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रायपुर : राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु राजधानी के गायत्री नगर स्थित भगवान जगन्नाथ मंदिर पहुँची
राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु राजधानी के गायत्री नगर स्थित भगवान जगन्नाथ मंदिर पहुँची। यहाँ उन्होंने भगवान जगन्नाथ, बलभद्र जी तथा सुभद्रा जी के दर्शन किये। यहाँ उन्होंने देशवासियों की सुख-समृद्धि एवं निरंतर प्रगति की कामना की।
इस अवसर पर राज्यपाल विश्व भूषण हरिचंदन, मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, विधायक कुलदीप जुनेजा, विधायक बृजमोहन अग्रवाल, महापौर एजाज ढेबर, अपर मुख्य सचिव सुब्रत साहू, पूर्व राज्य मुख्य सूचना आयुक्त एमके राउत, मंदिर समिति के अध्यक्ष पुरंदर मिश्रा सहित मंदिर समिति के सदस्यगण एवम प्रबुद्ध नागरिक उपस्थित थे।
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रक्षाबंधन आज : भद्रा काल में बिलकुल ना बांधे राखी, जानिए शुभ समय से लेकर सबकुछ
भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधती है और भाई उसकी रक्षा का वचन देता है। साथ ही शगुन के रूप में तोहफे देता है। इस वर्ष रक्षाबंधन दो दिन मनाया जा रहा है। 30 अगस्त, दोपहर 12 बजकर 29 मिनट से लेकर कल 31 अगस्त सुबह 8 बजकर 35 मिनट तक राखी बांधी जा सकता है
इस साल रक्षाबंधन के त्योहार की तारीख लेकर मतभेद है कि राखी का पर्व 30 अगस्त को मनाया जाय या फिर 31 अगस्त को। हिंदू पंचांग के अनुसार रक्षाबंधन का त्योहार हर वर्ष श्रावण माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि और भद्रा काल रहित मुहूर्त में मनाने की परंपरा होती है। दरअसल इस साल सावन पूर्णिमा की तिथि अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार 30 और 31 अगस्त दोनों ही दिन पड़ रही है, इसके अलावा श्रावण पूर्णिमा तिथि के शुरू होने के साथ ही भद्राकाल शुरू हो जाएगा। शास्त्रों में भद्रा के समय राखी बांधना शुभ माना जाता है।
भद्राकाल साया ?
आमतौर पर यह देखा जाता है कि हर 2 साल के दौरान भद्रा के कारण रक्षाबंधन का त्योहार 2 दिन मनाया जाता है। हिंदू पंचांग के मुताबिक रक्षाबंधन का त्योहार पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है लेकिन पूर्णिमा तिथि के शुरू होने के साथ भद्रा भी शुरू जाती है। पूर्णिमा तिथि का करीब आधा भाग भद्राकाल के साए में रहता है। रक्षाबंधन के त्योहार भद्रा में मनाना वर्जित होता है। इसके अलावा हर दूसरे वर्ष हिंदू कैलेंडर की पूर्णिमा तिथि और अंग्रेजी कैलेंडर की तारीखों में तालमेल न होने के वजह से राखी का त्योहार हर दूसरे साल दो दिनों तक मनाया जाता है।
क्या होती है भद्रा?
पौराणिक कथाओं के अनुसार भद्रा सूर्य देव की पुत्री और शनिदेव की बहन हैं। भद्रा का स्वभाव क्रोधी है। जब भद्रा का जन्म हुआ तो वह जन्म लेने के फौरन बाद ही पूरे सृष्टि को अपना निवाला बनाने लगी थीं। इस तरह से भद्रा के कारण जहां भी शुभ और मांगलिक कार्य, यज्ञ और अनुष्ठान होते वहां विध्न आने लगता है।
