देश विदेश

25 वें टीसीएस रूरल आईटी क्विज़ विजेता बना छत्तीसगढ़

टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) और कर्नाटक सरकार के सहयोग से आयोजित 25वें टीसीएस रूरल आईटी क्विज़ का कर्नाटक क्षेत्रीय फाइनल हाल ही में संपन्न हुआ। इस प्रतियोगिता में राज्य के विभिन्न जिलों के 8वीं से 12वीं कक्षा के छात्रों ने भाग लिया। कर्नाटक क्षेत्रीय फाइनल के विजेता टीम को बेंगलुरु में नवंबर 2024 में आयोजित राष्ट्रीय फाइनल में भाग लेने का अवसर मिला। सभी क्षेत्रीय विजेताओं को 10,000 रुपये के गिफ्ट वाउचर और उपविजेताओं को 7,000 रुपये के गिफ्ट वाउचर से सम्मानित किया गया। ​​ फाइनल में छत्तीसगढ़ भिलाई के छात्र तनिष्क कुमार साहू ने 125 अंकों के साथ जीत हासिल की फाइनल विजेता के रूप में तनिष्क कुमार साहू को₹100000 की राशि और अवार्ड से सम्मानित किया गया अवार्ड सम्मान समारोह में कर्नाटक के आईटी शिक्षा मंत्री ने सभी प्रतियोगियों को पुरस्कार वितरित किया | इस क्विज़ का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों के छात्रों में आईटी के प्रति जागरूकता बढ़ाना और उन्हें प्रौद्योगिकी के नवीनतम रुझानों से अवगत कराना है। यह कार्यक्रम 2000 से आयोजित हो रहा है और अब तक 21 मिलियन से अधिक छात्रों तक पहुंच चुका है। ​​​​
और पढ़ें ...

संयुक्त संचालक मत्स्य विभाग के ज्वाइंट डायरेक्टर देव कुमार सिंह एसीबी की गिरफ्त में

मन्नू मानिकपुरी की रिपोर्ट /  बिलासपुर :-  मत्स्य विभाग के ज्वाइंट डायरेक्टर देव कुमार सिंह एक लाख रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथों की रफ्तार एंटी करप्शन ब्यूरो की कार्यवाही मत्स्य विभाग के ज्वॉइंट डायरेक्टर देव कुमार सिंह को रिश्वत लेते पकड़ा गया राज्य में भ्रष्टाचार के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए मत्स्य विभाग के ज्वॉइंट डायरेक्टर देव कुमार सिंह को रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई विभाग की टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर की। क्या है मामला? नरेंद्र श्रीवास उपयंत्री मछली पालन विभाग जांजगीर चांपा के विभागीय जांच को दबाने देव कुमार सिंह ने रिश्वत की मांग की थी | एंटी करप्शन ब्यूरो को शिकायत मिली थी कि ज्वॉइंट डायरेक्टर देव कुमार सिंह ने मछली पालन लाइसेंस प्रक्रिया में मदद के लिए रिश्वत की मांग की है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि काम में अड़चन डालकर 2 लाख रुपये की घूस मांगी गई थी। इसके बाद एसीबी ने योजना बनाकर इस भ्रष्टाचार के खेल का पर्दाफाश किया। रंगे हाथों पकड़े गए गुप्त सूचना के आधार पर एसीबी की टीम ने जाल बिछाया और शिकायतकर्ता को नकद राशि के साथ भेजा। जैसे ही देव कुमार सिंह ने रिश्वत की रकम स्वीकार की, टीम ने उन्हें मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया। मौके से रिश्वत की राशि बरामद कर ली गई है। कार्रवाई जारी एसीबी ने देव कुमार सिंह को गिरफ्तार कर उनके कार्यालय और आवास पर छापेमारी की है। प्रारंभिक जांच में करोड़ों रुपये की संपत्ति और कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद हुए हैं। इन दस्तावेजों से अन्य अधिकारियों के भी इस भ्रष्टाचार में शामिल होने की संभावना जताई जा रही है। *आरोप और कानूनी प्रक्रिया* देव कुमार सिंह पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। उन्हें कोर्ट में पेश किया जाएगा, जहां से रिमांड की मांग की जाएगी। प्रतिक्रिया घटना के बाद मत्स्य विभाग के अन्य अधिकारियों में हड़कंप मच गया है। विभागीय मंत्री ने घटना की निंदा करते हुए कहा कि सरकार भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है, और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। यह घटना भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रशासनिक सख्ती और जनता के सहयोग से ऐसे मामलों को उजागर करने की आवश्यकता को उजागर करती है।

और पढ़ें ...

एक ओंकार अर्थात् परमात्मा एक है - इंसानियत से बढ़कर कोई धर्म नहीं है - श्री गुरु नानक देव जी की जयंती के 555 वर्ष पूरे होने पर पर विषेश लेख

देश के वर्तमान हालातो पर श्री गुरु नानक देव जी के उपदेश और संदेश पर हर किसी को गौर करना चाहिए 

सतगुरु नानक परगटिया, मिट्टी धुन्ध जग चानन होआ |ज्यों कर सूरज निकलया, तारे छपे अंधेर पलोआ ||

एक ओंकार अर्थात् परमात्मा एक है - इंसानियत से बढ़कर कोई धर्म नहीं है

  श्री गुरु नानक देव जी ने जात-पात उच्च नीच धर्म और वर्ग के भेदभाव को मिटाने की बात की थी  

कीरत करो, वण्ड छको,  नाम जपो अर्थात काम करो, मिल बाटकर खाओ और भगवान का नाम लो का मंत्र दिया
 
 
 
श्री गुरु नानक देव जी की जीवनी, उद्देश्य, मानवता के प्रति योगदान और प्रकाश पर्व की महिमा

श्री गुरु नानक देव जी ने संपूर्ण मानवता को प्रेम, सेवा, समानता और एकता का संदेश दिया

उनके विचार का मूल तत्व "एक ओंकार" जिसका अर्थ है "परमात्मा एक है।" उन्होंने जात-पात, ऊँच-नीच, धर्म, और वर्ग के भेदभाव को मिटाने पर ज़ोर दिया।

श्री गुरु नानक देव जी (1469–1539) सिख धर्म के संस्थापक और पहले गुरु थे, जिन्होंने अपनी शिक्षा और विचारों के माध्यम से संपूर्ण मानवता को प्रेम, सेवा, समानता और एकता का संदेश दिया। उनकी शिक्षाएँ और जीवन दर्शन न केवल सिख धर्म के अनुयायियों बल्कि दुनिया के सभी लोगों के लिए एक प्रेरणा बने हुए हैं। गुरु नानक जी ने अपने समय की सामाजिक और धार्मिक विषमताओं को मिटाने के लिए कई महत्वपूर्ण कार्य किए, जिनका प्रभाव आज भी विश्व के कोने-कोने में महसूस किया जाता है।

प्रारंभिक जीवन

श्री  गुरु नानक देव जी का जन्म 15 अप्रैल, 1469 को रावी नदी के तट पर स्थित तलवंडी नामक स्थान पर हुआ था, जो अब पाकिस्तान के ननकाना साहिब में है। उनके पिता का नाम मेहता कालू जी और माता का नाम तृप्ता जी था। गुरु नानक जी का बचपन से ही आध्यात्मिकता की ओर झुकाव था और वे साधारण जीवन में भी असाधारण ज्ञान और विवेक के धनी थे। बचपन में ही उन्होंने समाज में फैली असमानता, धार्मिक कट्टरता, अंधविश्वासों के प्रति अपनी असहमति व्यक्त करना शुरू कर दिया था।

श्री  गुरु नानक जी का प्रमुख उद्देश्य

श्री  गुरु नानक देव जी का प्रमुख उद्देश्य मनुष्य को मनुष्यता के मार्ग पर चलाना था। उनके अनुसार ईश्वर एक है और सभी प्राणी उसके ही अंश हैं। उनके विचार का मूल तत्व "एक ओंकार" में समाहित है, जिसका अर्थ है "परमात्मा एक है।" उन्होंने जात-पात, ऊँच-नीच, धर्म, और वर्ग के भेदभाव को मिटाने पर ज़ोर दिया। गुरु नानक जी का मानना था कि ईश्वर के सच्चे उपासक वही हैं जो परोपकार, प्रेम, करुणा और सेवा में विश्वास रखते हैं।

मानवता के प्रति योगदान

श्री  गुरु नानक देव जी ने समाज में सुधार लाने के लिए कई यात्राएँ कीं, जिन्हें "उदासियाँ" कहा जाता है। इन उदासियों के माध्यम से उन्होंने भारत, अफगानिस्तान, अरब, तिब्बत और श्रीलंका जैसे विभिन्न देशों में जाकर अपने विचारों का प्रचार किया। उन्होंने लोगों को सत्य, धर्म, और करुणा के मार्ग पर चलने की शिक्षा दी। उनके कार्यों ने समाज में गहरे बदलाव लाए और लोगों में आत्म-सुधार और एकता की भावना जागृत की।

1. लंगर प्रथा : श्रीगुरु नानक जी ने "लंगर" की परंपरा शुरू की, जिसका उद्देश्य था सभी को समानता और एकता के भाव में जोड़ना। इसमें बिना किसी भेदभाव के सभी लोगों को भोजन कराया जाता था, जो आज भी सभी गुरुद्वारों में चल रहा है।


2. समानता और भेदभाव के विरोधी: गुरु नानक देव जी ने अपनी शिक्षाओं से महिलाओं के प्रति सम्मान का प्रचार किया और जात-पात के भेदभाव का कड़ा विरोध किया। वे कहते थे कि ईश्वर के सामने सभी एक समान हैं, चाहे वे किसी भी जाति या धर्म के हों।


3. सत्य का मार्ग: गुरु नानक जी ने ईश्वर के प्रति प्रेम और सत्य के मार्ग पर चलने का संदेश दिया। वे बाहरी आडंबरों के बजाय अंतःकरण की शुद्धता पर विश्वास करते थे। उनके उपदेशों में हमेशा सत्य को ही सर्वोपरि माना गया।



देश-दुनिया में योगदान और उनके अनुयायियों की भावनाएँ

श्री  गुरु नानक देव जी की शिक्षाएँ और उनके सिद्धांत सिख धर्म के मूल स्तंभ बन गए। उन्होंने "नाम जपो, किरत करो, वंड छको" का मंत्र दिया, जो आज भी सिख धर्म के अनुयायी मानते हैं। उनके विचारों ने न केवल भारत में बल्कि पूरे विश्व में धर्म और मानवता के प्रति एक नई दिशा प्रदान की। गुरु नानक जी के अनुयायियों के लिए उनका जीवन एक प्रेरणा है, और वे उनकी शिक्षाओं का पालन करके सेवा और सद्भाव के मार्ग पर चलने का प्रयास करते हैं।

प्रकाश पर्व

श्री  गुरु नानक देव जी के जन्म दिवस को "गुरु नानक जयंती" के रूप में मनाया जाता है, जिसे "प्रकाश पर्व" भी कहा जाता है। यह सिख धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है, जिसे पूरे विश्व में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है। इस दिन गुरुद्वारों में विशेष रूप से "अखंड पाठ" किया जाता है और गुरु का "लंगर" आयोजित होता है। इसके अलावा, प्रभात फेरियाँ निकाली जाती हैं और "शबद कीर्तन" किया जाता है, जिसमें  श्री  गुरु नानक देव जी  की शिक्षाओं का गायन होता है।

प्रकाश पर्व के दिन, सिख समुदाय के लोग विशेष सजावट करते हैं और दीयों से गुरुद्वारों और अपने घरों को सजाते हैं। यह त्योहार न केवल धार्मिक आयोजन है बल्कि एक सांस्कृतिक उत्सव भी है, जो सभी लोगों को एकता, प्रेम और मानवता के मूल्यों का स्मरण कराता है।

निष्कर्ष    
श्री  गुरु नानक देव जी का जीवन और उनके उपदेश हमें सिखाते हैं कि इंसानियत से बढ़कर कोई धर्म नहीं है। उनकी शिक्षाएँ हमें अपने भीतर प्रेम, शांति, और सेवा के भाव को विकसित करने के लिए प्रेरित करती हैं। श्री गुरु नानक देव जी के योगदान और उनके विचारों की प्रासंगिकता आज भी उतनी ही है जितनी उनके समय में थी। उन्होंने अपने जीवन से यह सिद्ध किया कि एक सच्चा गुरु केवल शिक्षा ही नहीं देता, बल्कि अपनी शिक्षाओं को अपने आचरण में जीता भी है। उनके द्वारा शुरू की गई लंगर परंपरा, जात-पात और ऊँच-नीच का भेदभाव मिटाने का प्रयास, और विश्व भर में उनके अनुयायियों की निस्वार्थ सेवा का भाव यह दर्शाते हैं कि श्री गुरु नानक देव जी का संदेश आज भी मानवता को एक नई दिशा प्रदान कर रहा है।
लेखक :- सुखबीर सिंघोत्रा अध्यक्ष छत्तीसगढ़ सिक्ख समाज
और पढ़ें ...

सिक्ख समाज मनाएगा श्री गुरु नानक देव जी की 555वीं जयंती का उत्सव

श्री गुरु नानक देव जी  की  जयंती पर विषेश लेख 

 
देश के वर्तमान हालातो पर श्री गुरु नानक देव जी के उपदेश और संदेश पर हर किसी को गौर करना चाहिए

एक ओंकार अर्थात् परमात्मा एक है - इंसानियत से बढ़कर कोई धर्म नहीं है

  श्री गुरु नानक देव जी ने जात-पात उच्च नीच धर्म और वर्ग के भेदभाव को मिटाने की बात की थी  

कीरत करो, वण्ड छको,  नाम जपो अर्थात काम करो, मिल बाटकर खाओ और भगवान का नाम लो का मंत्र दिया

 

 

श्री गुरु नानक जयंती सिख समुदाय के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण पर्व है, जिसे हर साल कार्तिक पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। इसे "गुरुपर्व" या "प्रकाश पर्व" भी कहा जाता है। यह पर्व सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देव जी के जन्मदिवस का प्रतीक है। गुरु नानक देव जी सिख समुदाय के पहले गुरु है। यह पर्व अकसर अक्टूबर या नवंबर माह में आता है, और इस दिन को सिख समाज के लोग बड़े उत्साह के साथ मनाते हैं। इस दिन गुरुद्वारों में विशेष समारोह आयोजित किए जाते हैं। यह पर्व कार्तिक पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है

गुरु नानक जयंती तिथि 2024
इस वर्ष गुरु नानक जयंती 15 नवंबर को मनाई जाएगी, क्योंकि इसी दिन कार्तिक पूर्णिमा पड़ रही है। इस साल गुरु नानक देव जी की 555वीं जयंती का उत्सव मनाया जाएगा।

 
 
और पढ़ें ...

डिजिटल अरेस्ट मामले में छत्तीसगढ़ में मिला आरोपी

Raipur में डिजिटल अरेस्ट का मामला आया सामने... क्राइम ब्रांच का अफसर बताकर 58 वर्षीय महिला से 58 लाख की ठगी... आईजी अमरेश मिश्रा के निर्देश पर रेंज सायबर ने राजनांदगांव से आरोपी जसविंदर को किया गिरफ्तार... 9.50 लाख नगदी भी जब्त
और पढ़ें ...

धर्मान्तरित लोगों की घरवापसी ही अखंड भारत का मार्ग है , बहुत जल्द धर्मान्तरण पर कड़े कानून बनेंगे- प्रबल प्रताप

धर्मान्तरित लोगों की घरवापसी ही अखंड भारत का मार्ग है , बहुत जल्द धर्मान्तरण पर कड़े कानून बनेंगे- प्रबल प्रताप धर्मान्तरण की गैंग पूरे देश में सक्रिय,अब तक 17000 धर्मान्तरित लोगों की हुई घर वापसी । घरवापसी अभियान के प्रमुख और छत्तीसगढ़ प्रदेश में भाजपा के प्रदेश महामंत्री प्रबल प्रताप जूदेव अब खुलकर अब कोटा विधायक अटल श्रीवास्तव के विरोध में आ गए हैं साथ ही बंगलाभट्ठा में बने अवैध चर्च को लेकर चुनौती दे दी है । घर वापसी अभियान के प्रमुख प्रबल प्रताप को भगवा गुंडा और बाहरी कहकर कांग्रेसी विधायक ने सनातन का अपमान किया है जिसको लेकर सन्त समाज ने भी प्रबल प्रताप सिंह जूदेव के साथ खड़े हो गए हैं। कोटा रतनपुर के बंगला भाठा में एक चर्च को लेकर उठे विवाद के बाद  अब प्रबल प्रताप जूदेव का बड़ा बयान आया है। उन्होंने अपने बयान में कहा है कि" प्रशासन के जांच के बाद यह पुष्टि की गई कि बंगलाभाटा, रतनपुर में निर्मित चर्च/प्रार्थना भवन अवैध है और वन विभाग की जमीन के पट्टे पर निर्मित है। मैं सरकार से मांग करता हूं कि ऐसे धर्मांतरण के केंद्र को ध्वस्त करने का आदेश जारी कर सनातन समाज को आश्वस्त करे कि प्रलोभन आधारित धर्मांतरण अब छत्तीसगढ़ में नहीं चलेगा। मैं इस घृणित कार्य में संलग्न आरोपियों के खिलाफ प्रशासन से एफ. आई. आर. दर्ज करने की मांग करता हूं। आपको बता दें कि इसी चर्च को लेकर कोटा क्षेत्र के विधायक अटल श्रीवास्तव ने प्रबल प्रताप को भगवा गुंडा बताकर पुलिस से प्रबल के विरुद्ध एफ़ आई आर दर्ज करने  की मांग की थी ।अटल के भगवा गुंडे वाले बयान को लेकर प्रबल समर्थकों ने हर जिले में मोर्चा खोला हुआ है । प्रबल प्रताप सिंह जूदेव ने आगे बताया कि धर्मान्तरण हमारी हिंदुत्व को खोखला कर रही है छत्तीसगढ़ ओडिशा और झारखंड में पूरी गैंग सक्रिय है लेकिन हमारी टीम की मेहनत और लगन से प्रदेश में इनके द्वारा किये जा रहे करतूतों का पर्दाफाश हो जा रहा है। हम सनातन की रक्षा को लेकर पूरी तरह से समर्पित हैं मेरे पिताजी स्व दिलीप सिंह जूदेव हमेशा आदिवासीयों की रक्षा की है और उनकी रक्षा की है और इस कार्य को आगे बढ़ाते हुए पूरे सनातन समाज की रक्षा करूँगा । आगे प्रबल प्रताप सिंह जूदेव ने कहा कि धर्मान्तरण पर मैं विशेष रूप से मुख्यमंत्री जी से बात किया हूँ इसपर अब कठोर कानून बनने वाला है प्रदेश में विधर्मियों द्वारा अराजकता का माहौल बनाया जा रहा है। कूटरचित तरीके से धर्मान्तरण को बढ़ावा दिया जा रहा है। ऐसे में हमारी सनातन संस्कृति और परंपरा पर प्रतिघात कर रहे हैं हमें एकजुटता का परिचय देते हुए सभी हिन्दू समाज को एक साथ खड़ा होना होगा ऐसे विधर्मियों को अब सबक सिखाने का समय आ गया है। हमारे जशपुर, सरगुजा, बस्तर, बलरामपुर क्षेत्र में तो धर्मान्तरण का खेल चलता था लेकिन अब ये बड़े पैमाने पे करने की साजिश रच रहे हैं जिसमें अब रायगढ़, बिलासपुर, कोरबा जैसे शहरों में भी शुरू हो चुका है । रायगढ़ की घटना की मैं कड़ी निंदा करता हूँ इसपर प्रशासन कड़ी कार्यवाही करते हुए कुछ लोगों के खिलाफ एफआईआर की है। हमारा संघर्ष हिंदुओं और सनातन के लिये मरते दम तक जारी रहेगा । मेरे पिताजी स्व दिलीप सिंह जूदेव ने अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया अब मेरे परीक्षा की घड़ी है आपलोगों के आशीर्वाद और समर्थन से सनातन समाज की रक्षा में कोई कसर नहीं छोडूंगा।
और पढ़ें ...

अपने ही पत्र पर उलझे मुख्यमंत्री

छत्तीसगढ़ में सहकारी समिति के कर्मचारी 4 नवंबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं, जिससे 14 नवंबर से शुरू होने वाली धान खरीदी प्रभावित हो सकती है। कर्मचारियों ने तीन प्रमुख मांगें रखी हैं: 1. सूखे हुए धान का प्रावधान। 2. प्रदेश की सभी समितियों को प्रबंधकीय अनुदान देने का मध्य प्रदेश जैसा प्रावधान, ताकि समय पर वेतन मिल सके। 3. सेवा नियम 2018 में संशोधन कर नया वेतनमान लागू करना। इस हड़ताल का कारण यह है कि धान खरीदी में इन समितियों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है, और यदि उनकी मांगों पर सहमति नहीं बनी तो किसानों के लिए धान बेचने में समस्याएं आ सकती हैं। राज्यभर के लगभग 13,000 कर्मचारी इस हड़ताल में शामिल हैं और वे अपने मुद्दों को लेकर संघर्षरत हैं, ताकि सरकार जल्द से जल्द उनकी मांगों को पूरा करे​​​​​​​​। छत्तीसगढ़ में 2058 सहकारी समितियां के लगभग 13000 कर्मचारी 4 नवंबर से हड़ताल पर हैं और 15 नवंबर से प्रदेश में धान खरीदी शुरू होना है जिस पर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने विष्णु देव साय सरकार पर अनेक आरोप लगाते हुए पत्रकार वार्ता में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का 9 नवंबर 2021 का एक पत्र मीडिया को जारी करते हुए कहा कि जब वे भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष थे उन्होंने मुख्यमंत्री के नाते मुझे पत्र लिखकर सहकारी समितियां के कर्मचारियों की हड़ताल का समर्थन किया था आज वही कर्मचारी हड़ताल पर हैं मुख्यमंत्री धान खरीदी शुरू कैसे करेंगे की मांगे मानेंगे या फिर हड़ताल के कारण धान खरीदी शुरू नहीं होगी उल्लेखनीय है कि भारतीय जनता पार्टी के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष विष्णु देव साय ने तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को जारी पत्र में सहकारी समितियां के कर्मचारियों की मांग ऑन का समर्थन किया था अब देखने वाली बात यह है की पूर्व मुख्यमंत्री द्वारा धान खरीदी न करने का षड्यंत्र रचने का जो आरोप लगाया है उसे पर प्रदेश सरकार का क्या जवाब आता है ?
और पढ़ें ...

श्री गुरु नानक देव जी की जयंती पर विशाल नगर कीर्तन - शोभायात्रा

गुरु नानक देव जी की जयंती को ‘गुरु पर्व’ या ‘गुरुपुरब’ के रूप में बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। गुरु नानक देव जी सिख धर्म के संस्थापक और पहले गुरु थे। उनका जन्म कार्तिक पूर्णिमा के दिन 1469 में हुआ था, और इसलिए उनकी जयंती को ‘प्रकाश पर्व’ के रूप में मनाया जाता है। इस अवसर पर देशभर में भव्य शोभायात्राएँ निकाली जाती हैं। *श्री गुरुनानक देव जी के प्रकाश पर्व पर राजधानी रायपुर में 10 नवंबर को विशाल नगर कीर्तन* श्री गुरु नानक देव जी के पावन प्रकाश पर्व की खुशी में श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की छत्रछाया में,पंज प्यारों की अगुवाई में खालसाई शान के साथ रविवार 10 नवंबर को दोपहर 2:00 बजे गुरुद्वारा स्टेशन रोड रायपुर से विशाल नगर कीर्तन आरंभ होकर संजय गांधी चौक, श्री गुरु नानक चौक,एम जी रोड, शारदा चौक, जय स्तंभ चौक, शास्त्री चौक, कचहरी चौक, खालसा स्कूल के सामने से होकर गुरुद्वारा गोविंद नगर पंडरी में सम्पन्न होगा | गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान सुरेंद्र सिंह छाबड़ा ने बताया कि श्री गुरू नानक देव जी की जयंती के उपलक्ष में जयंती से पहले विशाल नगर कीर्तन (शोभायात्रा) निकालने की परंपरा रही है जिसका पालन आज तक सिक्ख समाज करता है | इस वर्ष भी श्री गुरू नानक देव जी की जयंती से पूर्व आयोजित नगर कीर्तन खलसाई शान के साथ निकाला जाएगा | प्रभातफेरी में भी बड़ी संख्या में संगत पहुंच रही है इस वर्ष शौर्य का प्रतीक पंजाब की गुरदीप सिंह गतका पार्टी,जबलपुर की श्याम बैंड,उड़ीसा का घन्टा बाजा, सिक्ख बैंड विशेष आकर्षण का केंद्र रहेंगे नगर कीर्तन में श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की पालकी की अगुवाई कर रहे पंज प्यारों के आगे सफाई सेवा कर फूलों की सेज सजाई जाएगी | इस विशेष अवसर पर गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के सुरेंद्र सिंह छाबड़ा,महेंद्र सिंह छाबड़ा,इंदरजीत सिंह छाबड़ा, कल्याण सिंह पसरीजा, तेजिंदर सिंह होरा,मंजीत सिंह सलूजा,गुरमीत सिंह गुरदत्ता, हरजीत सिंह अजमानी, गुरदीप सिंह छाबड़ा, कुलदीप सिंह चावला, भूपेंद्र सिंह मक्कड़,सतपाल सिंह खनूजा, निरंजन सिंह खनूजा,कुलजीत सिंह मक्कड़,तरजीत सिंह मल्होत्रा,रजिंदर सिंह सलूजा,रविंदर सिंह दत्ता,महेंदर पाल सिंह छाबड़ा,भगत सिंह छाबड़ा, इंदरपाल सिह अजमानी,रश्मित सिंह टुटेजा,इंदरजीत सिंह सलूजा,रविंदर सिंह चावला,आविन्दर सिंह सलूजा,बलजीत सिंह भल्ला,गुरुचरण सिंह टांक, प्रीतपाल सिंह मिस्सन,कुलवंत सिंह अरोरा,चरण सिंह अरोरा,मनीष चंदानी ने समस्त गुरुनानक नाम लेवा संगत से अपने कारोबार बंद कर महिलाएं सफेद सूट नीला दुपट्टा, पुरुष सफेद ड्रेस नीली दस्तार सजा कर नगर कीर्तन में शामिल होने की अपील की है | *शोभायात्रा का महत्व और आयोजन* गुरु नानक देव जी की जयंती पर आयोजित होने वाली शोभायात्रा, एक धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन होता है जिसमें लोग पूरे श्रद्धा भाव के साथ हिस्सा लेते हैं। इस यात्रा का उद्देश्य गुरु नानक देव जी के उपदेशों और जीवन से लोगों को अवगत कराना है। यात्रा का आरंभ प्रायः किसी प्रमुख गुरुद्वारे से किया जाता है और इसे नगर की विभिन्न गलियों और सड़कों पर घुमाया जाता है। *शोभायात्रा की विशेषताएं* 1. नगर कीर्तन: शोभायात्रा में सबसे पहले ‘नगर कीर्तन’ निकाला जाता है। नगर कीर्तन का अर्थ है कि संगत (समुदाय) मिलकर कीर्तन करते हुए नगर में यात्रा करती है। इसमें गुरु ग्रंथ साहिब को सजी हुई पालकी में रखा जाता है और इसे सबसे आगे चलाया जाता है। कीर्तन की धुन से पूरी शोभायात्रा एक धार्मिक और आध्यात्मिक माहौल में रहती है। 2. पंज प्यारे: शोभायात्रा में पंज प्यारे पारंपरिक वेशभूषा में श्री गुरू ग्रंथ साहिब जी की अगुवाई करते पैदल चलते हैं | 3. गुरबाणी और शबद कीर्तन: शोभायात्रा के दौरान गुरबाणी और शबद कीर्तन गाए जाते हैं। यह शबद (भजन) गुरु नानक देव जी के जीवन और उनकी शिक्षाओं से जुड़े होते हैं, जो श्रद्धालुओं को अध्यात्मिक रूप से प्रेरित करते हैं। 4. निशान साहिब (ध्वज): शोभायात्रा में निशान साहिब, सिख धर्म का पवित्र ध्वज, ऊँचा उठाया जाता है। यह ध्वज सिख धर्म के सम्मान और अखंडता का प्रतीक है। 5. गटका प्रदर्शन: कुछ शोभायात्राओं में सिख योद्धा ‘गटका’ नामक पारंपरिक युद्ध कला का प्रदर्शन करते हैं। गटका एक शौर्यपूर्ण मार्शल आर्ट है जिसमें तलवारों का कुशलता से प्रदर्शन किया जाता है। यह प्रदर्शन सिख वीरता और साहस का प्रतीक माना जाता है। 6. लंगर सेवा: शोभायात्रा में लंगर (भोजन सेवा) का आयोजन भी किया जाता है। भक्तों और यात्रियों को निःशुल्क भोजन और प्रसाद वितरण किया जाता है। इस सेवा का उद्देश्य गुरु नानक के द्वारा दी गई सेवा और समर्पण की भावना को प्रकट करना है। शोभायात्रा का मार्ग और श्रद्धालुओं का उत्साह इस शोभायात्रा का मार्ग गुरुद्वारे से शुरू होकर नगर के विभिन्न हिस्सों से होकर गुजरता है। हर तरफ रंग-बिरंगे फूलों और रोशनी से सजी हुई गलियाँ होती हैं। शोभायात्रा के मार्ग पर लोग भक्ति-भाव से पंक्तिबद्ध होकर खड़े होते हैं और गुरु नानक देव जी के जयकारे लगाते हैं। श्रद्धालु सड़कों पर साफ-सफाई करते हैं और गुरुद्वारे के सेवादार पूरे रास्ते में पानी और अन्य जरूरत की वस्तुएँ उपलब्ध कराते हैं। गुरु नानक देव जी की शिक्षाओं की झलक इस शोभायात्रा के दौरान गुरु नानक देव जी की शिक्षाओं पर भी जोर दिया जाता है, जैसे - एकता, समानता, परोपकार, और भगवान के प्रति अडिग विश्वास। उनका संदेश ‘नाम जपो, किरत करो, वंड छको’ (भगवान का नाम जपना, मेहनत करना, और दूसरों के साथ बाँटना) हर किसी को एक बेहतर इंसान बनने की प्रेरणा देता है। गुरु नानक देव जी की जयंती पर निकाली जाने वाली यह शोभायात्रा सिर्फ एक धार्मिक आयोजन ही नहीं, बल्कि समाज को भाईचारे, मानवता, और शांति का संदेश देने वाला एक महत्वपूर्ण आयोजन भी है। इस शोभायात्रा के माध्यम से लोग गुरु नानक देव जी की शिक्षाओं को आत्मसात करते हैं और उनके पदचिन्हों पर चलने की प्रेरणा पाते हैं।
और पढ़ें ...

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने छत्तीसगढ़ की सड़कों के लिए दी 20 हजार करोड़ की सौगात

केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने आरसी अर्थात इंडियन रोड कांग्रेस के रायपुर में आयोजित 83 वे इंडिया सड़क कांग्रेस के कार्यक्रम में संबोधित करते हुए छत्तीसगढ़ को 20000 करोड़ के सड़कों फ्लाई ओवर एवं अन्य कार्यों की सौगात दी |
और पढ़ें ...

भारतीय सड़क कांग्रेस (IRC) सड़क एवं सेतु निर्माण से संबंधित मानक एवं गाइडलाइन्स निर्धारित करने वाली देश की सर्वोच्च संस्था - अरुण साव

केन्द्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री  नितिन गडकरी 8 नवम्बर से रायपुर में आयोजित भारतीय सड़क कांग्रेस के 83वें वार्षिक अधिवेशन का शुभारंभ करेंगे। रायपुर के साइंस कॉलेज परिसर में 8 नवम्बर से 11 नवम्बर तक इसका आयोजन किया गया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और उप मुख्यमंत्री अरुण साव भी 8 नवम्बर को शाम साढ़े चार बजे आयोजित अधिवेशन के शुभारंभ कार्यक्रम में शामिल होंगे। चार दिनों तक चलने वाले भारतीय सड़क कांग्रेस के अधिवेशन में सड़क निर्माण और सड़क सुरक्षा से जुड़े देशभर के दो हजार से अधिक विशेषज्ञ, वैज्ञानिक, अभियंता और अधिकारी शामिल होंगे। अधिवेशन के शुभारंभ कार्यक्रम में सड़क निर्माण तकनीक और सामग्री से संबंधित तीन गाइडलाइन्स और एक मैनुअल भी जारी किए जाएंगे।

उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने आज तकनीकी प्रदर्शनी का किया उद्घाटन उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने आज तकनीकी प्रदर्शनी का किया उद्घाटन उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने आज तकनीकी प्रदर्शनी का किया उद्घाटन 

उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने आज तकनीकी प्रदर्शनी का किया उद्घाटन 

उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने आज शाम साइंस कॉलेज परिसर में भारतीय सड़क कांग्रेस के 83वें वार्षिक अधिवेशन के तहत आयोजित तकनीकी प्रदर्शनी का शुभारंभ किया। उन्होंने प्रदर्शनी का भ्रमण कर सड़क निर्माण, सड़क सुरक्षा, निर्माण सामग्री और सड़कों के रखरखाव से जुड़ी मशीनरी व उपकरणों की निर्माता तथा आपूर्तिकर्ता कंपनियों के प्रतिनिधियों से इनकी जानकारी ली। विभिन्न कंपनियों द्वारा यहां लगाए गए स्टॉल्स मंर सड़क निर्माण से संबंधित तकनीकी मटेरियल्स, डिजाइन, टेक्नोलॉजी इत्यादि का प्रदर्शन आगामी चार दिनों तक किया जाएगा।

उप मुख्यमंत्री श्री साव ने आज आयोजन स्थल पर प्रेस-कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए बताया कि भारतीय सड़क कांग्रेस (IRC) सड़क एवं सेतु निर्माण से संबंधित मानक एवं गाइडलाइन्स निर्धारित करने वाली देश की सर्वोच्च संस्था है। आईआरसी में भारत सरकार, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण, एन.एच.ए.आई.डी.सी.एल., बी.आर.ओ., मिलिट्री इंजीनियरिंग सर्विसेस, एन.आर. आई.डी.ए., ग्रामीण विकास मंत्रालय, शहरी विकास मंत्रालय, सभी राज्यों के लोक निर्माण विभाग, ग्रामीण सड़क निर्माण विभाग, पब्लिक सेक्टर, प्राइवेट सेक्टर, रिसर्च आर्गेनाइजेशन्स के इंजीनियर्स की सोसायटी आदि शामिल हैं। 

श्री साव ने प्रेस-कॉन्फ्रेंस में बताया कि आईआरसी का मुख्य उद्देश्य सड़क निर्माण, सेतु निर्माण एवं यातायात से संबंधित मानकों का निर्धारण करना तथा निर्माण संबंधी गाइडलाइन्स एवं मैन्युअल तैयार करना, समय-समय पर उनका पुनरीक्षण करना, देश-विदेश में आ रही सड़क निर्माण की नई तकनीकों एवं सामग्रियों का अध्ययन कर देश में लागू करने के लिए मानक तैयार करना है। आईआरसी द्वारा जारी किए गए मानकों एवं गाइडलाइन्स के अनुसार ही भारत सरकार एवं अन्य सड़क निर्माण विभाग सड़क निर्माण करते हैं। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ राज्य के गठन के बाद पहली बार यहां आईआरसी का वार्षिक अधिवेशन हो रहा है जो कि प्रदेश के लिए गौरव का विषय है। लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता श्री के.के. पीपरी और भारतीय सड़क कांग्रेस के महासचिव श्री एस.के. निर्मल ने भी प्रेस-कॉन्फ्रेंस में अधिवेशन के बारे में जानकारी दी। लोक निर्माण विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह भी इस दौरान मौजूद थे। 

आईआरसी के चार दिवसीय अधिवेशन के दौरान विशेषज्ञों, वैज्ञानिकों, अभियंताओं और अधिकारियों के बीच विभिन्न बैठकों, परिचर्चाओं, तकनीकी सत्रों और दस्तावेजों पर चर्चा होगी। इस दौरान आयोजित हाइवे रिसर्च बोर्ड की बैठक में भारत सरकार, राज्य सरकार, रिसर्च इंस्टीट्यूट एवं शैक्षणिक संस्थानों, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों एवं प्राइवेट सेक्टर के प्रतिनिधि सड़क निर्माण से संबंधित अनुसंधान एवं विकास के संबंध में रोड मैप तैयार करेंगे। अधिवेशन के चारों दिन अलग-अलग तकनीकी सत्रों में विभिन्न संस्थानों, शासकीय विभागों और निजी क्षेत्र से आए इंजीनियर्स अपना प्रस्तुतीकरण देंगे। अधिवेशन के दौरान आईआरसी की बिजनेस मीटिंग और काउंसिल मीटिंग भी आयोजित है। 8, 9 एवं 10 नवम्बर को शाम को सांस्कृतिक कार्यक्रम भी होंगे। अधिवेशन में शामिल होने आए देशभर के प्रतिनधियों को छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक वैभव, पुरातत्व, पर्यटन, पौराणिक और धार्मिक महत्व से जुड़े स्थलों का भ्रमण भी कराया जाएगा |

और पढ़ें ...

श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी को सिक्ख समाज जीवित गुरु मानता है

श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का गुरु गद्दी दिवस: सिख परंपरा में एक महत्वपूर्ण पर्व प्रकाश पर्व का महत्व श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का गुरु गद्दी दिवस सिख समुदाय के लिए एक महत्वपूर्ण और पवित्र पर्व है, जो गुरु गोबिंद सिंह जी द्वारा गुरु ग्रंथ साहिब को गुरु के रूप में प्रतिष्ठित करने की स्मृति में मनाया जाता है। यह दिवस हर साल कार्तिक मास की अमावस्या के दिन मनाया जाता है। गुरु गोबिंद सिंह जी ने अपनी अंतिम वाणी में घोषणा की थी कि उनके बाद कोई भी मानव गुरु नहीं होगा, बल्कि सिख धर्म का मार्गदर्शन गुरु ग्रंथ साहिब जी के माध्यम से किया जाएगा। इसे "प्रकाश पर्व" के नाम से भी जाना जाता है और इसे व्यापक उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। गुरु ग्रंथ साहिब जी का महत्व गुरु ग्रंथ साहिब जी केवल एक धार्मिक ग्रंथ ही नहीं, बल्कि सिखों के लिए जीवित गुरु के समान हैं। इसमें 1430 अंगों (पन्नों) में सिख धर्म के दस गुरुओं के अलावा संत कबीर, भक्त रविदास, नामदेव, फरीद जैसे संतों की वाणी भी शामिल है। इसे "गुरु" का दर्जा देकर गुरु गोबिंद सिंह जी ने सिख धर्म को एक दिशा और स्थायित्व प्रदान किया, जिससे सिख समुदाय को आत्म-निर्भरता का अहसास हुआ। गुरुद्वारों में विशेष कार्यक्रम गुरु गद्दी दिवस के अवसर पर सभी गुरुद्वारों में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। अखंड पाठ, कीर्तन दरबार, शब्द कीर्तन और अरदास के माध्यम से भक्तगण गुरु ग्रंथ साहिब जी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। इस दिन कीर्तन दरबारों में गुरु ग्रंथ साहिब के शिक्षाओं का प्रचार और प्रसार किया जाता है। इसके अलावा, लंगर सेवा (सामुदायिक भोजन सेवा) का भी आयोजन होता है, जहाँ हर धर्म, जाति और वर्ग के लोग एक साथ बैठकर भोजन करते हैं, जो समानता का प्रतीक है। सिख परंपरा का संदेश और उद्देश्य गुरु ग्रंथ साहिब जी का गुरु गद्दी दिवस सिख समुदाय को एकता, सेवा और समर्पण के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। इस दिन गुरु ग्रंथ साहिब की शिक्षाओं पर चिंतन किया जाता है, जिसमें मानवता, भाईचारे, करुणा, सहनशीलता और सत्य की शिक्षा मिलती है। यह दिवस हमें एक ऐसी दुनिया का निर्माण करने की प्रेरणा देता है जहाँ प्रेम, समानता और न्याय का साम्राज्य हो। प्रमुख स्थानों पर समारोह इस पर्व के अवसर पर पंजाब के अमृतसर स्थित स्वर्ण मंदिर, आनंदपुर साहिब और पटना साहिब में विशेष समारोह आयोजित होते हैं। लाखों श्रद्धालु इन पवित्र स्थानों पर मत्था टेकने के लिए पहुंचते हैं और गुरु साहिब की शिक्षाओं का अनुसरण करने की प्रेरणा प्राप्त करते हैं। देश-विदेश से भी श्रद्धालु इस पर्व में सम्मिलित होने के लिए आते हैं और अपनी आस्था को प्रकट करते हैं। गुरु गद्दी दिवस का समाज पर प्रभाव यह पर्व समाज में सौहार्द, एकता और सच्चे मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। इस दिन के आयोजन का उद्देश्य है कि लोग गुरु ग्रंथ साहिब की शिक्षाओं को अपने जीवन में आत्मसात करें और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास करें। गुरु ग्रंथ साहिब के सिद्धांतों पर चलकर हम एक सशक्त और शांतिपूर्ण समाज की स्थापना कर सकते हैं। निष्कर्ष गुरु गद्दी दिवस सिख धर्म के अनुयायियों के लिए एक ऐसा पर्व है, जो उन्हें अपने धर्म और परंपराओं के प्रति और अधिक श्रद्धा से जोड़ता है। यह पर्व गुरु ग्रंथ साहिब जी की शिक्षाओं के महत्व को उजागर करता है और लोगों को एकता, प्रेम और समर्पण के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। cg24news.in
और पढ़ें ...

छत्तीसगढ़ में अपराध की स्थिति

छत्तीसगढ़ में अपराध की स्थिति पर एक संक्षिप्त रिपोर्ट 1. *संगठित अपराध और अपराध दर में वृद्धि* हाल के वर्षों में छत्तीसगढ़ में अपराध दर में वृद्धि देखी गई है, जिसमें संगठित अपराध, चोरी, डकैती और हत्याओं की घटनाओं में भी बढ़ोतरी हो रही है। पुलिस विभाग के आंकड़ों के अनुसार, इस वृद्धि का मुख्य कारण नगरीकरण, बेरोजगारी और बढ़ती आर्थिक असमानता को माना जा रहा है। 2. माओवाद और नक्सलवाद: छत्तीसगढ़ के बस्तर, दंतेवाड़ा, सुकमा और नारायणपुर जैसे इलाके लंबे समय से नक्सल प्रभावित रहे हैं। माओवादियों का प्रभाव इन क्षेत्रों में अब भी सक्रिय है, जिससे जन सुरक्षा पर प्रतिकूल असर पड़ता है। सरकार ने विशेष बलों और सुरक्षा अभियान चलाकर माओवादी गतिविधियों को नियंत्रित करने के प्रयास किए हैं, लेकिन इस समस्या का पूरी तरह से समाधान नहीं हुआ है। 3. महिला अपराध और बाल अपराध: महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराध भी एक गंभीर समस्या बन चुकी है। विशेषकर महिलाओं के प्रति दुष्कर्म, घरेलू हिंसा, और बच्चों के शोषण के मामले काफी संख्या में दर्ज हो रहे हैं। पुलिस द्वारा इन मामलों पर तेजी से कार्रवाई करने के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन अपराध दर में स्थिरता नहीं आई है। 4. साइबर क्राइम: टेक्नोलॉजी के विकास के साथ-साथ छत्तीसगढ़ में साइबर अपराध के मामले भी तेजी से बढ़े हैं। साइबर धोखाधड़ी, फ़िशिंग, और ऑनलाइन वित्तीय घोटालों से लोग प्रभावित हो रहे हैं। पुलिस ने साइबर क्राइम सेल का गठन किया है ताकि इस प्रकार के अपराधों पर नियंत्रण किया जा सके, लेकिन साइबर क्राइम के बढ़ते मामलों पर नियंत्रण पाने में चुनौतियां आ रही हैं। 5. *कानून व्यवस्था और पुलिस की भूमिका* छत्तीसगढ़ पुलिस राज्य में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए अनेकों प्रयास कर रही है। इनमें CCTV निगरानी, सामुदायिक पुलिसिंग, और नशामुक्ति अभियान जैसे कदम शामिल हैं। पुलिस की मौजूदगी से कई इलाकों में अपराध पर नियंत्रण पाया गया है, लेकिन सीमित संसाधनों और बल की कमी के कारण चुनौतियां बनी हुई हैं। 6. *राज्य सरकार के प्रयास* राज्य सरकार अपराध पर नियंत्रण के लिए सख्त कानून लागू कर रही है। इसके अलावा, महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। युवा वर्ग के लिए रोजगार सृजन के प्रयास किए जा रहे हैं ताकि बेरोजगारी के कारण अपराध की ओर जाने की संभावना कम हो सके। वहीं दूसरी तरफ राज्य में अपराधों को लेकर विपक्ष लगातार हमले कर रहा है - सत्ता पक्ष को घेर रहा है | विपक्षी कांग्रेस द्वारा बलौदा बाजार अग्निकांड, कवर्धा के अलावा राजधानी में हो रही हत्याओं को लेकर सत्ता पक्ष पर अपराध नियंत्रण न कर पाने के आरोप लगाए जा रहे है | निष्कर्ष : छत्तीसगढ़ में अपराध पर नियंत्रण के लिए पुलिस और सरकार कई स्तरों पर प्रयास कर रहे हैं, लेकिन चुनौतियों की जड़ें गहरी हैं। संगठित अपराध, माओवाद, साइबर अपराध और महिलाओं एवं बच्चों के प्रति अपराधों को नियंत्रित करने के लिए अभी भी सतत प्रयासों और योजनाओं की जरूरत है। छत्तीसगढ़ को अपराध-मुक्त राज्य बनाने के लिए जागरूकता अभियान, प्रभावी कानूनों और समन्वित सुरक्षा प्रयासों की आवश्यकता है। (सूत्र : छत्तीसगढ़ पुलिस विभाग की रिपोर्ट और राज्य सरकार के उपलब्ध दस्तावेज )
और पढ़ें ...

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने केंद्रीय योग और प्राकृतिक चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (CRIYN) रायपुर का किया वर्चुअली शिलान्यास

 

 

10 एकड़ क्षेत्र में 24 माह में तैयार होगा 100 बिस्तरों का केंद्रीय योग और प्राकृतिक चिकित्सा अनुसंधान संस्थान
CRIYN से प्रशिक्षण लेकर स्वरोजगार की तरफ अग्रसर होंगे छत्तीसगढ़ के युवा: स्वास्थ्य मंत्री श्री जायसवाल
रायपुर, 29 अक्टूबर 2024

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने  केंद्रीय योग और प्राकृतिक चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (CRIYN) रायपुर  का किया वर्चुअली शिलान्यास

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने  केंद्रीय योग और प्राकृतिक चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (CRIYN) रायपुर  का किया वर्चुअली शिलान्यास

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने  केंद्रीय योग और प्राकृतिक चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (CRIYN) रायपुर  का किया वर्चुअली शिलान्यास

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने  केंद्रीय योग और प्राकृतिक चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (CRIYN) रायपुर  का किया वर्चुअली शिलान्यास
देश के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस पर वर्चुअल माध्यम से रायपुर में बनने वाले 100 बिस्तरों वाले केंद्रीय योग और प्राकृतिक चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (CRIYN) का शिलान्यास किया।प्रधानमंत्री श्री मोदी अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान, नई दिल्ली से वर्चुअल माध्यम से रायपुर से जुड़े थे। श्री मोदी ने कहा कि देश के लोग जितना ज्यादा स्वस्थ रहेंगे, देश की प्रगति उतनी ही तेजी से होगी। पूरी दुनिया के लोग योग और पंचकर्म के लिए भारत आते हैं और आने वाले समय में इनकी संख्या और बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि भारत सरकार स्वास्थ्य के क्षेत्र में संवेदनशीलता के साथ काम रही है।
केंद्रीय योग और प्राकृतिक चिकित्सा अनुसंधान संस्थान रायपुर को केन्द्रीय योग और प्राकृतिक चिकित्सा अनुसंधान परिषद् (सीसीआरवायएन) के तहत स्थापित किया जा रहा है। 90 करोड़ रूपए की लागत से इस संस्थान का निर्माण 24 माह में पूरा होगा। राज्य सरकार ने इस संस्थान के लिए 10 एकड़ की भूमि विभाग को उपलब्ध करा दी है। यह छत्तीसगढ़ का पहला योग और प्राकृतिक चिकित्सा अनुसंधान केंद्र और अस्पताल होगा जो गैर संचारी रोगों जैसे मोटापा, प्रीडायबिटीज, मेटाबोलिक सिंड्रोम, व गठिया आदि के  उपचार की सुविधा प्रदान करेगा।
अनुसंधान केन्द्र में बाह्य रोगी और प्रशासनिक ब्लॉक, आंतरिक रोगी ब्लॉक, स्टाफ क्वार्टर, योग हॉल, आहार केन्द्र, मालिश और फिजियोथेरेपी अनुभाग के साथ ही अनुसंधान ब्लॉक भी स्थापित होंगे। यह केन्द्र स्पा और वेलनेस थेरेपी में प्रशिक्षण प्रमाणन पाठ्यक्रम और अनुसंधान में फेलोशिप पाठ्यक्रम संचालित करेगा।
केंद्र में वेलनेस थिरेपी में प्रशिक्षण प्रमाणन पाठ्यक्रम और अनुसंधान में फेलोशिप पाठ्यक्रम का भी संचालन होगा। इस संस्थान के शुरू होने से योग और प्राकृतिक चिकित्सा के प्रभावों के बारे में नए ज्ञान का विकास होगा।
इस मौके पर स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल ने अपने संबोधन में कहा कि भारत देश अपनी पुरानी पद्धतियों को संजोकर लगातार आगे बढ़ रहा है। श्री जायसवाल ने कहा कि आज धनतेरस के अवसर पर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने राज्य को केंद्रीय योग और प्राकृतिक चिकित्सा अनुसंधान संस्थान के रूप में जो उपहार दिया है उसे हम और हमारी आने वाली पीढ़ियां भी याद करती रहेंगी। उन्होंने कहा कि इस अनुसंधान केंद्र के स्थापित हो जाने के बाद राज्य के युवाओं को स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे। युवा यहां से प्रशिक्षण प्राप्त कर सक्षम बनेंगे और स्वरोजगार को बढ़ावा देंगे। उन्होंने कहा कि भारत देश योग और आयुर्वेद में सदैव अग्रणी रहा है और इस तरह के अनुसंधान केंद्रों के खुलने से इस परंपरा को और बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय छत्तीसगढ़ के चतुर्मुखी विकास के लिए लगातार काम कर रहे हैं। राज्य की स्वास्थ्य सुविधाओं में विस्तार ,मुख्यमंत्री की प्राथमिकताओं में शामिल है।
रायपुर के डीडीयू ऑडिटोरियम में आयोजित कार्यक्रम के दौरान सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल, विधायक श्री पुरंदर मिश्रा, विधायक श्री खुशवंत साहेब, विधायक श्री मोती लाल साहू, आयुष विभाग के अधिकारी एवं आयुर्वेद कॉलेज के विद्यार्थी उपस्थित थे।

और पढ़ें ...

कांग्रेस के खिलाफ थाने पहुंची भाजपा : चुनाव आयोग से भी करेंगे शिकायत

भारतीय जनता पार्टी रायपुर द्वारा थाना सिविल लाइन में कांग्रेस के खिलाफ एक शिकायत दर्ज कराई है। इस शिकायत में भाजपा ने कांग्रेस पर चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन, अभद्र भाषा का प्रयोग, और फर्जी वीडियो प्रसारित करने के आरोप लगाए हैं। भाजपा का आरोप है कि कांग्रेस द्वारा सोशल मीडिया और विभिन्न प्लेटफार्मों पर भाजपा नेताओं के खिलाफ भ्रामक और अपमानजनक सामग्री का प्रचार किया जा रहा है, जो कि न केवल चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन है, बल्कि समाज में गलत संदेश भी फैलाता है। इस शिकायत में भाजपा ने कांग्रेस के कुछ सदस्यों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है। भारतीय जनता पार्टी रायपुर दक्षिण चुनाव संयोजक व विधायक शिवरतन शर्मा व विधायक अजय चंद्राकर के नेतृत्व में भाजपा पदाधिकारी सिविल लाइन थाना पहुंचे | भाजपा के नेताओं ने कहा है कि कांग्रेस के इस तरह के कृत्यों से चुनावी माहौल को दूषित करने का प्रयास किया जा रहा है और जनता को भ्रमित किया जा रहा है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि कांग्रेस के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए और ऐसे कृत्यों पर लगाम लगाई जाए ताकि चुनाव निष्पक्ष और स्वतंत्र रूप से संपन्न हो सके। इस शिकायत के साथ भाजपा ने सोशल मीडिया पर प्रसारित किए गए वीडियो और पोस्ट के साक्ष्य भी प्रस्तुत किए हैं, जिनमें कथित तौर पर फर्जी जानकारियां फैलाई गई हैं। थाना सिविल लाइन के थानेदार रोहित पुलिस ने इस मामले पर जांच शुरू कर दी है और कहा है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो उचित कार्रवाई की जाएगी। राजनीतिक दलों के बीच इस प्रकार की शिकायतों से राज्य में चुनावी माहौल गर्माता दिख रहा है और आगामी चुनावों में इसकी गूंज भी सुनाई दे सकती है।cg24news.in
और पढ़ें ...

दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू ने एनआईटी रायपुर ने 1044 बी.टेक और बी.आर्क छात्रों, 225 एमसीए और एम.टेक छात्रों, और 170 पीएचडी छात्रों को डिग्रियाँ प्रदान कीं

एनआईटी रायपुर में 14वां दीक्षांत समारोह किया गया आयोजित, भारत की माननीय राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु रही मुख्य अतिथि राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) रायपुर ने 25 अक्टूबर, 2024 को अपना 14वां दीक्षांत समारोह पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में आयोजित किया, जिसमें भारत की माननीय राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं। इस समारोह में छत्तीसगढ़ के माननीय राज्यपाल रमेन डेका, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, और माननीय राज्य मंत्री, नगरीय एवं नगर योजना तोखन साहू भी विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। समारोह की अध्यक्षता एनआईटी रायपुर के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के अध्यक्ष डॉ. सुरेश हावरे ने की और इस कार्यक्रम में संस्थान के निदेशक डॉ. एन. वी. रमना ,सीनेट सदस्य, रजिस्ट्रार, डीन, विभागाध्यक्ष और संकाय सदस्य उपस्थित रहे। इस दीक्षांत समारोह में एनआईटी रायपुर ने 1044 बी.टेक और बी.आर्क छात्रों, 225 एमसीए और एम.टेक छात्रों, और 170 पीएचडी छात्रों को डिग्रियाँ प्रदान कीं। कार्यक्रम में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्रों को 13 गोल्ड और 12 सिल्वर मेडल बी.टेक और बी.आर्क के लिए और 11 गोल्ड तथा 11 सिल्वर मेडल एमसीए और एम.टेक के लिए दिए गए। कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग के बी.टेक छात्र यश बंसल को संस्थान का ओवरऑल टॉपर घोषित किया गया। अपने संबोधन में माननीय राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने सभी स्नातक छात्रों को उनकी इस महत्वपूर्ण उपलब्धि पर बधाई दी और शिक्षकों के योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा, "आज, जब आप जीवन के एक नए अध्याय में कदम रख रहे हैं, तो दुनिया की चुनौतियों का समाधान करने में विज्ञान और प्रौद्योगिकी की भूमिका को हमेशा याद रखें। एनआईटी रायपुर में अर्जित ज्ञान का उपयोग जलवायु परिवर्तन, वैश्विक भूख, गरीबी और तकनीकी विकास जैसी चुनौतियों को सुलझाने में करें।" श्रीमती मुर्मू ने भारत की कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के क्षेत्र में उपलब्धियों का उल्लेख किया और हालिया नोबेल पुरस्कारों उधारण दिया, जो एआई में प्रगति की ओर इशारा करते हैं। उन्होंने भारत के स्टार्टअप और नवाचार को समर्थन देने के संकल्प को दोहराया और स्नातकों को प्रेरित किया कि वे इस क्षेत्र में योगदान दें और डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम जैसे वैज्ञानिकों की विरासत को आगे बढ़ाएं। छत्तीसगढ़ के माननीय मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने श्रीमती मुर्मु का आभार व्यक्त किया, और उनके दीक्षांत समारोह में शामिल होने को सभी उपस्थितजनों के लिए गर्व और प्रोत्साहन का स्रोत बताया। उन्होंने एनआईटी रायपुर की महत्ता को रेखांकित करते हुए कहा, "छत्तीसगढ़ के लिए यह गर्व का क्षण है कि हमारे छात्र इतने प्रतिष्ठित संस्थान से स्नातक हो रहे हैं। इंजीनियरिंग शिक्षा केवल तकनीकी ज्ञान तक सीमित नहीं है; यह ज्ञान को समाज की जरूरतों के साथ जोड़ने का माध्यम है।" उन्होंने स्नातकों से छत्तीसगढ़ के विकास में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया। "छत्तीसगढ़, जहाँ अधिकतर जनसंख्या ग्रामीण और वन क्षेत्रों में निवास करती है, ग्रामीण और पर्यावरणीय विकास में युवाओं के तकनीकी कौशल से बहुत लाभान्वित हो सकता है"। मुख्यमंत्री साय ने छात्रों को प्रेरित किया कि वे अपने ज्ञान का उपयोग अपने आसपास के लोगों के जीवन को बेहतर बनाने में करें और राज्य को प्रगति की ओर अग्रसर करें। माननीय राज्यपाल श्री रमेन डेका ने स्नातकों को उनके कठिन परिश्रम और उपलब्धियों के लिए बधाई दी। अपने संबोधन में उन्होंने छात्रों को दृढ़ संकल्प और साहस बनाए रखने का महत्व बताया। उन्होंने कहा, "आज की चुनौतियाँ जटिल हैं, जिनमें जलवायु परिवर्तन, लैंगिक असमानता और बेरोजगारी शामिल हैं। लेकिन एक इंजीनियर के रूप में आपके पास इन क्षेत्रों में बदलाव लाने के लिए अद्वितीय कौशल और दृष्टिकोण हैं।" श्री डेका ने छात्रों से अनुरोध किया कि वे केवल अपने लिए नहीं, बल्कि समाज की सेवा के लिए अपने ज्ञान का उपयोग करें। "कठिन परिस्थितियों से डरें नहीं। आपकी शिक्षा का उद्देश्य केवल पेशेवर उत्कृष्टता नहीं है, बल्कि वैश्विक मुद्दों को संबोधित करना और अपने तकनीकी कौशल से सतत विकास लाना है," उन्होंने जोर दिया। उनकी बातों ने छात्रों को इस बात की याद दिलाई कि उनकी जिम्मेदारियाँ कार्यस्थल से आगे जाकर एक बेहतर भविष्य की दिशा में योगदान देने में निहित हैं। संस्थान के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के अध्यक्ष डॉ सुरेश हावरे ने अपने भाषण में भारत की माननीय राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु जी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें राष्ट्रपति मुर्मु के आगमन से अत्यंत हर्ष की अनुभूति हो रही है | उन्होंने माननीय राष्ट्रपति की जीवन यात्रा पर बात करते हुए कहा कि माननीय राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु जी की यात्रा गांव से ज्ञान तक की यात्रा है | उन्होंने उनकी उपलब्धियों पर प्रकाश डाला और कहा कि हमें माननीय राष्ट्रपति के जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिए| उन्होंने सभी से खुद की क्षमता पहचानने और कभी एक सीमा में न बंधे रहने की बात कही | उन्होंने कहा कि बड़े चैलेंज लो और बड़े बनो , हार से निराश न हो बल्कि उससे सिख के और बड़ी जीत की और बढ़ो | अपने भाषण में एनआईटी रायपुर के निदेशक डॉ. एन. वी. रमना राव ने माननीय राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु व अन्य गणमान्य व्यक्तियों का स्वागत किया और संस्थान की 1956 में सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज के रूप में स्थापना से लेकर 2005 में इसे राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान के रूप में परिवर्तित होने तक की यात्रा को साझा किया। उन्होंने संस्थान की उपलब्धियों की सराहना की, जिसमें 2025 के टाइम्स हायर एजुकेशन वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग में #1001-1200 की रैंकिंग और एनआईआरएफ इंजीनियरिंग श्रेणी में 71वीं रैंक (48.88 अंक) शामिल है। डॉ. राव ने संस्थान की हाल की उपलब्धियों का भी उल्लेख किया: 95 प्रायोजित शोध परियोजनाएँ (32.9 करोड़ रुपये मूल्य), 43 एमओयू पर हस्ताक्षर, शहरी योजना में पीजी पाठ्यक्रम की शुरुआत, और स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी की शीर्ष 2% वैज्ञानिकों की सूची में 15 शिक्षक शामिल थे। इसके अतिरिक्त, संस्थान के संकाय और छात्रों को 14 पेटेंट और डिज़ाइन पुरस्कार प्राप्त हुए, जो नवाचार के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं। संस्थान के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के अध्यक्ष डॉ सुरेश हावरे ने अपने भाषण में भारत की माननीय राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु जी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें राष्ट्रपति मुर्मु के आगमन से अत्यंत हर्ष की अनुभूति हो रही है | उन्होंने माननीय राष्ट्रपति की जीवन यात्रा पर बात करते हुए कहा कि माननीय राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु जी की यात्रा गांव से ज्ञान तक की यात्रा है | उन्होंने उनकी उपलब्धियों पर प्रकाश डाला और कहा कि हमें माननीय राष्ट्रपति के जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिए| उन्होंने सभी से खुद की क्षमता पहचानने और कभी एक सीमा में न बंधे रहने की बात कही | उन्होंने कहा कि बड़े चैलेंज लो और बड़े बनो , हार से निराश न हो बल्कि उससे सिख के और बड़ी जीत की और बढ़ो | कार्यक्रम के दूसरे भाग में पी एच डी विद्यार्थीयों को उपाधि प्रदान की गई साथ ही पी जी प्रोग्राम के विद्यार्थियों को मेडल्स प्रदान किए गए | इसके अतिरिक्त अन्य विद्यार्थियों को भी डिग्री प्रदान की गई | समारोह का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ, जिससे एनआईटी रायपुर के स्नातक छात्रों, संकाय और विशिष्ट अतिथियों के लिए यह एक यादगार दिन बन गया।
और पढ़ें ...

राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान रायपुर के 14 वें दीक्षांत समारोह में पहुंची

राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम पहुंची

राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान रायपुर के 14वें दीक्षांत समारोह में की शिरकत

छत्तीसगढ़ के राज्यपाल श्री रमेन डेका, मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय और आवास एवं शहरी विकास राज्य मंत्री श्री तोखन साहू भी दीक्षांत समारोह में मौजूद

रायपुर, 25 अक्टूबर 2024

राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान रायपुर के 14वें दीक्षांत समारोह में की शिरकत

राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान रायपुर के 14वें दीक्षांत समारोह में की शिरकत

राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान रायपुर के 14वें दीक्षांत समारोह में की शिरकत

राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान रायपुर के 14वें दीक्षांत समारोह में की शिरकत

राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान रायपुर के 14वें दीक्षांत समारोह में की शिरकत

राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान रायपुर के 14वें दीक्षांत समारोह में की शिरकत

राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम पहुंची

राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान रायपुर के 14वें दीक्षांत समारोह में की शिरकत

छत्तीसगढ़ के राज्यपाल श्री रमेन डेका, मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय और आवास एवं शहरी विकास राज्य मंत्री श्री तोखन साहू भी दीक्षांत समारोह में मौजूद

राष्ट्रपति के मुख्य आतिथ्य में पहली बार राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान का दीक्षांत समारोह हो रहा आयोजित

राष्ट्रपति के हाथों 11 होनहार विद्यार्थियों को मिलेगा 12 स्वर्ण  पदक

यश बंसल को मिलेंगे दो स्वर्ण पदक , कंप्यूटर साइंस एवं इंजीनियरिंग शाखा तथा संस्थान में ओवर ऑल टॉपर बनने पर

दीक्षांत समारोह में 1439 विद्यार्थियों को  मिलेगी डिग्री

ऑडिटोरियम उत्साही विद्यार्थियों से भरा हुआ

राष्ट्रपति के साथ गोल्ड मेडलिस्ट का हो रहा फोटो सेशन

और पढ़ें ...