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हाथरस में प्रवचन के दौरान एकत्रित भीड़ में भगदड़ : 100 से ज्यादा लोगों की मौत अनेकों घायल

हाथरस में प्रवचन के दौरान एकत्रित भीड़ में भगदड़ : 100 से ज्यादा लोगों की मौत अनेकों घायल

हाथरस में प्रवचन के दौरान एकत्रित भीड़ में भगदड़ भगदड़ में 100 से ज्यादा लोगों की मौत अनेकों घायल उत्तर प्रदेश के हाथरस में बाबा नारायण हरि नामक व्यक्ति के प्रवचन के दौरान भगदड़ में 100 से ज्यादा लोगों की मौत और सैकड़ो की संख्या में घायल होने की खबर के बाद बाबा नारायण हरि फरार हैं • लोगों के दुख दूर करने के नाम से प्रवचन का आयोजन करने वाले आयोजन और जो बाबा हैं उनके उपदेशों और टोटका से लोगों को कितना फायदा होता है यह तो हम नहीं कह सकते परंतु यह बात सत्य है कि ऐसे आयोजनों में होने वाली भीड़ जीने भरोसा और विश्वास रहता है कि उनके दुख और तकलीफों का अंत बाबा द्वारा किया जाता है और यह भी सत्य है कि ऐसे आयोजनों में बाबा के द्वारा उनकी टीम के द्वारा लगातार भक्तों को दान देने के लिए प्रेरित किया जाता है उन्हें भ्रमित किया जाता है कि आप सत्संग में शामिल होंगे बाबा का आशीर्वाद लेंगे तो आपके सब दुख दूर हो जाएंगे आपकी बीमारियां समाप्त हो जाएगी या ऐसा भी होता है की टोटके बताए जाते हैं और कहा जाता है कि इन टोटकों को करने से उनके दुखों का निवारण होगा उन्हें अपार संपत्ति प्राप्त होगी वह धन संपन्न होंगे, परंतु यह आम नागरिकों को समझना चाहिए कि जो व्यक्ति आप सबके दुख दूर कर सकता है उसके पास कोई शक्तियां हैं उनके पास कुछ सिद्धियां हैं तो फिर ऐसे लोग अपने भक्तों से दान और नगद राशि के अलावा बैंक खातों में रूपों की मांग क्यों करते हैं वह अपनी शक्तियों के माध्यम से लोगों की समस्याओं का निवारण क्यों नहीं करते सीधी सी बात है पिया सब एक बड़ा धंधा है व्यापार है और इसमें आयोजकों की मिलीभगत होती है अगर नहीं तो फिर बाबा कहां है क्यों भाग गए क्यों फरार हो गए और क्यों नहीं अपनी शक्तियों के माध्यम से अपनी सीढ़ियां के माध्यम से पीड़ितों की समस्याओं का समाधान कर रहे हैं क्यों नहीं इस हाथ से के शिकार लोगों को ठीक कर रहे क्यों नहीं इस हादसे में मरे लोगों को जिंदा कर रहा है यह तो वहां पहुंचने वाले भक्तों को भी सोचना होगा कि भगवान भगवान होते हैं यह तो महज एक प्रचारक हैं जैसे किसी मंदिर में पुजारी होता है गुरुद्वारे में ज्ञानी होता है मस्जिद में मौलवी होता है चर्च में पादरी होता है वैसे ही यह लोग धर्म के बारे में लोगों को समझने वाले एक उपदेश मात्र होते हैं इन्हें भगवान मानकर इनकी पूजा करना अपने आप में अपने को धोखा देना कहा जा सकता है परंतु ऐसे कार्यक्रमों में लोगों की भीड़ एकत्रित होने देना उनके द्वारा बताए जाए जाने वाले नुस्खे से इलाज होना जैसे प्रचारकों को संज्ञान लेकर शासन प्रशासन इन पर रोक क्यों नहीं लगता और जब तक शासन प्रशासन जनप्रतिनिधि केंद्र सरकार इन पर इस तरह के आयोजनों करने पर प्रतिबंध नहीं लगता तब तक यह व्यापार किसी तरह बेखौफ चलता रहेगा |

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