर्म के पांचवें गुरु श्री गुरु अर्जुन देव जी ने किया। गुरु ग्रन्थ साहिब जी का पहला प्रकाश 16 अगस्त 1604 को गोल्डन टेंपल अमृतसर में हुआ था.
कहते हैं ईश्वर के मुख से निकले अनमोल विचारों को ही गुरु ग्रंथ साहिब में बताया गया है. ये पंजाबी भाषा की लिपि गुरमुखी में लिखी गई है. माना जाता है कि गुरमुखी लिपि ईश्वर के मुख से निकली है. यही कारण है कि गुरु ग्रंथ साहिब को गुरु का दर्जा प्राप्त है. ये गुरु के बराबर ही सम्मनीय है.
गुरु ग्रंथ साहिब की 10 बड़ी बातें (Guru Granth Sahib Motivational Quotes)

- जब मन शुद्ध नहीं है, तो बाहर की सफाई करना बेकार ही है.
- जिसका मन उसके नियंत्रण में है, समझो उसने दुनिया उसके कदमों में है.
- शरीर इस युग में कर्म का क्षेत्र है; तुम जो भी बोओगे, वही काटोगे
- ईश्वर एक है तो उसे उसी के रास्ते से प्राप्त किया जा सकता है, किसी दुसरे रास्ते से नहीं
- जन्म और मृत्यु का चक्र तब तक खत्म नहीं होता है जब तक अहंकार ओर स्वार्थ खत्म नहीं होता है.
- ईश्वर को वही व्यक्ति प्राप्त कर सकता है, जो सबसे प्रेम करता हो.
- संसार एक भ्रम है, यह हमें हमेशा भ्रम में ही रखता है इसलिए अच्छा है की सपने में ही रहा जाएं
- जो व्यक्ति सुख और दुःख को समान तरह से स्वीकार करता है उसे समस्याओं का बोझ नहीं सताता.
- सच्चाई को जानना हर चीज से बड़ा होता है और उस से भी बड़ा है सच्चाई से जीना.
- जीभ एक ऐसे तेज चाकू की तरह है जो खून को गिराए बिना मार देती है. इसलिए अपनी वाणी पर संयम रखें.
