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25 वें टीसीएस रूरल आईटी क्विज़ विजेता बना छत्तीसगढ़
संयुक्त संचालक मत्स्य विभाग के ज्वाइंट डायरेक्टर देव कुमार सिंह एसीबी की गिरफ्त में
मन्नू मानिकपुरी की रिपोर्ट / बिलासपुर :- मत्स्य विभाग के ज्वाइंट डायरेक्टर देव कुमार सिंह एक लाख रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथों की रफ्तार एंटी करप्शन ब्यूरो की कार्यवाही मत्स्य विभाग के ज्वॉइंट डायरेक्टर देव कुमार सिंह को रिश्वत लेते पकड़ा गया राज्य में भ्रष्टाचार के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए मत्स्य विभाग के ज्वॉइंट डायरेक्टर देव कुमार सिंह को रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई विभाग की टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर की। क्या है मामला? नरेंद्र श्रीवास उपयंत्री मछली पालन विभाग जांजगीर चांपा के विभागीय जांच को दबाने देव कुमार सिंह ने रिश्वत की मांग की थी | एंटी करप्शन ब्यूरो को शिकायत मिली थी कि ज्वॉइंट डायरेक्टर देव कुमार सिंह ने मछली पालन लाइसेंस प्रक्रिया में मदद के लिए रिश्वत की मांग की है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि काम में अड़चन डालकर 2 लाख रुपये की घूस मांगी गई थी। इसके बाद एसीबी ने योजना बनाकर इस भ्रष्टाचार के खेल का पर्दाफाश किया। रंगे हाथों पकड़े गए गुप्त सूचना के आधार पर एसीबी की टीम ने जाल बिछाया और शिकायतकर्ता को नकद राशि के साथ भेजा। जैसे ही देव कुमार सिंह ने रिश्वत की रकम स्वीकार की, टीम ने उन्हें मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया। मौके से रिश्वत की राशि बरामद कर ली गई है। कार्रवाई जारी एसीबी ने देव कुमार सिंह को गिरफ्तार कर उनके कार्यालय और आवास पर छापेमारी की है। प्रारंभिक जांच में करोड़ों रुपये की संपत्ति और कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद हुए हैं। इन दस्तावेजों से अन्य अधिकारियों के भी इस भ्रष्टाचार में शामिल होने की संभावना जताई जा रही है। *आरोप और कानूनी प्रक्रिया* देव कुमार सिंह पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। उन्हें कोर्ट में पेश किया जाएगा, जहां से रिमांड की मांग की जाएगी। प्रतिक्रिया घटना के बाद मत्स्य विभाग के अन्य अधिकारियों में हड़कंप मच गया है। विभागीय मंत्री ने घटना की निंदा करते हुए कहा कि सरकार भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है, और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। यह घटना भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रशासनिक सख्ती और जनता के सहयोग से ऐसे मामलों को उजागर करने की आवश्यकता को उजागर करती है।
एक ओंकार अर्थात् परमात्मा एक है - इंसानियत से बढ़कर कोई धर्म नहीं है - श्री गुरु नानक देव जी की जयंती के 555 वर्ष पूरे होने पर पर विषेश लेख
देश के वर्तमान हालातो पर श्री गुरु नानक देव जी के उपदेश और संदेश पर हर किसी को गौर करना चाहिए
सतगुरु नानक परगटिया, मिट्टी धुन्ध जग चानन होआ |ज्यों कर सूरज निकलया, तारे छपे अंधेर पलोआ ||एक ओंकार अर्थात् परमात्मा एक है - इंसानियत से बढ़कर कोई धर्म नहीं है
श्री गुरु नानक देव जी ने जात-पात उच्च नीच धर्म और वर्ग के भेदभाव को मिटाने की बात की थी
कीरत करो, वण्ड छको, नाम जपो अर्थात काम करो, मिल बाटकर खाओ और भगवान का नाम लो का मंत्र दिया
श्री गुरु नानक देव जी ने संपूर्ण मानवता को प्रेम, सेवा, समानता और एकता का संदेश दिया
उनके विचार का मूल तत्व "एक ओंकार" जिसका अर्थ है "परमात्मा एक है।" उन्होंने जात-पात, ऊँच-नीच, धर्म, और वर्ग के भेदभाव को मिटाने पर ज़ोर दिया।
श्री गुरु नानक देव जी (1469–1539) सिख धर्म के संस्थापक और पहले गुरु थे, जिन्होंने अपनी शिक्षा और विचारों के माध्यम से संपूर्ण मानवता को प्रेम, सेवा, समानता और एकता का संदेश दिया। उनकी शिक्षाएँ और जीवन दर्शन न केवल सिख धर्म के अनुयायियों बल्कि दुनिया के सभी लोगों के लिए एक प्रेरणा बने हुए हैं। गुरु नानक जी ने अपने समय की सामाजिक और धार्मिक विषमताओं को मिटाने के लिए कई महत्वपूर्ण कार्य किए, जिनका प्रभाव आज भी विश्व के कोने-कोने में महसूस किया जाता है।
प्रारंभिक जीवन
श्री गुरु नानक देव जी का जन्म 15 अप्रैल, 1469 को रावी नदी के तट पर स्थित तलवंडी नामक स्थान पर हुआ था, जो अब पाकिस्तान के ननकाना साहिब में है। उनके पिता का नाम मेहता कालू जी और माता का नाम तृप्ता जी था। गुरु नानक जी का बचपन से ही आध्यात्मिकता की ओर झुकाव था और वे साधारण जीवन में भी असाधारण ज्ञान और विवेक के धनी थे। बचपन में ही उन्होंने समाज में फैली असमानता, धार्मिक कट्टरता, अंधविश्वासों के प्रति अपनी असहमति व्यक्त करना शुरू कर दिया था।
श्री गुरु नानक जी का प्रमुख उद्देश्य
श्री गुरु नानक देव जी का प्रमुख उद्देश्य मनुष्य को मनुष्यता के मार्ग पर चलाना था। उनके अनुसार ईश्वर एक है और सभी प्राणी उसके ही अंश हैं। उनके विचार का मूल तत्व "एक ओंकार" में समाहित है, जिसका अर्थ है "परमात्मा एक है।" उन्होंने जात-पात, ऊँच-नीच, धर्म, और वर्ग के भेदभाव को मिटाने पर ज़ोर दिया। गुरु नानक जी का मानना था कि ईश्वर के सच्चे उपासक वही हैं जो परोपकार, प्रेम, करुणा और सेवा में विश्वास रखते हैं।
मानवता के प्रति योगदान
श्री गुरु नानक देव जी ने समाज में सुधार लाने के लिए कई यात्राएँ कीं, जिन्हें "उदासियाँ" कहा जाता है। इन उदासियों के माध्यम से उन्होंने भारत, अफगानिस्तान, अरब, तिब्बत और श्रीलंका जैसे विभिन्न देशों में जाकर अपने विचारों का प्रचार किया। उन्होंने लोगों को सत्य, धर्म, और करुणा के मार्ग पर चलने की शिक्षा दी। उनके कार्यों ने समाज में गहरे बदलाव लाए और लोगों में आत्म-सुधार और एकता की भावना जागृत की।
1. लंगर प्रथा : श्रीगुरु नानक जी ने "लंगर" की परंपरा शुरू की, जिसका उद्देश्य था सभी को समानता और एकता के भाव में जोड़ना। इसमें बिना किसी भेदभाव के सभी लोगों को भोजन कराया जाता था, जो आज भी सभी गुरुद्वारों में चल रहा है।
2. समानता और भेदभाव के विरोधी: गुरु नानक देव जी ने अपनी शिक्षाओं से महिलाओं के प्रति सम्मान का प्रचार किया और जात-पात के भेदभाव का कड़ा विरोध किया। वे कहते थे कि ईश्वर के सामने सभी एक समान हैं, चाहे वे किसी भी जाति या धर्म के हों।
3. सत्य का मार्ग: गुरु नानक जी ने ईश्वर के प्रति प्रेम और सत्य के मार्ग पर चलने का संदेश दिया। वे बाहरी आडंबरों के बजाय अंतःकरण की शुद्धता पर विश्वास करते थे। उनके उपदेशों में हमेशा सत्य को ही सर्वोपरि माना गया।
देश-दुनिया में योगदान और उनके अनुयायियों की भावनाएँ
श्री गुरु नानक देव जी की शिक्षाएँ और उनके सिद्धांत सिख धर्म के मूल स्तंभ बन गए। उन्होंने "नाम जपो, किरत करो, वंड छको" का मंत्र दिया, जो आज भी सिख धर्म के अनुयायी मानते हैं। उनके विचारों ने न केवल भारत में बल्कि पूरे विश्व में धर्म और मानवता के प्रति एक नई दिशा प्रदान की। गुरु नानक जी के अनुयायियों के लिए उनका जीवन एक प्रेरणा है, और वे उनकी शिक्षाओं का पालन करके सेवा और सद्भाव के मार्ग पर चलने का प्रयास करते हैं।
प्रकाश पर्व
श्री गुरु नानक देव जी के जन्म दिवस को "गुरु नानक जयंती" के रूप में मनाया जाता है, जिसे "प्रकाश पर्व" भी कहा जाता है। यह सिख धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है, जिसे पूरे विश्व में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है। इस दिन गुरुद्वारों में विशेष रूप से "अखंड पाठ" किया जाता है और गुरु का "लंगर" आयोजित होता है। इसके अलावा, प्रभात फेरियाँ निकाली जाती हैं और "शबद कीर्तन" किया जाता है, जिसमें श्री गुरु नानक देव जी की शिक्षाओं का गायन होता है।
प्रकाश पर्व के दिन, सिख समुदाय के लोग विशेष सजावट करते हैं और दीयों से गुरुद्वारों और अपने घरों को सजाते हैं। यह त्योहार न केवल धार्मिक आयोजन है बल्कि एक सांस्कृतिक उत्सव भी है, जो सभी लोगों को एकता, प्रेम और मानवता के मूल्यों का स्मरण कराता है।
निष्कर्ष
श्री गुरु नानक देव जी का जीवन और उनके उपदेश हमें सिखाते हैं कि इंसानियत से बढ़कर कोई धर्म नहीं है। उनकी शिक्षाएँ हमें अपने भीतर प्रेम, शांति, और सेवा के भाव को विकसित करने के लिए प्रेरित करती हैं। श्री गुरु नानक देव जी के योगदान और उनके विचारों की प्रासंगिकता आज भी उतनी ही है जितनी उनके समय में थी। उन्होंने अपने जीवन से यह सिद्ध किया कि एक सच्चा गुरु केवल शिक्षा ही नहीं देता, बल्कि अपनी शिक्षाओं को अपने आचरण में जीता भी है। उनके द्वारा शुरू की गई लंगर परंपरा, जात-पात और ऊँच-नीच का भेदभाव मिटाने का प्रयास, और विश्व भर में उनके अनुयायियों की निस्वार्थ सेवा का भाव यह दर्शाते हैं कि श्री गुरु नानक देव जी का संदेश आज भी मानवता को एक नई दिशा प्रदान कर रहा है।
सिक्ख समाज मनाएगा श्री गुरु नानक देव जी की 555वीं जयंती का उत्सव
श्री गुरु नानक देव जी की जयंती पर विषेश लेख
एक ओंकार अर्थात् परमात्मा एक है - इंसानियत से बढ़कर कोई धर्म नहीं है
श्री गुरु नानक देव जी ने जात-पात उच्च नीच धर्म और वर्ग के भेदभाव को मिटाने की बात की थी
कीरत करो, वण्ड छको, नाम जपो अर्थात काम करो, मिल बाटकर खाओ और भगवान का नाम लो का मंत्र दिया
श्री गुरु नानक जयंती सिख समुदाय के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण पर्व है, जिसे हर साल कार्तिक पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। इसे "गुरुपर्व" या "प्रकाश पर्व" भी कहा जाता है। यह पर्व सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देव जी के जन्मदिवस का प्रतीक है। गुरु नानक देव जी सिख समुदाय के पहले गुरु है। यह पर्व अकसर अक्टूबर या नवंबर माह में आता है, और इस दिन को सिख समाज के लोग बड़े उत्साह के साथ मनाते हैं। इस दिन गुरुद्वारों में विशेष समारोह आयोजित किए जाते हैं। यह पर्व कार्तिक पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है
गुरु नानक जयंती तिथि 2024
इस वर्ष गुरु नानक जयंती 15 नवंबर को मनाई जाएगी, क्योंकि इसी दिन कार्तिक पूर्णिमा पड़ रही है। इस साल गुरु नानक देव जी की 555वीं जयंती का उत्सव मनाया जाएगा।
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श्री गुरु नानक देव जी की जयंती पर विशाल नगर कीर्तन - शोभायात्रा
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने छत्तीसगढ़ की सड़कों के लिए दी 20 हजार करोड़ की सौगात
भारतीय सड़क कांग्रेस (IRC) सड़क एवं सेतु निर्माण से संबंधित मानक एवं गाइडलाइन्स निर्धारित करने वाली देश की सर्वोच्च संस्था - अरुण साव
केन्द्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी 8 नवम्बर से रायपुर में आयोजित भारतीय सड़क कांग्रेस के 83वें वार्षिक अधिवेशन का शुभारंभ करेंगे। रायपुर के साइंस कॉलेज परिसर में 8 नवम्बर से 11 नवम्बर तक इसका आयोजन किया गया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और उप मुख्यमंत्री अरुण साव भी 8 नवम्बर को शाम साढ़े चार बजे आयोजित अधिवेशन के शुभारंभ कार्यक्रम में शामिल होंगे। चार दिनों तक चलने वाले भारतीय सड़क कांग्रेस के अधिवेशन में सड़क निर्माण और सड़क सुरक्षा से जुड़े देशभर के दो हजार से अधिक विशेषज्ञ, वैज्ञानिक, अभियंता और अधिकारी शामिल होंगे। अधिवेशन के शुभारंभ कार्यक्रम में सड़क निर्माण तकनीक और सामग्री से संबंधित तीन गाइडलाइन्स और एक मैनुअल भी जारी किए जाएंगे।
उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने आज शाम साइंस कॉलेज परिसर में भारतीय सड़क कांग्रेस के 83वें वार्षिक अधिवेशन के तहत आयोजित तकनीकी प्रदर्शनी का शुभारंभ किया। उन्होंने प्रदर्शनी का भ्रमण कर सड़क निर्माण, सड़क सुरक्षा, निर्माण सामग्री और सड़कों के रखरखाव से जुड़ी मशीनरी व उपकरणों की निर्माता तथा आपूर्तिकर्ता कंपनियों के प्रतिनिधियों से इनकी जानकारी ली। विभिन्न कंपनियों द्वारा यहां लगाए गए स्टॉल्स मंर सड़क निर्माण से संबंधित तकनीकी मटेरियल्स, डिजाइन, टेक्नोलॉजी इत्यादि का प्रदर्शन आगामी चार दिनों तक किया जाएगा।
उप मुख्यमंत्री श्री साव ने आज आयोजन स्थल पर प्रेस-कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए बताया कि भारतीय सड़क कांग्रेस (IRC) सड़क एवं सेतु निर्माण से संबंधित मानक एवं गाइडलाइन्स निर्धारित करने वाली देश की सर्वोच्च संस्था है। आईआरसी में भारत सरकार, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण, एन.एच.ए.आई.डी.सी.एल., बी.आर.ओ., मिलिट्री इंजीनियरिंग सर्विसेस, एन.आर. आई.डी.ए., ग्रामीण विकास मंत्रालय, शहरी विकास मंत्रालय, सभी राज्यों के लोक निर्माण विभाग, ग्रामीण सड़क निर्माण विभाग, पब्लिक सेक्टर, प्राइवेट सेक्टर, रिसर्च आर्गेनाइजेशन्स के इंजीनियर्स की सोसायटी आदि शामिल हैं।
श्री साव ने प्रेस-कॉन्फ्रेंस में बताया कि आईआरसी का मुख्य उद्देश्य सड़क निर्माण, सेतु निर्माण एवं यातायात से संबंधित मानकों का निर्धारण करना तथा निर्माण संबंधी गाइडलाइन्स एवं मैन्युअल तैयार करना, समय-समय पर उनका पुनरीक्षण करना, देश-विदेश में आ रही सड़क निर्माण की नई तकनीकों एवं सामग्रियों का अध्ययन कर देश में लागू करने के लिए मानक तैयार करना है। आईआरसी द्वारा जारी किए गए मानकों एवं गाइडलाइन्स के अनुसार ही भारत सरकार एवं अन्य सड़क निर्माण विभाग सड़क निर्माण करते हैं। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ राज्य के गठन के बाद पहली बार यहां आईआरसी का वार्षिक अधिवेशन हो रहा है जो कि प्रदेश के लिए गौरव का विषय है। लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता श्री के.के. पीपरी और भारतीय सड़क कांग्रेस के महासचिव श्री एस.के. निर्मल ने भी प्रेस-कॉन्फ्रेंस में अधिवेशन के बारे में जानकारी दी। लोक निर्माण विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह भी इस दौरान मौजूद थे।
आईआरसी के चार दिवसीय अधिवेशन के दौरान विशेषज्ञों, वैज्ञानिकों, अभियंताओं और अधिकारियों के बीच विभिन्न बैठकों, परिचर्चाओं, तकनीकी सत्रों और दस्तावेजों पर चर्चा होगी। इस दौरान आयोजित हाइवे रिसर्च बोर्ड की बैठक में भारत सरकार, राज्य सरकार, रिसर्च इंस्टीट्यूट एवं शैक्षणिक संस्थानों, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों एवं प्राइवेट सेक्टर के प्रतिनिधि सड़क निर्माण से संबंधित अनुसंधान एवं विकास के संबंध में रोड मैप तैयार करेंगे। अधिवेशन के चारों दिन अलग-अलग तकनीकी सत्रों में विभिन्न संस्थानों, शासकीय विभागों और निजी क्षेत्र से आए इंजीनियर्स अपना प्रस्तुतीकरण देंगे। अधिवेशन के दौरान आईआरसी की बिजनेस मीटिंग और काउंसिल मीटिंग भी आयोजित है। 8, 9 एवं 10 नवम्बर को शाम को सांस्कृतिक कार्यक्रम भी होंगे। अधिवेशन में शामिल होने आए देशभर के प्रतिनधियों को छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक वैभव, पुरातत्व, पर्यटन, पौराणिक और धार्मिक महत्व से जुड़े स्थलों का भ्रमण भी कराया जाएगा |
श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी को सिक्ख समाज जीवित गुरु मानता है
छत्तीसगढ़ में अपराध की स्थिति
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने केंद्रीय योग और प्राकृतिक चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (CRIYN) रायपुर का किया वर्चुअली शिलान्यास
10 एकड़ क्षेत्र में 24 माह में तैयार होगा 100 बिस्तरों का केंद्रीय योग और प्राकृतिक चिकित्सा अनुसंधान संस्थान
CRIYN से प्रशिक्षण लेकर स्वरोजगार की तरफ अग्रसर होंगे छत्तीसगढ़ के युवा: स्वास्थ्य मंत्री श्री जायसवाल
रायपुर, 29 अक्टूबर 2024




देश के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस पर वर्चुअल माध्यम से रायपुर में बनने वाले 100 बिस्तरों वाले केंद्रीय योग और प्राकृतिक चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (CRIYN) का शिलान्यास किया।प्रधानमंत्री श्री मोदी अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान, नई दिल्ली से वर्चुअल माध्यम से रायपुर से जुड़े थे। श्री मोदी ने कहा कि देश के लोग जितना ज्यादा स्वस्थ रहेंगे, देश की प्रगति उतनी ही तेजी से होगी। पूरी दुनिया के लोग योग और पंचकर्म के लिए भारत आते हैं और आने वाले समय में इनकी संख्या और बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि भारत सरकार स्वास्थ्य के क्षेत्र में संवेदनशीलता के साथ काम रही है।
केंद्रीय योग और प्राकृतिक चिकित्सा अनुसंधान संस्थान रायपुर को केन्द्रीय योग और प्राकृतिक चिकित्सा अनुसंधान परिषद् (सीसीआरवायएन) के तहत स्थापित किया जा रहा है। 90 करोड़ रूपए की लागत से इस संस्थान का निर्माण 24 माह में पूरा होगा। राज्य सरकार ने इस संस्थान के लिए 10 एकड़ की भूमि विभाग को उपलब्ध करा दी है। यह छत्तीसगढ़ का पहला योग और प्राकृतिक चिकित्सा अनुसंधान केंद्र और अस्पताल होगा जो गैर संचारी रोगों जैसे मोटापा, प्रीडायबिटीज, मेटाबोलिक सिंड्रोम, व गठिया आदि के उपचार की सुविधा प्रदान करेगा।
अनुसंधान केन्द्र में बाह्य रोगी और प्रशासनिक ब्लॉक, आंतरिक रोगी ब्लॉक, स्टाफ क्वार्टर, योग हॉल, आहार केन्द्र, मालिश और फिजियोथेरेपी अनुभाग के साथ ही अनुसंधान ब्लॉक भी स्थापित होंगे। यह केन्द्र स्पा और वेलनेस थेरेपी में प्रशिक्षण प्रमाणन पाठ्यक्रम और अनुसंधान में फेलोशिप पाठ्यक्रम संचालित करेगा।
केंद्र में वेलनेस थिरेपी में प्रशिक्षण प्रमाणन पाठ्यक्रम और अनुसंधान में फेलोशिप पाठ्यक्रम का भी संचालन होगा। इस संस्थान के शुरू होने से योग और प्राकृतिक चिकित्सा के प्रभावों के बारे में नए ज्ञान का विकास होगा।
इस मौके पर स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल ने अपने संबोधन में कहा कि भारत देश अपनी पुरानी पद्धतियों को संजोकर लगातार आगे बढ़ रहा है। श्री जायसवाल ने कहा कि आज धनतेरस के अवसर पर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने राज्य को केंद्रीय योग और प्राकृतिक चिकित्सा अनुसंधान संस्थान के रूप में जो उपहार दिया है उसे हम और हमारी आने वाली पीढ़ियां भी याद करती रहेंगी। उन्होंने कहा कि इस अनुसंधान केंद्र के स्थापित हो जाने के बाद राज्य के युवाओं को स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे। युवा यहां से प्रशिक्षण प्राप्त कर सक्षम बनेंगे और स्वरोजगार को बढ़ावा देंगे। उन्होंने कहा कि भारत देश योग और आयुर्वेद में सदैव अग्रणी रहा है और इस तरह के अनुसंधान केंद्रों के खुलने से इस परंपरा को और बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय छत्तीसगढ़ के चतुर्मुखी विकास के लिए लगातार काम कर रहे हैं। राज्य की स्वास्थ्य सुविधाओं में विस्तार ,मुख्यमंत्री की प्राथमिकताओं में शामिल है।
रायपुर के डीडीयू ऑडिटोरियम में आयोजित कार्यक्रम के दौरान सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल, विधायक श्री पुरंदर मिश्रा, विधायक श्री खुशवंत साहेब, विधायक श्री मोती लाल साहू, आयुष विभाग के अधिकारी एवं आयुर्वेद कॉलेज के विद्यार्थी उपस्थित थे।
कांग्रेस के खिलाफ थाने पहुंची भाजपा : चुनाव आयोग से भी करेंगे शिकायत
दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू ने एनआईटी रायपुर ने 1044 बी.टेक और बी.आर्क छात्रों, 225 एमसीए और एम.टेक छात्रों, और 170 पीएचडी छात्रों को डिग्रियाँ प्रदान कीं
राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान रायपुर के 14 वें दीक्षांत समारोह में पहुंची
राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम पहुंची
राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान रायपुर के 14वें दीक्षांत समारोह में की शिरकत
छत्तीसगढ़ के राज्यपाल श्री रमेन डेका, मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय और आवास एवं शहरी विकास राज्य मंत्री श्री तोखन साहू भी दीक्षांत समारोह में मौजूद
रायपुर, 25 अक्टूबर 2024






राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम पहुंची
राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान रायपुर के 14वें दीक्षांत समारोह में की शिरकत
छत्तीसगढ़ के राज्यपाल श्री रमेन डेका, मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय और आवास एवं शहरी विकास राज्य मंत्री श्री तोखन साहू भी दीक्षांत समारोह में मौजूद
राष्ट्रपति के मुख्य आतिथ्य में पहली बार राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान का दीक्षांत समारोह हो रहा आयोजित
राष्ट्रपति के हाथों 11 होनहार विद्यार्थियों को मिलेगा 12 स्वर्ण पदक
यश बंसल को मिलेंगे दो स्वर्ण पदक , कंप्यूटर साइंस एवं इंजीनियरिंग शाखा तथा संस्थान में ओवर ऑल टॉपर बनने पर
दीक्षांत समारोह में 1439 विद्यार्थियों को मिलेगी डिग्री
ऑडिटोरियम उत्साही विद्यार्थियों से भरा हुआ
राष्ट्रपति के साथ गोल्ड मेडलिस्ट का हो रहा फोटो सेशन
