सियासत
गुरुद्वारे में आने वाले हर व्यक्ति को भगवान के आशीर्वाद के रूप में हथेली पर कड़ा प्रसाद (मिलता है।
भारत में भंडारे की परंपरा शुरू से रही है जिसमें जरूरतमंदों और गरीबों को पेट भर कर खाना खिलाये जाने का रिवाज है। जहां हिन्दू धर्म में इसे भंडारे या पंगत के नाम से जाना जाता है तो वहीं, सिख धर्म में इसे लंगर के रूप में जाना जाता है। सिख धर्म के अनुसार, गुरुद्वारे में आने वाले हर व्यक्ति को बिना किसी भेदभाव के समान रूप से लंगर में खाना खिलाया जाता है।
इसी लंगर में मिलता है एक विशेष प्रसाद जिसे 'कड़ा प्रसाद' कहते हैं। 'कड़ा प्रसाद' को गुरु प्रसाद के नाम से भी जाना जाता है। आज हम आपको इस लेख में ज्योतिषाचार्य राधाकांत वत्स द्वारा दी गई जानकारी के माध्यम से यही बताने जा रहे हैं कि आखिर क्या है गुरुद्वारे में मिलने वाले इस 'कड़ा प्रसाद' का महत्व और इसे गुरुद्वारे में जा कर क्यों खाना चाहिए। साथ ही, जानेंगे किसने शुरू किया था यह प्रसाद।
कड़ा प्रसाद' असल में गुरुद्वारे में मिलने वाले हलवे को कहा जाता है। सबसे पहले लंगर के लिए बने सभी व्यंजनों को गुरु ग्रंथ साहेब के सामने परोसा जाता है। फिर किरपान के माध्यम से उन्हें हलवे का भोग लगाया जाता है।
इसके बाद लंगर शुरू होता है और फिर सभी व्यंजनों और हलवे को भक्तों में बांटा जाता है। मान्यता है कि गुरुद्वारे में मिलने वाले इस गुरु प्रसाद यानी कि कड़ा प्रसाद को खाने से व्यक्ति पर गुरु कृपा बनी रहती है।
आप भी इस लेख में दी गई जानकारी के माध्यम से यह जान सकते हैं कि क्या होता है गुरुद्वारे में मिलने वाला 'कड़ा प्रसाद' और क्या है इसका महत्व।
