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अपने ही पत्र पर उलझे मुख्यमंत्री

अपने ही पत्र पर उलझे मुख्यमंत्री

छत्तीसगढ़ में सहकारी समिति के कर्मचारी 4 नवंबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं, जिससे 14 नवंबर से शुरू होने वाली धान खरीदी प्रभावित हो सकती है। कर्मचारियों ने तीन प्रमुख मांगें रखी हैं: 1. सूखे हुए धान का प्रावधान। 2. प्रदेश की सभी समितियों को प्रबंधकीय अनुदान देने का मध्य प्रदेश जैसा प्रावधान, ताकि समय पर वेतन मिल सके। 3. सेवा नियम 2018 में संशोधन कर नया वेतनमान लागू करना। इस हड़ताल का कारण यह है कि धान खरीदी में इन समितियों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है, और यदि उनकी मांगों पर सहमति नहीं बनी तो किसानों के लिए धान बेचने में समस्याएं आ सकती हैं। राज्यभर के लगभग 13,000 कर्मचारी इस हड़ताल में शामिल हैं और वे अपने मुद्दों को लेकर संघर्षरत हैं, ताकि सरकार जल्द से जल्द उनकी मांगों को पूरा करे​​​​​​​​। छत्तीसगढ़ में 2058 सहकारी समितियां के लगभग 13000 कर्मचारी 4 नवंबर से हड़ताल पर हैं और 15 नवंबर से प्रदेश में धान खरीदी शुरू होना है जिस पर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने विष्णु देव साय सरकार पर अनेक आरोप लगाते हुए पत्रकार वार्ता में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का 9 नवंबर 2021 का एक पत्र मीडिया को जारी करते हुए कहा कि जब वे भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष थे उन्होंने मुख्यमंत्री के नाते मुझे पत्र लिखकर सहकारी समितियां के कर्मचारियों की हड़ताल का समर्थन किया था आज वही कर्मचारी हड़ताल पर हैं मुख्यमंत्री धान खरीदी शुरू कैसे करेंगे की मांगे मानेंगे या फिर हड़ताल के कारण धान खरीदी शुरू नहीं होगी उल्लेखनीय है कि भारतीय जनता पार्टी के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष विष्णु देव साय ने तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को जारी पत्र में सहकारी समितियां के कर्मचारियों की मांग ऑन का समर्थन किया था अब देखने वाली बात यह है की पूर्व मुख्यमंत्री द्वारा धान खरीदी न करने का षड्यंत्र रचने का जो आरोप लगाया है उसे पर प्रदेश सरकार का क्या जवाब आता है ?

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