देश विदेश

गुरमीत राम रहीम सिंह: जेल में बंद होने की कहानी और पैरोल-फरलो का खेल

गुरमीत राम रहीम सिंह: जेल में बंद होने की कहानी और पैरोल-फरलो का खेल

गुरमीत राम रहीम सिंह: जेल में बंद होने की कहानी और पैरोल-फरलो का खेल गुरमीत राम रहीम सिंह, जो डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख हैं, 25 अगस्त 2017 से जेल में बंद हैं। उन्हें विशेष सीबीआई अदालत द्वारा दो साध्वियों के साथ बलात्कार के आरोप में दोषी ठहराया गया था। इसके बाद, उन्हें 20 साल की सजा सुनाई गई। इसके अलावा, 2019 में उन्हें एक और मामले में दोषी ठहराया गया, जिसमें उन्होंने 16 साल पहले डेरा सच्चा सौदा के एक पूर्व प्रबंधक रंजीत सिंह की हत्या करवाई थी। साथ ही, 2002 में पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की हत्या के मामले में भी उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। ये सभी मामले डेरा सच्चा सौदा से जुड़े विवादों और अपराधों का हिस्सा थे। जेल में बंद होने के कारण 1. दो साध्वियों से बलात्कार: 2002 में दो साध्वियों ने सीबीआई के पास शिकायत दर्ज कराई थी कि डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख, गुरमीत राम रहीम सिंह, ने उनके साथ बलात्कार किया है। इस मामले की जांच के बाद, उन्हें 25 अगस्त 2017 को दोषी करार दिया गया और 28 अगस्त 2017 को 20 साल की सजा सुनाई गई। हर मामले में 10 साल की सजा सुनाई गई, जो एक साथ चलने वाली थीं। 2. रंजीत सिंह हत्याकांड: 2019 में गुरमीत राम रहीम को एक और मामले में दोषी पाया गया, जिसमें रंजीत सिंह, जो डेरा सच्चा सौदा के एक पूर्व प्रबंधक थे, की 2002 में हत्या करवा दी गई थी। रंजीत सिंह की हत्या का मुख्य कारण यह था कि उन्होंने डेरा की कुरीतियों का खुलासा किया था। 3. पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की हत्या: 2002 में, पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की हत्या के मामले में भी गुरमीत राम रहीम दोषी ठहराए गए। छत्रपति ने अपने अखबार में डेरा सच्चा सौदा के भीतर हो रहे अन्याय और अपराधों का पर्दाफाश किया था, जिसके बाद उनकी हत्या कर दी गई। पैरोल और फरलो: कितनी बार जेल से रिहाई गुरमीत राम रहीम को जेल में रहते हुए कई बार पैरोल और फरलो दी गई है, जिसके कारण वह अक्सर चर्चा में रहे हैं। हर बार जब उन्हें पैरोल या फरलो मिलती है, तो राजनीतिक और सामाजिक हलकों में इसका विरोध भी होता है, खासकर पीड़ितों और उनके परिवारों द्वारा। 1. पहली बार फरलो: अक्टूबर 2020 में गुरमीत राम रहीम को अपनी बीमार मां से मिलने के लिए 40 दिनों की फरलो दी गई थी। इसे उनके समर्थकों द्वारा स्वागत किया गया, लेकिन इस फैसले की काफी आलोचना भी हुई। 2. दूसरी बार पैरोल: जून 2022 में उन्हें एक और पैरोल दी गई, जिसमें वह 30 दिनों तक जेल से बाहर रहे। इस दौरान उन्होंने कुछ धार्मिक कार्यक्रमों में ऑनलाइन भाग लिया, जिससे उनके समर्थकों में उत्साह बढ़ा। हालांकि, उनके विरोधियों ने इसे न्याय प्रणाली का दुरुपयोग माना। 3. तीसरी बार पैरोल: 2023 में, राम रहीम को फिर से 30 दिनों की पैरोल मिली। इस बार भी वह अपने अनुयायियों के साथ ऑनलाइन सत्संग आयोजित करते रहे, और सोशल मीडिया पर उनकी वीडियो भी खूब वायरल हुईं। उनके इन सत्संगों में कई बड़े राजनीतिक नेता भी शामिल हुए, जो राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना। 4. चौथी बार फरलो: 2024 में गुरमीत राम रहीम को एक बार फिर फरलो दी गई। इस फरलो के दौरान उन्होंने फिर से कई ऑनलाइन कार्यक्रम किए और यह समय उनके अनुयायियों के लिए महत्वपूर्ण बना। पैरोल और फरलो पर विवाद गुरमीत राम रहीम को बार-बार दी गई पैरोल और फरलो पर काफी विवाद हुआ। पीड़ितों के परिवार और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इसे न्याय का मजाक बताया। हर बार जब उन्हें जेल से बाहर आने का मौका मिलता है, तब उनके समर्थक बड़ी संख्या में उनका समर्थन करते हैं, जबकि पीड़ित और उनके परिजन न्यायिक प्रक्रिया पर सवाल उठाते हैं। कई लोगों का मानना है कि गुरमीत राम रहीम को बार-बार पैरोल और फरलो मिलना उनके राजनीतिक संबंधों के कारण है। कई राजनीतिक दलों के नेता उनके समर्थन में खड़े होते हैं, खासकर चुनावों के दौरान, क्योंकि उनके पास लाखों अनुयायियों का समर्थन है। यह समर्थन चुनावी परिणामों को प्रभावित कर सकता है, और यही कारण है कि कई बार उनके प्रति उदारता दिखाई जाती है। निष्कर्ष गुरमीत राम रहीम सिंह, जो गंभीर अपराधों के लिए जेल में सजा काट रहे हैं, को कई बार पैरोल और फरलो मिली है, जिससे विवाद उत्पन्न हुए हैं। उनका राजनीतिक प्रभाव और अनुयायियों की बड़ी संख्या उन्हें बार-बार रिहाई दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, लेकिन यह न्याय प्रणाली और पीड़ितों के अधिकारों के लिए एक गंभीर चुनौती भी प्रस्तुत करता है।

ये भी पढ़ें...