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निगम आयुक्त का कितना प्रभाव ?
निगम आयुक्त का कितना प्रभाव ? - निगम आयुक्त की अधिकारियों पर कितनी ?
राजधानी में जो कुछ हो रहा है वह निगम कमिश्नर के कंट्रोल में नहीं!
नगर निगम रायपुर के आयुक्त अबिनाश मिश्रा के आदेशों पर जोन कमिश्नर कितना ध्यान देते हैं इसके बारे में शहर की नाली - नाला निर्माण, शहर की सड़को की दुर्दशा, स्ट्रीट लाइट की दुर्दशा, शहर के सार्वजनिक शौचलयों की हालत, थोड़ी सी बारिश में जय स्तंभ - भाजपा कार्यालय सहित अनेक बस्तियों का जल मग्न होना, सब्जी बाजारों की अस्त व्यस्त व्यवस्था, सड़कों पर कब्जा, दुकानों के बाहर सड़कों पर समान से यातायात अवरुद्ध होना, शहर की सड़कों - गलियों में अवैध वाहनों पर अवैध स्थाई दुकानों के कारण सड़कों की चौड़ाई का कम होना, नागरिकों को सड़कों पर चलने में परेशानी, यातायात अवरुद्ध होना, अवैध दुकानों - मकान का निर्माण, बिना पार्किंग के व्यावसायिक भवनों - कंपलेक्सों का अवैध निर्माण, शहर में धड़ल्ले से जारी है और इन सबके लिए राजधानी रायपुर के निगम आयुक्त अविनाश मिश्रा अनेकों बार अपने अधीनस्थ अधिकारियों सहित सभी जोन कमिश्नरों को सख्त हिदायतें दे चुके हैं | निगम आयुक्त ने बिलासपुर हाईकोर्ट के आदेश पर राजधानी की सड़कों पर लावारिस गोवंश एवं पशुओं की धमा चौकड़ी रोकने के भी निर्देश सभी जोन आयुक्त को दिए हैं परंतु अधिकारियों के कान में जूं तक नहीं रेंगी और व्यवस्था जस की तस है | पूरी राजधानी में अवैध कार्य और समस्याओं में कोई कमी नहीं आ रही है, जोन कमिश्नर और निगम के अन्य अधिकारी - कर्मचारी कमिश्नर अबिनाश मिश्रा के आदेशों निर्देशों को एक कान से सुनते हैं और दूसरे कान से निकाल देते हैं और अपनी सफाई में झूठे आंकड़े पेश कर अपने आप को बहुत ही जिम्मेदार अफसर साबित कर देते हैं | और यह सब कुछ पूरी राजधानी में खुली आंखों से दिन की रोशनी में तो क्या रात के अंधेरे में भी साफ नजर आता है कि नगर निगम की कार्य प्रणाली किस तरह की है |
30 जुलाई 2021 को लिखित शिकायत - धारा 307(2) अ के तहत अंतिम नोटिस 16 जुलाई 2022 को
फिर 22.5.23 को नियमितिकरण कैसे ?
ऐसा ही एक मामला है 2021 का जिसमें शिकायतकर्ता ने 30 जुलाई 2021 को नगर निगम जोन क्रमांक 10 के कमिश्नर को लिखित शिकायत कर पंडित राजेन्द्र प्रसाद वार्ड के पवन विहार कॉलोनी के कविराज सुंदरानी द्वारा अवैध निर्माण और भूमि कब्जा पर कार्यवाही करने की मांग की थी, शिकायत सही पाई जाने पर जोन क्रमांक 10 के कमिश्नर द्वारा अवैध निर्माण कर्ता कविराज सुंदरानी को नोटिस देकर भूमि स्वामी दस्तावेज भवन अनुज्ञा पत्र एवं स्वीकृत मानचित्र प्रस्तुत करने के आदेश दिए थे |

परंतु आदेश की अवहेलना के बाद नगर निगम जोन क्रमांक 10 द्वारा लगातार तीन नोटिस भेज कर नगर निगम के नियमों का पालन करते हुए अंतिम नोटिस धारा 307(2) अ के तहत 16 जुलाई 2022 को भेजा गया और निर्माण को तोड़ने की चेतावनी दी गई परंतु अवैध भवन निर्माण कर्ता ने इस अंतिम आदेश को भी कचरे के डब्बे में डाल दिया | अब सवाल यह उठता है कि जब शिकायत कर्ता लगातार प्रमाण सहित शिकायत पर कार्यवाही की मांग कर रहा है तो जोन क्रमांक 10 के तत्कालीन जोन कमिश्नर दिनेश कुमार कोसरिया ने किस आधार पर बिना भूमि नापे, बैनामा की जांच किए, शिकायतों को नजर अंदाज कर, बिना भवन अनुज्ञा और दूसरे की निजी भूमि पर अवैध कब्जा करने वाले कविराज सुंदरानी से राजी नामा शुल्क लेकर भवन के अवैध निर्माण का नियमितीकरण कैसे कर दिया ? इस तरह अवैध भवन निर्माण का शिकायतों के बावजूद नियमितीकरण करना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि भ्रष्टाचार हुआ है और ऊपरी लेनदेन के आधार पर कार्यवाही की गई है जिसकी जांच होना जरूरी है ताकि अवैध सहयोग करने वाले अधिकारी पर जुर्म दर्ज हो|
शिकायतकर्ता ने जोन क्रमांक 10 के तत्कालीन कमिश्नर दिनेश कुमार कोरिया के खिलाफ लिखित शिकायत निगम आयुक्त अविनाश मिश्रा को सौंप कर कार्यवाही की मांग की तो निगम आयुक्त ने जोन 10 के वर्तमान कमिश्नर को उचित जांच कर कार्यवाही के लिए निर्देशित किया |
नगर निगम की धारा 307(2) अ के तहत अंतिम नोटिस 16 जुलाई 2022 को

25 अप्रैल 2024 के आवेदन पर कोई कार्यवाही न होने पर शिकायत कर्ता प्रमाण सहित पुनः निगम आयुक्त से मिला, दोबारा उनके कहने पर जोन क्रमांक 10 के वर्तमान कमिश्नर द्वारा अवैध निर्माण करता कविराज सुंदरानी को 12 सितंबर 2024 को लिखित नोटिस भेज कर भवन अनुज्ञा पत्र, स्वीकृत मानचित्र सहित बैनामा की प्रति परीक्षण हेतु लाने नोटिस जारी किया परंतु नोटिस के बाद भी कविराज सुंदरानी ने स्वीकृत मानचित्र, भवन अनुज्ञा पत्र नगर निगम को नहीं दिया | अवैध निर्माण कर्ता कविराज सुंदरानी द्वारा नोटिस के जवाब में सिर्फ यही बताया गया कि मेरे भवन का नियमितीकरण हो चुका है परंतु उसने भवन अनुज्ञा पत्र और स्वीकृत मानचित्र नगर निगम को नहीं दिया |
अब सवाल यह उठता है कि नगर निगम द्वारा भेजे गए नोटिस का सही जवाब यदि नहीं मिला है तो नगर निगम कार्यवाही करने से पीछे क्यों हट रहा है, जाहिर सी बात है कि लेनदेन तो हुआ ही है और शायद वर्तमान जोन कमिश्नर को भी कुछ देकर संतुष्ट कर दिया गया होगा | अर्थात निगम आयुक्त के आदेश के बावजूद जोन कमिश्नर द्वारा कोई कार्यवाही ना करना और आदेश का जवाब ना देना इस बात की ओर इशारा करता है कि निगम आयुक्त की अधिकारियों पर कोई पकड़ नहीं है, जोन कमिश्नर उनके आदेशों को कोई महत्व नहीं देते हैं, उन्हें जो करना है वह अपनी मर्जी से करते हैं, और निगम आयुक्त अविनाश मिश्रा भी उनके इस व्यवहार के बावजूद कोई सख्ती नहीं बरत रहे | ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि राजधानी में जो कुछ हो रहा है वह निगम कमिश्नर के कंट्रोल में नहीं है | राजधानी में जितने भी कार्य हो रहे हैं वह चाहे वैध हों या अवैध अधिकारी अपने हिसाब से अपनी सुविधा अनुसार कर रहे हैं उन पर भारतीय जनता पार्टी हो या कांग्रेस नेता किसी का कोई कंट्रोल नहीं है | अगर यही हाल रहा तो नागरिकों को हर कार्य के लिए न्यायालय की शरण लेनी पड़ सकती है अब देखते हैं कि राजधानी का भविष्य कैसा होगा |
