सियासत
रेल विभाग की समस्याओं का बिना शिकायत नहीं होता है निवारण
रेल व्यवस्था में मॉनिटरिंग का अभाव
महंगा किराया देने के बावजूद भी यात्री हो रहे परेशान
ट्रेनों के बाथरूम में दिखावे के लिए होती है सफाई
छोटे बाथरूम और डस्टबिन भी हो गए हैं छोटे
टिकट निरीक्षक भी हैं लाचार, सुनते पढ़ते हैं यात्रियों के ताने
महंगा किराया देकर रेलवे में सफर करने वाले यात्री एक तो यात्री ट्रेनों के रद्द होने से परेशान हैं वहीं दूसरी तरफ रेलों में साफ सफाई पर करोड़ों रुपए खर्च करने के बाद ठेकेदारों के कर्मचारी दिखावे के लिए करते हैं साफ सफाई - टोटियों और फ्लश बटन मिलते हैं टूटे हुए - ऐसी अनेक परेशानियों के बीच मजबूरी में सफर करते हैं महिला, पुरुष , बच्चे - बुजुर्ग
इस फोटो में आप देख सकते हैं की वॉश बेसिन का नल किस तरह पॉलिथीन से बांधा गया है क्योंकि यह शायद टूटा हुआ है या ठीक से काम नहीं कर रहा है जब कर्मचारियों से इस बारे में बात की गई तो उन्होंने कहा कि हमने शिकायत की है लेकिन अभी तक कोई संबंधित कर्मचारी ठीक करने नहीं आया है | इसी के बाबत जब हमने टिकट निरीक्षक से पूछा तो उसने भी टोटी की तरफ देखा और ऊपर इशारा कर निकल गया मानो यह कह रहा हो भगवान भरोसे चल रही है व्यवस्था |
सवाल यह उठता है रेल मंत्रालय ऊपर से हर कार्य के लिए ठेका देकर अपनी तरफ से निश्चित हो जाता है कि हमने सिस्टम बैठा दिया है परंतु जो मॉनिटरिंग टीमें है उनके द्वारा किस तरह की मॉनिटरिंग की जाती है इसके बारे में टाइम टू टाइम सरप्राइज चेकिंग करने वाला कोई नहीं है, हर समस्या के लिए जब तक यात्री शिकायत ना करें या फिर मीडिया द्वारा इस तरह की खबरें प्रकाशित न हो तब तक समस्याओं की तरफ कोई अधिकारी, कर्मचारी जन प्रतिनिधि झांकने तक नहीं जाता | कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि विभाग के पास जब तक शिकायत नहीं आएगी संबंधित विभाग के अधिकारी, कर्मचारी, मॉनिटरिंग अधिकारी स्वयं होकर कुछ भी निरीक्षण करने, देखने नहीं जाएंगे और जब तक ऐसा होगा आम यात्री रेल विभाग की समस्याओं से 2 - 4 होता रहेगा और मजबूरी में अपना सफर पूरा कर रेल विभाग को खोजना रहेगा |
