सियासत
भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए मां पार्वती ने रखा था ये खास व्रत
भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान के साथ विवाहित महिलाएं व्रत रखते हुए पूजा-पाठ करती हैं। हरतालिका तीज पर सुहागिन महिलाएं दिनभर निर्जला व्रत रखती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए पहली बार हरतालिका तीज का व्रत किया था। आइए जानते हैं हरतालिका व्रत का महत्व, तिथि, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त।
वैदिक पंचांग के अनुसार इस वर्ष हरतालिका तीज की तिथि भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि 5 सितंबर को दोपहर 12 बजकर 22 मिनट से शुरू हो जाएगी और इस तिथि का समापन 06 सितंबर को दोपहर 03 बजकर 01 मिनट पर होगा। इस तरह से उदयातिथि के आधार पर हरतालिका तीज का व्रत 06 सितंबर को रखा जाएगा।
इस वर्ष हरतालिका तीज पर बहुत ही अच्छा शुभ संयोग बन रहा है। पंचांग गणना के मुताबिक 06 सितंबर को हरतालिका पर रवि और शुक्ल योग के साथ चित्रा नक्षत्र का संयोग बन रहा है।
हरतालिका तीज 2024 पूजा मुहूर्त ( Hartalika Teej 2024 Puja Muhurat)
हरतालिका तीज पर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा विशेष रूप से होती है। इस पूजा को सुबह ही करनी चाहिए लेकिन शिव-पार्वती के पूजन के लिए प्रदोष काल का समय सबसे सही माना जाता है। प्रदोष काल यानी सूर्यास्त के बाद का जो समय होता है वह प्रदोष काल कहलाता है। 06 सितंबर को सुबह के लिए पूजा का मुहूर्त 06 बजकर 2 मिनट से लेकर 08 बजकर 33 मिनट तक रहेगा, वहीं प्रदोष काल 06 सितंबर को शाम 06 बजकर 36 मिनट से आरंभ हो जाएगा।
हरतालिका तीज पूजन सामग्री
- भगवान शिव, देवी पार्वती और भगवान गणेश की मिट्टी की प्रतिमा
- पीले रंग का कपड़ा
- जनेऊ, सुपारी, बेलपत्र, कलश, अक्षत, दूर्वा, घी, दही और गंगाजल
- देवी पार्वती के लिए श्रृंगार के लिए सिंदूर, बिंदी, चूड़ी, कंघा, मेंहदी और कुमकुम
हरतालिका तीज पूजन विधि
हरतालिका पूजन के लिए भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की बालू रेत व काली मिट्टी की प्रतिमा हाथों से बनाएं। पूजा स्थल को फूलों से सजाकर एक चौकी रखें और उस चौकी पर केले के पत्ते रखकर भगवान शंकर, माता पार्वती और भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें। इसके बाद देवताओं का आह्वान करते हुए भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश का पूजन करें। सुहाग की सारी वस्तु रखकर माता पार्वती को चढ़ाना इस व्रत की मुख्य परंपरा है। इसमें शिवजी को धोती और अंगोछा चढ़ाया जाता है। यह सुहाग की सामग्री को सास के चरण स्पर्श करने के बाद दान कर दें।
