साहित्य

*राजा की संपत्ति को लेकर बड़ा विवाद - तलाकशुदा रानी दूसरा विवाह करवाने के बाद भी पहले पति की संपत्ति पर कर रही अवैध दावा*

*राजा की संपत्ति को लेकर बड़ा विवाद - तलाकशुदा रानी दूसरा विवाह करवाने के बाद भी पहले पति की संपत्ति पर कर रही अवैध दावा*

तलाकशुदा पत्नी दूसरा विवाह करवाने के बाद भी पहले पति की संपत्ति पर कर रही अवैध दावा

 पूर्व रियासत के राजा की संपत्ति  विवाद पर विशेष रिपोर्ट

 

एक महिला अपने पति से तलाक लेती है, तलाक आपसी रजामंदी और पूरी तरह से विचार विमर्श के साथ होता है, वह भी पूरी कानूनी प्रक्रिया के साथ फैमिली कोर्ट में | तलाक के दौरान पत्नी अपने पति की संपत्ति में से अच्छा खासा हिस्सा और एक मोटी रकम नगद राशि के रूप में लेकर अलग होती है, तलाक लेने वाले पति - पत्नी के दो बच्चे भी हैं, एक लड़की और एक लड़का, दोनों नाबालिग थे, न्यायालय द्वारा तलाक के समय बच्चों की शिक्षा, रहने - खाने, और अन्य सभी जरूरी सुविधाओं के लिए भी आवश्यक दिशा निर्देश तय किए जाते हैं, जिसे तलाक लेने वाले पति-पत्नी दोनों स्वीकार करते हैं और अपनी सहमति देते हैं |
 
 
तलाक के कुछ समय बाद महिला दूसरा विवाह कर लेती है बच्चों से उसका मिलना कोर्ट के निर्देशानुसार चलता रहता है, दोनों बच्चे भी हॉस्टल में रहकर अपनी पढ़ाई जारी रखते हैं, छुट्टियों में अपनी स्वेच्छा अनुसार कभी अपनी मां, कभी अपने पिता और कभी अपनी बुआ के यहां रहते हैं |
 
 
 पत्नी से तलाक के एक साल बाद वह व्यक्ति भी दूसरा विवाह कर लेता है और अपनी दूसरी पत्नी के साथ सार्वजनिक रूप से जीवन व्यतीत करता है, दूसरा विवाह करने वाले इस व्यक्ति के बच्चे भी अपनी दूसरी मां के साथ रहते हैं, मिलते हैं |
 
पति का दूसरी पत्नी और बच्चों के साथ पारिवारिक जीवन ठीक-ठाक चल रहा था, दूसरे विवाह और दूसरी पत्नी के साथ भी पति को समाज में पूरा मान सम्मान प्राप्त था, हर जगह अर्थात सामाजिक, धार्मिक और पारिवारिक के अलावा तीज त्योहार पर दोनों एक साथ जाते थे |
 
सब कुछ ठीक-ठाक चल रहा था कि 4 नवंबर 2021 को पति का हृदय घात से आकस्मिक निधन हो जाता है, पत्नी उस वक्त मायके में थी उसके पहुंचने तक का इंतजार नहीं किया गया और पति का अंतिम संस्कार कर दिया गया |
 
 
आगे की कहानी बताने से पहले हम आपको स्पष्ट कर दें कि उपरोक्त कहानी छत्तीसगढ़ के खैरागढ़ रियासत के राजा देवव्रत सिंह की है जो राजनांदगांव के सांसद के अलावा खैरागढ़ विधानसभा से कई बार के विधायक भी रहे |
 
 
*राजा की संपत्ति को लेकर बड़ा विवाद*
 
खैरागढ़ के पूर्व विधायक राजा देवव्रत सिंह के निधन के बाद से उनकी पहली पत्नी पद्मा सिंह और विभा सिंह के बीच संपत्ति को लेकर विवाद चल रहा है।  राजनांदगांव से एमपी रहे देवव्रत सिंह और उनकी पत्नी पद्मा सिंह के बीच अगस्त 2016 में तलाक हो गया था। दोनों ने आपसी समझौते के तहत तलाक लिया था, पत्नी से अलग होने के लिए देवव्रत सिंह को तकरीबन 11 करोड़ रुपए चुकाने पड़े थे। वे खैरागढ़ राजपरिवार के महाराजा थे|
 
उनका यह तलाक छत्तीसगढ़ सहित अनेक राज्यों में सबसे महंगा तलाक माना जाता है, 
 
 
रानी पदमा सिंह से तलाक के एक साल बाद महाराजा देवव्रत सिंह ने रानी  विभा सिंह से कोर्ट में नियमानुसार कानूनी रूप से दूसरा विवाह किया |
 
 
 नवंबर 2021 में उनका हार्ट अटैक से निधन हो गया था। जिस समय देवव्रत सिंह का निधन हुआ, तब उनकी पत्नी विभा सिंह थीं जबकि पूर्व पत्नी पद्मा सिंह से उन्होंने दिसंबर 2016 में तलाक ले लिया था |
 
महाराजा देवव्रत सिंह की पहली पत्नी
 
महाराजा देवव्रत सिंह के निधन के बाद उनकी पूर्व पत्नी पदमा सिंह ने संपत्ति विवाद खड़ा कर दिया और राजमहल में कब्जा करने का प्रयास किया | जबकि नियमानुसार रानी पदमा सिंह ने देवव्रत सिंह से तलाक और बटवारा प्राप्त कर लिया था ऐसे में उनके संपत्ति पर दावा करना और महल में प्रवेश करने का प्रयास करना गैर कानूनी कहा जाएगा |
 
*कानूनी प्रावधान*
 
एक महिला जिसने तलाक के दौरान अपने पति की संपत्ति में अपना हिस्सा ले लिया है, वह किसी और से दोबारा शादी करने के बाद अपने पूर्व पति की संपत्ति में हिस्सेदारी का दावा नहीं कर सकती है।
 
भारत में, कानून यह प्रावधान करता है कि पुनर्विवाह पर एक तलाकशुदा महिला का उसके पूर्व पति की संपत्ति से अधिकार समाप्त हो जाता है। इसका मतलब यह है कि वह अपने पूर्व पति की संपत्ति पर अपना दावा छोड़ देती है, जिसमें तलाक के दौरान उसे मिला कोई भी हिस्सा भी शामिल है।
 
हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 और विशेष विवाह अधिनियम, 1954, दोनों यह प्रावधान करते हैं कि एक तलाकशुदा महिला के पुनर्विवाह पर भरण-पोषण, गुजारा भत्ता और संपत्ति के अधिकार समाप्त हो जाते हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि कानून मानता है कि उसने एक नया जीवन शुरू कर दिया है और अब वह वित्तीय सहायता के लिए अपने पूर्व पति पर निर्भर नहीं है |

इस मामले में तमाम प्रमाण होने के बावजूद पुलिस ने कानून का पालन नहीं किया मामला कोर्ट मैं गया परंतु न्यायालय ने भी प्रमाणों पर गौर नहीं किया | अब सवाल यह उठता है कि प्रमाण होने के बावजूद अगर न्याय नहीं मिलेगा तो पीड़ित प्रमाणों को लेकर कहां जाए ?

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