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मुकेश पटाखा अग्निकांड: जांच तेज, 7 दिन में रिपोर्ट।
शहर के बहुचर्चित मुकेश पटाखा और प्लास्टिक दुकान अग्निकांड मामले में अब जांच ने रफ्तार पकड़ ली है। कलेक्टर द्वारा गठित उच्च स्तरीय संयुक्त कमेटी की निगरानी में सोमवार को फोरेंसिक विशेषज्ञों की टीम घटनास्थल पर पहुंची और मलबे से अहम साक्ष्य जुटाए गए।
फोरेंसिक टीम ने पूरी तरह जल चुकी दुकान और गोदाम का बारीकी से निरीक्षण किया। इस दौरान जले हुए पटाखों के रैपर, खोखे और प्लास्टिक के पिघले अवशेषों के नमूने एकत्रित किए गए हैं। इन सैंपलों की जांच से आग लगने के वास्तविक कारणों का खुलासा होने की उम्मीद है, साथ ही यह भी स्पष्ट होगा कि वहां किस प्रकार के विस्फोटकों का भंडारण किया गया था।
जिला प्रशासन की ओर से गठित उच्च स्तरीय जांच कमेटी पूरे मामले की विभिन्न पहलुओं से जांच कर रही है। कमेटी को सात दिनों के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट कलेक्टर को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। जांच में सुरक्षा मानकों की अनदेखी, रिहायशी क्षेत्र में विस्फोटक भंडारण की अनुमति और प्रशासनिक जिम्मेदारी जैसे मुद्दों पर विशेष फोकस किया जा रहा है।
गौरतलब है कि 23 अप्रैल को हुए इस भीषण अग्निकांड ने पूरे शहर को झकझोर दिया था। प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि घनी आबादी वाले क्षेत्र में स्थित इस दुकान और गोदाम में भारी मात्रा में पटाखों का अवैध भंडारण किया गया था। नियमों की अनदेखी कर इस तरह का संचालन किया जाना अब प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर रहा है।
घटना के बाद से शहरवासियों में भारी आक्रोश है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस तरह के अवैध कारोबार के चलते बड़ा हादसा हो सकता था और जनहानि भी हो सकती थी। अब लोग दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और ऐसे गोदामों को शहर से बाहर शिफ्ट करने की मांग कर रहे हैं।
