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मांदर की थाप पर झूम उठा नगेसिया समाज, सातों मंडलों के नृत्य दलों ने बिखेरी लोक संस्कृति की छटा

मांदर की थाप पर झूम उठा नगेसिया समाज, सातों मंडलों के नृत्य दलों ने बिखेरी लोक संस्कृति की छटा

 

 

छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर 1 नवंबर 2026, रविवार को आदिवासी नगेसिया/किसान समाज का जिला स्तरीय करमा मिलन महोत्सव कुनकुरी मंडल के शाहीडांड धान खरीदी केंद्र मैदान में हर्षोल्लास और पारंपरिक उत्साह के साथ आयोजित किया गया। महोत्सव में जशपुर जिले के सभी सातों मंडलों के नृत्य दलों ने अपनी पारंपरिक वेशभूषा और पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ शानदार सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देकर आदिवासी लोक संस्कृति की जीवंत झलक पेश की।

झांझ, मंजीरा, ढोल और मांदर की गूंज के बीच पारंपरिक करमा गीतों पर पूरा पंडाल उत्सव के रंग में सराबोर हो गया। कार्यक्रम में जशपुर जिले के साथ-साथ सामरी, चांदो, झारखंड, सरगुजा और धौरपुर क्षेत्र से बड़ी संख्या में नगेसिया समाज के लोग शामिल हुए। सामाजिक पदाधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने भी नृत्य दलों के साथ करमा नृत्य में शामिल होकर उत्सव का आनंद लिया।

जिलाध्यक्ष, जनपद अध्यक्ष बगीचा, जनपद अध्यक्ष सामरी-चांदो तथा नागपुरी गायक दिनेश नाग भी मांदर की थाप और लोकगीतों के आकर्षण में खुद को रोक नहीं पाए और करमा पंडाल में उतरकर नृत्य दलों के साथ जमकर थिरके।

समाज की एकजुटता ने बनाया आयोजन को भव्य

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए नगेसिया समाज के जिलाध्यक्ष श्री रामप्रसाद नागेस ने कहा कि जिला स्तरीय करमा महोत्सव का यह पहला आयोजन था। उन्हें उम्मीद नहीं थी कि समाज के लोगों के सहयोग से कार्यक्रम इतने भव्य रूप में सफल होगा। उन्होंने जिले के सातों मंडलों से पहुंचे नृत्य दलों और समाज के सभी लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया।

उन्होंने कहा कि हमारा समाज इतना कमजोर नहीं है कि किसी कार्यक्रम को असफल होने दे। आज के आयोजन ने यह विश्वास मजबूत किया है कि हमारा समाज आने वाले समय में निश्चित रूप से नई ऊंचाइयों तक पहुंचेगा। इसके लिए समाज की संगठनात्मक एकता को मजबूत करना, लोगों में जागरूकता लाना और शिक्षा को बढ़ावा देना आवश्यक है। उन्होंने विशेष रूप से युवाओं से आह्वान किया कि वे सामाजिक गतिविधियों में बढ़-चढ़कर भाग लें और समाज के विकास में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं।

नशामुक्ति और शिक्षा से मजबूत होगा समाज

प्रांतीय कोषाध्यक्ष श्री नान राम नाग ने अपने उद्बोधन में समाज को नशापान से दूर रहने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि यदि समाज के लोग नशे की प्रवृत्ति को छोड़ दें तो समाज में जागरूकता और शिक्षा का स्तर स्वतः बेहतर होगा। नशामुक्त समाज ही मजबूती के साथ विकास की दिशा में आगे बढ़ सकता है।

झारखंड में भी लागू होगी पारंपरिक करमा पोशाक

झारखंड से पहुंचे अतिथियों ने महोत्सव की भव्यता और पारंपरिक परिधानों की सराहना की। उन्होंने कहा कि नगेसिया समाज की पारंपरिक करमा साड़ी, धोती और कुर्ते की वेशभूषा हमारी सांस्कृतिक पहचान और गौरव का प्रतीक है।

उन्होंने मंच से संकल्प व्यक्त किया कि झारखंड में भी नगेसिया समाज की इस पारंपरिक करमा पोशाक को जल्द ही व्यापक रूप से लागू करने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अपनी परंपरा, रीति-रिवाज और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखना समाज का प्रथम कर्तव्य है। नई पीढ़ी तक अपनी सांस्कृतिक पहचान पहुंचाने के लिए ऐसे आयोजन बेहद महत्वपूर्ण हैं।

समाज के पदाधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की रही गरिमामयी उपस्थिति

महोत्सव में संरक्षक श्री मंगन पंडा (सती धाम बगडोल), श्रीमती गायत्री नागेस (जनपद अध्यक्ष बगीचा), जिलाध्यक्ष श्री रामप्रसाद नागेस, प्रांतीय कोषाध्यक्ष श्री नान राम नाग, जिला सचिव श्री अर्जुन नागदेव, पूर्व जिलाध्यक्ष श्री हरेंद्र राम नाग, प्रांतीय उपाध्यक्ष श्री रामलाल नागेस, संभाग सह-सचिव श्री सुखनाथ राम, जशपुर मंडल अध्यक्ष श्री बिहानू राम नाग, सन्ना मंडल अध्यक्ष श्री पुसनाथ राम नाग, प्रेमजीत नागेस, राजेंद्र नागेस (कुनकुरी मंडल अध्यक्ष), नेमीचंद नागेस (बगीचा मंडल अध्यक्ष), श्री चमरू नागदेव (अध्यक्ष कर्मचारी संघ), श्री पवन कुमार नाग (जिला मीडिया प्रभारी), श्री बिनोद राम नागेस (प्रांतीय युवा सचिव), श्री धनराम नाग (प्रांतीय अध्यक्ष), श्री रसिया राम नागेस (जिलाध्यक्ष सरगुजा), श्री कुंवर साय राम, पूर्व प्रांतीय अध्यक्ष श्री प्रदीप नाग सहित विभिन्न मंडलों एवं सामाजिक संगठनों के पदाधिकारी उपस्थित रहे।

इसके अलावा श्री मंगरू राम नाग (सरपंच), श्री तिरथू राम, श्री नंदकुमार, श्री रामकुमार, श्री हरी राम नागेस (बीडीसी), श्री संजीता नाग (बीडीसी चांदो-सामरी), नागपुरी गायक एवं सामाजिक कार्यकर्ता श्री दिनेश राम नाग सहित अनेक सामाजिक कार्यकर्ताओं, जनप्रतिनिधियों और समाज के सदस्यों की सहभागिता रही।

संस्कृति संरक्षण और सामाजिक एकता का दिया संदेश

जिले के सातों मंडलों के नृत्य दलों की सहभागिता, पारंपरिक करमा गीतों, रंग-बिरंगी वेशभूषा और मांदर की थाप ने इस महोत्सव को यादगार बना दिया। कार्यक्रम ने न केवल समाज की सांस्कृतिक विरासत को मंच प्रदान किया, बल्कि सामाजिक एकता, संगठन की मजबूती, नशामुक्ति, शिक्षा और युवा सहभागिता का भी महत्वपूर्ण संदेश दिया।

बड़ी संख्या में समाजजनों की उपस्थिति के बीच जिला स्तरीय करमा मिलन महोत्सव हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ। आयोजन ने यह संदेश दिया कि अपनी जड़ों, परंपराओं और सांस्कृतिक पहचान को सहेजकर ही समाज संगठित होकर प्रगति के पथ पर आगे बढ़ सकता है।

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